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Heemal
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@Balamnegiuk01 रीलबाज रीलबाजी के लिए कुछ भी ड्रामा रच सकते हैं...
हो सकता है ये मामला शुरू से ही रीलबाजी वाला ड्रामा हो...
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#Uttarakhand के हमारे गढ़वाल मंडल के मरोड़ा गाँव की प्रधान वीरा रावत जो काफ़ी पॉपुलर प्रधान है।
उनके गाँव के एक बुजुर्ग से हुए एक विवाद ने बहुत बड़ा मोड़ तब ले लिया जब बुजुर्ग ने वीरा के पैर पकड़कर मांफी मांगी।
इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर सामाजिक संस्कारो का पतन माना जा रहा है।

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Three contenders for Keralam CM :
K.C. Venugopal : Upper Caste
V.D. Satheesan : Upper Caste
Ramesh Chennithala : Upper Caste
Not one of them is Dalit, SC, ST or Minority.
Is this the social justice @RahulGandhi rants about?

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अगर बीजेपी अकेले दम पर कांग्रेस को असम से खदेड़ सकती है।
अगर बीजेपी अकेले दम पर टीएमसी को बंगाल से भगा सकती
तो
तमिलनाडु से डीएमके को निकालने के लिए एआईएडीएमके का सहारा लेने की क्या जरूरत थी?
अपने आप और के अन्नामलाई पर भरोसा क्यों नहीं किया? तमिलनाडु के हिंदुओं को क्यों नहीं जगाया?
के अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद से हटाना आत्मघाती कदम था।
वोट प्रतिशत तो गिरे ही, एआईएडीएमके भी धोखा दे गया।
उदयनिधि स्टालिन आज भी सनातन को खत्म करने की बात कर रहा है।
के अन्नामलाई को वापस लाओ। तमिलनाडु में सिर्फ वही हिंदू विरोधी तत्वों को पटक सकता है।
@BJP4India
@AmitShah
@NitinNabin
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राजपूत घरों में ब्याही गई सभी राजपूत रानियों के अपने मायके जाने के इतिहास में प्रमाण मिलते हैं
पर कथित जोधा या मुस्लिम सोर्स मे वर्णित किसी भी राजपूत कन्या का अपने मायके जाने का प्रमाण नहीं मिलता
इससे दो ही बातें साबित होती हैं कि उनको मुसलमान रखैल से उत्पन्न दासी पुत्री मिलती थी जिसको वो राजपूतानी बताते थे या कोई दासी उठाकर उसे चुपके से राजपूत पुत्री लिख देते थे
मेरा सभी मुस्लिम इतिहासकारों को चैलेंज है कि मुस्लिम सोर्स में कोई एक घटना बता दें जब उन्होंने किसी एक कथित राजपूत रानी के अपने मायके जाने और उसके स्वागत का जिक्र किया हो?
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बिहार के इन बच्चों की आँखों में डॉल्फिन देखकर जो चमक है, वही गंगा की सच्ची कमाई है।
पर एक बात समझनी होगी। डॉल्फिन को छूना, गोद में उठाना, उसके साथ खेलना उसे मार सकता है। उसकी त्वचा फूल जितनी कोमल है। पानी से बाहर वो कुछ ही पल में प्राण त्याग देती है।
बच्चों पर क्रोध मत कीजिए। उन्हें प्यार से समझाइए। डॉल्फिन दिखे तो दूर से निहारिए, उसे पानी में रहने दीजिए, और तुरंत वन विभाग को सूचना दीजिए। अगर ये बच्चे जान जाएँ कि डॉल्फिन क्या है, तो वही इसके सबसे बड़े रक्षक बनेंगे।
गंगा में डॉल्फिन का लौटना बड़ी बात है। उसे बचाए रखना हम सबका कर्तव्य है।
#Dolphin #Ganga #NamamiGange
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जाधव नाम का यह शख्स 10वीं की परीक्षा देने के बाद अपने गांव में ब्रह्मपुत्र नदी के बारिश से भीगे रेतीले किनारे पर घूम रहा था क्योंकि बाढ़ का पानी कम हो गया था।
तभी उसकी नजर करीब 100 मरे हुए सांपों के एक विशाल झुंड पर पड़ी। इसके बाद उसने आगे बढ़कर देखा कि नदी का पूरा किनारा मरे हुए जानवरों से भरा हुआ था और एक श्मशान जैसा लग रहा था।
मृत प्राणियों के शवों के कारण खड़े होने की जगह नहीं थी। इस दर्दनाक सामूहिक निर्दोष मौत के दृश्य ने किशोर जाधव के मन को झकझोर कर रख दिया।
हजारों बेजान जानवरों की बेजान, चौड़ी खुली आंखों ने जाधव को कई रातों तक सोने नहीं दिया। एक चर्चा के दौरान गांव के एक शख्स ने व्याकुल जाधव से कहा कि जब पेड़-पौधे नहीं उग रहे हैं तो बाढ़ से बचने के लिए नदी के रेतीले किनारे जानवरों को शरण कहां मिलेगी?
