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Udaipur Katılım Ağustos 2019
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जो कार्यकर्ता सड़क पर है, कांग्रेस उसके साथ क्यों नहीं है? उदयपुर नगर निगम के बाहर आठ मई को जो हुआ, वह केवल एक स्थानीय प्रदर्शन या एक एफ़आईआर की ख़बर भर नहीं है; यह कांग्रेस संगठन की उस पुरानी बीमारी का नया एक्स-रे है, जिसमें कार्यकर्ता को संघर्ष के समय आगे कर दिया जाता है और संकट के समय अकेला छोड़ दिया जाता है। कांग्रेस ने नगर निगम की बदहाल सफाई, टूटी सड़कों, सीवरेज, बंद स्ट्रीट लाइटों, पर्यटन स्थलों की दुर्दशा, आयड़ नदी और 272 प्लॉट जैसे सवालों पर प्रदर्शन बुलाया। यानी मुद्दे जनता के थे, सड़क जनता की थी और जोखिम कार्यकर्ताओं का था। जिला कांग्रेस अध्यक्ष, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता नगर निगम पहुंचे। नारेबाज़ी हुई, विवाद हुआ, ज्ञापन लेने से इनकार और देर-सबेर की स्थिति बनी, कार्यकर्ता उत्तेजित हुए और अंततः देर रात कांग्रेस के ही लोगों पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा हो गया। बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि आयुक्त या पुलिस ने केस क्यों किया; इसकी तो जांच होगी, वीडियो देखे जाएंगे, भूमिका तय होगी।लेकिन असली प्रश्न यह है कि कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी क्यों नहीं दिखती? जो लोग विपक्ष की भूमिका निभाते हुए मैदान में उतरे, जिनके कंधों पर पार्टी अपनी “जनसंघर्ष” की राजनीति टिकाए रखना चाहती है, वे जब कानूनी शिकंजे में आए तो प्रदेश नेतृत्व की आवाज़ कहां गई? प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रभारी, राष्ट्रीयप्रभारी महासचिव, पूर्व सीएम आदि क्या इन पदों का काम केवल चुनावी मंचों पर मालाएं पहनना है? कांग्रेस की त्रासदी यही है कि वह कार्यकर्ता से बलिदान मांगती है; लेकिन उसके पीछे राजनीतिक ढाल बनकर खड़ी नहीं होती। कार्यकर्ता नारे लगाए, गिरफ्तारी झेले, मुकदमे झेले, सोशल मीडिया पर पार्टी की लड़ाई लड़े और जब वही कार्यकर्ता संकट में आए तो बड़े नेता प्रेसनोट तक जारी न करें; यह संगठन नहीं, भावनात्मक परित्याग है। भाजपा पर आरोप लगाना आसान है कि केस राजनीतिक इशारे पर हुआ। हो भी सकता है, नहीं भी। लेकिन कांग्रेस पहले अपने घर में झांके। क्या उसने अपने जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता दी? क्या किसी वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम जनता के मुद्दों पर प्रदर्शन करने वालों के साथ हैं? क्या किसी ने यह मांग की कि निष्पक्ष जांच हो, वीडियो सार्वजनिक हों और निर्दोष कार्यकर्ताओं को न फंसाया जाए? क्या जयपुर से किसी को उदयपुर भेजा? सड़क पर संघर्ष करने वाला कार्यकर्ता कोई डिस्पोज़ेबल आइटम नहीं है कि प्रदर्शन के दिन उपयोग कर लिया और एफ़आईआर के बाद भूल गए। उदयपुर की घटना का सबसे कड़वा संदेश यही है: कांग्रेस अगर अपने सिपाहियों की चिंता नहीं करेगी, तो कल कोई सिपाही उसके लिए मैदान में क्यों उतरेगा? मैंने उदयपुर में बहुत बार देखा है कि किसी भाजपा कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ भी कोई ज़्यादती हो तो गुलाबचंद कटारिया जैसे वयोवृद्ध नेता भी ऐसे ताल ठोंकते थे, जैसे वह कोई सोलह साल के लड़के हों। और क्या मुंह से भाषा बोलते थे। वह हलकी होती थी, लेकिन प्रशासन पर बहुत भारी पड़ती थी। कटारिया कई बार तो अपने लोगों को थाने से उठाकर ऐसे ही ले आया करते थे और कांग्रेस सरकार में कभी किसी की सांस नहीं निकलती थी। कटारिया ने इसी तरह से उदयपुर में भाजपा को बकरी से बाघ बना दिया और कांग्रेस के नेताओं ने उदयपुर की बघेरे जैसी कांग्रेस को भीगी बिल्ली