देव आनंद

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देव आनंद

@devaanand_

Katılım Ağustos 2017
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Raj Thackeray
Raj Thackeray@RajThackeray·
एका जपानी तरुणीचा एक व्हिडीओ समोर आला. ती सध्या महाराष्ट्रात वास्तव्याला आहे आणि ती तिच्या परीने मराठी भाषा शिकायचा प्रयत्न करत आहे. ती एक नवीन मराठी शब्द रोज शिकते आणि त्याची एक चित्रफीत तिने टाकली. ती चित्रफीत पाहिल्यावर एक विचार डोक्यात आला की हे सगळे काही हजार किलोमीटरवरून येणारे परदेशी पाहुणे, पण इथे आल्यावर या प्रांताची भाषा 'मराठी' आहे हे सहज मान्य करतात. ते जर इथे खूप काळ राहणार असतील तर ती भाषा शिकण्याचा प्रयत्न करतात,नाहीतर किमान भाषेचा अनादर कधीच करत नाहीत. उलट आपण त्यांच्यासमोर आपल्या भाषेत बोललो तर त्यांना आनंद होतो. त्यांना जमलं तर आपल्या भाषेतील नाटकं बघायची असतात, इथली खाद्यसंस्कृती समजून घ्यायची असते, इथला इतिहास समजून घ्यायचा असतो. आणि हे सगळं करताना त्यांना मराठीबद्दल जितकं अपार कुतूहल असतं तितका अपार आदर पण असतो. ते इथून इतर राज्यात गेले तर तिकडे जाऊन पण त्याच उत्सुक्याने सगळं बघत असतात, शिकत असतात. मध्यंतरी नवी मुंबईत कोल्डप्लेचा कार्यक्रम झाला तेंव्हा या शहराची, राज्याची भाषा मराठी आहे हे कळल्यावर, ख्रिस मार्टिनने अगदी सहज मराठीत एक दोन वाक्य बोलत प्रेक्षकांना अभिवादन केलं. या शहरांत जेंव्हा जेंव्हा इतर देशांचे राष्ट्राध्यक्ष आलेत तेंव्हा त्यांच्यातील बहुसंख्य राष्ट्राध्यक्षांनी मराठीत अभिवादन केलं आहे. मुंबईत असलेली दूतावासांची कार्यालयं मराठी ही या राज्याची भाषा आहे त्यामुळे महत्वाच्या सणांना मराठीत शुभेच्छा देतात. तिथे मराठी बोलणारा कर्मचारी वर्ग राहील हे बघतात. हे परक्यांना कळतं पण काही स्वकीयांना कळत नाही. त्यांना मुंबईची भाषा मराठी नाही तर इथे अनेक भाषा आहेत हे म्हणावंसं वाटतं. मध्यंतरी सरसंघचालक मुंबईत एका कार्यक्रमाला येऊन गेले. त्यावेळी आपण मुंबईत आहोत, आपण मराठी पण आहोत त्यामुळे थोडाफार संवाद मराठीत पण साधावा असं त्यांना का वाटलं नाही ? माहित नाही. मला संघाच्याच काही लोकांनी सांगितलं की या आधीचे सरसंघचालक सुदर्शनजी यांचा जन्म आणि बालपण रायपूरमध्ये झालं होतं, त्यांना हिंदी यायचं पण ते जे कर्नाटकातून आले होते त्या राज्याच्या कन्नड भाषेचा त्यांना कधी विसर पडला नाही. उलट कर्नाटकात गेले तर आवर्जून कन्नडमध्ये संवाद साधायचे. असो.. माझं मराठी भाषिकांना आवाहन आहे की परदेशी व्यक्ती तुमच्या भाषेचा सन्मान करतील आणि करतात. पण इथल्या मूठभर स्वकीयांना या भाषेत बोलतं करण्यासाठी आपली भाषा ज्ञानाची आणि अर्थार्जनाची बनवूया. जेणेकरून ती शिकल्या शिवाय पर्यायच उरणार नाही. त्या जपानी मुलीला मनःपूर्वक धन्यवाद 🙏 राज ठाकरे ।
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Gaurav Pal
Gaurav Pal@GauravPalRaj·