जंगल के बिना उन्हें भोजन कैसे मिलेगा? यह बात जाधव के दिल को छू गई और उन्होंने जानवरों को बचाने के लिए पेड़ लगाने की कसम खाई।
16 साल के जाधव 50 बीज और 25 बांस के पेड़ लेकर नदी के रेतीले किनारे पर पौधे लगाने पहुंचे।
यह घटना आज से 35 साल पुरानी है।
वह दिन था और आज भी दिन है। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि इन 35 वर्षों में जाधव ने बिना किसी सरकारी मदद के 1360 एकड़ भूमि पर घना जंगल बना दिया है।
क्या हम विश्वास कर सकते हैं कि एक अकेले आदमी ने उस जंगल को लगाया
5 बंगाल टाइगर, 100 से अधिक हिरण, जंगली सूअर, 150 जंगली हाथियों का झुंड, गैंडा और कई अन्य जंगली जानवर सांपों सहित शांति से घूम रहे हैं, जिन्हें इस अद्भुत कर्मयोगी ने इस जंगल का गौरव बनाया है।
जंगल का रकबा बढ़ाने के लिए मैं सुबह 9 बजे से 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर नदी पार करती, दूसरी तरफ एक पेड़ लगाती और फिर शाम को फिर से नदी पार करती और फिर साइकिल चलाती थी।
5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद घर लौटेंगे।
उनके द्वारा लगाए गए इस जंगल में कटहल, गुलमोहर, अनानास, बांस, साल, सागौन, सीताफल, आम, बरगद, शहतूत, जामुन, आड़ू और कई औषधीय पौधे हैं।
आश्चर्य और दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस असंभव कार्य को पूरा करने वाले इस साधक को पांच साल पहले तक देश में अज्ञात था।
एक्शन का ये योद्धा अपने बनाए जंगल में पौधों से भरा बैग लेकर अपनी साइकिल पर असम के जंगल में अकेले अपनी धुन पर काम कर रहा था। वो पहली बार साल 2010 में देश की नजरों में तब आए थे जब एक वाइल्ड फोटोग्राफर
"जीतू कलिता" ने उन पर एक वृत्तचित्र फिल्म "द मोलाई फॉरेस्ट" बनाई
इस फिल्म को देश के नामी विश्वविद्यालयों में दिखाया गया था। दूसरी फिल्म आरती श्रीवास्तव की "फॉरेस्टिंग लाइफ" थी जिसमें जाधव के जीवन के अछूते पहलुओं और समस्याओं को दिखाया गया था।
तीसरी फिल्म "फॉरेस्ट मैन" को भी विदेशी फिल्म समारोहों में काफी सराहा गया था।
एक अकेले व्यक्ति ने पर्यावरण की रक्षा के लिए वन विभाग की मदद के बिना, बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के ऐसा किया।
इतने पिछड़े इलाके से आने के कारण उनके पास पहचान पत्र के रूप में "राशन कार्ड" भी नहीं था, उन्होंने हजारों एकड़ में फैला एक पूरा जंगल बना दिया।
जो लोग उन्हें जानते थे उन्होंने उनके काम का सम्मान किया और उनके नाम पर इस जंगल का नाम रखा।
असम का यह जंगल
इसे "मिशिंग जंगल" कहा जाता है।
(जाधव असम की मिशिंग जनजाति से हैं)। उन्होंने जीविकोपार्जन के लिए गायों को पाला है। शेरों द्वारा उनके घरेलू जानवरों को खाने के बाद भी, जो उनकी आजीविका का साधन थे, जंगली जानवरों के प्रति उनकी करुणा कम नहीं हुई। उनका मानना है और वे कहते हैं कि शेरों ने मुझे नुकसान पहुंचाया क्योंकि वे नहीं जानते कि अपनी भूख मिटाने के लिए खेती कैसे करें।
तुम जंगलों को नष्ट कर दो, वे तुम्हें नष्ट कर देंगे।
जाधव को एक साल पहले देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था, जो अभी भी असम में एक कमरे की बांस की झोपड़ी में रहते हैं और अपनी पुरानी दिनचर्या में तल्लीन हैं।