बना दिया। यह कोई आज का मामला नहीं है। यह एक लंबी कहानी का एक आख़िरी सिरा है। पार्टी कार्यालयों की दीवारों पर “संघर्ष” लिख देने से संघर्ष नहीं होता। संघर्ष की पहली शर्त है, अपने लोगों के साथ खड़ा होना। और उदयपुर में कांग्रेस की चुप्पी ने यही साबित किया कि उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी विरोधी दल नहीं, अपने कार्यकर्ताओं के प्रति उसकी बेपरवाही है। आख़िर प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ऐसे मामलों को गंभीर क्यों नहीं मानते। प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, नेता प्रतिपक्ष भी कोई कमज़ोर नहीं हैं। वे बीच-बीच में बड़े मुद्दे उठाने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन उदयपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस तरह बेसहारा छोड़ने का संदेश अच्छा नहीं है। @kharge @priyankagandhi @JitendraSAlwar @RahulGandhi @PSKhachariyawas @Gulab_kataria
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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कल (मंगलवार) दोपहर 3:00 बजे उदयपुर पहुंचेंगे। उदयपुर में एक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होकर शाम को जयपुर के लिए रवाना होंगे। #BhajanlalSharmaCM #BhajanlalSharma #trendingudaipur #mewar #udaipur
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पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से एयरपोर्ट लाउंज में की मुलाकात #GulabchandKataria #VasundharaRaje #rajasthan #mewar #chandigarh
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राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया ने कहा- वो पूछते हैं कि आप बार-बार आ जाते हो। मैं डे टू डे जनवरी, फरवरी और मार्च का सारा कार्यक्रम लाया हूं। मै गारंटी से कह सकता हूं कि मैं जितना प्रवास चड़ीगढ़ करता, जितना पब्लिक से मिलता हूं। पब्लिक के काम काम करता हूं। #GulabchandKataria #punjab
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Tribhuvan_Official
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जो साहस आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी और भाजपा के बड़े-बड़े नेता नहीं दिखा सके, वह पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने दिखाया है। वे शनिवार को बाँसवाड़ा में बोले : अमेरिका चारों खाने चित हो गया। ईरान ने उसका घमंड आसमान में ही फोड़ दिया।उन्होंने कम-से-कम एक बार, एक क्षण के लिए शक्ति की चिरपरिचित भाषा से ऊपर उठकर सत्य की भाषा बोली। और हमारे समय में, जहाँ शब्द बहुत हैं पर निर्भीक वाक्य बहुत कम, यह छोटी बात नहीं है। यह सार्वजनिक जीवन के सूखे कंठ पर गिरा हुआ पानी है। यह याद दिलाता है कि सच बोलना आज भी संभव है बशर्ते आदमी पद से नहीं, अपनी अंतरात्मा से बोल रहा हो। कटारिया बहुत से मौकों पर अपने बयानों से ऐसे ही चौंकाते रहे हैं। आज के भारत में यह सिर्फ़ एक बयान नहीं है; यह उस राजनीतिक कायरता के बीच गिरा हुआ एक वाक्य है, जहाँ बड़े-बड़े नेता सिंहनाद तो बहुत करते हैं, पर सत्य का नाम लेते ही उनकी आवाज़ कूटनीतिक धुंध में खो जाती है। जिस समय सत्ता के शिखर पर बैठे लोग अंतरराष्ट्रीय प्रश्नों पर शब्दों को इतनी सावधानी से तौलते हैं कि उनमें से नैतिक अर्थ ही झर जाता है, उस समय मेवाड़ का मान याद दिलाने गुलाबचंद कटारिया ने इतना तो किया कि उन्होंने शक्ति के दंभ और प्रतिरोध की क्षमता को एक साफ़, निर्विवाद वाक्य में रख दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जो कभी अपनी तकनीक और हथियारों के अभेद्य होने का गर्व पालता था, उसके उस दंभ को ईरान