Harish Kumar Suhalka

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@hksuhalka

Eye Beyond 21st century

India Katılım Ekim 2014
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
स्कूल वालों के दबाव में कानून के विपरीत फैसला लिया है राज्य सरकार
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
जो कार्यकर्ता सड़क पर है, कांग्रेस उसके साथ क्यों नहीं है? उदयपुर नगर निगम के बाहर आठ मई को जो हुआ, वह केवल एक स्थानीय प्रदर्शन या एक एफ़आईआर की ख़बर भर नहीं है; यह कांग्रेस संगठन की उस पुरानी बीमारी का नया एक्स-रे है, जिसमें कार्यकर्ता को संघर्ष के समय आगे कर दिया जाता है और संकट के समय अकेला छोड़ दिया जाता है। कांग्रेस ने नगर निगम की बदहाल सफाई, टूटी सड़कों, सीवरेज, बंद स्ट्रीट लाइटों, पर्यटन स्थलों की दुर्दशा, आयड़ नदी और 272 प्लॉट जैसे सवालों पर प्रदर्शन बुलाया। यानी मुद्दे जनता के थे, सड़क जनता की थी और जोखिम कार्यकर्ताओं का था। जिला कांग्रेस अध्यक्ष, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता नगर निगम पहुंचे। नारेबाज़ी हुई, विवाद हुआ, ज्ञापन लेने से इनकार और देर-सबेर की स्थिति बनी, कार्यकर्ता उत्तेजित हुए और अंततः देर रात कांग्रेस के ही लोगों पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा हो गया। बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि आयुक्त या पुलिस ने केस क्यों किया; इसकी तो जांच होगी, वीडियो देखे जाएंगे, भूमिका तय होगी।लेकिन असली प्रश्न यह है कि कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी क्यों नहीं दिखती? जो लोग विपक्ष की भूमिका निभाते हुए मैदान में उतरे, जिनके कंधों पर पार्टी अपनी “जनसंघर्ष” की राजनीति टिकाए रखना चाहती है, वे जब कानूनी शिकंजे में आए तो प्रदेश नेतृत्व की आवाज़ कहां गई? प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रभारी, राष्ट्रीयप्रभारी महासचिव, पूर्व सीएम आदि क्या इन पदों का काम केवल चुनावी मंचों पर मालाएं पहनना है? कांग्रेस की त्रासदी यही है कि वह कार्यकर्ता से बलिदान मांगती है; लेकिन उसके पीछे राजनीतिक ढाल बनकर खड़ी नहीं होती। कार्यकर्ता नारे लगाए, गिरफ्तारी झेले, मुकदमे झेले, सोशल मीडिया पर पार्टी की लड़ाई लड़े और जब वही कार्यकर्ता संकट में आए तो बड़े नेता प्रेसनोट तक जारी न करें; यह संगठन नहीं, भावनात्मक परित्याग है। भाजपा पर आरोप लगाना आसान है कि केस राजनीतिक इशारे पर हुआ। हो भी सकता है, नहीं भी। लेकिन कांग्रेस पहले अपने घर में झांके। क्या उसने अपने जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता दी? क्या किसी वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम जनता के मुद्दों पर प्रदर्शन करने वालों के साथ हैं? क्या किसी ने यह मांग की कि निष्पक्ष जांच हो, वीडियो सार्वजनिक हों और निर्दोष कार्यकर्ताओं को न फंसाया जाए? क्या जयपुर से किसी को उदयपुर भेजा? सड़क पर संघर्ष करने वाला कार्यकर्ता कोई डिस्पोज़ेबल आइटम नहीं है कि प्रदर्शन के दिन उपयोग कर लिया और एफ़आईआर के बाद भूल गए। उदयपुर की घटना का सबसे कड़वा संदेश यही है: कांग्रेस अगर अपने सिपाहियों की चिंता नहीं करेगी, तो कल कोई सिपाही उसके लिए मैदान में क्यों उतरेगा? मैंने उदयपुर में बहुत बार देखा है कि किसी भाजपा कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ भी कोई ज़्यादती हो तो गुलाबचंद कटारिया जैसे वयोवृद्ध नेता भी ऐसे ताल ठोंकते थे, जैसे वह कोई सोलह साल के लड़के हों। और क्या मुंह से भाषा बोलते थे। वह हलकी होती थी, लेकिन प्रशासन पर बहुत भारी पड़ती थी। कटारिया कई बार तो अपने