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आखिर हम बीमार होते क्यों हैं 👇
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि हमारा शरीर पंचभूतों से निर्मित है।
मानव के अतिरिक्त मानव उपयोगी समस्त जीवों का भी शरीर भी पंचभूतों से ही निर्मित है।
वर्तमान चिकित्सा पद्धतियाँ आज के समय रासायनिक तरीकों से चिकित्सा करती हैं उन्हें पंचभूत को संतुलित करने का कोई ज्ञान नहीं है।
आज के समय मानव निर्मित सारे पंचभूत चाहे वह मिट्टी हो, जल हो, वायु हो, अग्नि हो या आकाश हो सब कुछ दूषित हो चुका है।
हमारे महान ऋषि-मुनियों की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में पंचभूतो को ध्यान में रखकर चिकित्सा की जाती थी।
हमें हमारे वातावरण के अनुरूप आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों से मिला जो मानव की नाड़ी देखकर यह ज्ञात कर लेते थे कि हमारे शरीर का कौन सा पंचभूत असंतुलित है और उसके अनुरूप ही वो चिकित्सा करते थे।
विश्व में यदि कहीं भी चिकित्सा का ज्ञान सर्वप्रथम उद्भव हुआ तो वह हमारा देश आर्याव्रत भारत वर्ष ही है।
सर्वप्रथम पूरे विश्व को ज्ञान हमारे महान ऋषि-मुनियों ने दिया चाहे वह अध्यात्मिक क्षेत्र हो या आयुर्वेदिक का क्षेत्र हो।
यदि किसी भी व्यक्ति ज्ञान ना हो तो वह व्यक्ति उस ज्ञान को जानने का प्रयास करता है लेकिन यहाँ उल्टा हुआ।
अनेक विदेशी लुटेरों ने हमारे ज्ञान को लूटा और हमारे अस्तित्व को मिटाने के लिए उसमे आग लगा दी।
वर्षों तक हमारे ज्ञानपीठ गुरुकुल तक्षशिला की पुस्तके आग में धू-धू करके जलती रही, इतना ही नहीं बचा खुचा ज्ञान भी हमारी संस्कृति को भी नष्ट करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
अब प्रश्न यह उठता है जिस धरती को हम अपनी माँ मानते हैं उस धरती पर प्रतिदिन लाखों लीटर रासायनिक जहर डाला जा रहा है ..? ऐसा क्यों...?
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