एक आम हिंदुस्तानी

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@a_comonindian

Atheist|Indian|Love reading,movies,songs|Love Jacky|Love Taksh|Love Sonam|जीना यहां मरना यहां।शुद्ध इलाहाबादी

Katılım Haziran 2009
821 Takip Edilen478 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
एक आम हिंदुस्तानी
धार्मिक/मजहबी/रिलीजियस जहालत और मूर्खता और कट्टरता से मुझे घिन आती है चाहे वो किसी भी ओर वाले हों। ऐसे लोगों का मकसद सिर्फ एक होता है अपने सिवा सबको खत्म करना और सबको गलत बताना। जो खुद समझौता न कर सिर्फ दूसरे से समझौता कराते हैं। ये घिनौने लोग हैं औरतों के दुश्मन।
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Hridayesh Joshi
Hridayesh Joshi@hridayeshjoshi·
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें न्यूजलॉन्ड्री की @MnshaP और अन्य पत्रकारों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में अभिजीत अय्यर-मित्रा के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगाई गई थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि सत्र न्यायालय का आदेश बिना किसी कारण के था। उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय को एक नया, तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। @newslaundry @Iyervval
Bar and Bench@barandbench

#Breaking Delhi High Court sets aside the Sessions Court order, which stayed FIR against Abhijit Iyer-Mitra for alleged objectionable tweets against Newslaundry's Manisha Pande and other journalists. HC says the Sessions Court order was without any reasons. HC asks the Sessions Court to pass a fresh, reasoned order. @newslaundry @MnshaP @Iyervval

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Santosh Yadav, Ph.D.
अभी विदेश मंत्रालय के अधिकारी नॉर्वे में कहा रहे थे कि भारत में कोर्ट है। अगर किसी के ख़िलाफ़ ज़्यादती हो रही है तो उसे कोर्ट जाना चाहिए। यहाँ माननीय कोलोजियम तो एक यूट्यूबर के कमेंट से नाराज हो गये और जेल की सजा सुना दी।
Bar and Bench@barandbench

YouTuber who called judiciary "taanashahi, manmarzi" sentenced to 6 months jail by Delhi High Court report by @BhaviniSri24 barandbench.com/news/litigatio…

