Awadhesh Ambasta
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@MediaHarshVT राजनीति और शर्म? क्या बात करते हैं सर। इससे सुन्दर चित्र और कहां मिलेगा 🤣
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@semeerc अब ज्यादा नही दो टर्म और रहना है राज्यसभा मे फिर रिटायरमेंट के बारे मे सोचुंगा 😍
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आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर ध्वजारोहण किया एवं संगठन के आधार स्तंभ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
#47YearsOfNationFirst
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The flag carries within it the sweat, hard work, and sacrifices of countless karyakarthas across our country.
On the 47th Foundation Day of our party, I unfurled our party’s flag at my residence, as a mark of respect for those who’ve helped shape its glorious journey.
#47YearsOfNationFirst
@BJP4India @NitinNabin @BJP4TamilNadu

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46 Years Of BJP: 1980 का अटल बीज मंत्र, पालमपुर प्रस्ताव, NDA, मोदी का उदय; भारतीय जनता पार्टी के 10 टर्निंग पॉइंट ndtv.in/india/bhartiya… via @ndtvindia
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भाजपा सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि माँ भारती की सेवा का एक जन-आंदोलन है। इस संगठन की रगों में बस एक ही संकल्प दौड़ता है- राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम!
पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की अनंत शुभकामनाएँ।🇮🇳
#47YearsOfNationFirst 🧵
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@MediaHarshVT वैसे पटना मे कनेक्सन का काम तेजी से हो रहा है। हमारी सोसायटी मे तो 2019 मे ही लग गया।
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#Maharashtra #Gujarat देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल हैं। शहरीकरण भी यहाँ सर्वाधिक है तो #PNGConnection भी स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश को और रफ्तार पकड़ना है। बिहार की तो अभी बात भी नहीं की जा सकती। बिहार में पहले शहर बनाना होगा।

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Received via WA but makes sense 👇
मेरे आदरणीय,
कृपया आपसे निवेदन है…
“मार्च 2027” तक भारत की जनगणना पूरी होने जा रही है। जनगणना अधिकारी शीघ्र ही आपसे जानकारी एकत्र करने के लिए मिलेंगे।
आपसे जब आपकी मातृभाषा पूछी जाएगी और उसके बाद जब आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कौन-कौन सी भाषाएँ जानते हैं, तो कृपया “संस्कृतम्” को भी उन भाषाओं में अवश्य शामिल करें जिन्हें आप जानते हैं। यद्यपि हम सभी संस्कृतम् बोल नहीं पाते, फिर भी हम प्रतिदिन अपनी प्रार्थना, जप, श्लोक तथा सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में इसका उपयोग करते हैं।
पिछली जनगणना के अनुसार पूरे देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या मात्र हजारों में थी, जबकि अरबी और फ़ारसी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है। उन भाषाओं के विकास के लिए उन्हें वित्तीय सहायता भी मिलती है। यदि संस्कृतम् को “लुप्तप्राय” भाषा घोषित कर दिया गया, तो हमारे प्राचीन धर्मग्रंथ, वेद, पुराण आदि का प्रकाशन बंद हो सकता है। हम अपनी जड़ों से कटते जाएंगे और अंततः पूजा-अर्चना का अर्थ केवल DJ बजाने तक सीमित हो जाएगा।
देवभाषा संस्कृतम् भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि संस्कृत को “लुप्त” भाषा घोषित कर दिया गया, तो इसके विकास और विस्तार के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। संभव है कि हम संस्कृत को हमेशा के लिए खो दें।
केवल हमारी जागरूकता और प्रयास ही संस्कृत को जीवित रख सकते हैं। अभी भी देर नहीं हुई है। कृपया संस्कृत सीखने के साथ-साथ यह छोटा-सा प्रयास अवश्य करें।
यदि आपको यह उचित लगे, तो कृपया इस संदेश को अपने सभी परिचितों तक अवश्य पहुँचाएँ।
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@Baliyan_x पतन तो है ही। फिर भी एक दूसरे को जान से मारने से तो अच्छा है विधि पूर्वक तलाक ले लेना।
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