सरकार के तमाम प्रयासों और वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपए के पौधे खरीदने के बावजूद पर्यावरण और वन विभाग उस मुकाम को हासिल नहीं कर सका जो किसी एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति से हासिल किया गया था। वह पौधों से भरे बैग और कुदाल के साथ जंगल की पगडंडियों पर साइकिल चलाकर एक निस्वार्थ उपासक के रूप में अपनी साधना में लीन है।
तो यह कहा जा सकता है कि कभी-कभी "एक ग्राम न केवल भट्टी को तोड़ सकता है बल्कि उसे चकनाचूर भी कर सकता है।
हजारों सलामी और सलाम।
सादर। #viralreelsシ #viralreels #foryouシ #treding #post #viral #

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हंसराज मीणा की शादी हो गई।
👉 हंसराज चाहता तो जाटव समाज की लड़की से शादी करके जाति के बन्धन को तोड़कर आंबेडकर का सपना पूरा कर सकते थे।
👉 हंसराज चाहता बिना दहेज के शादी कर सकता था
👉 शादी में हंसराज मीणा ने ना सफेद कपड़े पहने , ना अशोक की लाट के फेरे लिए, ना बौद्ध भिक्षु से शादी करवाई
👉 ना पूरे पंडाल में कही आंबेडकर, बुद्ध , फुले की फोटो थी ।
हल्दी की रस्म से लेकर शादी तक , सारे कार्य सनातन पद्धति से हीं पूर्ण है। बाकी दलितों को मूर्ख बनाकर रिच फॉलोअर बटोरने का काम चलता रहेगा ।

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प्रधानमंत्री मोदी ने कल हैदराबाद में एक बेहद महत्वूर्ण मुद्दा उठाया है-
एक समय था जब भारत कॉपर का एक्सपोर्ट किया करता था, परंतु अपने देश के कॉपर प्लांट्स में हड़ताले करवायी गई, उन्हें बंद करवाया गया।
और नतीजे में आज भारत कॉपर इंपोर्ट करता है जिसमे विदेशी मुद्रा भंडार की ठीक ठाक मात्रा खर्च होती है।
कितना गंभीर मुद्दा है- जो क्रिरिटकल मिनरल हम बना सकते है दुनिया को बेच सकते है, सस्ती राजनीति और षड्यंत्रों के कारण उसका भी आयात करना पड़ रहा है।
उम्मीद है कि इस छोटी राजनीति से आगे बढ़कर अब नई सरकार @CMOTamilnadu और @TVKVijayHQ तमिलनाडु में बंद हुए कॉपर प्लांट को खुलवाने में मदद करेगी।
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@Balamnegiuk01 सुबेंदु अधिकारी को नवीन पटनायक के अलावा किसी विपक्ष वाले ने अभी तक बधाई नहीं दी है।
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इसको सीएम बनता देख उन तिलचट्टों को भी दर्द हो रहा है,जो बंगाल के साथ ही हर उस राज्य के जनादेश पाने पर खुश होते हैँ जहाँ भाजपा की सरकार बन रही हो।
लेकिन #CMJosephVijay को जनादेश मिला तो हाय तौबा मचाना है।
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ऐसे लोग दीमक जैसे ही हैँ।
#TVKVijayHQ #CMVijay
Vije@vijeshetty
Bro, literally delivered a mass movie dialogue in the oath ceremony 😂 Did Governor controlled him and said read what's written? #CMJosephVijay
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बंगाल में ममता चुनवा हारी - इस्तीफ़ा नहीं दिया, कल शपथ ग्रहण समारोह में TMC का कोई नेता शामिल नहीं हुआ।
तमिलनाडु में विजय की पार्टी जीती, बीजेपी को सफलता नहीं मिली- बिना किसी ड्रामे के तमिल भाजपा के नेता विजय के शपथग्रहण में शामिल हो रहे है।
संविधान का रक्षक कौन? - वो जो हार के बावजूद तानाशाही करने की कोशिश करे या वो जो जनमत को सरमाथे लगाकर स्वीकार करे?
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