Anupam K. Singh
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Anupam K. Singh
@AnupamNawada
Ex Associate Editor & Research Head: OpIndia | Ex Editor: TFI Media | Narrative Strategist | Hindu Nationalist. Proud of our history, culture & tradition |
Bharatvarsh Katılım Şubat 2012
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दलित समाज आंतरिक दुविधा से संघर्षरत है। यह विचित्र संघर्ष है; अपने मूल तत्त्व और ऊपर से थोपे जा रही नव-पहचान के मध्य। इसी कारण दलित समाज दिशाहीनता का शिकार हो रहा है।
दलित अपना मूलधर्म छोड़ना नहीं चाहता। सनातन का सातत्य उसमें विद्यमान है। किंतु नव-बौद्ध होने का नैरेटिव भी दलित-युवा को मथ रहा है। सोशल मीडिया और धरातल पर चल रहे बौद्ध मत के प्रसार के कारण युवा-मन में हिंदू धर्म के प्रति संशय का बीज पनपा है। इसके परिणाम स्वरूप इधर माँ-बाप हिंदू देवी-देवताओं के चरणों में शीश नवाते हैं, उधर बेटा भंते के यहाँ।
बाबा साहब की कल्ट-इमेज और उनके बौद्ध धर्म में दीक्षित होने का प्रसंग बहुत प्रभावी है, लेकिन दलितों का हिंदू-मन यह करने के लिए उतना सहज नहीं है। किंतु एक ओर बाबा साहब का सम्मान भी सर्वोच्च है!
इस मनोवैज्ञानिक जटिलता के कारण दलित के घर मंदिर में गणेश और हनुमान की फ़ोटो के आसपास बाबा साहब अंबेडकर की भी फ़ोटो विराजती है। यह उस दुविधा का बाह्य प्रकटीकरण है, जिसका एक विंडम्बनापूर्ण तोड़ दलितों ने खोजा है। इसलिए ही बाबा साहब के नाम “कांवड़ यात्रा” हो रही है, “भीम नाम सत्य” हो रहा है, बाबा साहब को साक्षी मानकर फेरे हो रहे हैं। ऊपर से थोपी जा रही पहचान का स्थायित्व पुनः अपनी जड़ों में ही खोजा जा रहा है। यह सामाजिक विज्ञान की किस कक्षा में समझा जा सकेगा, मालूम नहीं।
यह मूल और कृत्रिमता के बीच टकराव से उपजा बदरंग दृश्य है। इस मतिभ्रम का लाभ कौन उठा रहा है, उससे दलित समाज अभी अनभिज्ञ है।
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मेरे पूरे पोस्ट में मेरा प्रचार कहाँ है, क्या आप इंगित करेंगे? मुझे प्रचार की आवश्यकता नहीं है, मेरा लेखन ही मेरा प्रचार है।
भीड़ जुटाने का अर्थ है कि जिस विषय पर आपका कार्यक्रम है उसमें रुचि रखने वाले लोग वहाँ आने चाहिए, वरना उद्देश्य विफल हो जाता है। ये भी प्रोफेशनलिज्म का ही एक हिस्सा है।
मेरी बुद्धि को नमन करने से पहले ये भी ध्यान रखें कि मैंने एक अच्छे व्यक्ति के बारे में बताया जो इसी कैम्पस में वर्षों से कार्यक्रम कर रहे हैं, सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। मैं सिर्फ़ जानता भर हूँ उन्हें, उससे अधिक कुछ नहीं।
निहितार्थ निकालने से पहले अच्छे से पढ़-समझ लिया करें। तब फ़ैसला सुनाएँ।
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@smitaprakash @AnupamNawada @satendrasuman Sab apna prachaar karne mein lage hain, baat ho rahi hai unprofessionalism mein aur anupam ji bheed juta hai rahe hain. Inki buddhi ko naman hai🙏
