sufferचंद

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@sufferchand

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Bharat Katılım Kasım 2011
597 Takip Edilen413 Takipçiler
sufferचंद
sufferचंद@sufferchand·
@Paurushgupta_ @pandeypuraan जोड़ देते हैं। रोहित भविष्य में अपने पौरुष का परिचय दे ही देंगे।
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Paurush Gupta
Paurush Gupta@Paurushgupta_·
@sufferchand @pandeypuraan दादा पुरुषार्थ का भी जोड़ दीजिए, हमें भी सम्मिलित कर लीजिए।
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sufferचंद
sufferचंद@sufferchand·
प्रिय @pandeypuraan सोशल मीडिया पर आपके द्वारा बीते दिनों पोस्ट किए गए प्रश्नोत्तर संवाद से पता चला कि आप पुराना संस्थान आंशिक रूप से त्याग कर कुछ अन्य कार्य में व्यस्त होने जा रहे हैं। इस नए कार्य के लिए आपको शुभकामनाएँ। जिस भी क्षेत्र में कार्य करो, हमेशा अजित ही रहना। सभी से अनुराग भरी मित्रता रखना। लेकिन मर्यादा तोड़ने वाले सभी विरोधियों को धूल अवश्य चटा देना। मेरा अनुपम आशीष सदैव आपके साथ है। अंदर से तो हम सभी मनुष्य मैले होते हैं। लेकिन सामाजिक व्यवहार में हमेशा चंदन की ही सुगंध का प्रसार उसी गर्मजोशी से करते रहना, जिस गर्मजोशी से अब तक करते आये हो। कोई किसी के प्रारब्ध को उससे छीन नहीं सकता। लेकिन कुछ मुद्दों पर जब किसी से टकराव हो जाता है, तो अपनी भूमिका ध्रुव की तरह अड़िग रहनी चाहिये, इसका ध्यान रखना। भारत की परंपराओं के दिव्य अंश का बखान अपने कार्य में आप हमेशा करते हो। इसलिए सनातनी आर्यों से लेकर कपिल मुनि तक और गार्गी से लेकर संघमित्रा तक सभी महानुभावों की कही बातें और उनके अनुभवों को निरंतर याद रखना। हम सभी के भीतर एक शैशव खिलता है, उसे संभाल कर रखने का जतन करना। वैष्णव परंपरा और नीतिशास्त्र में भी अनेक प्रिय बातों के पीयूष का अर्णव समाया हुआ है, उन्हें अपने मस्तिष्क में अंकित कर लेना। उन बातों से मिली सीख पर अमल करने से आपके आलोकपूर्ण संकल्प सिद्धि तक पहुँच सकेंगे। अनेकों युगों से इस धरती पर कौशलेश श्रीराम और केशवराय गोपाल की कई उक्तियाँ समय समय पर यथार्थ में आती रही हैं, इसे कभी मत भूलना। ध्यान रहे सांदीपनि ऋषि ने कहा था कि किसी भी गलत व्यक्ति की धारणाओं से प्रभावित होकर उसके गलत कार्य में यदि कोई व्यक्ति अर्पित हो जाता है, तो अंततः उस व्यक्ति के प्रशांत जीवन से हर्ष तो निकल ही जाता है और फिर आगे चलकर जीवन भी उतना प्रशांत नही रहता। आपका उज्ज्वल भविष्य सदैव पल्लवित होता रहे।
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sufferचंद
sufferचंद@sufferchand·
@pandeypuraan हाँ, हाँ! जो लोग इतना अच्छा और सम्मानजनक फेयरवेल डिझर्व करते हैं उन्हें वो हर हाल में बिना किसी डर या बहाने के दिया ही जाना चाहिए। ये तो मेरी ओर से बस एक शुभकामना संदेश है।
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Rohit pandey
Rohit pandey@pandeypuraan·
Thank you भईया 🙏😊 इतना सुंदर farewell message ❤️😊 भावुक कर दिया आपने। सबको समेट लिया। याद रहेगा सब कुछ 😊🫂🫂🫂
sufferचंद@sufferchand

