mujeeb ur rehman
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@KBLPumps Sir.
Want details pertaing to suitable pumping system motor for filling and emptying 5 acre tank,Inlet outlet,pump house design and motor cost.
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On this day, we remember Shri Shantanurao L Kirloskar, a pioneering industrialist and the driving force behind the Kirloskar Group.
His legacy continues to guide our values and commitment to innovation.
#KirloskarBrothersLimited #KBL #KirloskarPumps
#DeathAnniversary

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For Monday #Nifty
1) 24500
2) 24600
4) Flat
5) Negative
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उम्र का बंधन तोड़ रहा इंस्टाग्राम , 21 साल का लड़का और 40 साल की विधवा ने भाग कर शादी कर लिया।
मामला यूपी के अमरोहा जिला का है।
दोनों की मुलाकात इंस्टाग्राम पर रील और चैटिंग के दौरान हुई।
युवक महिला के प्रति इतना आकर्षित हो गया कि घर में बिना बताए हुए एक दिन मंदिर में जाकर शादी कर लिया।
परिवार वालों ने युवक को घर में रखने से मना कर दिया है।


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चित्र में दिख रही महिला की फोटो को ध्यान से देखें तो उनके गले में एक बड़ा सा हीरा साफ नजर आता है। यह 245.35 कैरेट का मशहूर जुबली डायमंड है, जो आकार और वजन में मशहूर "कोहिनूर" हीरे से भी लगभग दोगुना है।
ये महिला थीं मेहरबाई टाटा, जो जमशेदजी टाटा की बहू और उनके बड़े बेटे सर दोराबजी टाटा की पत्नी थीं।
साल 1920 में, जब प्रथम विश्वयुद्ध के बाद आर्थिक मंदी का दौर चल रहा था और टाटा कंपनी के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं बचे थे, तब मेहरबाई ने अपना यह अनमोल जुबली डायमंड इम्पीरियल बैंक में गिरवी रखकर एक करोड़ रुपये दिलवाए। उसी पैसे से कर्मचारियों का वेतन चुकाया गया और कंपनी संकट से बच पाई।
लेकिन कुछ समय बाद मेहरबाई का ब्लड कैंसर से निधन हो गया। उनके जाने के बाद, सर दोराबजी टाटा ने इस हीरे को बेचकर भारत में कैंसर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च फाउंडेशन की नींव रखी।
यह हीरा केवल प्यार की याद नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक ऐसा उपहार बना जिसने अनगिनत जिंदगी बचाईं।
अब तय कर लें..
प्रेम का स्मारक लोगों को जिंदगी देने वाला टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च फाउंडेशन है...... या कोई मुर्दा घर वाला ताज महल!!!

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@AdYX7879 @umashankarsingh Wiseman-Democracy un home and Terrorising others abroad?
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@umashankarsingh Why is US not blocking internet like Ayatolla Iran to stop his messages like these ? Because it is democracy , why is Iran blocking internet of own people to know truth ? Because Iran is Ayatolla at present .. and Ayatolla is GOD..

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजे़श्कियन ने अमेरिकी लोगों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले जारी किया गया था। इस पत्र मे मुख्य बातें जो उन्होंने अमेरिकी लोगों से कहीं हैं
कोई दुश्मनी नहीं
ईरान अमेरिकी लोगों, यूरोपियों या पड़ोसी देशों के प्रति कोई शत्रुता नहीं रखता। ईरान को खतरा बताना ऐतिहासिक सच्चाई और वर्तमान तथ्यों से मेल नहीं खाता। यह राजनीतिक और आर्थिक हितों से प्रेरित "निर्मित दुश्मन" की छवि है।
रक्षा का अधिकार
ईरान ने जो कुछ किया, वह आक्रमण नहीं बल्कि उसका वैध आत्मरक्षा है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों का जवाब दिया गया है।
युद्ध के हित?
अमेरिकी लोगों से पूछा कि इस युद्ध से अमेरिका के किन हितों की रक्षा हो रही है? ‘America First’ नीति आज अमेरिकी सरकार की वास्तविक प्राथमिकता है या नहीं? क्या मासूम बच्चों की हत्या, कैंसर उपचार वाली दवा फैक्टरियों का विनाश या ‘पत्थर के युग में वापस ले जाना’ जैसी धमकियां अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने के अलावा कुछ करती हैं?
इज़राइल का प्रॉक्सी
अमेरिका इस युद्ध में इजरायल का ‘प्रॉक्सी’ बनकर काम कर रहा है। इजरायल चाहता है कि ईरान से लड़ाई आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर तक लड़ी जाए।
गलत सूचना से बचें
अमेरिकी लोगों से अपील की कि ‘गलत सूचना और प्रचार’ से परे देखें। ईरान ने आधुनिक इतिहास में कभी आक्रमण या विस्तारवाद नहीं किया। ईरानी लोग शांतिप्रिय हैं और ईरान में पढ़े-लिखे ईरानी प्रवासी अमेरिका और पश्चिम में अच्छा योगदान दे रहे हैं।
संवाद का रास्ता
संघर्ष का रास्ता महंगा और व्यर्थ है। संवाद और जुड़ाव बेहतर विकल्प है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।
पत्र में उन्होंने 1953 के ईरानी तख़्तापलट, सद्दाम को समर्थन, लंबे प्रतिबंधों और हाल के सैन्य हमलों का जिक्र कर अमेरिका पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला युद्ध अपराध होगा, जिसके परिणाम ईरान से आगे जाएंगे।


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@KraantiKumar What use of such big agencies unable to predict the outcome of retaliation before the hostilities began.
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इजरायल के पास ईरानी नेताओं के लोकेशन की सटीक जानकारी होती है.
ईरान के टॉप नेताओं को इजरायली सेना IDF चुन चुन कर मारते जा रही है.
अभी तक ईरान ऐसी कोई करवाई करने में नाकाम रहा है.
इजरायल की सफलता का कारण है उसका इंटेलिजेंस नेटवर्क और खुफिया एजेंसी MOSSAD.
MOSSAD की ताकत की बात से लगा सकते हैं, अभी कुछ साल पहले ईरान ने तय किया देश के भीतर मौजूद मोसाद के जासूस हैं सबको पकड़कर खत्म किया जाए,
ईरान ने इसके लिए एक काउंटर इंटेलिजेंस ब्यूरो बनाया. इस ब्यूरो का चीफ MOSSAD का एजेंट निकला.
तो इस हद तक MOSSAD अपने काम करता है. जान पर खेलकर MOSSAD के एजेंट इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करते हैं. इसी कारण 1948 से लेकर आज तक इजरायल अजेय है.


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