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amit singh
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amit singh
@__amitsingh
आह जिस वक़्त सर उठाती है, अर्श पे बर्छियाँ चलाती है ! ~मीर तक़ी ‘मीर’ @meertaqimeerjee
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@__amitsingh Welcome back Bade Bhai.. Happy to see you 💐🤗
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संबंधों की गहराई जीत-हार से कहीं ऊपर होती है,
कमज़ोर लोग ही अपनी नाकामी छुपाने के लिए बदनाम करते हैं।
~ अर्चना अनिरुद्ध
#archana_anirudh
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@divya_sabaa @SensingSenses “काम”
सही है अगर मीर जी के लहजे से देखें तो और मैं अली सरदार जी की बुक के साथ जाना भी चाहूँगा
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@SensingSenses @__amitsingh Haan ek jagah "kaam" hai ek jagah "rabt"
To sahi kya lagta hai
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मीर जी दो अलग जगह दो अलग तरह से:
होगा किसू दीवार के साये में पड़ा 'मीर'
क्या काम महब्बत से उस आराम तलब को
-दीवान ए मीर (by अली सरदार जाफ़री)
—
होगा किसू दीवार के साए में पड़ा 'मीर'
क्या रब्त मोहब्बत से उस आराम-तलब को
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मौत अपना पता नहीं देती
सुकूँ कोई फ़ज़ा नहीं देती
ज़ख़्म खा कर भी मुस्कुराता हूँ
ज़िन्दगी कुछ सिवा नहीं देती
हर नज़र में है तीरगी का सफ़र
चाँदनी भी *जिया नहीं देती
(*चमक)
कहती है बेवफ़ा मुझे लेकिन
जाने क्यूँ बद-दुआ नहीं देती
#अमित_सिंह
@__amitsingh
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अपनी औलाद के हक़ में जो दुआ माँ कर दे,
उससे बेहतर कोई सौग़ात नहीं हो सकती।
मेहर-ए-उम्मीद है रोशन यहाँ जब तक, ऐ दिल,
तेरी दुनिया में कभी रात नहीं हो सकती।
रब जो चाहे तो हर एक बात है मुमकिन, यारो,
और न चाहे तो कोई बात नहीं हो सकती।
-बशर @basharsays
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