मिलिए EWS के खिलाड़ी संदीप रघुवंशी से संदीप EWS कोटे 2023 बैच में IAS बने। आपको लग रहा होगा संदीप गरीब सुदामा हैं इसलिए EWS सर्टिफिकेट बना हैं लेकिन कहानी में थोड़ा ट्विस्ट हैं। संदीप ने IIT,IIM से पढ़ाई की एक निजी कोचिंग रघुकुल CS चला कर 5000 हजार का कोर्स बेचा। अनअकैडमी में लाखों के पैकेज पर पढ़ाया। संदीप के पिता एक सरकारी शिक्षक है और एक डेयरी मालिक भी हैं संदीप की पत्नि 55 लाख सालाना कमाती हैं। इतना सब कुछ होने बाद संदीप रघुवंशी EWS कोटे से IAS बने और मेरा सुदामा दोस्त सोचता है उसकी नौकरी गौरव पाल को मिल रहे आरक्षण की वजह से नहीं लग रही।
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Sanjay Raut
Sanjay Raut@rautsanjay61·
प्रेसिडेंट ट्रम्प काय सांगतोय? श्रीमान प्रधानमंत्री व त्यांच्या भक्त मंडळीनो ऐका : EVM वर भरवसा ठेवता येत नाही त्यात घोटाळा आहे; मत पत्रिकेवर चे मतदान विश्वासार्ह आहे! मिस्टर पंतप्रधान तुमच्या महा गुरुचे तरी ऐका! हो,आणि गोदी मीडिया यावर नेहमीप्रमाणे चूप
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बाबा लपेटू नाथ
सुप्रभात साथियों🙏🙏 इंग्लैंड के एक होटल में अंधभक्तों को बीफ दिख गया, अंधभक्तों ने होटल में तोड़ फोड़ शुरू कर दी, फिर क्या था, होटल वालों बहुत बुरे तरीके से धोया, पुलिस के हवाले किया सो अलग, ये अंधभक्ति अपने देश तक ही सीमित रखो अंधभक्तों🤣🤣👇👇
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Dr. Tarun Kothari
Dr. Tarun Kothari@DrTaKoMD·
अब सारा गेम खुल चुका है l मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल हलफनामे में कहा- अगर कोविड के टीके से किसी को कुछ हुआ है तो उसके लिए सरकार नहीं वही व्यक्ति ज़िम्मेदार है क्योंकि कोविड की वैक्सीन कोई अनिवार्य नहीं बल्कि वॉलंट्री थी। लोगों को इसके साइड इफेक्ट के बारे में पता था
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Dinesh Purohit
Dinesh Purohit@Imdineshpurohit·
यूट्यूबर — कांग्रेस सरकार की क्या अचीवमेंट है? रघुराम राजन — PayTM, PhonePe जैसे UPI ऐप्स का क्रेडिट UPA को जाता है। 🔥 मौजूदा सरकार क्रेडिट नहीं देगी लेकिन सच ये है कि डॉ. साहब ने शानदार काम किया था। अब BJP भक्त UPI के लिए मोदी को क्रेडिट दे रहे है। 😭
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Ravi Parmar
Ravi Parmar@raviparmarIN·
"योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं" – जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ( छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट) "लड़की का स्तन पकड़ना, नाडा तोड़ना, बाहों में भींचना, बलात्कार की कोशिश नहीं माना जा सकता" – जस्टिस राम मनोहर मिश्रा (इलाहाबाद हाईकोर्ट) न्यायपालिका पर सवाल मत उठाओ अन्यथा कंटेंप्ट लग जाएगा, कॉलेजियम के खिलाफ़ भी मत बोलो, योग्यता के बारे में तो प्रश्न कर ही नहीं सकते, अगर इन जजों की बहन बेटियों के साथ भी ऐसा होता तो क्या फिर भी ऐसा ही बोलते, इनके फैसलों को देखकर लगता है इंसानियत भी मर चुकी है, अगर अदिति मिश्रा ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद कहती है तो वह ग़लत नहीं है, किसी ने कहा था मुंह से जन्मी औलादों में न्यायिक चरित्र नहीं होता है, इन जजों ने साबित कर दिया 🔥🔥🔥
