@jeetusp ये लीजिए रोहित जी का वीडियो ,
जो उन्होंने घटना वाले दिन बनाया था।
किसी ग्रुप में मात्र 1 लाइक कर देने मात्र पर बच्चे को इतना मारा है।
हालांकि @Etahpolice ने हेल्प की है।
यूपी – नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल का UKG का छात्र करीब 7 घंटे तक बस में बंद रहा। बच्चा घर से स्कूल के लिए बस में बैठा और सो गया। स्कूल में बच्चे उतारकर बस करीब 25 KM दूर यार्ड में जाकर खड़ी हो गई। बच्चा मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी।
छुट्टी के बाद वो घर नहीं पहुंचा तो खोज शुरू हुई। पता चला कि वो स्कूल भी नहीं पहुंचा। ढूंढते–ढूंढते फैमिली वाले स्कूल से 25 KM दूर यार्ड पर पहुंचे, जहां उन्हें वो बच्चा बस के अंदर बंद मिला। वो पसीने से लथपथ था। भूखा–प्यासा था। रो रहा था।
सोचिए, किस लेवल पर लापरवाही हुई है...
– स्कूल बस ड्राइवर/हेल्पर की, जिन्होंने बस चेक नहीं की
– स्कूल की, जिसने बच्चा एब्सेंट होने पर फैमिली को सूचित नहीं किया
@Nishantkaushik0
@AmazonHelp I ordered a Samsung A.C. from you, the order number is 402-5572786-8494719 It was delivered to me 10 days ago.But it is not installed yet and it is showing installed in your order, how can this happen??
वो स्त्री है, कुछ भी कर सकती है
जिस भतीजे मंशाराम को पाल पोसकर बड़ा किया, 2016 में होली के दिन उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। लेकिन 65 साल बुआ चंद्रावती की जुबां भले लड़खड़ाती रही, शरीर ढलान पर था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। माफिया के सामने डंटकर खड़ी रहीं। 10 साल अकेले न्याय की लड़ाई लड़ी और हत्यारों को सजा दिलवाकर ही दम लिया।
पूरा मामला यूपी के सुल्तानपुर का है। पंचायत चुनाव की रंजिश में पूर्व ब्लॉक प्रमुख और माफिया अजय सिपाही ने अपने दो गुर्गों के साथ मिलकर 2016 में होली के दिन 23 मार्च को मंशाराम यादव की हत्या कर दी। बुआ ने तीनों के खिलाफ तहरीर दी। मंगलवार को एडीजे प्रथम ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
बता दें कि अजय सिपाही पहले यूपी पुलिस में सिपाही था। लेकिन सात साल बाद नौकरी छोड़ जय ने जरायम की दुनिया में कदम रखकर माफिया बनने का सफर शुरू किया। पूर्वांचल के सफेदपोश बाहुबलियों की पनाह पाकर अजय ने कई जिलों में अपना रसूख कायम किया। पुलिस ने उसके खिलाफ पिछले 21 वर्षों में सात बार गैंगस्टर, चार बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई करते हुए कुल 34 प्राथमिकी दर्ज कीं, लेकिन अजय का काकस नहीं तोड़ पाई।
एक पिता-पुत्र कार में देश की हालत पर चर्चा कर रहे थे
पिता ने 2014 के बाद हालात बिगड़ने की बात कही
बेटा असहमत हुआ — बहस बढ़ी — गुस्सा इतना कि उसने अपने ही पिता को चलती कार से बाहर धक्का दे दिया।
अंधभक्ति ने नए भारत में कई परिवारों को तोड़ दिया है।
🚨 ट्रेन में परोसे जा रहे खाने को लेकर बड़ा सवाल 🚨
वंदे भारत (इलाहाबाद → दिल्ली) में सफर कर रही एक महिला यात्री ने रेलवे कैटरिंग की ऐसी प्रैक्टिस पर सवाल उठाया, जिसे देखकर कई यात्री हैरान रह गए।
सील्ड प्लास्टिक पैकेट में रखा खाना सीधे माइक्रोवेव में गरम किया जा रहा था - जबकि पैकेट पर साफ लिखा था Store in a cool & dry place. कहीं भी यह नहीं लिखा था कि इसे माइक्रोवेव में रखा जा सकता है।
महिला: क्या आपने इसे माइक्रोवेव में गरम किया? पैकेट पर माइक्रोवेव-सेफ लिखा कहाँ है?
