Dalit_VOICE_BSP
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Dalit_VOICE_BSP
@iajeeet
Masters - Mechanical Engineer, PhD Proud Supporter of @AnandAkash_BSP अम्बेडकरवादी/BSP/BAMSEF/कांशीराम/मायावती/ बाबासाहेब/बौद्ध धर्म/Posting/all types of videos

नेहरू की इतनी बड़ी औकात या हैसियत नहीं थी कि मान्यवर कांशीराम जैसे महान व्यक्ति को सीएम पोस्ट ऑफर करते. वे तो बाबा साहब को कैबिनेट में नहीं रख पाए. और कर्पूरी ठाकुर की तरह ही, कांशीराम जी को भारत रत्न देने का सौभाग्य कांग्रेस गंवा चुकी है. ये शुभ काम नरेंद्र मोदी के हाथों होना लिखा है. कांग्रेस सरकार ने तो मान्यवर के निधन पर राष्ट्रीय शोक भी नहीं किया था. नेहरू कांशीराम के पैर की धूल बराबर भी नहीं थे. कांशीराम सीएम बनाते थे. उन्होंने एक पार्टी बनाई और 11 साल में देश के सबसे बड़े राज्य में अपना सीएम बना लिया. इससे करोड़ों लोगों में लोकतंत्र के प्रति आस्था बढ़ी. इसे 'डिपेनिंग ऑफ डेमोक्रेसी' बोलते हैं. नेहरू को राज गांधी ने गिफ्ट में सौंपा, वरना तमाम कांग्रेस कमेटियां तो सरदार पटेल को बना रही थीं. वहीं कांशीराम ने देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनाई, जबकि वे साधारण परिवार से थे. मान्यवर कांशीराम और नेहरू की तुलना ही गलत है. और हां, मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने का अवसर भी नरेंद्र मोदी को ही मिलेगा. कांग्रेस का नसीब फूटा है कि वो बाबा साहब से लेकर कर्पूरी ठाकुर किसी को भी भारत रत्न न दे पाई. यूपीए सरकार ने तो कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक भी नहीं किया था. सपा की यूपी में सरकार थी, उसने तो मान्यवर के नाम पर बने जिले और संस्थानों के नाम तक मिटा दिए.

पहले के ज़माने में प्रजा ज़ब सो जाती थी, राजा तब रात के अँधेरे में घोड़े पर बैठकर राज्य का हाल जानने निकलता था,



देश का दलित वंचित तबका सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी जी की तरफ देख रहा है। बुद्ध, कबीर, ज्योतिबा, बाबासाहेब और बापू, नेहरू जी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले नेता हैं राहुल गांधी। BSP की रैली, कायर अत्याचारी भाजपा की पुनर्वापसी के लिए हुई थी!! @RahulGandhi @Mayawati

*मायावती की अपील बीजेपी को वोट दे*

महोदय @Uppolice किसी के घर के पते को सार्वजनिक रूप से साझा करना आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 72 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) और धारा 379 (चोरी) के तहत दंडनीय हो सकता है। इस अपराध में तीन साल तक की जेल और/या जुर्माना हो सकता है। कृपया संज्ञान लीजिए।

पूछना ये था कि अब बहन जी किसी पीड़ित दलित के घर क्यों नहीं जाती??



So why give reservation on the basis of birth?





