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Anuragg Shuklaa - पं अनुराग शुक्ला
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Anuragg Shuklaa - पं अनुराग शुक्ला
@imanuragAlld
कार्यकर्ता @ABVPVoice journalist #writerblogger #Politicalanalysist #Motivationalspeaker #Personaltweet , #जन_समर्पण #DailyNewsPaper, #Teacher
Uttar Pradesh, India Katılım Aralık 2017
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कैंसर के इलाज में NEXAVAR नाम की दवा वरदान है. यह दवा मरीजों की जान बचाने में बहुत काम आती है.
इस दवा को केवल BAYER नाम की कंपनी बनाती है. NEXAWAR टैबलेट की एक डिब्बी 250000 रुपए की आती है. जिसमें 120 टैबलेट होते हैं.
अगर डॉक्टर किसी गरीब मरीज में को यह दवा लिख दे, तो जान बचाने के लिए वो 250000 लाख रुपए कहां से लाएगा.
BAYER के पास पेटेंट है. किसी अन्य कंपनी को बनाने नही देती. ऐसे समय में कई देशों की सरकारों को WHO से पूछने की हिम्मत नही होती है.
लेकिन 2012 में SINGH इज KING ने गरीब मरीजों के हित में CIPLA कंपनी को स्पेशल लाइसेंस पावर के तहत अधिकार दे दिया. CIPLA ने यह दवा 28,000 में बनाकर मार्केट में उतारा. बाद में दिल्ली की एक कंपनी ने 8000 में बना दिया.
लेकिन मीडिया ने मनमोहन सिंह की इमेज को कमजोर दिखाया. प्रोपोगंडा के तहत Accidental Primeminister फ़िल्म बनाकर बदनाम किया गया. सवाल है दवाओं के दाम कम करने के लिए, MODI जी ने स्पेशल लाइसेंस पावर का कितनी बार इस्तेमाल किया ?


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चित्रकूट ट्रेजरी में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी की हिरासत में मौत, एक बेहद गंभीर मुद्दा है क्योंकि इतना बड़ा घोटाला कोई अकेले नहीं कर सकता है। इसमें कई लोगों की संलिप्तता के उजागर होने की आशंका रही होगी। इसीलिए इसे सामान्य मौत न मानकर निष्पक्ष जाँच हो और सभी दोषियों पर सख़्त से सख़्त कार्रवाई हो।
न्याय हो!

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एक समय था जब संघ का गणवेश केवल संघ के कार्यालयों में ही मिलता था, लेकिन अब यह बड़े शोरूम में भी उपलब्ध है, जो बदलाव का प्रतीक है। उत्साही कार्यकर्ताओं की बढ़ती संख्या और समाज के सभी वर्गों को साथ लाने का प्रयास इसका एक और संकेत है।
विजयदशमी पर्व यह संघ का शताब्दी वर्ष है इस वर्ष को संपर्क, संवाद, संगठन और सेवा के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचने के लिए एक नए अध्याय के रूप में लिखा जा रहा है जो अभी तक नहीं पहुंचे हैं। यह अहम पहल है जो संघ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी।
@RSSorg @friendsofrss
#RSS100Years #RSS100

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बात ₹5 की नहीं थी, बात रवैये और सम्मान की थी!
[12626/केरला एक्सप्रेस] में, मैंने अभी थोड़ी देर पहले प्यास में ₹15 वाली पानी की बोतल ली,
लेकिन वेंडर ने बिना किसी झिझक के ₹20 मांग लिया!
जब मैंने सही दाम पूछा, तो अकड़ दिखाई और जैसे कहना चाहता हो — ले तो ले, ये मेरी मर्जी है!
बोतल तो मैंने झेल ली 20 में, लेकिन बेअदबी और बेज्जती झेलना किसी के बस की बात नहीं है!
पानी बेच रहे हो, पैसे की तंगी समझ आती है, लेकिन रवैये में जहर मिलाना बिल्कुल गलत है!
ये मामला सिर्फ मेरी तकलीफ का नहीं है,
अगली बार कोई और मुसाफिर इससे न जूझे इसलिए ये पोस्ट किया!
रेलवे में सुविधा जरूरी हैं,लेकिन संस्कार और सम्मान उससे भी जरूरी!
@RailMinIndia @IRCTCofficial कृपया ऐसे वेंडरों पर कार्रवाई करें!"
धन्यवाद 🙏 "


