Rekha Srivastava

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Rekha Srivastava

Rekha Srivastava

@aishrekha

Delhi NCR, India Katılım Haziran 2010
122 Takip Edilen509 Takipçiler
Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@AshokShrivasta6 Are waah! Congressi rahul ka virodh kar CM bana rahe hain aur ashok jaise bike log apne aaka k charno me gire huye hain. Ek baar aaina dekh lo ki behtar kaun hai?
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Ashok Shrivastav
Ashok Shrivastav@AshokShrivasta6·
वीडी सतीशन होंगे केरल के नए मुख्यमंत्री। लोकप्रिय नेता हैं। 2001 से आज तक सतीशन कभी चुनाव नहीं हारे हैं। बड़ी बात यह है कि राहुल गांधी अपने खास के सी वेणुगोपालन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन केरल कांग्रेस ने ही राहुल गांधी की पसंद का इतना विरोध किया कि पार्टी को सतीशन को मुख्यमंत्री चुनना पड़ा।
Ashok Shrivastav tweet media
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@Anshulk19Anshul @AadeshRawal Jiske jute ki barabri karne ki aukat nahi woh uski padhayi aur gyan dekh rahe hain. Jao bhai whatsapp gyan se apna gobar dimag bharo, yaha apna majak nat banwao...
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Anshul
Anshul@Anshulk19Anshul·
@AadeshRawal ACR का फुल फार्म जिसे नहीं पता , जिस पप्पू को सिर्फ़ जाति ढूंढनी है, उसे विस्तृत जानकारी दे कर करना क्या है.. UPA सरकार के समय में CBI director सिर्फ़ सोनिया अकेली सिलेक्ट करती थी, तब लोकतंत्र बहुत अच्छा था..
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Aadesh Rawal
Aadesh Rawal@AadeshRawal·
सरकार ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को CBI चीफ की नियुक्ति के लिए 60 से ज़्यादा IPS अफ़सरों की सूची दी थी।लेकिन इन अधिकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। राहुल गांधी ने सरकार से अनुरोध किया कि,मुझे इन अधिकारियों का ACR चाहिए लेकिन उन्हें मुहैया नहीं कराया गया।बल्कि कहा गया कि बैठक में आपको सभी अधिकारियों की विस्तृत जानकारी दे दी जाएगी। लेकिन बैठक में इतने अफ़सरों के बारे पढ़ना नामुमकिन सा था।इसलिए राहुल गांधी ने अपनी असहमति दर्ज कराई।
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ajay
ajay@kalra_ajay·
@RajatSharmaLive आपको यही समझ नही है हालांकि आप काफी वरिष्ठ है, समय आएगा जब आपको इसका ज्ञान जरूर होगा तब कीजियेगा आत्ममंथन
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Rajat Sharma
Rajat Sharma@RajatSharmaLive·
इस बात की समझ ज़रूरी है कि किसको जवाब देना चाहिए, किसको सफाई देनी चाहिए और किस को कुछ भी कहने से बचना चाहिए.
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@DohareCa Are waah modi k chamchon ko ijjat dekar bhakt bol diya to asman par chadh gaye aur jinhone desh k nirman me sab kuch jhonk diya uske samarthak talve chatne wale ban gaye? Kisi ne tum jaiso k liye sahi kaha hai ki chor sari duniya ko chor hi samajhta hai, jaise ho waisa sochte ho
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CA Rajkumar Dohare
CA Rajkumar Dohare@DohareCa·
12 साल से मोदी का समर्थन करने वाले तो अन्धभक्त हो गए,लेकिन 73 साल से एक ही परिवार के तलवे चाटने वाले नासा के वैज्ञानिक हैं 😂🤣🤣
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@bridrizzle95 Lekin woh machine bhi to modi ji ne hi banaya tha to sahyog to unhe karna chahiye janta ka. Phir rona kis baat ka..
