
Arvind tripathi
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Arvind tripathi
@imvivek297
मेरे बायो में कुछ नही रखा, अपना काम करो RT पर सहमति जरूरी नही




एससी हमेशा "ओबीसी" के मानव अधिकारों के लिए सँघर्ष करता रहा है। ************************************** प्रश्न : क्या ब्राह्मण व एससी में एकता हो सकती है? उत्तर : "बाबा साहब के समय से ही समन्वय के रूप में होती रही है" बल्कि बाबा साहब के समय से बाबा साहब व ब्राह्मण के बीच समन्वय रहा है क्योंकि बाबा साहब जानते थे कि व्यवस्था परिवर्तन समन्वय से ही हो सकता है। विवाद ठीक है। लेकिन उसके साथ साथ समन्वय भी रहना चाहिए। जिसमे; 1.बाबा साहब के सबसे बड़े सहयोगी ब्राह्मण गंगाधर सहस्त्रबुद्धे थे। महाड आंदोलन में अनुसुचित जातीयो को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी तक गंगाधर जी को बाबा साहब ने दी थी। महाड आंदोलन में ब्राह्मण, कायस्थ तक बाबा साहब के साथ थे। महाड आंदोलन पर हमले के विरुद्ध मनुस्मृति दहन कार्यक्रम गंगाधर सहस्त्रबुद्धे ने ही आयोजित किया था व उसे कायस्थ समाज के बुद्धिजीवी काले जी के साथ मिलकर स्वयं जलाया रहा। जबकिं मनुस्मृति का सीधा सम्बन्ध शुद्र अथार्त ओबीसी से है।। 2.बाल गंगाधर तिलक के पुत्र श्रीपति तिलक बाबा साहब के कट्टर समर्थक व सहयोगी थी। उनके निधन पर बाबा साहब ने काफी दुख प्रकट किया था। " बल्कि एससी व ब्राह्मण के मध्य कोई विवाद बड़े स्तर पर नही हुआ। उसका मुख्य कारण यह भी था कि अनुसुचित जातिया वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नही थी, वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नही होने के कारण "ब्राह्मण धर्म" से कोई लिंक भी नहीं रहा। यह अवर्ण जातिया थी व वर्ण व्यवस्था से बाहर थी। मनुस्मृति में इन्हें अत्यंजय कहा गया है। ऊपर से अँग्रेजी शासन था। इसलिए वार्ता से ही बाबा साहब ने अधिकार दिलवाए।। 3.विवाद कब होता है? जब वर्ण व्यवस्था का चौथा वर्ण "शुद्र" जो कि वर्तमान की ओबीसी जातिया जैसे यादव, लोहार, धीमान, सैनी, कुशवाह, निषाद व अन्य जातिया है जो गाँव मे रहकर व ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के घरों, मंदिरों में जाकर श्रम का कार्य कर सकती थी, उनके मानव अधिकार के लिए अनुसुचित जातिया सँघर्ष करती है।। 1.जब अनुसुचित जाति "ओबीसी" की लड़ाई लड़ती है। 2.मण्डल आयोग की सिफारिश के लिए दलित लड़े। 3.ओबीसी से जुड़ी हर योजना के लिए दलित लड़ता है।। 4.इससे समझे कि; "मण्डल आयोग के खिलाफ अपने आप को आग लगाके घायल करने वाला व्यक्ति गोस्वामी स्वयं ओबीसी था जिसका 2005 में अमरीका में निधन हुआ" उस समय भी किसी ने ओबीसी बनाम ब्राह्मण नही किया बल्कि अनुसुचित जातीयो के आरक्षण के खिलाफ बयानबाजी हुई। 5.लेकिन; "इससे एससी व ब्राह्मण में विवाद होता है। मजेदार बात यह है कि ब्राह्मण सन्गठन इसमे ओबीसी को ही आगे करके अनुसुचित जातियो से विवाद करवा देते है। मतलब ओबीसी की लड़ाई औऱ ओबीसी से ही विवाद ओर यह बात ओबीसी की समझ मे नही आती। यह अनुसुचित जातिया झेलती है।" 6.इससे समझे; "बाबा साहब पर महाड आंदोलन से अलग कभी भी हमले नही हुए। लेकिन सँविधान लागू होने व प्रथम चुनाव के बाद बाबा साहब के ऊपर एक कार्यक्रम पटना में कोंग्रेस की शह पर हमला हुआ जिसके कारण बाबा साहब को यह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। अब यह कार्यक्रम "ओबीसी संगठनों" द्वारा बाबा साहब द्वारा आर्टिकल 340 में उनके लिए किए गए प्रावधान को लागू करने के लिए आयोजित हुआ था। बाबा साहब नई दिल्ली से इस कार्यक्रम में आये लेकिन इस कार्यक्रम में टमाटर व अन्य सामग्री फैंकी गयी जिसके कारण रद्द करना पड़ा" लेकिन इससे हमें फर्क नही पड़ता है। हम अनुसुचित जातिया अपने मानव अधिकारों के साथ साथ सभी के मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए, उनके विकास, संसाधन पर हिस्सेदारी के लिए हर व्यक्ति के साथ खड़े है। इसलिए अत्यंत ओबीसी जातीयो की सबसे पहली आवाज ही बहुजन विचारधारा ने शुरू की। जिसके कारण सैकड़ो ऐसी ओबीसी जातीयो से मंत्री तक बने, जिन्हने कभी विधानसभा तक नही देखी थी। मान्यवर कांशीराम ने ऐसे में से ही मंत्री बनाये।। जय भीम। विकास कुमार जाटव




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