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Swarnim Chaturvedi INC
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Swarnim Chaturvedi INC
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Jaipur Rajasthan Katılım Ağustos 2013
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NEET-UG पेपर लीक और उसके बाद परीक्षा रद्द किया जाना, हाल के उन कई मामलों में एक और ताजा उदाहरण है, जिन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उद्देश्य और कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 371वीं रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि केवल 2024 में ही NTA द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से 5 में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए। JEE Mains 2025 में उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण प्रश्नपत्र के 12 प्रश्न वापस लेने पड़े। वहीं विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए मोदी सरकार द्वारा थोपे गए CUET में परीक्षाओं के आयोजन और परिणाम जारी करने में लगातार देरी होती रही है। इस समस्या ने सभी शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक कैलेंडर को पूरी तरह अव्यवस्थित कर दिया है और छात्रों को अधिक निश्चित एवं समय से होने वाली प्रवेश प्रक्रिया वाले निजी विश्वविद्यालयों की ओर धकेला है।
समिति ने यह भी उल्लेख किया था कि NTA लगातार संसद को अपनी वार्षिक रिपोर्ट देने में विफल रही है और केवल ऑडिटेड वित्तीय विवरण ही उपलब्ध कराती रही है। मोदी सरकार ने दशकों पुरानी प्रवेश प्रक्रियाओं और परीक्षाओं को खत्म कर उनकी जगह भ्रष्टाचार से ग्रस्त एक केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की और यह सुनिश्चित किया कि वह संसद के प्रति जवाबदेह न रहे।
16 जून 2024 को शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया था कि NTA को 'बहुत सुधार की जरूरत' है। दो साल बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस स्वीकारोक्ति के बाद आखिर क्या कार्रवाई हुई। अब यह लगातार स्पष्ट होता जा रहा है कि केवल सुधार नहीं, बल्कि NTA और उससे जुड़े पूरे तंत्र के बुनियादी पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि इसे मोदी सरकार के भ्रष्ट हाथों से बाहर रखा जा सके।
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डबल इंजन की राजस्थान सरकार के शासन में लचर होती चिकित्सा व्यवस्थाओं के कारण कोटा अनेक प्रसुताओं की मौत हो गई। हद तो तब हो गई जब न्याय मांग रहे विपक्ष के नेताओं के धरने की बिजली भी काट दी गई और सरकार कुछ ही दूरी पर जश्न मना रही थी।
"शर्मनाक शब्द भी शर्मसार हो जाए"
#kota

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राजस्थान में नीट जैसी बड़ी परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोप चिंता जनक है 22 लाख बच्चों के भविष्य का सवाल है।
@ABPNews
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मोदी सरकार में परीक्षा प्रणाली पूरी तरह अव्यवस्था, अविश्वास और अराजकता का प्रतीक बन चुकी है।
NEET के अब तक कम से कम 4 पेपर लीक हो चुके है - 2026, 2024, 2021, 2016!
राजस्थान के सीकर में परीक्षा से पहले handwritten “guess paper” मिलता है, जिसमें से 135 प्रश्न सीधे NEET के असली पेपर से मैच हुए। ये खुलेआम धड़ल्ले से बेचा जा रहा था और केंद्र सरकार को इसकी भनक तक नहीं पड़ती?
करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना भाजपा की आदत बन चुकी है।
ये निकम्मी सरकार नौकरियाँ देती नहीं,
भर्ती-परीक्षा में धांधली करती है,
पेपर-लीक माफिया का संरक्षण करती है,
पकड़े जाने पर लीपा-पोती में जुट जाती है !!
#NEETPaperLeak
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जंगलराज नहीं देखा हो तो देख लीजिए
जो पिट रहा है, वह एक 16 साल का किशोर बताया जा रहा है और किराये के एक रुपए के डिफरेंस के विवाद में यह घटना हुई है।
घटनाक्रम हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र का बताया जा रहा है। एक 16 वर्ष के बच्चे के साथ ऐसी निर्दयता करते हुए वैसे तो किसी के भी हाथ कांप सकते हैं लेकिन अब समय बदल गया है। पांच-पांच लोग एक बच्चे पर पिल पड़े, शर्म भी नहीं आई। और पुलिस ने भी इस हमले का मामला बहुत साधारण धाराओं में लिखा बता रहे हैं।
उम्मीद है, इन हैवानों को अपने किए की सजा मिलेगी।
@HmghPolice @PoliceRajasthan @Rajeev_ips @BhajanlalBjp
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प्रधानमंत्री द्वारा कल हैदराबाद से देशवासियों से की गई अप्रत्याशित अपील के निम्नलिखित अर्थ हो सकते हैं-
1. आर्थिक स्थिति आधिकारिक आंकड़ों और प्रधानमंत्री तथा उनके साथियों द्वारा अब तक किए जा रहे दावों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।
2. ईंधन की कीमतों में वृद्धि सहित सख्ती से खर्च कम करने के उपायों का दौर आने वाला हो सकता है, और उन्हें अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए माहौल तैयार किया जा रहा है।
यह बात लंबे समय से स्पष्ट है कि जमीन पर आर्थिक हालात-जो वास्तविक मजदूरी में ठहराव, परिवारों पर बढ़ते कर्ज और रोजगार पैदा करने वाले निजी निवेश में गति की कमी जैसी स्थितियों में दिखाई देते हैं-मोदी सरकार के प्रचार से बिल्कुल अलग हैं।
हिसाब-किताब का समय अब आ गया है।
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The State Bank of India released a research report based on the latest Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2025 unit-level data on May 8, 2026. It finds that:
- Nearly 25% of casual workers nationally were paid below the statutory minimum wage.
- Odisha has emerged as one of the states with the highest incidence of minimum wage violations among casual workers, with 66% reportedly earning below the statutory minimum wage.
- Punjab recorded the highest share of informal workers at 82%, followed by Uttar Pradesh and Bihar at 81% each.
- Agriculture accounted for the largest share of informal employment nationally at 42%.
- Female workers accounted for 45% of all underpaid casual workers despite constituting only about 25% of the casual workforce.
Despite this grim picture, the government is leaving no stone unturned to exacerbate the situation for the labour class. As per the latest changes in the labour codes:
- Minimum wage calculation criteria have been diluted and left to government discretion.
- Employees may see lower take-home salaries due to salary restructuring rules.
- Agricultural and domestic workers remain outside strong wage protection.
- Workplace safety violations can now be settled monetarily instead of strict criminal action.
- Protections for women working night shifts remain weak and non-mandatory.
- Contract labourers lack adequate employer accountability for safety and health.
- Social security reforms mostly create registration systems without guaranteed benefits.
- Gig workers are recognised ambiguously without clear protections or funding support.
These are only some of the regressive changes in the Labour codes. Overall, India’s economic environment is being made increasingly pro-corporate and anti-worker.
On top of this, a mandatory 60-day notice is now required before any strike. Furthermore, if a matter is pending in conciliation, the strike is deemed illegal. Effectively, workers’ Right to Protest is being snatched away.
The idea is to strip the poor and working masses to the bone so that the BJP’s crony friends can walk red carpets. And at the same time, those very people are denied any meaningful avenue to question their reality and the decisions that fundamentally shape their lives.
“Sabka sath sabka vikas” needs to become a reality.
Castles need not be built on graves.


