Pankaj Kushwal@PankajHimalaya
मेरा गांव रैथल, समुद्र तल से 7 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित, कुछ साल पहले तक गर्मियों में यहां आश्चर्यजनक तरीके से पारा 30 डिग्री तक पहुंच गया, बर्फबारी सालों से कम होते होते तकरीबन गायब हो गई, चार साल पहले रिकार्ड 30 डिग्री सेल्सियस पारा दर्ज हुआ। मतलब ग्लोबल वार्मिंग का पूरा असर, लेकिन बीते तीन सालों से जब पूरा देश उबल रहा यहां पारा 20 पार भी नहीं कर पा रहा। अप्रैल से लेकर अब तक शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो जब बारिश न हुई हो। सुबह गर्मी दोपहर बाद कड़ाके की ठंड। नतीजा, फल व फसलें बर्बाद। शुक्र है कि गांव की आजीविका पर्यटन से चलती है, खेती की जमीनें भी बहुत है तो फसल भी खराब होने के बावजूद इतनी हो जाती है कि भूखे मरने की नौबत न आए।
तीन सालों में ऐसा क्या हुआ कि पूरा देश गर्मी से उबल रहा यहां भीषण ठंड पड़ रही है। हां, सर्दियां सूखी और पहले के मुकाबले ज्यादा गर्म हो रही है। बीते साल सर्दियों में पूरे इलाके में बिल्कुल बर्फ नहीं गिरी, लेकिन मार्च अप्रैल में भारी बर्फबारी हुई। क्लाइमेट चेंज हर तरह से मार रहा है सिर्फ गर्मी से ही नहीं
@hridayeshjoshi