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खुचरेंप
खुचरेंप@khuchrep·
फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुल मैक्रो कह रहे हैं कि, 10 साल पहले मुंबई के स्ट्रीट वेंडर अपना बैंक अकाउंट ओपन नहीं कर सकते थे। लेकिन आज वही वेंडर ऑनलाइन पेमेंट लेता है। आपकी जानकारी के लिए बता दूं, मैक्रो 2026 की यात्रा से पहले कभी भी मुंबई नहीं आए हैं। उनकी आधिकारिक यात्राएं कुछ इस प्रकार हैं- 2018- नई दिल्ली, आगरा, मिर्ज़ापुर और वाराणसी। 2023- नई दिल्ली (G20 शिखर सम्मेलन के लिए)। 2024-जयपुर और नई दिल्ली (गणतंत्र दिवस समारोह के लिए)।  तो फिर इनको किसने बताया कि 10 साल पहले मुंबई के स्ट्रीट वेंडर के पास खुद का अकाउंट नहीं होता था। ये एक स्क्रिप्ट देकर सरकार को अपनी वाहवाही करवाने से बचना चाहिए। ये मैक्रो के विचार नहीं है, ये सरकार की दी हुई पर्ची है।
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The Equality
The Equality@TheEqualityLab·
मुकेश मोहन ने ग्रॉक AI को 5 अलग-अलग सरनेम वाले लोगों की लिस्ट दी। फिर ग्रॉक को कहा कि इन पाँचों के लिए प्रोफेशन चुनो। तो ग्रॉक ने मुकेश #जाटव को तो मजदूरी का काम दिया जबकि रिया #शर्मा - डेंटिस्ट अंकित K. #श्रीनिवासन - इंजीनियर दीपेंद्र #सिंह - आर्मी ऑफिसर मोहित #अग्रवाल - CA
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Akhil Chitre अखिल चित्रे
महानगरपालिकेच्या एकतर्फी कारवाईबद्दल शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे पक्षाच्या पदाधिकाऱ्यांनी @mybmc @mybmcWardHW सहाय्यक आयुक्तांना पुरावे सादर करून जाब विचारला. अनधिकृत बॅनरबाजी करणाऱ्या मंत्र्यांवर कारवाई कधी? कायदे-नियम फक्त आमच्यासाठीच आहेत का? उपमुख्यमंत्री, सांस्कृतिक मंत्री नियमांच्या पलीकडे आहेत का… की कायदा VIP पाहून लागू होतो?
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Mukesh Mohan
Mukesh Mohan@MukeshMohannn·
सोचो अगर गलगोटिया के CSE डिपार्टमेंट में सभी फैकल्टी सवर्णों के बजाए SC/ST/OBC होते? अब तक चिलाचिलाकर मेरिटाधीशों का गला सूख चुका होता।
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Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी @HardeepSPuri पूरी बेशर्मी के साथ अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं, चूंकि अब मोदी जी ने तारीफ कर दी है तो हौसला और बढ़ा होगा। लेकिन उनके एक कॉलेज के दिनों के दोस्त और शिक्षाविद डॉ रमाशंकर सिंह ने उनके बारे में एक चिट्ठा लिख भेजा है। आप सबको वो पढ़ना चाहिए। हरदीप को भी "दिल्ली विश्वविद्यालय में हरदीप पुरी वैसे तो हमारे समकालीन थे। उम्र में मुझसे दस माह छोटे रहे और हिंदू कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष भी थे । भारतीय विदेश सेवा में जल्दी ही सिलेक्ट हो कर करीब ४० साल की विदेशों में नौकरी की । संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि भी रहे और कभी बुरे नौकरशाह नहीं माने गये ।