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Nehr_who?
Nehr_who?@Nher_who·
Now even foreign Media is mocking Mahamanav 😂
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
बीजेपी कह रही है कि राहुल गांधी ने "राष्ट्रभक्तों" को गद्दार कह दिया। कौन से राष्ट्रभक्त? वही जो हमारे शहीदों के खिलाफ अंग्रेजों के लिए जासूसी करते थे? या फिर वे जो स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने को गलत काम मानते थे? या फिर वे जो भारत के संविधान का विरोध कर रहे थे? या फिर वे जो भारत के तिरंगे और राष्ट्रगान का विरोध करते थे? या फिर वे जो बरसों से भारत के संविधान को बदलने की बात करते हैं? या फिर वे जिन्होंने संविधान बदलने के लिए संविधान समीक्षा आयोग बना डाला था? या फिर वे जो कहते हैं कि 400 पार कर दो तो संविधान बदल देंगे? या फिर वे जो वोट चोरी करके सरकार बनाते हैं? या फिर वे जो वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के नाम पर लाखों लाख लोगों को वोट के अधिकार से वंचित कर देते हैं? या फिर वे जो लगातार भारत के संविधान और लोकतंत्र की हत्या करते हैं? कौन से राष्ट्रभक्त?
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Prakash K Ray
Prakash K Ray@pkray11·
बंगाल में गाय की बिक्री और कुर्बानी को लेकर लिबरेशन की याचिका पर टिप्पणी के बाद मुझे बताया गया है कि सभी मुस्लिम लोगों ने क़ुर्बानी नहीं करने का फ़ैसला नहीं किया है. यह भी पता चला कि कोई 20 याचिकाएँ डाली गई हैं. बताया तो ये भी जा रहा है कि सरकार से मुस्लिम समुदाय की बातचीत चल रही है और कोई बीच का रास्ता संभावित है. इन बातों पर मुझे कुछ नहीं कहना है. कहना ये है कि वामपंथियों को ऐसे मामलों से दूर रहना चाहिए. मिलना कुछ नहीं है, नुक़सान की पूरी गारंटी है. सबरीमला मामले में केरल की लेफ़्ट सरकार ऐसे ही फँसी थी. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर फ़ैसला सुनाया कि अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को जाने का अधिकार है. यह निर्णय मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के विरुद्ध था. अब इस आदेश को लागू कराने का ज़िम्मा राज्य सरकार पर आ गया. बहुत विरोध के बाद जनवरी 2019 के पुलिस सुरक्षा में दो महिलाओं को पौने चार बजे दर्शन कराया गया. इसके बाद पुजारी ने शुद्धिकरण के लिए मंदिर बंद कर दिया. महिला प्रवेश के विरुद्ध आंदोलन होता रहा. वाम मोर्चा सरकार ने आगामी दिनों में दावा किया कि 51 महिलाओं को दर्शन कराया गया है. सरकार अदालत के फ़रमान को लागू करा रही थी. इसी बीच नेशनल मीडिया ने “Godless” कम्युनिस्टों के ख़िलाफ़ धर्मयुद्ध छेड़ दिया. हम जैसे कई लोग चिल्ला रहे थे कि केरल सरकार को केंद्र से सुरक्षा बल माँगना चाहिए. हम लोग गाली सुने, पर कम्युनिस्टों को बुद्धि आई. पुलिस ने कहना शुरू कर दिया कि जिसको दर्शन करना है, वह अपने लिए अलग से अदालत से आदेश लाए. पुनर्विचार का मामला अदालत में विचाराधीन है. इस साल चुनाव से पहले सुनवाई होने लगी. फिर मीडिया ने लेफ़्ट को लपेटा. लेफ़्ट सरकार ने कहा कि पुनर्विचार हो. लेकिन कथित प्रगतिशीलता दिखानी थी, तो सीपीएम राज्य इकाई ने कह दिया कि सरकार और पार्टी की राय अलग अलग है. यह भ्रामक स्थिति थी. जैसा तमिलनाडु में डीएमके ने कहा है कि वह छह माह बाद सरकार की आलोचना करेगी. यही काम लेफ़्ट को बंगाल या और कहीं करना चाहिए. हिंसा आदि पर बोलना अलग बात है. धार्मिक पचड़े में पड़ना वामपंथ के बचे-खुचे में भूसा भरना होगा. साल-दो साल समीक्षा हो, रणनीति बने, हेडलाइन में रहने का चस्का छोड़ना होगा. धार्मिक मुद्दों के पीछे के सियासी खेल को लेफ़्ट वाले बख़ूबी समझते हैं.
Prakash K Ray@pkray11

कम्युनिस्टों के साथ बड़ी समस्या यह है कि समस्या सुलझाने से ज़्यादा वे समस्या को उलझा देने में लगे रहते हैं जब मुस्लिम समाज ने क़ुर्बानी नहीं देने का फ़ैसला कर लिया है, तो लिबरेशन वाले क्यों उछल रहे हैं?

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Ajay Jha
Ajay Jha@Ajay_reporter·
1 $ = ₹ 96.93 ( नोट: साल 2014 में 1 डॉलर 58 रुपया के बराबर था..)
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Nehr_who?
Nehr_who?@Nher_who·
Account Based in Europe BDSK firangi 😂😂
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Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
एक बार किसी को गद्दार कहना जुमला हो सकता है लेकिन दोबारा कहना भावना होती है। राहुल गांधी को अपनी भावनाओं पर यकीन है। अब मोदी और शाह को सिद्ध करना है कि वो देशप्रेमी है गद्दार नहीं। उसके लिए कुछ काम करने होंगे। जैसे ज्ञानेश कुमार को हटाना। चुनाव आयोग में अपना हस्तक्षेप बंद करना। सुप्रीम कोर्ट में कॉलेजियम को प्रभावित करने के लिए क्षमा याचना करना और अमेरिका से ट्रेड डील खत्म करना।
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Saurabh
Saurabh@sauravyadav1133·
योगा नहीं है...इस चेहरे की चमक की वजह ये 30 हजार रुपये किलो वाली मशरूम है। जिसकी एक किलो की कीमत में आम आदमी का 5 महीने का राशन आ जाए...
Saurabh tweet media
Rishi Bagree@rishibagree

Importance of Yoga !!!