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कुछ दिनों पहले इसी मिरांडा हाउस के ही एक कार्यक्रम में गया था। इस कार्यक्रम में न कोई बड़ा नाम था और न ही ज़्यादा पैसे ख़र्च किए गए थे। इसके बावजूद न केवल हॉल ठसाठस भरा हुआ था बल्कि बाहर भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ वी अतिथिगण खड़े थे।
आयोजक थे @satendrasuman सर। कार्यक्रम था -‘सिद्धिदा’, जिसे वो हर वर्ष आयोजित करते हैं।
लेकिन, समझिए कि समस्या कहाँ है। समस्या ये है कि अगर सतेंद्र शुक्ला बाबा चाहेंगे स्मिता प्रकाश जैसे बड़े नामों को बुलाना तो ये लोग नहीं आएँगे। वहीं जहाँ एक कुत्ता भी देखने-सुनने नहीं पहुँचता वहाँ ये लोग दौड़-दौड़कर जाएँगे।
अच्छे लोगों को व्यवस्था आगे नहीं बढ़ाती। उन्हें संघर्ष के लिए छोड़ दिया जाता है। एक-एक कार्यक्रम की फंडिंग के लिए दर-दर भटकते हैं, जबकि उनके एक इशारे पर 1000 छात्र व 100 अतिथि ऐसे ही आ जाएँ। बस ‘बड़े लोग’ कन्नी काटते हैं। वहीं कनेक्शन वाले लोगों के दरवाज़े पर जाकर बेइज्जत होने में भी कोई गुरेज नहीं ‘बड़े लोगों’ को। यही अंतर है। @smitaprakash मैम को भी समझना चाहिए।
Smita Prakash@smitaprakash
To the Principal, staff and students of Miranda College, Delhi University, you need to respect the Chief Guest you invite for your events. I was there for a no show! I have posted the videos and pix here so that you learn that tardiness equals to disrespect. No staff and 4-5 students. Flow chart & evidence posted
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मैम मेरे कहने का आशय ये बिल्कुल नहीं था। आपको सुनने के लिए भीड़ भी आती है, आप एक महत्वपूर्ण पद पर भी हैं और आपकी योग्यता पर भी कहीं से कोई प्रश्नचिह्न नहीं है। कइयों के घर चला रहीं आप।
मैं केवल इतना पूछ रहा कि सतेंद्र शुक्ला बाबा जैसे लोग जब अपने कार्यक्रम के लिए आप जैसे बड़े लोगों को अप्रोच करते हैं तो कोई प्रतिक्रिया नहीं आती। जिस कैंपस में आप गईं थीं उसी में कार्यक्रम कराते हैं वो। इतने बड़े विद्वान हैं फिर भी ANI पर उनका पॉडकास्ट नहीं आएगा।
कारण - ‘बड़े लोग’ उन जैसों पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि वो चुपचाप कार्य करते हैं। जिनपर भरोसा किया आपने वो एक आदमी नहीं जुटा पाया। मैं तो आपको बस एक तुच्छ सलाह दे रहा कि आपके वक़्त की इज़्ज़त शुक्ला सर जैसे लोग समझते हैं, ऐसे अच्छे लोगों को आप नहीं आगे बढ़ाएँगी तो कौन?
आप बड़ी हैं @smitaprakash मैम, एक बार पुनः पढ़िए और मेरे कहे पर विचार कीजिए। आपके लिए कहीं कोई ग़लत बात नहीं है।
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@AnupamNawada @satendrasuman Satendra ji aap mahaan hain, aapko sunane ke liye bheeden aatin hain. Mai toh keval ek tuch koti ki patrakaar hoon. Na toh bheed maang rahi thi na hi koi rakm. Sirf mere vakt ki izzat.