लोगों को थाने से उठाकर ऐसे ही ले आया करते थे और कांग्रेस सरकार में कभी किसी की सांस नहीं निकलती थी। कटारिया ने इसी तरह से उदयपुर में भाजपा को बकरी से बाघ बना दिया और कांग्रेस के नेताओं ने उदयपुर की बघेरे जैसी कांग्रेस को भीगी बिल्ली बना दिया। यह कोई आज का मामला नहीं है। यह एक लंबी कहानी का एक आख़िरी सिरा है। पार्टी कार्यालयों की दीवारों पर “संघर्ष” लिख देने से संघर्ष नहीं होता। संघर्ष की पहली शर्त है, अपने लोगों के साथ खड़ा होना। और उदयपुर में कांग्रेस की चुप्पी ने यही साबित किया कि उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी विरोधी दल नहीं, अपने कार्यकर्ताओं के प्रति उसकी बेपरवाही है। आख़िर प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ऐसे मामलों को गंभीर क्यों नहीं मानते। प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, नेता प्रतिपक्ष भी कोई कमज़ोर नहीं हैं। वे बीच-बीच में बड़े मुद्दे उठाने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन उदयपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस तरह बेसहारा छोड़ने का संदेश अच्छा नहीं है। @kharge @priyankagandhi @JitendraSAlwar @RahulGandhi @PSKhachariyawas @Gulab_kataria
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@gauravkrdwivedi वर्तमान युद्ध में अमेरिका और इसराइल की असलियत दुनिया के सामने आ चुकी है
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Gaurav Dwivedi
Gaurav Dwivedi@gauravkrdwivedi·
"ईरान को नक्शे से मिटा देने का भ्रम, इतिहास रचने वाले एक राष्ट्र की इच्छाशक्ति के सामने की हताशा को दर्शाता है. धमकियां और आतंक केवल हमारी एकता को और मज़बूत करते हैं." ये आवाज मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बिछाए चक्रव्यूह में फंसे ईरान की है. वो ईरान, जो अमेरिका जैसी सुपरपावर से पिछले 22 दिन से लड़ रहा है. ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा है कि होर्मुज़ सभी के लिए खुला है, सिवाय उनके जो हमारी संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं. हम युद्ध के मैदान में ऐसी बेतुकी धमकियों का पूरी दृढ़ता से सामना करते हैं. प्रतिरोध की संस्कृति ईरान के इतिहास में है. उसकी जड़ों को वह भुला नहीं है. आज मिडिल ईस्ट में जो कुछ हो रहा है, वह केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह 2500 साल पुराने फारसी इतिहास का एक आधुनिक घोषणापत्र है. यह बयान याद दिलाता है कि मंगोलों से लेकर अलेक्जेंडर तक, कई आए और चले गए, लेकिन ईरान (पर्शिया) का भूगोल और संस्कृति कायम रही. ईरान उसी शाश्वत इतिहास को वर्तमान में वाशिंगटन को याद दिल रहा है और अपने भविष्य के लिए लड़ रहा है. 1980 के दशक के वक्त भी ईरान-इराक युद्ध के दौरान, ईरान ने लगभग पूरी दुनिया के खिलाफ अकेले लड़कर अपनी सीमाओं की रक्षा की थी. आज उसने रणनीतिक तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण कायम कर 'Navigational Freedom' को Asymmetric Warfare में हथियार की तरह इस्तेमाल करने को तैयार है. वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन दुनिया की एनर्जी का चॉकपॉइंट को ठप करने की धमकी देना, उसकी तैयारी को बताता है. आप चाहे इस युद्ध में ईरान के साथ हो या अमेरिका के साथ या शान्ति की उम्मीद करें...लेकिन यह युद्ध वॉर स्टडीज के लिए एक क्लासिकल उदाहरण बनकर सामने आया है. #IranWar#Israel
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@Profdilipmandal अमेरिका में रहकर भी लोग अमेरिका का विरोध कर रहे हैं मगर वहां अपराध नहीं माना जाता है अभिव्यक्ति की आजादी होना बहुत जरूरी है