लम्बे समय अमेरिका में रहे । आप सब जानते होंगें कि विदेश सेवा का व्यक्ति दिन रात दावतों में ही मेलमिलाप से अपने सम्बंध बनाता है और दिल्ली में बैठी सरकार को खबर करता रहता है । इस दावतबाजी में सरकारें बड़ा पैसा खर्च करतीं हैं । सुरा सुंदरी कंचन कामिनी सब उपयोग में आती हैं कि जानकारी भर मिल जाये । मुझे मालूम है कि यदि सेवानिवृत्ति के समय कांग्रेस सरकार होती तो आप वहॉं भी कुछ न कुछ  पद पा जाते और दूसरी पार्टी की ओर झांकते तक नहीं । लेकिन मंत्री  बनने के बाद ऐसा मानसिक परिवर्तन हुआ कि एक तटस्थ भाव के पंथनिरपेक्ष शिक्षित व्यक्ति के कदम बहके तो ऐसे कि ऐपस्टीन ( पुरी उसे ऐपस्टाइन कहते हैं , शायद सही भी हो ) तक पहुंच गये । आधी सदी का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव इतना ही काम आया कि मामूली से कूटनीतिक राजनीतिक सम्पर्क बनाने के लिये एक सजायाफ्ता यौन अपराधी के दर पर पहुँचा दिया । मैं अभी यह नहीं मानता कि पुरी ने एपस्टीन के नारकीय वीभत्स हरम में कोई यौनाचार किया होगा पर उस राक्षस से सम्पर्क करने की जरूरत ही क्या थी और अगर पड़ गई तो लानत है उस पचास साल के अनुभव पर जिसमें भारत के सैंकड़ों करोड़ रु तो बहे पर काम नहीं आ सके । किसी का राजनीतिक रूप से बच्चा होना अवयस्क होना अपरिपक्व होना तो माफ किया जा सकता है पर इतने अनुभव के बाद अनैतिक होना नहीं । अब जब भी सेवानिवृत्त होंगें दो कौड़ी की इज़्ज़त कहीं नहीं पायेंगे- गुरु साहेब के दरबार में तो बिल्कुल ही नहीं । निजी मित्रतायें राजनीतिक मतभेदों से बेअसर रहती हैं , रहनी चाहियें पर मानवीय मूल्यों की बलिवेदी पर नहीं । आप समझें या और खुलकर कहूं कि मैं अब आपको पहचानता नहीं !"
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Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
आज सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक पर सुनवाई चल रही थी। गजब है कि सरकार ने उनकी गिरफ्तारी को सुनिश्चित करने के लिए उनके मुंह से वह भी कहलवा दिया जो सोनम ने कभी कहा ही नहीं। 3 मिनट के वीडियो को नजीर बनाकर उन्हें जेल में डाल दिया गया लेकिन अदालत में जो अनुवाद पेश किया गया वह 5 से 7 मिनट का है। सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करी की, “कम से कम, उन्होंने जो कुछ भी कहा, उसका सही अनुवाद तो होना ही चाहिए। आपका अनुवाद 7 से 8 मिनट तक चलता है, जबकि भाषण केवल 3 मिनट का है। हम AI के युग में हैं; अनुवाद में सटीकता कम से कम 98 प्रतिशत होनी चाहिए। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वांगचुक ने अपनी हड़ताल जारी रखी और नेपाल का हवाला देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा। यह बात कहाँ से आ रही है? यह एक बहुत ही अनोखा हिरासत आदेश है - आप एक ऐसी चीज़ पर भरोसा कर रहे हैं जो संभव ही नहीं है। सोनम की गिरफ्तारी इस सरकार की बरजोरी का सबसे बड़ा उदाहरण है जिसकी बात तापसी पन्नू भी कह रही थी। जो जिंदाबाद नहीं करेगा वो निशाने पर है।
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गजाभाऊ
गजाभाऊ@gajabhauX·