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🌧️ RAIN
🌧️ RAIN@bridrizzle95·
प्रिय मोदी विरोधी (haters) , मोदी जी ने केवल सोना खरीदने से मना किया है , आलू को नहीं ! आलू से सोना बनवा लो..🥲
🌧️ RAIN tweet media
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Dr Ajay Alok
Dr Ajay Alok@alok_ajay·
राहूल गैंडी को ये सब क्यों नहीं दिखता ? दरअसल आज की कांग्रेस की विफलता का जिम्मेदार वो नेहरू , इंदिरा और राजीव को मानते हैं । ये तो हैं अलबेला , करोड़ों में अकेला
Dr Ajay Alok tweet media
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@RajatSharmaLive Aur yahi chamchagiri karne ko wajah se aap logo ki vishwasniyta khatm ho chuki hai. Yuddh to shuru huye 2 mahine se upar ho gaya lekin ab tak koi samasya nahi thi kyonki election tha. Khud railiyan nikale desh ka paisa aur tel pani ki tarah bahe.Khud k liye aisho aaram aur janta?
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Rajat Sharma
Rajat Sharma@RajatSharmaLive·
मेरा ये मानना है कि अगर प्रधानमंत्री ने तेल और गैस की बचत को लेकर अपील की तो कौन सा पहाड़ टूट गया? मोदी ने अगर सोना कम खरीदने को कहा, विदेशों में सैर सपाटा कम करने को कहा तो इसमें इतनी हाय-तौबा मचाने की क्या ज़रूरत? अमेरिका से ईरान पर हमला मोदी ने तो नहीं करवाया था. दुनिया में तेल का संकट मोदी के कारण पैदा नहीं हुआ. जिन चीजों पर विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होती है, उनकी खरीदारी में किफायत बरतने में किसी को क्या समस्या हो सकती है? ये समस्या विरोधी दलों के कुछ नेताओं की है. इस तरह की बेसिर पैर की बातें करने के कारण ही उनकी विश्वसनीयता कम हुई है और उनको लोग ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते. rajatsharma.in/?p=12520
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@SunitaAnand1986 @alok_ajay @RahulGandhi Rajaon wale that unke,pichhle 2 mahine se na to yuddh ho raha tha na hi crisis thi kyonki chunav tha.Thode apne that baat me bhi kami kar lete,netaon ko bhi salah de dete lekin updesh sirf unhe jinke tax k paise par yeh khud aish karenge.Baki kaam it cell aur bhakt kar hi denge
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Sunita Anand
Sunita Anand@SunitaAnand1986·
@alok_ajay Papup ki reh gaya itne dino ki world war hote hue bhi desh main gas gher gher aa rahi hai petrol pump chal rahe hain. Jayain pak main dekhain kitni haai tauba machi hai. Shukr karain ye Bharat main hain. @RahulGandhi @alok_ajay
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@SunitaAnand1986 @alok_ajay @RahulGandhi Hum to humesha shukr manate hain ki india me hain. Pakistan ki tarah dharmik desh bana hota to waise hi barbad hote. Woh modi ki wajah se nahi balki unki wajah se bacha hai jinhone iska nirman kiya hai. Modi ko to bas pani ki rarah paisa baha kar chunavi railiyan karni hain
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@Samrend32309381 @hi_essdee @alok_ajay Unse nahi idhar baat kariye aapko bura kyon laga? Mera chehra to dikh raha hai na? Kitni gandgi failayenge modi ko bachane k liye? Bjp it cell ne fake news diya nahi ki pura gang active ho gaya. Unhe to issi k paise milte hain kya aapko bhi milte hain?
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Dr. S.K.Das
Dr. S.K.Das@Samrend32309381·
@hi_essdee @alok_ajay बेटा, अब तक ठीक से जन्म नहीं लिया है ! तमीज़ से बोल बेटा ! मुँह तो असली दिखा ?