स्टाफ: हाँ मैम, गरम करने के लिए माइक्रोवेव किया है... वीडियो मत बनाइए।
महिला: वीडियो से दिक्कत क्यों? यही खाना आप सभी यात्रियों को सर्व कर रहे हैं। ये प्लास्टिक पैक है, इसे सीधे माइक्रोवेव करना सुरक्षित कैसे है?
स्टाफ: लिखा तो नहीं है मैम... लेकिन हम ऐसे ही करते हैं।
महिला ने बताया कि एक दिन पहले राजधनी एक्सप्रेस में भी उन्हें ऐसा ही खाना परोसा गया था। भूख लगी होने के कारण उन्होंने गरम कचौरी तुरंत खा ली, लेकिन बाद में सवाल उठा - अगर पैकेट सील्ड था, तो इसे गरम कैसे किया गया?
मुद्दा सिर्फ नियमों का नहीं, यात्रियों की सेहत का है। अगर नॉन-माइक्रोवेव-सेफ प्लास्टिक को सीधे गर्म किया जा रहा है, तो उससे निकलने वाले केमिकल्स का खतरा कौन उठाएगा?
सवाल सीधा है - क्या सुविधा और जल्दी के लिए सेफ्टी से समझौता किया जा रहा है? अब जवाब रेलवे और IRCTC को देना होगा।
Video in comment 👇
भारतीयों की नागरिक भावना सुधरने की कगार पर है, इसे किसी भी कीमत पर सुधारा नहीं जा सकता।
एक आदमी ट्रेन में अंडा बिरयानी बेच रहा था।
तभी ऊपर बैठे एक व्यक्ति ने अंडा बिरयानी का एक डिब्बा चुरा लिया।
बाद में उसने चुराई हुई बिरयानी को बड़े चाव से खाया।
ये 400 करोड़ में बना पुल है, जो 3 साल पहले बना था. अब ये टूटकर बिखर गया.
ये पुल नेशनल हाईवे का हिस्सा है, जिसे बनवाने का काम मोदी सरकार ने किया है. कुछ लोग इसे लेकर मोदी सरकार को भ्रष्ट कह रहे हैं.
मैं उनसे बस इतना पूछूंगा- क्या देशहित में आप थोड़ा भ्रष्टाचार सह नहीं सकते?
उत्तर प्रदेश के जिला बहराइच में सरकारी स्कूल के बच्चों को बंटने के लिए आई किताबें 4 रुपए किलो में कबाड़ी को बेच दी गईं। पुलिस ने कबाड़ी के यहां छापा मारकर 13 हजार किताबें बरामद की हैं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दफ्तर का फोर्थ क्लास कर्मचारी आलोक मिश्रा, कबाड़ी दिलशाद, शुभांकर गुप्त, अर्जुन गिरफ्तार हैं। BSA दफ्तर के कर्मचारी आशुतोष सिंह, दीपक कुमार, अतुल सिंह को बर्खास्त किया गया। ब्लॉक ऑफिसर डॉली मिश्रा और अकाउंट ऑफिसर वीरेश वर्मा पर कार्रवाई के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी गई।
ये किताबें कबाड़ी के थ्रू उत्तराखंड जानी थी। किताबों से भरा कंटेनर लखीमपुर खीरी जिले से वापस मंगवाई गई है। सोचिए, पूरा का पूरा महकमा सरकारी किताबें बेचने में इन्वॉल्व था। इधर, तमाम बच्चे किताबों से महरूम हैं।
OBC SC ने सवर्णों का विरोध किया तो उनकी हिम्मत नहीं है ये लोग विधायक सांसद बन जाएं- साक्षी महाराज का बयान
ओबीसी एससी के 90% इकट्ठा हो गए तो कोई MP MLA मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनेगा क्या ?