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‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्माता @AbhishekOfficl सर को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ! माँ भाग्यलक्ष्मी आपकी सदा सहायक हों।
मेरा सौभाग्य है कि अभिषेक अग्रवाल सर मेरे मार्गदर्शकों में से एक रहे हैं। समस्त हिंदू समाज भी आपको धन्यवाद करता है क्योंकि आपने एक ऐसे विषय की फ़िल्म पर पैसा लगाया जब कोई इसे छूने तक को तैयार नहीं हो रहा था।
झोले में इतनी सुपरहिट फ़िल्में होने के बावजूद विनम्र कैसे रहा जाता है, ये बॉलीवुड वालों को इनसे सीखना चाहिए।
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प्रिय @pandeypuraan
सोशल मीडिया पर आपके द्वारा बीते दिनों पोस्ट किए गए प्रश्नोत्तर संवाद से पता चला कि आप पुराना संस्थान आंशिक रूप से त्याग कर कुछ अन्य कार्य में व्यस्त होने जा रहे हैं। इस नए कार्य के लिए आपको शुभकामनाएँ। जिस भी क्षेत्र में कार्य करो, हमेशा अजित ही रहना। सभी से अनुराग भरी मित्रता रखना। लेकिन मर्यादा तोड़ने वाले सभी विरोधियों को धूल अवश्य चटा देना। मेरा अनुपम आशीष सदैव आपके साथ है। अंदर से तो हम सभी मनुष्य मैले होते हैं। लेकिन सामाजिक व्यवहार में हमेशा चंदन की ही सुगंध का प्रसार उसी गर्मजोशी से करते रहना, जिस गर्मजोशी से अब तक करते आये हो। कोई किसी के प्रारब्ध को उससे छीन नहीं सकता। लेकिन कुछ मुद्दों पर जब किसी से टकराव हो जाता है, तो अपनी भूमिका ध्रुव की तरह अड़िग रहनी चाहिये, इसका ध्यान रखना। भारत की परंपराओं के दिव्य अंश का बखान अपने कार्य में आप हमेशा करते हो। इसलिए सनातनी आर्यों से लेकर कपिल मुनि तक और गार्गी से लेकर संघमित्रा तक सभी महानुभावों की कही बातें और उनके अनुभवों को निरंतर याद रखना। हम सभी के भीतर एक शैशव खिलता है, उसे संभाल कर रखने का जतन करना। वैष्णव परंपरा और नीतिशास्त्र में भी अनेक प्रिय बातों के पीयूष का अर्णव समाया हुआ है, उन्हें अपने मस्तिष्क में अंकित कर लेना। उन बातों से मिली सीख पर अमल करने से आपके आलोकपूर्ण संकल्प सिद्धि तक पहुँच सकेंगे। अनेकों युगों से इस धरती पर कौशलेश श्रीराम और केशवराय गोपाल की कई उक्तियाँ समय समय पर यथार्थ में आती रही हैं, इसे कभी मत भूलना। ध्यान रहे सांदीपनि ऋषि ने कहा था कि किसी भी गलत व्यक्ति की धारणाओं से प्रभावित होकर उसके गलत कार्य में यदि कोई व्यक्ति अर्पित हो जाता है, तो अंततः उस व्यक्ति के प्रशांत जीवन से हर्ष तो निकल ही जाता है और फिर आगे चलकर जीवन भी उतना प्रशांत नही रहता। आपका उज्ज्वल भविष्य सदैव पल्लवित होता रहे।

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बयरु न कर काहू सन कोई
रामप्रताप विषमता खोई
Anupam K. Singh@AnupamNawada
सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं हम सर-ए-ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर लिए फिरते हैं
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चलिए, 'धुरंधर 2' भारत में दूसरी सबसे अधिक नेट कमाई करने वाली फ़िल्म बन गई है। ₹1050 करोड़ के नेट कलेक्शन के साथ इसने 'बाहुबली 2' (₹1030 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है। इससे आगे अब केवल 'पुष्पा 2' है, जिसने ₹1471 करोड़ की घरेलू नेट कमाई की थी। ये रिकॉर्ड अक्षुण्ण रहेगा फ़िलहाल।
वर्ल्डवाइड कलेक्शंस की बात करें तो ये आज ₹1700 करोड़ पार कर रही है। 'बाहुबली 2' ने दुनियाभर में कुल ₹1800 करोड़ बटोरे थे। ये रिकॉर्ड टूट रहा है।
यानी, नेट कमाई के मामले में #DhurandharTheRevenge पहले और वर्ल्डवाइड कमाई के मामले में दूसरे स्थान पर रहेगी भारतीय फ़िल्मों की सूची में। शीर्ष-10 में दोनों 'धुरंधर' के अलावा सिर्फ़ 'छावा' ही एक बॉलीवुड फ़िल्म है। माफ़ कीजिए, मैं 'जवान' को नहीं गिन रहा। 9 साल पहले चीन से ₹1300 करोड़ लाने वाली 'दंगल' को भी नहीं गिन रहा।
दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के बाद अब बॉलीवुड में 'अमन की आशा' गिरोह को ठेंगा दिखाने वाली ऐसी फ़िल्मों की सफलता ने निश्चित ही जुहू-बांद्रा गिरोह की नींद उड़ा दी है। विशेषकर उस गिरोह में शामिल लोगों की पत्नियों की गॉसिप्स में आदित्य-यामी चर्चा का विषय बन रहे हैं। रामगोपाल वर्मा और संदीप रेड्डी ने जिस तरह से 'धुरंधर' सीरीज का समर्थन किया है, उससे भी ये गिरोह किलसा हुआ है।
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ईरान और उसके समर्थकों के लिए डेढ़ महीने के युद्ध के बावजूद इस्लामी मुल्क़ का अस्तित्व में बने रहना ही जीत है।
सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बावजूद मुल्लाओं के ख़िलाफ़ एक भी ईरानी सड़क पर नहीं निकला, यही ईरान की जीत है। डोनाल्ड ट्रम्प एक ख़ामेनेई के बाद दूसरे ख़ामेनेई को गद्दी मिलने को ही सत्ता-परिवर्तन कह रहे, यही ईरान की जीत है। ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर तेल, गैस व उर्वरकों की कीमतों में बड़ा उछाल ला दिया, यही उसकी जीत है।
यहाँ जीत का पैमाना अमेरिका के लिए इतना ऊँचा स्थित है और ईरान के लिए इतना नीचे गिरा हुआ है कि लहूलुहान ईरान को ही विश्लेषक विजेता बताएँगे। ट्रम्प के बाद कोई अगला अमेरिकी राष्ट्रपति आएगा, ईरान को सहलाकर नोबेल पा जाएगा। अमेरिका का गेम पूरा हुआ, राष्ट्रपति कोई भी रहे देशहित व अपनी कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देती है वहाँ की सत्ता। भले ही इसके लिए दुनिया में कितनी ही तबाही क्यों न मचानी पड़े।
ईरान को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर वापस तैयार करने में ही कई साल लग जाएँगे, अर्थव्यवस्था का तो जो हाल है सो है ही। पलायन जारी ही रहेगा। लेकिन, जीत की घोषणा हो गई है क्योंकि मुल्ला-शासन टिका हुआ है।
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@AshokShrivasta6 @Sanjay_Dixit @ShyamMeeraSingh राहुल गाँधी की यात्रा में घूमने वाला पत्रकारिता पर ज्ञान दे रहा है सर।
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कोर्ट के आदेश से हर हफ्ते एक वीडियो डिलीट करने वाला अब तय करेगा कि क्वालिटी कंटेंट की बात कौन करे और कौन नहीं?
सपने में बाबा रामदेव और सद्गुरु जग्गी वासुदेव तो आते ही होंगे @ShyamMeeraSingh?
Shyam Meera Singh@ShyamMeeraSingh
@AnupamNawada बताओ ये नमूना भी क्वालिटी कंटेंट की बात कर रहा है। जिसे कोई अपने यहाँ इंटर्न ना रखे 😂
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@old_cricketer @ShyamMeeraSingh हैदराबाद में पवन खेड़ा के पाँव दबा रहा है।
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@atsshow7 @Sanjay_Dixit @ShyamMeeraSingh ये केवल फॉर्मल पहनकर फ़ोटो खिंचवाता है। कांग्रेसी नेताओं का टट्टू है।
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@AnupamNawada @Sanjay_Dixit @ShyamMeeraSingh श्याम मीरा सिंह जैसे मुन्ना जब डाइपर में सूसू कर रहे थे तब दिल्ली दंगे के अंदर अनुपम ताहिर हुसैन के घर में घुसकर फैक्ट पर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहा था ।
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@ComradeMalal मुख्य संपादक पर कहीं से कोई प्रश्नचिह्न नहीं है।
आपको 'Multimedia & Digital Head & Editor' बनना पड़ेगा, इस संसार के इतिहास में पहली बार ये पद सृजित हुआ है।
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@sharmabhu डॉलर ख़त्म हो चुका है, ब्रिक्स की करेंसी चलती है दुनियाभर में - मैंने एक जियोपॉलिटिक्स के जानकार से सुना था।
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@AnupamNawada ट्रंप नाराज हो जायेंगे अनुपम जी, $ के आगे उपसर्ग न lagayea😀😀🙏🙏
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@KiaInd @TATA_AIG
For the past 6 months, my vehicle (TG 12 D 0369) has been lying at an authorized Kia workshop under an insurance claim.
Repeated follow-ups, multiple visits, but still no resolution or delivery timeline.
This has caused serious inconvenience.
#KiaIndia #TataAIG #ConsumerRights
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