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जब “ग़रीबी में आटा गीला” हो रहा है तब मोदी जी देश को बचत करने का पाठ पढ़ा रहे हैं।
28 फ़रवरी को West Asia में जंग शुरू हुई, कांग्रेस पार्टी ने हर पहलू को highlight किया —
अर्थव्यस्था की बर्बादी,
रुपये का लगातार गिरना,
पेट्रोल-डीज़ल-LPG के दाम और क़िल्लत,
किसानों के लिए Fertiliser की कमी,
Food Security पर मँडराता खतरा,
दवाइयों के दाम,
MSMEs का संकट और बहुत कुछ !!
पर प्रधानमंत्री जी क्यों चुनावी प्रचार में मश्गूल थे?
क्यों Roadshows कर रहे थे ?
क्यों कह रहे थे “स्थिति काबू में है”, “सब चंगा सी”?
अब जब चुनाव ख़त्म हैं तो देश को उपदेश दिया जा रहा है -
ये मत करिये, वो मत खरीदिये, इसकी बचत कीजिये, Work From Home कीजिये …!
अपनी 12 वर्षों की नाकामी का ठीकरा,
देश की जनता पर मत फोड़िये, मोदी जी !!!
गोस्वामी तुलसीराम जी ने सही कहा है —
"पर उपदेश कुशल बहुतेरे"
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NEET 2024 के बाद अब NEET 2026 का भी पेपर परीक्षा से पहले लीक होना और सैंपल पेपर के नाम पर बिकना बेहद गंभीर एवं युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
परीक्षा से पहले "गैस पेपर" के नाम पर हूबहू पेपर आउट होने, 42 घंटे पहले व्हाट्सएप पर आने और देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को पकड़ना इस बात का संकेत है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार संकट में है। करोड़ों विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक और गड़बड़ियां युवाओं का भरोसा तोड़ देती हैं।
मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्यों में आखिर ऐसी कौन सी व्यवस्था चल रही है जहां एक के बाद एक भर्ती परीक्षाएं और राष्ट्रीय एग्जाम सवालों के घेरे में आ रहे हैं?
पेपर लीक की ख़बरों ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच बेहद जरूरी है, ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
#NEET

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मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
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अन्य सेवाओं से प्रमोट होकर राजस्थान से IAS सिलेक्ट हुए थे उनकी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में धरी रह गई। नियुक्ति के अभाव में प्रदेश को IAS नहीं मिले, जबकि यूपीएससी ने रिमाइंडर भेजें किंतु सरकार ने प्रमोशन देना स्वीकार नहीं किया।
Vaibhav Purohit@purohitvaibhav
राजस्थान सरकार के पास वरिष्ठ IAS अधिकारियों की कमी है। इसी कारण पिछले दिनों राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर दो IAS अधिकारियों को पुनः प्रदेश भेजने का अनुरोध किया। आखिर राजस्थान के IAS अधिकारी किस बात से नाराज़ हैं कि उनकी दिलचस्पी प्रदेश छोड़कर दिल्ली जाने में ही रहती है और वे वापस भी नहीं आना चाहते? #राजस्थान @8PMnoCM @BhajanlalBjp
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Twelve years of the Modi Government have exposed the hollowness of its claims on “law and order” and “women’s safety,” bringing the truth before the nation.
Since 2013, according to the NCRB report —
🔺Crimes against women have surged by 42.6%.
🔺Crimes against children have increased by 204.6%.
🔺Atrocities against Dalits have risen by 41.3%.
🔺Crimes against Adivasis have gone up by 46.7%.
🔺Cybercrime has exploded by 1,689%.
And 10,546 farmers, 52,931 daily wage labourers, and 14,488 students have died by suicide in 2024.
English