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@alok_ajay Tumhare liye bas itna news hi kafi hai. Aur jise bhi shaq hai google par jakar search kar le. Bjp ke it cell wale yahi to kar pate hain. Bechare edit karenge, fake news taiyar karenge aur apne gang ko bolenge ki isse failao
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Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
अगर आप राहुल गांधी जी की तरह घूमने या मस्ती के लिए विदेश जाने की सोच रहे हैं तो एक साल बाद जाइए. ऐसा क्या बिगड़ जाएगा. एक कार में अकेले ट्रैवल करने की जगह मेट्रो और बस आदि से चलिए. सोना खरीदना इस समय टाल सकते हैं तो टाल दीजिए. थोड़े समय की बात है. जहां संभव है, और ऑफिस इजाजत दे रहा है, वहां ऑफिस जाने की जगह घर से काम कीजिए. खाने में ज्यादा तेल सेहत के लिए वैसे भी ठीक नहीं है. थोड़ा कम कीजिए. मोटापा घटेगा. प्रधानमंत्री चार साल से ये बोल रहे हैं. प्राकृतिक खाद का प्रयोग बढ़ाइए. खेत भी बचे रहेंगे. मोदी जी ने इस वैश्विक संकट काल में भी गरीबों और मिडिल क्लास का ध्यान रखा है, ताकि उन पर कोई दबाव न आए. भारत अकेला देश है जहां क्रूड ऑयल बहुत कम है, फिर भी डीजल, पेट्रोल, और घरेलू एलपीजी तथा सीएनजी के दाम बढ़ने से रोका गया है. भारत का पिछले वर्षों का सबसे बड़ा फैसला रेल ट्रैक के बिजलीकरण का था. आज लगभग शत प्रतिशत ट्रैक का बिजलीकरण हो चुका है. हमारा देश फंसेगा नहीं. सोलर का कुल बिजली उत्पादन में हिस्सा 20 परसेंट है. हम भविष्य के ऐसे किसी भी संकट के लिए बेहतर तैयारी कर रहे हैं.
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@Rohitsri1996 @Profdilipmandal Anpadh k ghulam sari duniya ko khud jaisa hi samajhte hain lekin gande aur ghatiya log atank to macha sakte hain lekin duniya ko khud jaisa nahi bana sakte to filhal madari jaise jaise nacha raha hai nacho taki tumhare ghar ka kharcha pani chalta rahe🤣🤣
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Rohit Srivastava
Rohit Srivastava@Rohitsri1996·
@aishrekha @Profdilipmandal कांग्रेसी गुलाम और ऊपर से वामपंथी अब मुझे ज्ञान देगी 🤣🤣🤣
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Rohit Srivastava
Rohit Srivastava@Rohitsri1996·
@Profdilipmandal अगर मोदी जी कह दे कि हगने के बाद गान धोना जरूरी है तो चमचे कहेंगे कि नहीं जी हम तो चाट कर काम चलाएंगे
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@alok_ajay Agar yeh satta me hota to 2 mahine pahle se hi sabhi intejam kar leta. Election me prachar k liye pani ki tarah paisa aur tel nahi bahata. Ambani aur adani k sath America aur Israel ki ghulami nahi karta aur iran se rishte bhi kharab nahi hote to yeh barking kahi aur jake karo😡
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Dr Ajay Alok
Dr Ajay Alok@alok_ajay·
ये अबोध व्यस्क बालक नहीं बल्कि महामूर्ख के साथ दुष्ट जलन खोट्टा हैं । जरा सोचिए इस वैश्विक समस्या के समय अगर ये व्यक्ति भगवान ना करे अगर सत्ता में होता तो देश का क्या होता ?
Rahul Gandhi@RahulGandhi

मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं। 12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।

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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@Khurpench_ Dusron ko gyan bantne se chauthi pass ki tarah koi gyani nahi ban jata. Jis tarike se bjp jeet rahi hai congress ne kiya hota to modi ji 10 janmo tak satta me nahi aa pate. Tum logo ki tarah sabki ankhein andhbhakti k nashe me band nahi hain. Isliye apna gyan apne pass rakho..
