Sabitlenmiş Tweet

#सवाल_ए_बराबरी
#दस्तूर-ए-जहाँ में एक नई रीत तो लाओ,
सिर्फ बेटियों को ही नहीं, अब बेटों को भी बचाओ।
#मानते हैं कि औरत का एहतराम ही ज़िंदगी है,
पर मर्द के हक़ में भी कोई फ़रमान तो सुनाओ।
#तुम्हारी पलकों पे जो नमी हो, तो "जज़्बात" कहते हैं,
हमारी आँख भर आए, तो "कमज़ोरी" का नाम देते हैं।
#गहराई से देखो तो समझ पाओगे तुम ये दर्द,
कि कौन किसका, और कैसे शोषण करते हैं।
#वो मेहनत की डिग्री, वो नौकरी का दबदबा,
वो घर भर का बोझ, वो हर ज़ख्म का छुपावा।
#मर्द अकेला रोता है रातों की तन्हाइयों में,
पर महफिल में मुस्कुराना ही उसकी सबसे बड़ी सज़ा।
#कहीं झूठे इल्ज़ामात की दीवार खड़ी है,
कहीं बिना सुने ही सज़ा सर पे पड़ी है।
#ज़िंदगी भर जो रिश्तों की डोरी को थामे रहा,
आज वही शख्स अदालत की दहलीज़ पे खड़ा है।
#गुनाहगार को सज़ा दो, ये तो इंसाफ है,
मगर बेकसूर को न सताओ, ये भी तो इख्लाक है।
#सब जेंडर देख कर मोड़ लेते हैं अपना चेहरा,
क्या मर्द होना ही आज के दौर में एक पाप है?
#अब तो ख्वाबों में भी सुकून की नींद नहीं आती,
ये दुनिया बस "वर्दी" और "कमाई" ही है नापती।
#एक बार हाथ थाम कर हमारे जज़्बात भी तो समझो,
क्योंकि हर मर्द की दास्तान, कोई ज़ुबान नहीं कहती।
🥺🥺😔
#Brahm ✍️
#Brahmingenes 💫
हिन्दी
