प्रिय @pandeypuraan सोशल मीडिया पर आपके द्वारा बीते दिनों पोस्ट किए गए प्रश्नोत्तर संवाद से पता चला कि आप पुराना संस्थान आंशिक रूप से त्याग कर कुछ अन्य कार्य में व्यस्त होने जा रहे हैं। इस नए कार्य के लिए आपको शुभकामनाएँ। जिस भी क्षेत्र में कार्य करो, हमेशा अजित ही रहना। सभी से अनुराग भरी मित्रता रखना। लेकिन मर्यादा तोड़ने वाले सभी विरोधियों को धूल अवश्य चटा देना। मेरा अनुपम आशीष सदैव आपके साथ है। अंदर से तो हम सभी मनुष्य मैले होते हैं। लेकिन सामाजिक व्यवहार में हमेशा चंदन की ही सुगंध का प्रसार उसी गर्मजोशी से करते रहना, जिस गर्मजोशी से अब तक करते आये हो। कोई किसी के प्रारब्ध को उससे छीन नहीं सकता। लेकिन कुछ मुद्दों पर जब किसी से टकराव हो जाता है, तो अपनी भूमिका ध्रुव की तरह अड़िग रहनी चाहिये, इसका ध्यान रखना। भारत की परंपराओं के दिव्य अंश का बखान अपने कार्य में आप हमेशा करते हो। इसलिए सनातनी आर्यों से लेकर कपिल मुनि तक और गार्गी से लेकर संघमित्रा तक सभी महानुभावों की कही बातें और उनके अनुभवों को निरंतर याद रखना। हम सभी के भीतर एक शैशव खिलता है, उसे संभाल कर रखने का जतन करना। वैष्णव परंपरा और नीतिशास्त्र में भी अनेक प्रिय बातों के पीयूष का अर्णव समाया हुआ है, उन्हें अपने मस्तिष्क में अंकित कर लेना। उन बातों से मिली सीख पर अमल करने से आपके आलोकपूर्ण संकल्प सिद्धि तक पहुँच सकेंगे। अनेकों युगों से इस धरती पर कौशलेश श्रीराम और केशवराय गोपाल की कई उक्तियाँ समय समय पर यथार्थ में आती रही हैं, इसे कभी मत भूलना। ध्यान रहे सांदीपनि ऋषि ने कहा था कि किसी भी गलत व्यक्ति की धारणाओं से प्रभावित होकर उसके गलत कार्य में यदि कोई व्यक्ति अर्पित हो जाता है, तो अंततः उस व्यक्ति के प्रशांत जीवन से हर्ष तो निकल ही जाता है और फिर आगे चलकर जीवन भी उतना प्रशांत नही रहता। आपका उज्ज्वल भविष्य सदैव पल्लवित होता रहे।

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LikhaPadhi
LikhaPadhi@likhapadhi_com·
China has built a solar plant that makes electricity ALL NIGHT. No batteries, no gas, just salt. Where is it located? Dunhuang lies in the Gobi Desert of northwest China. A small town of 142,000 people, 3,246 hours of sunshine a year, and a great location to go a little crazy with solar power. A complete story in our thread... [Image Source - Third Party]
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OpIndia.tv
OpIndia.tv@OpIndia_tv·
सरकार विरोध के बहाने देशद्रोही क्यूँ बन जाते हैं JNU के वामपंथी? अफजल से लेकर हिडमा तक को क्यूँ बनाते हैं Hero? क्या JNU बन चुकी है Jihadi Naxal University? पूरी पड़ताल, जल्द ही OpIndia की डॉक्यूमेंट्री
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Kaushal S Inamdar| कौशल इनामदार