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व्यवस्था कैसी भी हो,
शिक्षक अगर ठीक हैं तो छात्र ठीक निकलते हैं
मैकाले की शिक्षा थी, तो भी योगी अरविंद, विवेकानंद,
तिलक, सावरकर, गांधी निकले कैसे निकले?- संघ प्रमुख मोहन भागवत जी
#MohanBhagwat #Education #EducationSystem #MacaulaysEducation #rssnewhorizons #RSS
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"स्वामी विवेकानंद पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने सभागृह में ब्रदर्स एण्ड सिस्टर्स नाम का संबोधन किया था"- श्री मुकुल कानिटकर
#swamivivekananda #MukulKanitakr #Chicago
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प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश घर की आर्थिक तंगी ने कभी-कभी इतनी क्रूर सच्चाई पैदा कर देती है कि बचपन की मासूमियत भी छिन जाती है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है प्रतापगढ़ के रानीगंज विधानसभा की तीन नाबालिग ब्राह्मण बेटियों की, जो पढ़ाई-लिखाई की उम्र में किताबों की बजाय मजदूरी का बोझ उठाने को मजबूर हैं। ये बेटियां अपनी जन्मभूमि से दूर गुजरात की एक छोटी-मोटी कंपनी में काम करके न सिर्फ अपना पेट पाल रही हैं, बल्कि अपनी बीमार मां के इलाज का खर्च भी जुटा रही हैं। शिखर न्यूज नेटवर्क के दफ्तर में इनकी व्यथा सुनकर हर आंख नम हो गई।
ये तीन बहनें—साक्षी शुक्ला और उनकी दो छोटी बहनें—प्रतापगढ़ के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं। परिवार की हालत इतनी खराब है कि उनका घर टूटा-फूटा है, दीवारें गिर रही हैं और छत से पानी टपकता है। पिता की कोई स्थिर आमदनी नहीं है, और मां की आंखों में गंभीर समस्या है, जिसके इलाज के लिए पैसे की सख्त जरूरत है। घर की इस तंगी ने इन मासूम बच्चियों को घर की दहलीज पार करने पर मजबूर कर दिया। वे गुजरात चली गईं, जहां एक छोटी कंपनी में काम करके कुछ पैसे कमाती हैं। लेकिन ये पैसे सिर्फ जीविका के लिए नहीं, बल्कि मां के इलाज और परिवार के गुजारे के लिए हैं।
शिखर न्यूज नेटवर्क के दफ्तर में गुजरात से लौटकर आई साक्षी शुक्ला रो-रोकर अपनी कहानी सुना रही थीं। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। "हमारी उम्र पढ़ने-लिखने की है, लेकिन गरीबी ने हमें मजदूर बना दिया," साक्षी ने सुबकते हुए कहा। "मां की आंखों का इलाज कराना है, घर चलाना है... हम क्या करें? गुजरात में काम करके जो थोड़े-बहुत पैसे कमाते हैं, उसी से सब कुछ चलता है। लेकिन दर्द इतना है कि आंखों से छलक जाता है।" उनकी बहनें भी चुपचाप सिर झुकाए बैठी थीं, मानो गरीबी ने उनकी आवाज भी छीन ली हो।
यह परिवार ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखता है, जहां परंपरागत रूप से शिक्षा और संस्कृति को महत्व दिया जाता है। लेकिन आर्थिक संकट ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया। स्थानीय लोग बताते हैं कि ये बेटियां बचपन से ही होशियार और मेहनती रही हैं, लेकिन गरीबी ने उनके सपनों को कुचल दिया। "ये बच्चियां हमारे गांव की शान हैं, लेकिन हालात ने उन्हें दूर कर दिया," एक पड़ोसी ने दुखी स्वर में कहा। "हमें इनकी मदद करनी चाहिए, ताकि ये वापस पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।"
शिखर न्यूज नेटवर्क की टीम ने इस परिवार से मुलाकात की और उनकी व्यथा को समझा। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की है जो गरीबी की चक्की में पिस रहे हैं। क्या हम सब मिलकर इन बेटियों की मदद नहीं कर सकते? एक छोटी सी मदद—चाहे आर्थिक सहायता हो, शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप हो या मां के इलाज के लिए चिकित्सा सहयोग—इनकी जिंदगी बदल सकती है। अगर आप इनकी मदद करना चाहते हैं, तो शिखर न्यूज नेटवर्क से संपर्क करें या स्थानीय एनजीओ के माध्यम से योगदान दें।
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि समाज में अभी भी ऐसे कोने हैं जहां गरीबी बचपन को चुरा लेती है। आइए, हम सब मिलकर इन बेटियों को एक बेहतर कल दें। उनकी आंखों में सपने अभी भी जिंदा हैं, बस हमें उन्हें पंख देने की जरूरत है।।
स्रोत-शिखर न्यूज से
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“सफलता कोई आकस्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि यह एक निरन्तर साधना, आत्मबल और दृढ़ संकल्प का परिणाम होती है”
#ThoughtForTheDay
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अराजकता के दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी कब??
गुंडों को जेल कब?
रामस्वरूप विश्वविद्यालय की अराजकता का समूल नाश कब?
#Justice4SRMUStudents
#ABVP4Students
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विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज करने वाले याद रखें –
ABVP हर अत्याचार का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
हम न झुकेंगे, न रुकेंगे, अन्याय के विरूद्ध लड़ाई लड़ते रहेंगे।
#Justice4SRMUStudents
#ABVP4Students
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शिक्षा का मतलब डर और दमन नहीं होता।
SRMU में जो हो रहा है, वो शिक्षा के मूल्यों पर धब्बा है।
आखिर कैसे बिना मान्यता के विधि की डिग्री इतने वर्षों तक जारी होती रही? और कैसे ABVP के आंदोलन के बाद 2 दिन में सशर्त मान्यता मिल गई? पूछता है छात्र।
#Justice4SRMUStudents
#ABVP4Students
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क्या बाराबंकी में छात्राओं एवं छात्रों को घर कर बेरहमी से मारने वाले सिर्फ 4 ही पुलिसकर्मी थे?
दोषी CO पर कार्यवाही कब?
लाठीचार्ज के सभी दोषियों पर कार्यवाही कब?
घायल विद्यार्थियों को न्याय कब?
पूछता है विद्यार्थी!
#Justice4SRMUStudents
#ABVP4Students

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ABVP ने सदैव ही शिक्षा माफियाओं के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद की है
SRMU प्रशासन में ज़िम्मेदार लोगों को अभी तक जेल क्यों नहीं भेजा गया ?
#Justice4SRMUStudents
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