Arvind tripathi

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@imvivek297

मेरे बायो में कुछ नही रखा, अपना काम करो RT पर सहमति जरूरी नही

India Katılım Temmuz 2017
82 Takip Edilen121 Takipçiler
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Priti Gautam
Priti Gautam@priti134·
जातिगत आरक्षण वाले 17 संशोधनों में अकेले अटल बिहारी बाजपेयी ने 6 संशोधन किए हैं और 6 में से एक भी संशोधन ओबीसी के लिए नहीं है, केवल SC-ST के लिए है। इसमें मुसलमानों के खिलाफ भी नहीं है, जिसके कारण ये राजनीति में आए थे। यानी जो SC-ST के लिए आरक्षण है, वह केवल ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए प्रतिबंधित है। जिनको इन्होंने भरमाया, यानी जनरल को चुनाव जीतते ही उस पर प्रतिबंध लगाया, यानी ओबीसी पर सामान्य वर्ग प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया। ये थे अटल बिहारी बाजपेयी। इसीलिए मैं बार-बार कहती हूँ कि सामान्य वर्ग का सबसे ज्यादा विनाश हमेशा से सामान्य वर्ग के नेता ही करते आ रहे हैं। दूसरी जातियों के नेता पहले तो अपने वर्ग के पक्ष में काम करते हैं और यदि एक-दो ना करते हों तो मुख्यतः अपने वर्ग के लिए काम करते हैं, लेकिन वे अपने वर्ग के खिलाफ एक भी काम नहीं करते। लेकिन सामान्य वर्ग के सारे नेता एक तो अपने वर्ग के पक्ष में कोई कार्य नहीं करते, ना आज तक किए। सामान्य वर्ग इसका ध्यान ही नहीं दिया, बोला कोई बात नहीं, लेकिन इन्होंने काम तो पक्ष में नहीं किए, उल्टा जितने काम किए, सारे के सारे सामान्य वर्ग के खिलाफ कर दिए। बाकी जो दूसरी जातियों के हैं, महामानव जैसे उनका क्या ही कहना। वो SC-ST एक्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर लाए ही हैं, UGC लाने के लिए लगे ही हैं। आरक्षण दिन-रात हर जगह बढ़ा ही रहे हैं और सामान्य वर्ग को दूसरी तरफ मूर्ख बनाकर वोट भी ले लेते हैं। चलो अब अच्छी बात यह है कि सामान्य वर्ग अब जाग चुका है और इन सबके षड्यंत्र के खिलाफ आवाज उठा है। अपने ऊपर हो रहे अत्याचार, भेदभाव और हर प्रकार से शोषण का विरोध करने लगा है। अब बहुत जल्द सुधार होगा। सामान्य वर्ग का पहले इतना विनाश इसीलिए कर दिया गया क्योंकि सामान्य वर्ग मौन रहना सीख लिया था और सोचता था कि हमारे वर्ग का नेता है तो हमारे खिलाफ कार्य नहीं करेगा। यही भरोसा सामान्य वर्ग का इतना विनाश किया है।
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@neelkam70386015 @priti134 जब रुचिका शर्मा से डिबेट होगी तो उनके तथ्य कितने सही हैं उसका जवाब उनसे ले लिया जाएगा, आप अपने फैक्ट दुरुस्त करो,किसी का कॉपी पेस्ट से अच्छा खुद थोड़ा मेहनत करो क्लियर पिक्चर दिखाई देगी। इतिहास पूर्वाग्रह से ग्रसित लोगों के पढ़ने का विषय है भी नहीं
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Dr N Kverma
Dr N Kverma@neelkam70386015·
@imvivek297 @priti134 इतिहासकार डॉ रुचिका शर्मा इतिहास विषय में डाक्ट्रेट हैं और वो शोध के उपरांत ही तथ्य को रखतीं हैं। उनको गलत साबित नहीं कर पा रहे हैं तो विरोध करे जा रहे हैं। बैसे डॉ रुचिका की बातों में कहीं न कहीं सच्चाई हो सकती है।
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Priti Gautam
Priti Gautam@priti134·
नालंदा विश्वविद्यालय को जाहिल बख्तियार खिलजी तुर्की आक्रमणकारी ने जलाकर नष्ट कर दिया था ज्ञानबिन्दु को झूठ की खान ने आने वाले 10 बीस साल बाद कुछ नमूने लिखेंगे की रौशन यादव के कोचिंग संस्थान को ब्राह्मणो ने बर्बाद कर दिया था पिछड़ा जानकर
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क्षत्रिय इतिहास RAJPUT HISTORY
वैसे विकास जी सच्चाई एकदम उल्टी है दिल्ली पुलिस का रिजल्ट देख लीजिए सीआरपीएफ का रिजल्ट देख लीजिए एलडीसी का रिजल्ट देख लीजिए रेलवे का रिजल्ट देख लीजिए लगभग 40% ओबीसी ओपन मेरिट में सेलेक्ट हो रहे हैं यानी मान लो आज आरक्षण खत्म हो जाए और कोई 100 वैकेंसी निकलती है तो 40 ओबीसी अपने दम पर सेलेक्ट हो जाएंगे लेकिन SC का 5 भी नहीं हो पाएगा यह बात आप जैसे चालाक SC जानते हैं इसलिए वह ओबीसी को बताते रहते हैं कि तुम भी हमारे जैसे नीच हो तुम भी आरक्षण मांगो क्योंकि उनको सदैव डर रहता है कि अगर ओबीसी समझ गया कि हमें आरक्षण की जरूरत नहीं है और वह आरक्षण का विरोध करने लगा तो आरक्षण खत्म हो जाएगा फिर पढ़ाई चोर एसी का क्या होगा ओबीसी का तो आरक्षण खत्म होने से फायदा ही फायदा है एक तो उसका सिलेक्शन जितना अभी हो रहा है उतना ही होगा आरक्षण का जो धब्बा है वह भी उसके ऊपर से खत्म हो जाएगा इस आरक्षण के धब्बे के कारण वह सबसे झूठ बोलता रहता है कि हम जनरल मेरिट में सेलेक्ट हुए हैं फिर उसे कोई झूठ भी बोलना नहीं पड़ेगा और वह गर्व से जिंदगी जिएगा
Vikas Kumar Jatav@vkjatav84