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खुरपेंच Satire
आपका नाम राहुल गांधी है। आप विपक्ष के सरगना और कांग्रेस के राजकुमार हैं। आप हमेशा जातियों की बात करते हैं, कांख में संविधान की किताब लेकर घूमते हैं और हर मंच से लोकतंत्र बचाने का भाषण देते हैं। लेकिन आपकी अपनी पार्टी का चुनावी इतिहास देखिए लोकतंत्र बचाते-बचाते कांग्रेस खुद ICU में पहुंच गई। 2014 में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी लोकसभा में विपक्ष का दर्जा तक नहीं बचा पाई। 2019 में कांग्रेस 52 सीटों पर रुकी। और आप खुद अपनी पारिवारिक सीट अमेठी से हार गए। 2022 में पंजाब गया , यूपी में कांग्रेस लगभग गायब हो गई , उत्तराखंड-गोवा-मणिपुर में भी सत्ता नहीं मिली। 2023 में तेलंगाना जीतकर खुशी मनाई , लेकिन उसी समय मध्य प्रदेश , राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य हाथ से निकल गए। 2024 में कांग्रेस 99 सीटों तक पहुंची, लेकिन सत्ता फिर भी दूर रही। मतलब सुधार हुआ , लेकिन सरकार नहीं बनी। फिर हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कांग्रेस उम्मीदों के बावजूद धड़ाम हो गई। सीधी बात है ... आप जाति गिनते रहे , जनता सीटें कम करती गई। आप संविधान दिखाते रहे , BJP सरकार बनाती रही। आप यात्रा निकालते रहे , कांग्रेस राज्यों से निकलती रही। राजकुमार की राजनीति में मुद्दे बहुत हैं , लेकिन जीत अभी भी missing है। राहुल गांधी की कहानी बताती है कि विरासत से पहचान मिल सकती है , लेकिन चुनाव जीतने के लिए संगठन , रणनीति और जमीन पर भरोसा चाहिए।
खुरपेंच Satire tweet media
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Mo. Nafees
Mo. Nafees@Nafees760·
@JaikyYadav16 यह सब तो ठीक है पर उन्होंने क्या जवाब दिया कोई guess कर सकता है So Tell Me I Appreciate Who ❓️
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Jaiky Yadav
Jaiky Yadav@JaikyYadav16·
आज राहुल गाँधी की सच्चाई उनके फाइनेंस एडवाइजर ने सोशल मीडिया पर बता डाली। फाइनेंस एडवाइजर मुथुकृष्णन धांडापाणी ने एक पोस्ट कर बताया कि वह राहुल गाँधी के साथ पिछले 13 सालों से जुड़े हैं, यानि UPA 2 के दौरान से, वह उनके म्यूचुअल फंड संभालते हैं, उन्होंने आगे कहा कि वो 2014 से लेकर 2024 तक BJP के कट्टर समर्थक रहे हैं। यह सब राहुल गाँधी ने जानते हुए भी कभी भी उनसे प्रोफेशनल रिश्ते खराब नहीं किए बल्कि वह हमेशा से ही काम को लेकर उनसे खूब बातचीत भी करते रहे हैं। उन्होंने यह सब कहते हुए राहुल गाँधी के व्यक्तित्व की जमकर तारीफ़ की जिसके बाद राहुल गाँधी ने उनके पोस्ट का मजाकिया अंदाज़ में जवाब दिया है।
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@G_S_Shukla @JaikyYadav16 वो तो 2014 से राज कर रहे हैं और आप जैसे लोग गुणगान किए जा रहे हैं फिर अपनी तारीफ अपने ही मुँह से? ग़ज़ब🤣🤣
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Girja shankar shukla
Girja shankar shukla@G_S_Shukla·
@JaikyYadav16 इसमें कौन सी बड़ी खबर है भाई ! अब देश में भंडवे व नौटंकी बाज ही राज करेंगे और तुम जैसे लोग उनका गुणगान करेंगे।
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Jaiky Yadav
Jaiky Yadav@JaikyYadav16·
तमिलनाडु से बड़ी खबर सामने आ रही है। आपको पता होगा Thalapathy Vijay तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 2 सीटें से चुनाव लड़े थे, और दोनों पर उनकी जीत हुई थी ऐसे में उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। अब खबर आ रही है कि उनकी गर्लफ्रेंड तृषा कृष्णन तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से उपचुनाव में TVK की उम्मीदवार बन सकती हैं। 4 मई को जब चुनाव परिणाम आए थे उसी दिन तृषा कृष्णन का जन्मदिन भी था, तृषा कृष्णन TVK की भारी जीत पर Vijay को बधाई देने उनके घर भी गई थीं।
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Rekha Srivastava
Rekha Srivastava@aishrekha·
@jaihind452661 @RebornManish Bilkul galat. Chamchon aur pakistaniyon me samanta, dono hi modi ko satta me dekhna chahte hain. Ek ko desh me arajkta failane ko milega aur dusre ko biryani khilane k bahane sauda ka mauka..