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Karishma Aziz
Karishma Aziz@KarishmaAziz_·
झारखंड के बोकारो के सेक्टर-9 बसंती मोड़ पेट्रोल पंप पर तीन मुस्लिम बच्चों के साथ सिर्फ इसलिए बेरहमी से मारपीट की गई क्योंकि उनके सिर पर टोपी थी। बच्चे हाथ जोड़ते रहे, रहम की भीख मांगते रहे… लेकिन नफरत का जुनून नहीं रुका, पूरी घटना CCTV में कैद है! @bokaropolice मामले की जांच कर आरोपी पर सख़्त कार्रवाई हो!
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KrishnanIyerForINC
KrishnanIyerForINC@KrishnanForINC·
◆ राहुल गांधी के बयान से तूफ़ान आ चुका है..रायबरेली में राहुल गांधी ने बयान दिया है कि 👉 नरेन्दर मोदी, पूर्व तड़ीपार अमित बाबा और आरएसएस ग़द्दार है.."ओवर द बाउंड्री" ◆ राहुल गांधी के इस बयान से इतना "छुई मुई" होने की कोई ज़रूरत नहीं है..क्योंकि भजपैया गैंग ने ~ देश के पहले PM नेहरूजी को ग़द्दार बोला ~ PM इंदिरा गांधी को ग़द्दार बोला ~ PM राजीव गांधी को ग़द्दार बोला ~ PM डॉ मनमोहन सिंह को ग़द्दार बोला ~ गांधी परिवार को ग़द्दार बोला ~ कांग्रेस को ग़द्दार बोला ◆ अगर पंडित नेहरू ग़द्दार हो सकते हैं तो देश के किस नेता की तशरीफ़ पर पैदाइशी वफ़ादार होने का ठप्पा लगा है? तशरीफ़ खोल कर वफ़ादारी का ठप्पा दिखाओ तो मान लेंगे!! ◆ अगर पंडित नेहरू ग़द्दार तो पूरा भारत ग़द्दार!! अगर डॉ मनमोहन सिंह ग़द्दार तो दुनिया में वफ़ादारी ख़त्म!! ◆ अगर इंदिराजी और राजीवजी की क़ुरबनियां ग़द्दारी थी तो देश में किसी ने क़ुरबानी नहीं दी.. ◆ अगर कांग्रेस ग़द्दार है तो अटल और आडवानी की तरह जिन्नाह की मज़ार पर चले जाओ और कभी भारत वापस मत लौटना..गेट आउट ~ ग़द्दारी का 'आलम यह है कि रूस से सस्ता कच्चा तेल भारत आया था.. ~ इस कच्चे तेल से मुकेश अंबानी ने 50,000 करोड़ कमाए..ये कमाई सरकारी कंपनियों का हक़ थी ~ और मोदी कहता है कि ये मत ख़रीद, वो मत इस्तेमाल कर, वहां घूमने मत जा, वो चीज़ नहीं खाना : यही देशभक्ति है..ये फ्रॉड है!! ◆ मुकेश अंबानी तो 50,000 करोड़ कमाएगा और 140 करोड़ भारतीय भूके रह कर देशभक्ति साबित करेंगे? लानत है ऐसी देशभक्ति पर.. ◆ ग़द्दार उद्योगपतियों का गैंग लाखों करोड़ विदेशों में रखा है..₹ गिरने की वजह से उद्योगपतियों को ज़बरदस्त मुनाफ़ा' हुआ है..मगर हर भारतीय 2014 से ग़रीब होता रहा ◆ राहुल गांधी आंखों में खटकते हैं, उन की बातें कानों को सुकून नहीं देती..क्योंकि राहुल गांधी भारत की तरक़्क़ी पर बोलते हैं.. ◆ 2014 के बा'द से 'अवाम को ख़ुद का होश नहीं रहा है..जब तक पाकिस्तान, मुसलमान, चीन पर फ़र्ज़ी ख़बरों का डोज़ नहीं मिले तब तक बेचैनी बरक़रार रहती है ✋ इस बयान के बा'द राहुल गांधी पर 50 FIR होगी..मीडिया को नेहरूजी और कांग्रेस को गाली देने का नया प्रॉजेक्ट दिया जाएगा..जनता को नशे का तगड़ा डोज़ मिलेगा ✌️ राहुल गांधी की सियासत एक "नशा मुक्ति केंद्र" जैसी है..'अवाम का नशा टूट कर रहेगा..भारत वापस तरक़्क़ी की राह पर होगा..जय हिंद कृष्णन अय्यर काँग्रेस पेज को फॉलो कीजिए कृष्णन अय्यर को फॉलो कीजिए @KrishnanForINC को X पर फॉलो कीजिए #भारतजोड़ोन्याययात्रा #भारतजोड़ोयात्रा #VoteChori
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
सही बात है। 2014 से पहले, जो भी देश को बनाने और बचाने में शामिल रहा, सबको इस देश से नफरत थी। भाजपा न पैदा हुई होती और भाजपा का सरेंडर न होता, सरेंडर प्रधानमंत्री न होता तो देशभक्ति का मतलब कोई जान ही न पाता। है कि नहीं? ये फूहड़ अश्लील नैरेटिव कब तक चलेगा कि हर विरोध, हर आलोचना को देश की अस्मिता और गर्व से जोड़ दो? देश की लंका लगी है, जिसे पूरा देश भोग रहा है और प्रधानमंत्री जो टॉफी-कंपट का बचकाना खेल खेल रहे हैं, वो भी दुनिया देख ही रही है। बस करो ये फूहड़ता। कुछ हो सकता है तो करो वरना कुर्सी छोड़ कर हटो, कोई और करेगा।
Piyush Goyal@PiyushGoyal