यांचा प्रॉब्लेम काय आहे तो लक्षात घ्या सावरकर पेन्शन वर होता आणि बाजीराव पेन्शनवर होता वाजपेयी इंग्रजांचा खबरी होता दुसरा बाजीरावाला जवळजवळ इंग्रजकडून 50 लाख वर्षाला पेन्शन होती निपुत्रिक असल्यामुळे , बाजीरावाने तीन पोरं दत्तक घेतली होती त्यातल्या पहिल्या पोराने इंग्रजकडे तीच पेन्शन मागितली आणि त्यांनी ती नाकारली अर्ध्यापेक्षा जास्त पेशव्यांनी इंग्रजांबरोबर संधान करून आपलीच लोक बुडवली पहिल्या अँग्लो मराठा मध्ये तर राघोजीने इंग्रजांना घेऊन पेशव्यांवर आक्रमण केलं होतं दुसऱ्या अँग्लो मराठा वॉर मध्ये बाजीरावाने पुणे परत मिळवण्यासाठी इंग्रज आणले होते कारण होळकरांच्या भीतीने आपल्या बायका सोडून हा पळून गेला होता त्याच्यावर ना त्याला पळपुटा बाजीराव हे नाव मिळालं होतं आता टिपू हा इंग्रजांच्या विरोधात लढताना आपल्या हातात तलवार ठेवून देणार ती तलवार जवळजवळ 100 मिलियन डॉलर पेक्षा जे हजार करोड रुपये च्या वर ती विकली गेली त्याला इंग्रज पण मानतात. मुस्लिम होता पण बहादुरपणाने यांच्या विरोधात लढत होता मग आता यांच्या पोटदुखीला थारा नसणार ना !! यांच्याकडे एक पण थोर पुरुष नाही जो इंग्रजांनी विरोधात लढला प्रत्येक जणांनी इंग्रजाचे बूट चाटले पुण्याच्या सर परशुराम SP कॉलेजमध्ये असणारे प्राध्यापक विक्रम संपद यांनी भरपूर वर्ष रिसर्च करून पुस्तक लिहिले वाचून घ्या
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Adv. Vijay Singh
Adv. Vijay Singh@VijaySingh_law·
वर्दी है भाई, कोई स्टेज की सजावट नहीं। 🚨 Isha Foundation के मंच पर मौजूदगी को “एकता” कहना आसान है। भारतीय सशस्त्र बलों की असली ताकत उनकी तटस्थता है। संविधान से शपथ है, किसी बाबा से नहीं। मोदी सरकार ने संस्थाओं को मजबूत करने के बजाय तमाशा बना दिया है। x.com/p_nikumar/stat…
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Samar Raj
Samar Raj@SamarRaj_·
अंजलि को हर घड़ी हजारों धमकियां रेप थ्रेट मिल रहे हैं। पुलिस थाने में गुंडों की भीड़ कैसे बदतमीजी की,देख ही रहे हैं। मीडिया और राइट विंग ने खुलेआम रुचि तिवारी का पक्ष ले लिया,जबकि वीडियो में दिख रहा वो झूठी है, गुंडी है। काश इस देश में विपक्ष ज़िंदा होता!
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ashokdanoda
ashokdanoda@ashokdanoda·
2022 में भारत सरकार ने घोषण किया कि भारत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रित करके बेचेगा जिससे देश के किसानों को मक्का के दाम मिलेंगे क्योंकि 40% मक्का से एथेनॉल बनता है । विदेशों से तेल का आयात कम होंगा और देश की आम जनता को सस्ता तेल मिलेंगा । एथेनॉल बनने लगा तो एक साल अच्छे दाम भी मिलें ! लेकिन फिर सरकार ने विदेशों से 2024-25 में 970000 टन का मक्का का आयात किया तो लोकल मंडी में मक्का के दाम 50% नीचे चलें गए । कच्चा तेल का आयात जो 85% होता था वह भी 90% हो गए पेट्रोल के दाम में कोई कमी नहीं आए । 600मिलियन लीटर एथेनॉल का भी आयात कर लिया अब MSP तो दुर लागत से भी 500-600 रुपये कम बिक रहा है ।
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Gurpreet Garry Walia
Gurpreet Garry Walia@garrywalia_·
कांग्रेस खेल गई अब भागना मत 😂
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