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
रशिंग टुवर्ड्स फाइनल डेस्टिनेशन !! पांच राज्यों के लिए तय किये गए नतीजे आपको बता दिए गए हैं। मुख्य विपक्ष को एक राज्य में बोटी फेंकनी थी। दूसरे में क्षेत्रीय दल को हटाना था। एक जगह प्रॉक्सी बिठाना था। और दो जगहों पर सत्ता पर पकड़ मजबूत करनी थी। ●● विपक्षी दल अपनी धुन में चुनाव लड़ते रहे। उनकी रेसिपी थी- मजबूत संगठन, गहरा जनसंपर्क, तगड़ा प्रचार। डीएमके ने तो अच्छी गवर्नेंस भी दी। अगर नतीजे जनता को तय करने होते, तो शायद यह काफी होता। पर वह बीते जमाने की बात है।2014 में लोकतांत्रिक तख्तापलट के बाद भारतीय राजव्यवस्था मुट्ठी भर हाथों में केंद्रित है। नतीजे दिल्ली में तय होते हैं। यह नई व्यवस्था, इलेक्शन का स्वांग रचती है, ताकि लेजिटिमेसी बनी रहे। एक ओलिगार्की कायम है, जो टॉप ब्यूरोक्रेसी, और पसंदीदा कारपोरेट के साथ मिलकर, तंत्र को चला रही है। ●● लोकतंत्र, विकल्पों की उपलब्धता, लेवल प्लेइंग फील्ड, तटस्थ रेफरी और आंखों की शर्म पर चलता है। अन्यथा वह इलेक्शन नहीं, इलिमिनेशन है। करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित कर, मनमाफिक चुनाव क्षेत्र बनाकर, संचार पर एकतरफा कब्जा करके, लालच-ब्लैकमेलिंग- बताते हैं कि एक दौर से भारत के इलेक्शन, दरअसल इलिमिनेशन का तरीका बन गए हैं। और विकल्पों का इलिमिनेशन.. लोकतंत्र का इलिमिनेशन है। ●● मेरी चिंता तृणमूल, डीएमके, या कांग्रेस नहीं। क्योकि राजनीतिक दल हारते हैं, मिटते हैं, तो नए नामों से फिर बनते हैं। इसलिए कभी हिंदू महासभा मिटी, जनसंघ आया। वह मिटा तो भाजपा आई। क्योकि समाज में कोई विचार है, उन्हें प्रतिनिधित्व करने वाले दल हो ही जाएंगे। जब 7 दशकों का सत्ता का सूखा इन्हें खत्म नहीं कर सका। तो एक-दो दशक की सत्ता में, कुछ दल अवश्य मिटा लें, मगर समाज में बुद्ध-गांधी, या मार्क्स/ पेरियार की धारा को मिटा नहीं सकते। ●● लेकिन विरोधी दलों को कुटिलता से मिटाने की प्रवृत्ति खतरनाक संकेत देती है। दरअसल, भारत नाम के राष्ट्र को बने रहने के लिए ऐसे राजनीतिक विकल्प चाहिए, जो इनक्लूजन के विचार को पोषित करें। भारतीय राष्ट्रवाद, इतिहास और समाजशास्त्र की मेरी समझ कहती है कि इस देश की लंबी आयु, इसी बात पर निर्भर है कि हम कितनी इनक्लूसिव सोसायटी बना पाते हैं। 40-42% जनमत से सीटें दो तिहाई जरूर आती हैं। मगर सम्मान 100% का करना जरूरी है। सीटों की चमक में अंधी भाजपा, यह समझने में नाकाम हैं- कि स्थायी सत्ता की उनकी आकांक्षा और सोशल डिवीजन की नीति तभी तक सफल है.. जब तक विभिन्न धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के लोगों की न्यूनतम आस्था- संविधान, सिस्टम और न्याय में बची है।