राहुल गांधी को भारत और भारत में बनी हर वस्तु से इतनी नफरत क्यों है? भारत आज Made in India और Local Goes Global के माध्यम से दुनिया का Trusted Destination बना है, लेकिन कांग्रेस को हर भारतीय उपलब्धि में समस्या ही दिखाई देती है। जिस वैश्विक सम्मान, निवेश और भरोसे के लिए देश दशकों तक इंतज़ार करता रहा, वही प्रधानमंत्री @NarendraModi जी के नेतृत्व में आज भारत अर्जित कर रहा है तो वह राहुल गांधी से सहन नहीं हो रहा है।

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ashutosh
ashutosh@ashutosh83B·
नार्वे की घटना ने भारत में “काकरोच पत्रकारिता” को नया जीवन दिया है । कई बुज़ुर्ग पत्रकारों ने अचानक अपने अंदर खोजी पत्रकारिता की प्रतिभा को पहचाना और दनादन तस्वीरों के ज़रिये खुलासा कर रहे हैं । देश इनकी पत्रकारिता को देखकर आह्लादित है । आनंद में डूब गया है ।
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Bhadohi Wallah
Bhadohi Wallah@Mithileshdhar·
अमचूर का टेस्ट तो इंसान ही बता सकता है। फिर मशीन की क्यों सुनना? सोचिए, सिस्टम की नाकामी की वजह से एक आदमी को 57 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। महज़ 10 लाख रुपये से क्या होगा?
Bhadohi Wallah tweet media
Bhadohi Wallah@Mithileshdhar

इंजीनियर अजय सिंह भोपाल एयरपोर्ट से दिल्ली की फ्लाइट लेने पहुंचे। जाँच ने दौरान बैग में रखे अमचूर को एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर ने हेरोइन और ड्रग्स बता दिया। इसके बाद अजय को जेल भेज दिया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट 57 दिन बाद आई, तब तक अजय जेल में ही रहे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख़्त टिप्पणी करते हुए अजय सिंह को 10 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है। मामला 7 मई 2010 का है। सैंपल की जाँच मध्य प्रदेश में नहीं हो पायी क्योंकि उनके पास टेस्टिंग की सुविधा नहीं थी। फिर सैंपल हैदराबाद भेजा गया। अजय को 2 जुलाई को रिहा किया गया था। सवाल यह है कि जब आपके यहाँ जाँच ही नहीं हो पा रही तो विभाग में लाखों रुपये की सैलरी उठाने वाले कर्मचारी क्यों रखे गए हैं?