ने तोड़ दिया। यह वाक्य केवल सामरिक टिप्पणी नहीं है; यह साम्राज्यवादी अहंकार के विरुद्ध एक नैतिक उद्घोष भी है। यहीं से कटारिया का कथन असाधारण बनता है। इसलिए नहीं कि उन्होंने कोई बहुत जटिल रणनीतिक विश्लेषण दे दिया, इसलिए कि उन्होंने वह बात कह दी जिसे कहने से हमारे समय के सबसे ऊँचे और सबसे मुखर माने जाने वाले नेता भी बचते रहे हैं। मोहन भागवत हों, नरेंद्र मोदी हों, भाजपा के बड़े-बड़े चेहरे हों; वे विश्वगुरु, सभ्यता, शक्ति, आत्मनिर्भरता और नए भारत की भाषा में प्रायः लबालब रहते हैं; लेकिन जब विश्व-राजनीति में अमेरिकी वर्चस्व, पश्चिमी सैन्य अभिमान या तकनीकी साम्राज्यवाद की खुली आलोचना की घड़ी आती है, तब उनकी भाषा में एक अजीब-सी हिचक, एक अजीब-सा संतुलन, एक अजीब-सी चुप्पी उतर आती है। वे सब कुछ कहते हैं, पर सच को उसके सबसे नंगे रूप में कहने से बच जाते हैं। कटारिया ने कम-से-कम इस भय को तोड़ा है। वीरता का अर्थ केवल रणक्षेत्र में तलवार चमकाना नहीं होता। सच्ची वीरता वह है जो अपने ही समय की सुविधा-साधित चुप्पियों के विरुद्ध बोल सके। जो अपने ही खेमे की बनावटी निष्ठाओं को भेद सके। जो यह समझ सके कि साहस का पहला रूप सत्य की स्पष्टता है। कटारिया का यह कथन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वह किसी विपक्षी नेता की ओर से नहीं, उसी व्यापक राजनीतिक संसार के भीतर से आया है, जो आम तौर पर अनुशासन, संकेत और नियंत्रित भाषा में विश्वास रखता है। और इस बयान को उनके कुछ दिन पहले दिए गए उस “उपदेश” के साथ पढ़ना चाहिए, जिसमें उन्होंने नेताओं को जनता का सच्चा सेवक बनने, दिल-दिमाग में सेवा का भाव रखने, शॉर्टकट से बचने, मेहनत पर भरोसा करने और सबसे बढ़कर सच को सच कहने की सलाह दी थी। तब यह कथन किसी औपचारिक नैतिकता की तरह सुनाई दे सकता था; पर अब लगता है कि कटारिया उस सलाह को कम-से-कम शब्दों के स्तर पर स्वयं निभाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि सच बोलने में शुरुआत में मुश्किलें आती हैं, लेकिन अंततः जीत सच की होती है। आज यह वाक्य उनके अपने बयान पर भी लागू होता दिखाई देता है। यही वह जगह है जहाँ कटारिया बाकी नेताओं से अलग खड़े दिखाई देते हैं। हमारे समय की राजनीति में सबसे बड़ी कमी झूठ की अधिकता भर नहीं है; उससे भी बड़ी कमी यह है कि सत्य बोलने का साहस लगातार सिकुड़ता जा रहा है। नेता अब वाक्य नहीं बोलते, वे सुरक्षित वाक्य-संयोजन बोलते हैं। वे नैतिक स्थिति नहीं लेते, वे प्रतिक्रियाओं का प्रबंधन करते हैं। वे जनभावना को दिशा नहीं देते, उसे पढ़कर उसी के पीछे खड़े हो जाते हैं। यह भी संभव है कि उदयपुर और राजस्थान भाजपा की गुटबाज़ी के संदर्भ में लोग कटारिया के शब्दों में स्थानीय प्रतिध्वनियाँ खोजें। राजनीति में हर वाक्य के पीछे तात्कालिक अर्थ भी होते हैं। लेकिन बड़े कथन का मूल्य केवल उसके तत्काल उपयोग में नहीं होता; उसका मूल्य उस नैतिक साहस में होता है, जो उसे संभव बनाता है। कटारिया ने जिस स्पष्टता से अमेरिका के दंभ, ईरान की तैयारी और भारत की आवश्यक शक्ति का प्रश्न उठाया, वह कम-से-कम इस बात का प्रमाण है कि भारतीय राजनीति अभी पूरी तरह निर्जीव नहीं हुई है। @Gulab_kataria
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मुख्य सचिव वी श्रीनिवास पहुंचे आरएनटी मेडिकल कॉलेज मुख्य सचिव मेडिकल कॉलेज फेकल्टी से किया संवाद #trendingudaipur #ias #CS #mewar
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मुख्य सचिव वी श्रीनिवास पहुंचे आरएनटी मेडिकल कॉलेज मुख्य सचिव ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ट्रॉमा एंड सर्जिकल इमरजेंसी आदि का किया निरीक्षण मरीजों और परिजनों से संवाद कर चिकित्सालय में उपलब्ध सेवाओं की ली जानकारी #udaipur #cs #rnt