एक बार वह आस्था टूट गई.. तो डंडे या बंदूक के बल पर इस बहुरंगी देश को एक रखना, किसी के लिए भी बेहद मुश्किल होगा। ●● और तब ये पांच राज्य इसलिए महत्वपूर्ण थे क्योंकि ये मेनलैंड से काफी अलग सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक पहचान रखते हैं। यहां सांप्रदायिक अविश्वास और उपराष्ट्रवाद से कुछ दशक पहले ही मुक्ति मिली थी। क्षेत्रीय दलों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान कायम रखी, लेकिन आइडिया ऑफ इंडिया से भी जुड़े रहे। केंद्रीय सत्ता का अहंकार, एकरूपता का दर्शन, और सांप्रदायिक आग में रोटी सेंकने की आदत, यहां विस्फोटक होगी। पर, जैसा जाहिर है, इस पड़ाव तक बदलाव के चुनावी रास्ते बंद किए जा चुके हैं। देश को यहां से आगे बढ़ना है। ●● अब आगे चौराहा है। एक रास्ता सीधा जाता है, जिस पर धकेलने की आशा RSS-BJP कर रही है। यह एकदलीय शासन और पुंसत्वहीन विपक्ष का चीनी मॉडल है। पर इसके हिंदू वर्जन में अर्थनीति, मानव विकास, और निम्न-मध्यवर्ग के प्रति घोर उपेक्षा हैं। दूसरा- आंदोलन का है। जिसमें सबकी भागीदारी हो। भारत का हर संवेदनशील, लोकतांत्रिक स्वभाव वाला नागरिक- चुनाव सुधारों और नियुक्तियों में शुचिता के लिए सत्याग्रह करें। तमाम विपक्ष और क्षेत्रीय दल एकजुट होकर इसे लीड करें। शेप करें। और मौजूदा स्वरूप में हो रहे चुनावों का परित्याग करें। अन्यथा, तीसरा रास्ता फिसलन का है। एक अराजक आंदोलन उन इलाकों में स्वतः उपजेगा- जिनकी सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक विविधता का निरादर, तथाकथित हिंदू राष्ट्र की नींव है। यह अलग होने, टूटन और बिखराव का मार्ग होगा। पहल न करने की सुस्ती से उपजेगा। ●● भारत का भविष्य वे तय करेंगे, जो चुनाव हार चुके हैं। आगे क्या उनके कार्यकर्ता, बूथ बनाने, टिकट पाने और पद पाने में जुटे रहेंगे? क्या उनके नेता, सबकुछ त्यागकर- पहले इस हाइजैक हो चुके सिस्टम को दुरुस्त करवाने की नीति पर चलेंगे? क्या तमाम गैर-भाजपा राजनीतिक दल समझेंगे, कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री की फिलहाल मिली कुर्सी से ज्यादा जरूरी, भारत देश में संस्थाओं की बहाली है? और क्या भारत का नागरिक, तेरा दल-मेरा दल की बहस से ऊपर उठकर संवैधानिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना के लिए उठ खड़ा होगा? ●● वो चौराहा सामने है। निर्णय की घड़ी शीघ्र आने वाली है.. वी आर रशिंग टुवर्ड्स फाइनल डेस्टिनेशन !!
Manish Singh tweet media
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