
sufferचंद
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प्रिय @pandeypuraan सोशल मीडिया पर आपके द्वारा बीते दिनों पोस्ट किए गए प्रश्नोत्तर संवाद से पता चला कि आप पुराना संस्थान आंशिक रूप से त्याग कर कुछ अन्य कार्य में व्यस्त होने जा रहे हैं। इस नए कार्य के लिए आपको शुभकामनाएँ। जिस भी क्षेत्र में कार्य करो, हमेशा अजित ही रहना। सभी से अनुराग भरी मित्रता रखना। लेकिन मर्यादा तोड़ने वाले सभी विरोधियों को धूल अवश्य चटा देना। मेरा अनुपम आशीष सदैव आपके साथ है। अंदर से तो हम सभी मनुष्य मैले होते हैं। लेकिन सामाजिक व्यवहार में हमेशा चंदन की ही सुगंध का प्रसार उसी गर्मजोशी से करते रहना, जिस गर्मजोशी से अब तक करते आये हो। कोई किसी के प्रारब्ध को उससे छीन नहीं सकता। लेकिन कुछ मुद्दों पर जब किसी से टकराव हो जाता है, तो अपनी भूमिका ध्रुव की तरह अड़िग रहनी चाहिये, इसका ध्यान रखना। भारत की परंपराओं के दिव्य अंश का बखान अपने कार्य में आप हमेशा करते हो। इसलिए सनातनी आर्यों से लेकर कपिल मुनि तक और गार्गी से लेकर संघमित्रा तक सभी महानुभावों की कही बातें और उनके अनुभवों को निरंतर याद रखना। हम सभी के भीतर एक शैशव खिलता है, उसे संभाल कर रखने का जतन करना। वैष्णव परंपरा और नीतिशास्त्र में भी अनेक प्रिय बातों के पीयूष का अर्णव समाया हुआ है, उन्हें अपने मस्तिष्क में अंकित कर लेना। उन बातों से मिली सीख पर अमल करने से आपके आलोकपूर्ण संकल्प सिद्धि तक पहुँच सकेंगे। अनेकों युगों से इस धरती पर कौशलेश श्रीराम और केशवराय गोपाल की कई उक्तियाँ समय समय पर यथार्थ में आती रही हैं, इसे कभी मत भूलना। ध्यान रहे सांदीपनि ऋषि ने कहा था कि किसी भी गलत व्यक्ति की धारणाओं से प्रभावित होकर उसके गलत कार्य में यदि कोई व्यक्ति अर्पित हो जाता है, तो अंततः उस व्यक्ति के प्रशांत जीवन से हर्ष तो निकल ही जाता है और फिर आगे चलकर जीवन भी उतना प्रशांत नही रहता। आपका उज्ज्वल भविष्य सदैव पल्लवित होता रहे।