#युरोप_अदैनंदिनी काल न्युरम्बर्गमध्ये फिरत असताना हा फोटो काढला आणि फार वर्षापूर्वी मला स्वतःबद्दलच कळलेल्या एका गोष्टीचा पुनःप्रत्यय आला. त्या वेळी केलेली ही नोंद. विश्वाचे आता दोन भाग झाले आहेत. जिथे मोबाईल फोनला रेंज असते, आणि जिथे रेंज नसते! काही वर्षांपूर्वी नववर्ष उंबऱ्यावर असताना मी मोबाईलला रेंज नसलेल्या कोकणातल्या एका छोट्या गावात होतो. रात्री बारा वाजता चंद्राला ग्रहण लागलं ते पाहत बसलो. चंद्रापर्यंत पोचण्याकरिता गुलाबी कापसाच्या पायऱ्या असाव्या अशी ढगांची रचना तयार झाली होती. प्रकृतीला हे कसं जमतं असा विचार करण्यात वेळ गेला. जे दृश्य समोर निसर्गाने दाखवलं आहे ते फक्त पाहात राहणे हेच आपलं काम आहे असं वाटावं असं ते वातावरण होतं. शाळेत शिकलेली W. H. Davies यांची कविता आठवली - What is this life, if full of care We have no time to stand and stare? वेळ इतक्या लवकर गेला की नव्या वर्षाचे संकल्प करण्याचंही राहून गेलं. इतक्या रम्य वातावरणात संकल्प करण्यासारखे रुक्ष विषय सुचलेच नसते म्हणा! मनात विचार आला की इतक्या भारावून टाकणाऱ्या वातावरणात काहीतरी नवं सुचायला हवं! एखादं नवं गीत किंवा नवी सुरावट... मनात अस्पष्ट विचार गर्दी करत होते, पण यातल्या एकाही बीजाचा संपूर्ण आविष्कार होत नव्हता. पण त्याचीही खंत नव्हती. आभाळासारखं आपलं मनही भरलेलं आहे याचाच दिलासा वाटत होता. मग मी विचार करू लागलो की या आधी इतक्या रम्य, भारावून टाकणाऱ्या वातावरणात मला काय सुचलं आहे. एका धक्कादायक निष्कर्षापर्यंत येऊन पोहोचलो. अशा काव्यमय, निसर्गरम्य वातावरणात मला अगदी एखादीच सुरावट सुचली असेल! बहुतेक ज्या सुरावटी सुचल्या त्या मुंबईच्या कोलाहलात सुचल्या होत्या. ट्रॅफिक जॅममध्ये, बस, ट्रेनच्या प्रवासात, गर्दीच्या ठिकाणी सुचलेल्या अनेक चाली मला आठवल्या; पण इतक्या सुंदर वातावरणात काही सुचलंय असं चटकन्‌ आठवेना. मग अशा रम्य ठिकाणी, रम्य वेळी नेमकं होतं काय? माझ्या ध्यान्यात आलं की निसर्ग शरीराप्रमाणे मनाचीही अशुद्धता दूर करतो. त्याचं सान्निध्य आपल्याला पुन्हा नवीन करतं. त्या वातवरणामधल्या शांततेला माझ्या संगीताची गरज नाहीये, त्या शांततेची माझ्या संगीताला गरज आहे! शहराच्या कोलाहलात मात्र संगीत सुचत जातं कारण तिथे त्याची गरज आहे. बहुतेक वेळा कोलाहल, संगीतासारखाच, आपल्याच डोक्यात असतो.
Kaushal S Inamdar| कौशल इनामदार tweet media
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sufferचंद
sufferचंद@sufferchand·
@ksinamdar न्यूरेम्बर्ग येथे नेटवर्क शोधण्याचा किंवा सुरावट जुळवण्याचा प्रयत्न केल्यास त्यास न्यूरेम्बर्ग ट्रायल म्हणावे.
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Pallav Singh
Pallav Singh@pallavserene·
अथक प्रयासों के बाद मिली सफलता। माता सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहे @RitikaChandola जी।🙏
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sufferचंद
sufferचंद@sufferchand·
Dear Irfan Habib, Shivjayanti should be celebrated everywhere in Bharat, not just Agra fort: Why your Marxist self fails to see the relevance opindia.com/2023/02/dear-i…
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Keh Ke Peheno
Keh Ke Peheno@coolfunnytshirt·
What a moment, Rohan Bopanna! Clinching the Australian open title at 43!
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