Hridayesh Joshi
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Hridayesh Joshi
@hridayeshjoshi
Founder - Eco N Energy Talk https://t.co/xZ1wzhfkSd Books: 'Rage of the River' @PenguinIndia, 'Laal Lakeer' @HarperCollinsIN



5 Questions for Uttarakhand Forest Department: The Uttarakhand Forest Department & NHAI should answer five simple questions for the people of Uttarakhand: When will compensatory afforestation begin, where will it take place & what native species will be planted? As thousands of trees are being cut, we, the people of Uttarakhand deserve transparency & answers! #Uttarakhand









At a time when people are searching for a Shivling in refrigerators, I chose to write about the disappearing ice Shivling at Amarnath—and the environmental impacts and tourism pressures behind it. Read on @Dnn24Network @Anoopnautiyal1 @SPSati2 dnn24.com/the-disappeari…


At a time when people are searching for a Shivling in refrigerators, I chose to write about the disappearing ice Shivling at Amarnath—and the environmental impacts and tourism pressures behind it. Read on @Dnn24Network @Anoopnautiyal1 @SPSati2 dnn24.com/the-disappeari…

उत्तर प्रदेश : आगरा में एक घर में फ्रिज के अंदर "शिवलिंग" जैसी आकृति बन गई है। लोग इसे अमरनाथ के पवित्र हिमलिंग जैसी आकृति से जोड़ रहे हैं। पूजा–पाठ शुरू हो गई है। चढ़ावा आना शुरू हो गया है। @madanmohansoni


"The ice in Amarnath has melted, so Lord Shiv has appeared in my Freezer to give his blessings Everyone is coming to our house to take the blessings" This is the level of Superstitious belief among people in India No wonder BJP wins elections invoking religion !!

चला गया राजस्थान की लोकधुनों का सजग प्रहरी राजस्थान की सांस्कृतिक स्मृति में सोमवार, 13 जुलाई 2026 की निविड़ रात एक गहरा सन्नाटा छोड़ गई। राजस्थानी गीत-संगीत के संरक्षक, वीणा कैसेट्स के संस्थापक, ‘राजस्थान रत्न’ केसरी चंद मालू का हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। देस राजस्थान कहें मरु संगीत संसार आत्मीयता से उन्हें केसी मालू के नाम से जानता था। उनके जाने से केवल एक सफल संगीत-उद्यमी नहीं, राजस्थान की लोकध्वनियों को विस्मृति से बचाने वाला एक सजग प्रहरी विदा हुआ है। के्सी मालू उस पीढ़ी के व्यक्ति थे जिसने तकनीक को बाजार का औजार भर नहीं माना; उसे संस्कृति की स्मृति में बदल दिया। जब राजस्थानी लोकगीत गांवों की चौपालों, विवाह के आंगनों, खेतों, मेलों और मंदिरों तक सीमित थे, तब वीणा कैसेट्स ने उन्हें घर-घर पहुंचाया। कैसेट के छोटे-से चुंबकीय फीते में राजस्थान का विराट सांस्कृतिक भूगोल दर्ज होने लगा—कहीं बन्ना-बन्नी के विवाह गीत, कहीं पनिहारी की विरह-वेदना, कहीं मांड का शास्त्रीय माधुर्य, कहीं तेजाजी, पाबूजी और रामदेवजी की लोकगाथाएं, तो कहीं मरुभूमि के जीवन की कठिनाइयों के बीच फूटती उत्सवधर्मिता। उनका महत्व इसलिए और अधिक है कि उन्होंने लोकसंगीत को किसी संग्रहालय की निर्जीव वस्तु नहीं बनने दिया। उन्होंने उसे बाजार दिया, श्रोता दिए और सबसे बढ़कर सम्मान दिया। अनेक लोककलाकार, जिनकी आवाजें संभवतः अपने गांव या जिले की सीमा से बाहर नहीं जा पातीं, रिकॉर्डिंग के माध्यम से पूरे राजस्थान और देश-दुनिया में सुनी गईं। यह काम केवल व्यापारिक दृष्टि से संभव नहीं था; इसके पीछे अपनी भाषा, अपनी मिट्टी और अपने लोगों के प्रति असाधारण अनुराग आवश्यक था। वीणा केवल एक संगीत कंपनी नहीं बनी; वह राजस्थान की श्रव्य-स्मृति का विशाल अभिलेखागार बन गई। जिन दिनों न इंटरनेट था, न यूट्यूब और न डिजिटल प्लेटफॉर्म, उन दिनों गांवों और कस्बों की दुकानों पर रखी वीणा की कैसेटें राजस्थान को अपनी ही आवाज सुनाती थीं। बसों, ट्रकों, चाय की दुकानों और घरेलू टेप रिकॉर्डरों से निकलती वे धुनें लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ती थीं। उन धुनों के पीछे केसी मालू की दृष्टि, परिश्रम और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता थी। किसी प्रदेश की संस्कृति केवल उसके कवियों, गायकों और कलाकारों से नहीं बचती; उसे ऐसे लोगों की भी आवश्यकता होती है जो उन आवाजों को पहचानें, संजोएं और दूर तक पहुंचाएं। के.सी. मालू ऐसे ही संस्कृतिकर्मी थे। उन्होंने मरुभूमि की आवाज को रिकॉर्ड किया, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने राजस्थान को अपनी आवाज पर गर्व करना सिखाया। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार अपराह्न 4:30 बजे उनके निवास, पुरानी चुंगी, अजमेर रोड, जयपुर से प्रस्थान करेगी। वे देह से विदा हो गए हैं, लेकिन राजस्थान में जब भी कोई लोकधुन बजेगी, किसी पनिहारी की आवाज रेगिस्तान की हवा में तैरेगी या कोई मांगणियार अपने सुर से रात को आलोकित करेगा, उसमें कहीं न कहीं केसी मालू की सांस्कृतिक साधना भी सुनाई देगी। राजस्थान के लोक संगीत के इस प्रहरी को हमारे शत शत नमन। #KCMaloo #Veena




'Sustainability events' are amusing. You get an 'invite' for it because, you are told, you have done excellent grassroots stories. And then, you are informed you have to buy a ticket worth several thousand rupees to attend it to listen to industry leaders :-) No, thank you :-)










