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तो क्रांति हो तुम
जब मौके को फ़र्ज़ मानते हो,
तो क्रांति हो तुम।
जब दर्द से डरते नहीं,
बल्कि उसे अपना रास्ता बनाते हो,
तो क्रांति हो तुम।
जब तन-मन को औज़ार में गढ़ते हो,
तो क्रांति हो तुम।
जब हमसफ़रों में वही जज़्बा जगाते हो,
तो क्रांति हो तुम।
जब ऐसा जीवन चुनते हो,
जिसकी तपस्या से जगत उठता है,
तो क्रांति हो तुम।
wrote for my father on his b'day today..sharing here for all Kraantikaari founders ❤️
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