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Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
यूएई ने छह ऐसे लोगों को अरेस्ट किया है जो वहीं रहकर वहां हो रहे ईरान के हमले के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट लिख रहे थे. इन छह नमूनों में 5 भारतीय और 1 पाकिस्तानी है. बाकी देशों के लोग ऐसे कांड नहीं करते. वो भी तब जब यूएई में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमला कर रहे है. भारत में कुछ भी लिखने-बोलने की लगभग असीमित आजादी है. आप मित्र देशों का झंडा जला कर भी बच जाते हैं, जबकि संविधान के अनुछेद 19 में इसका स्पष्ट निषेध है. भारत एक अतिशय उदार देश है. लेकिन दुनिया ऐसे नहीं चलती. वे लोग लंबा नापते हैं. समझने की बात ये है कि हमेशा राष्ट्र हित का ध्यान रखें और जहां खा-कमा रहे हैं, उस देश के हित का भी ख्याल रखें. वरना मार पड़ेगी. वे देश उम्मा वगैरह नहीं मानते. अपने राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखते हैं. फोटो: Emirates news agency WAM
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@karunas24428214 @farazmaniyar @epanchjanya मानसिक रोगी ना समझते हैं ना कुछ जानते हैं सिर्फ कुत्ते की तरह भूखना जानते हैं
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KSP
KSP@karunas24428214·
@farazmaniyar @epanchjanya तू सरकार को उसके हिसाब से काम करने दे और अपने खानदानी काम पंचर पर ध्यान दे। सरकार तेरे हिसाब से चलने लगे तो फिर इस देश के एक टुकड़े ओर हो जाएंगे। मोदी को जिसने चुना है वो मोदी के काम से बहुत खुश है। मदरसा ज्ञान अपने पास रख।
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Panchjanya
Panchjanya@epanchjanya·
बड़ी खबर! भारत ने USA पर लगाया 30% टैरिफ! अमेरिकी सांसदों ने कहा राष्ट्रपति ट्रंप PM मोदी से करें बात। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने भी जवाबी कदम उठाया है। भारत सरकार ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया है।
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Faraz Ahmed
Faraz Ahmed@farazmaniyar·
@epanchjanya सिर्फ दाल पर ही क्यों सभी प्रोडक्ट पर लगाते, दम है तो टेस्ला, एपल, mc डोलैंड पर लगाओ
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Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
1950 में मनुस्मृति रद्द कर दी गई, पर शरिया कानून यानी शरीयत को बचा लिया गया. शरीयत एक्ट भारत में आज भी लागू है. वाह नेहरू जी वाह! संविधान के अनुच्छेद 13 के कारण, 26 जनवरी 1950 में मनुस्मृति रद्द हो गई. उस पर आधारित कोई कानून देश में नहीं है. लेकिन महिला विरोधी शरीयत एक्ट, 1937 आज भी भारत में लागू है। मुसलमानों का ये अतिरिक्त तुष्टिकरण है. इसलिए मुसलमान कम उम्र की लड़कियों से कानूनी तौर पर निकाह कर सकता है. कानून की सहमति से चार शादी कर सकता है. इसके लिए उसे जेल नहीं भेजा जाता. महिलाओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार नहीं देता. बीवी को हमेशा डराता रहता है कि एक और ले आऊंगा और उनसे गुलामी कराता है. जबकि आर्टिकल 44 अलग पर्सनल लॉ का निषेध करता है. शरीयत का निषेध करता है. लेकिन शरीयत एक्ट लागू रहा. आज भी लागू है. नेहरू जी आप गजब थे. आपने अच्छा किया कि 1955 में खुद ही खुद को भारत रत्न दे लिया. आपके लिए सवाल: मनुस्मति खारिज की गई, हिंदुओं का बहुविवाह गैर-कानूनी किया गया तो हिंदुओं का एक भी प्रदर्शन नहीं हुआ. क्या मुसलमान शरीयत खत्म करने को उतनी ही शांति से स्वीकार कर लेंगे?
