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Aashish Yadav
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Aashish Yadav
@aashishsy
Communication Specialist,Ex BBC ,समाजवादी,History Lover,Traveller,From Jhansi.Tweets and RTs are personal.
Lucknow, India Katılım Aralık 2011
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सोशल कॉन्टेंट सोशल रिस्पांसिबिलिटी भी होती है।
एक INFLUENCER के नाते, समाज के प्रति ये आपका दायित्व बनता है कि आप समाज को सकारात्मक संदेश दें। सकारात्मक संदेश देने का लाभ आपको इस तरह से भी होगा कि Positive लोग ही Loyal होते हैं, वही Loyal audience भी बनते हैं, और बने भी रहते हैं। नकारात्मक बातें करनेवालों से लोग बहुत ज़ल्दी उकता जाते हैं क्योंकि मूल रूप से कोई भी बहुत देर तक Negativity के साथ नहीं रह सकता है।
हम शीघ्र सभी पॉज़िटिव सोशल मीडिया क्रिएटर्स व इंफ़्लुएंसर्स से लखनऊ में अपने मुख्यालय में मिलेंगे व इसके लिए पूर्व सूचना देंगे, जिससे कि सभी जगहों से लोगों का आना संभव हो सके।
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RT @yadavakhilesh: लोकप्रिय क्रिकेटर कुलदीप यादव एवं वंशिका को विवाह की हार्दिक बधाई और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएँ! https://t.co/…
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परेशान माँ की नहीं तो बिलखते बच्चे की पुकार ही शायद भाजपाइयों के ज़मीर को जगाए!
आक्रोशित जनता समझ ही नहीं पा रही है कि सिलेंडर की लाइन में सरेआम लगे लोगों की दिक़्क़त-परेशानी देखकर भी भाजपाई इतनी बेशर्मी से झूठ कैसे बोल पाते हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है। अब तो भूख से तड़पते परिवारवाले कह रहे हैं कि अब ये नहीं कहना चाहिए कि निर्दयी-निर्मम भाजपाइयों के दिल पत्थर के हैं बल्कि ये कहना चाहिए कि भाजपाइयों के दिल ही नहीं हैं।
ऐसी सच्ची पत्रकारिता से बड़े चैनल प्रेरणा लें।
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With Mr. Riteish Deshmukh, a true representative of Creativity Economy: An actor, director & producer at VISION INDIA : CREATIVE ECONOMY SUMMIT @ Mumbai
@Riteishd

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सिलेंडर पर सरकार के मुँह क्यों सिले हैं?
कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत दरअसल अपने घरों से दूर रह रहे विद्यार्थियों, कामगारों, पेशेवरों, नौकरीपेशा लोगों व श्रमिकों-मज़दूरों के लिए भोजन की भी समस्या है।
इसके अतिरिक्त क्लाउड किचन व फूड सप्लाई करनेवाले स्टार्टअप, सप्लाई चेन, ट्रेवल तक के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
सरकार हर तरह की गैस की आपूर्ति के बारे में स्पष्ट सूचना दे जिससे जनता समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर सके।
सरकार की गलत नीतियों का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते?
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अमेरिकी-इज़राइली हमलों का हमारी सरहदों के करीब, हिंद महासागर तक पहुँचना देशवासियों के लिए चिंता का विषय है और इन अर्थों में बेहद चिंतनीय भी कि इस गंभीर विषय पर भाजपा सरकार ने अभूतपूर्व चुप्पी साध रखी है। स्पष्ट किया जाए कि इसे ‘चुप्पी’ माना जाए या किसी विशेष भय के कारण इसे ‘घिग्घी बँधना’ माना जाए। भाजपा सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि उनके होंठ किसी ने सिल दिये हैं। जनता पूछ रही है कि आपका कौन सा पत्ता दबा है?
एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा होने के नाते ये देश की सरकार, विदेश मंत्रालय डिफेंस मिनिस्टरी का संयुक्त दायित्व बनता है कि उसे अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए, परंतु कई दिनों की प्रतीक्षा के बाद भी सरकार द्वारा मुँह न खोलने पर, इस वैश्विक मुद्दे पर विपक्ष को मजबूर होकर बोलना पड़ रहा है। इस संकटकाल में सरकार आगे आए और देश की जल, थल, वायु सीमाओं की रक्षा सुनिश्चित करे। जो भाजपा सरकार कुछ कह भी नहीं रही है; वो करेगी क्या, ये सोचकर देशवासी परेशान हैं। भाजपा ने जनता का विश्वास खो दिया है। ऐसा लग रहा है कि देश में सरकार नाम की कोई चीज़ ही नहीं है।
भाजपा सरकार अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अस्पष्ट नीति अपनाने का तरीक़ा ढूँढ रही है, जिससे लोग अटकलों में ही उलझे रहें। भाजपाई आगामी संसद सत्र में भी ऐसा कोई विवादास्पद विषय ज़रूर उठाएंगे, जिससे भाजपा सरकार की विफलताओं पर बात ही न हो सके।
देश के लिए ये समय ‘सरकार-शून्यता’ का काल है।
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