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मुख्य सचिव वी श्रीनिवास का उदयपुर प्रवास मुख्य सचिव ने किया नेहरू उद्यान का अवलोकन यूडीए के माध्यम से हाल ही हुए सौंदर्यीकरण कार्यों का किया निरीक्षण संभागीय आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी, जिला कलेक्टर नमित मेहता, यूडीए आयुक्त राहुल जैन आदि भी थे उपस्थित #CS #ias #mewar
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मुख्य सचिव ने लेडी पेट्रालिंग टीम से की मुलाकात उदयपुर. मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने शुक्रवार को उदयपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में जिला कलक्टर नमित मेहता तथा एसपी डॉ अमृता दुहन की उपस्थिति में लेडी पेट्रोलिंग टीम से मुलाकात कर कामकाज की जानकारी ली।
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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजसमंद के गुंजोल में लिया ग्राम सभा में भाग सड़क, पानी, बिजली, चिकित्सा सहित हर क्षेत्र पर आमजन दे अपने सुझाव, तब ही सफल मास्टर प्लान संभव :मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास @svoruganti1466 @DmRajsamand facebook.com/share/p/1JqNDU… #rajsamand #cs #ias #rajasthan
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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजसमंद प्रवास के दौरान प्रभु श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा) में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। युवाचार्य चिरंजीव विशाल बावा से लिया आशीर्वाद संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, कलक्टर अरुण कुमार हसीजा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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डॉ.अमृत दुहन उदयपुर की पहली महिला एसपी, बुधवार सुबह एसपी कार्यालय में संभाला पदभार, एसपी को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर #trendingudaipur #Udaipur #mewar #police
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वरिष्ठ पत्रकार कमलेश किशोर सिंह को हल्दीघाटी घाटी अलंकरण से सम्मानित करते हुए श्री जी डॉक्टर लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन का 42वाँ वार्षिक सम्मान समारोह सिटी पैलेस के ऐतिहासिक माणक चौक में हुआ #udaipur #mewar @kamleshksingh
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घरेलू गैस सिलेंडर आपूर्ति पर मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने हेतु मुख्य सचिव ने ली सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण बैठक facebook.com/share/p/1KCaDk… @svoruganti1466
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Madhav Sharma
Madhav Sharma@madhavsharma12·
1/14 "यार आपको देखकर अच्छा लगता है। खुशी होती है।" "तुम हो, @bhwj_pulkit , @Zinda_Avdhesh को देखकर सुकून सा होता है।" "यार आपको देखकर लगता ही नहीं कि धौलपुर चंबल से हो।"
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The Litmus
The Litmus@thelitmusnews·
अलविदा नारायण बारेठ सर... वरिष्ठ पत्रकार एवं राजस्थान के पूर्व सूचना आयुक्त नारायण बारेठ को विनम्र व्यक्तित्व, बेबाक अंदाज और आदर्श पत्रकारिता के प्रति समर्पण के लिए सदैव याद किया जाएगा. उनकी खबरें और लेखन पत्रकारिता के क्षेत्र में एक मानक के रूप में हमेशा स्थापित रहेंगे. ॐ शांति! The Litmus परिवार की ओर से सादर श्रृद्धांजलि, शत-शत नमन #NarayanBareth #Rajasthan
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