यूजीसी का विरोध करने वालों को साक्षी महाराज का करारा जवाब
#ugcbill#sashimaharaj
#साक्षी_महाराज
#viralvideoシfyp
#viralvideoシ
#obcscst#ugc#bhimarmy
"पुलिस कर्मी बोलो फौजी चोर होते हैं".."गाड़ी में भरकर थाने लाए,फोन छीना 70/80 थप्पड़ मारे कान का पर्दा फाड़ दिया"..!
कानपुर में खाकी की क्रूरता का ये उदाहरण देखिए..!
शादी समारोह से लौट रहे एयरफोर्स के जवान नितीश सचान को आधी रात दो पुलिसकर्मियों ने रोका और दबंगई भरे अंदाज में बात करने लगे..!
नीतीश द्वारा खुद को फौजी बताए जाने पर पुलिस कर्मी भड़क गए और थाने ले जाकर खूब पिटाई की....!
सुनिए पीड़ित की जुबानी..👇
लखनऊ के रामाधीन सिंह मार्केट के बाहर युवक के गले में फांसी पतंग के मांझे नस काटने से बचा, राहगीरी महिला और दूसरे शख्स ने संभाला, लोगों का मानना है इस धागे से पेड़ भी कट सकता है, सरकार को इस धागे पर बैन लगाना चाहिए!
शिवम अहिरवार आठ साल बाद पिता बने थे। लेकिन 12 दिन का मासूम उनके सामने ही तड़पकर मर गया। बच्चे के मुंह में ऑक्सीजन मॉस्क फंस गया। वह ऑक्सीजन नहीं ले सका और उसकी मौत हो गई। शिवम का आरोप है कि ICU में उसके मुंह से ऑक्सीजन मॉस्क निकल गया। लेकिन वहां मौजूद नर्स ने ध्यान नहीं दिया।
शिवम के अनुसार, जन्म के चार दिन बाद बच्चा घर आ गया था और दो दिन तक स्वस्थ रहा, लेकिन तीसरे दिन उसे हल्का बुखार आया। इसके बाद वे बच्चे को झांसी के वात्सल्य हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर प्रमोद गुप्ता ने बच्चे के गले में छाले होने की बात कहकर भर्ती कर लिया। इलाज के दौरान बच्चे की हालत में कुछ सुधार भी हुआ था।
पिता का आरोप है कि 21 तारीख को अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण बच्चे का ऑक्सीजन मास्क निकल गया, लेकिन स्टाफ ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि उस समय स्टाफ अन्य कामों में व्यस्त था और परिजनों को अंदर जाने से भी रोका जाता था। आरोप है कि ऑक्सीजन हटने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसके मुंह से खून आने लगा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
करनाल से दर्दनाक वीडियो सामने आई है
जिसमें एक बुजुर्ग डॉक्टर अपने घर में अकेले रह रहे थे उनके बेटा और उनकी बेटी दोनों ऑस्ट्रेलिया में सेटल है
डेढ़ साल से डॉक्टर साहब ने कपड़े तक नहीं बदले थे
घर में जो कुछ मिलता हुआ खा लेते या बाहर से कुछ मंगा लेते थे
बड़ी दयनीय और दर्दनाक हालत में थे
उनकी स्थिति देखकर उन्हें रिस्कयू करने वाले लोग भी हैरान रह गए
आश्चर्य यह की ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले उनके बेटे और बेटी ने कभी उनका हाल-चाल तक नहीं लिया
अब सरकार को ऐसे संतानों पर बेहद कड़ा कानून बनना चाहिए