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
आदरणीय आपने भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कही थी काला धन लाने की बात कही थी देश में भ्रष्टाचार का आतंकवाद है कृपया अपने पद की गरिमा बना रखकर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करें तभी आपका प्रधानमंत्री पद भारत के लिए सही साबित होगा
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Main Sirf Hindu (Modi Ka Parivaar)
@TejashwiYdvRJD बाबू 1.8 नहीं 1.08% वोट मिले हैं राजद को और भारतीय जनता पार्टी और जदयू को मिलकर एक करोड़ 86 लाख वोट मिले हैं। 145 सीटों का डिफरेंस है आरजेडी और एनडीए के बीच और वोटो का डिफरेंस हो गया 80 लाख के आसपास । मुझे तो कोई दिक्कत नहीं लगती ।
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@Profdilipmandal दिलीप मंडल की जो इज्जत थी वह धूल में मिल चुकी है सिर्फ वोट ख़रीदने के लिए ₹10000 नहीं प्रतिमाह 50000 का प्रति परिवार रोजगार चाहिए
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@Profdilipmandal सही बात है मंदिर मस्जिद में उलझा दो हिंदू बेचारा अपने शिक्षा चिकित्सा रोजगार कहां मांग रहा है
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@Profdilipmandal EWS आरक्षण विरोधी है भारतीय संविधान के विरोधी है बीजेपी सरकारी नौकरियां घटाकर अंबानी अडानी का गुलाम बनाकर आरक्षण की व्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से खत्म कर रही है
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Tejashwii Yadav
Tejashwii Yadav@TejashwiYdvRJD·
- RSS RJD से लड़ रही है - BJP RJD से लड़ रही है - प्रशांत किशोर पांडे RJD से लड़ रहे है - पप्पू यादव भी RJD से भिड़ते रहते है - नीतीश कुमार तो RJD के ख़िलाफ ही जिंदा है - मीडिया दिन-रात RJD से लड़ रही है - चिराग पासवान-जीतनराम मांझी सब RJD से लड़ रहे है - 👉🏻केवल एक पार्टी है जो जनता के हक़ और रोटी-रोजगार लिए सत्ता से लड़ रही है — #RJD#7thPayForBPSCTeachers #7thPayForBPSCTeachersBPSC
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@Profdilipmandal आप भी वही कर रहे हैं जो भारतीयों को मूर्ख बनाते रहे
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@janardanspeaks मूर्ख व्यक्ति क्या ट्रेन में या हवाई जहाज में रिजर्वेशन समाप्त हो सकता है रिजर्वेशन अलग बात है दिमाग लगाओ समझो
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Janardan Mishra
Janardan Mishra@janardanspeaks·
AC होने पर राशन कार्ड समाप्त हो सकता है.. किन्तु fortuner होने पर भी आरक्षण समाप्त नहीं होता आरक्षण भारत पर कलंक है🤦
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
The country's army is fighting against external terrorists, the citizens have to become aware and fight against the corruption (terrorists) inside the country by uniting together Harish Kumar Suhalka National Convenor Corruption Free India 9509755111
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
आतंकवादी हमले में सभी मृतको के आश्रितों को यह रकम मिलनी चाहिए
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
अब आगे का संघर्ष मेरी गिरफ्तारी का नहीं होकर प्रत्येक पुलिस अधिकारी द्वारा संविधान और पुलिस के नियम कानून कायदे पर चलने के लिए होगा
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Harish Kumar Suhalka
Harish Kumar Suhalka@hksuhalka·
@ajitanjum Great देश की वास्तविकता तो यही है
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