
किस मन को ये स्वीकार होगा
किसी का ऐसे चले जाना
ऐसा कब किसने सोचा होगा
कितनी विषम परिस्थितियां होती हैं
किस परिस्थति में क्या होगा
भरोसे की डोर पर अटकी होती हैं
जाने कब छूट जाये साँस
इसका पता कब किसको होगा
किसी का इस तरह से चले जाना
ये कब किसको स्वीकार होगा।
#planecrashahmedabad
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