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Narendra Nath Mishra
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath·
डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर। क्या आज 97 जाएगा ? क्या सेंचुरी जाकर ही रुकेगा? कुछ एक्सपर्ट इसके 110 तक जाने का अनुमान जता रहे हैं। उतना दूर चला जाएगा जहाँ से इसकी किसी की उम्र से तुलना संभव ही नहीं होगी। एक समय था डॉलर की तुलना कई लोगों के उम्र से होती थी।
Narendra Nath Mishra tweet media
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Dr.Tabassum Parveen
Dr.Tabassum Parveen@Tabassum__2·
ट्रेन का इंतजार करते-करते एक व्यक्ति स्टेशन पर ही सो गया था… 😴🚉 तभी वहां पहुंची RPF ने उसे लाठी मारकर उठा दिया, जिसे देखकर उसके साथी भड़क गए 😳 उनका कहना था “वो शांति से सो रहा था, कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं कर रहा था, फिर मारने की क्या जरूरत थी?” RPF का कहना था कि व्यक्ति शराब के नशे में था, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि अगर कोई शांत बैठा या सोया हो, तो क्या उसे मारना सही है? 🤔 कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इंसानियत और व्यवहार भी उतना ही जरूरी है
Dr.Tabassum Parveen tweet mediaDr.Tabassum Parveen tweet mediaDr.Tabassum Parveen tweet media
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Pankaj Sharma पंकज शर्मा
कल रात @DDNewslive के एक शो के ज़रिए यह झूठ फैलाया गया कि नॉर्वे में हमारे प्रधानमंत्री से सवाल पूछने वाली पत्रकार Helle Lyng जिस अखबार Dagsavisen के लिए काम करती हैं, वह वहां की लेबर पार्टी का मुखपत्र है. बार-बार यह कह कर एंकर ने हैले लिंग का मखौल उड़ाया कि वे 'टिकटॉक पत्रकार' हैं. असलियत यह है कि Dagsavisen अब नॉर्वेजियन लेबर पार्टी Arbeiderpartiet का मुखपत्र नहीं है। यह सही है कि वह दशकों तक नॉर्वेजियन श्रमिक आंदोलन का सबसे प्रमुख समाचार पत्र था, लेकिन इसने 1975 और 1999 के बीच अपने औपचारिक पार्टी संबंधों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। यानी कम-से-कम 27 साल से उस का लेबर पार्टी से कोई नाता नहीं है. आज वह पूरी तरह स्वतंत्र प्रकाशन है। यह समाचार पत्र अलग-अलग चरणों में पार्टी-नियंत्रित राजनीति से विलग हो कर एक स्वतंत्र मीडिया इकाई में बदला। 1884 में Social-Demokraten के रूप में स्थापित, इस समाचार पत्र का नाम 1923 में बदलकर Arbeiderbladet (द लेबर पेपर) कर दिया गया और वह लेबर पार्टी की आधिकारिक आवाज के रूप में काम करने लगा। 1997 में इसने राजनीतिक रूप से तटस्थ नाम Dagsavisen (द डेली न्यूजपेपर) अपनाया। लेबर पार्टी के पास 1991 तक इस समाचार पत्र का औपचारिक स्वामित्व था। इसके बाद Norsk Arbeiderpresse को स्वामित्व सौंप दिया गया और अंततः 1999 में यह एक स्वतंत्र फाउंडेशन Stiftelsen Dagsavisen के मातहत चला गया। आज, इस समाचार पत्र का मुख्य स्वामित्व Mentor Medier AS के पास है, जो एक मीडिया समूह है। यह समूह ईसाई दैनिक समाचार पत्र Vårt Land का भी मालिक है।
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Ajay Jha
Ajay Jha@Ajay_reporter·
देश कंगाल है..ये कैसा अमृतकाल है..? प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि ग्लोबल लड़ाई की वजह से हमारी अर्थव्यवस्था खराब हो गई है। हम चेतावनी दे रहे थे कि देश की अर्थव्यवस्था की सेहत खराब है। तब आप हमारी बात आप नहीं मानते थे। तब आप हमे फॉरेन एजेंट बताते थे। लोकतंत्र में आईना विपक्ष और मीडिया होता है। मोदी जी ने उस लोकतंत्र के आईना को तोड़ दिया है। पिछेल 12 साल में पीएम इसलिए पत्रकार वार्ता नहीं करते है क्योंकि उन्हें ये डर है कि कहीं मीडिया उनको आईना न दिखा दे..झूठ आईना से डरता है.. @Pawankhera
Ajay Jha tweet mediaAjay Jha tweet media
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