एससी हमेशा "ओबीसी" के मानव अधिकारों के लिए सँघर्ष करता रहा है। ************************************** प्रश्न : क्या ब्राह्मण व एससी में एकता हो सकती है? उत्तर : "बाबा साहब के समय से ही समन्वय के रूप में होती रही है" बल्कि बाबा साहब के समय से बाबा साहब व ब्राह्मण के बीच समन्वय रहा है क्योंकि बाबा साहब जानते थे कि व्यवस्था परिवर्तन समन्वय से ही हो सकता है। विवाद ठीक है। लेकिन उसके साथ साथ समन्वय भी रहना चाहिए। जिसमे; 1.बाबा साहब के सबसे बड़े सहयोगी ब्राह्मण गंगाधर सहस्त्रबुद्धे थे। महाड आंदोलन में अनुसुचित जातीयो को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी तक गंगाधर जी को बाबा साहब ने दी थी। महाड आंदोलन में ब्राह्मण, कायस्थ तक बाबा साहब के साथ थे। महाड आंदोलन पर हमले के विरुद्ध मनुस्मृति दहन कार्यक्रम गंगाधर सहस्त्रबुद्धे ने ही आयोजित किया था व उसे कायस्थ समाज के बुद्धिजीवी काले जी के साथ मिलकर स्वयं जलाया रहा। जबकिं मनुस्मृति का सीधा सम्बन्ध शुद्र अथार्त ओबीसी से है।। 2.बाल गंगाधर तिलक के पुत्र श्रीपति तिलक बाबा साहब के कट्टर समर्थक व सहयोगी थी। उनके निधन पर बाबा साहब ने काफी दुख प्रकट किया था। " बल्कि एससी व ब्राह्मण के मध्य कोई विवाद बड़े स्तर पर नही हुआ। उसका मुख्य कारण यह भी था कि अनुसुचित जातिया वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नही थी, वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नही होने के कारण "ब्राह्मण धर्म" से कोई लिंक भी नहीं रहा। यह अवर्ण जातिया थी व वर्ण व्यवस्था से बाहर थी। मनुस्मृति में इन्हें अत्यंजय कहा गया है। ऊपर से अँग्रेजी शासन था। इसलिए वार्ता से ही बाबा साहब ने अधिकार दिलवाए।। 3.विवाद कब होता है? जब वर्ण व्यवस्था का चौथा वर्ण "शुद्र" जो कि वर्तमान की ओबीसी जातिया जैसे यादव, लोहार, धीमान, सैनी, कुशवाह, निषाद व अन्य जातिया है जो गाँव मे रहकर व ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के घरों, मंदिरों में जाकर श्रम का कार्य कर सकती थी, उनके मानव अधिकार के लिए अनुसुचित जातिया सँघर्ष करती है।। 1.जब अनुसुचित जाति "ओबीसी" की लड़ाई लड़ती है। 2.मण्डल आयोग की सिफारिश के लिए दलित लड़े। 3.ओबीसी से जुड़ी हर योजना के लिए दलित लड़ता है।। 4.इससे समझे कि; "मण्डल आयोग के खिलाफ अपने आप को आग लगाके घायल करने वाला व्यक्ति गोस्वामी स्वयं ओबीसी था जिसका 2005 में अमरीका में निधन हुआ" उस समय भी किसी ने ओबीसी बनाम ब्राह्मण नही किया बल्कि अनुसुचित जातीयो के आरक्षण के खिलाफ बयानबाजी हुई। 5.लेकिन; "इससे एससी व ब्राह्मण में विवाद होता है। मजेदार बात यह है कि ब्राह्मण सन्गठन इसमे ओबीसी को ही आगे करके अनुसुचित जातियो से विवाद करवा देते है। मतलब ओबीसी की लड़ाई औऱ ओबीसी से ही विवाद ओर यह बात ओबीसी की समझ मे नही आती। यह अनुसुचित जातिया झेलती है।" 6.इससे समझे; "बाबा साहब पर महाड आंदोलन से अलग कभी भी हमले नही हुए। लेकिन सँविधान लागू होने व प्रथम चुनाव के बाद बाबा साहब के ऊपर एक कार्यक्रम पटना में कोंग्रेस की शह पर हमला हुआ जिसके कारण बाबा साहब को यह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। अब यह कार्यक्रम "ओबीसी संगठनों" द्वारा बाबा साहब द्वारा आर्टिकल 340 में उनके लिए किए गए प्रावधान को लागू करने के लिए आयोजित हुआ था। बाबा साहब नई दिल्ली से इस कार्यक्रम में आये लेकिन इस कार्यक्रम में टमाटर व अन्य सामग्री फैंकी गयी जिसके कारण रद्द करना पड़ा" लेकिन इससे हमें फर्क नही पड़ता है। हम अनुसुचित जातिया अपने मानव अधिकारों के साथ साथ सभी के मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए, उनके विकास, संसाधन पर हिस्सेदारी के लिए हर व्यक्ति के साथ खड़े है। इसलिए अत्यंत ओबीसी जातीयो की सबसे पहली आवाज ही बहुजन विचारधारा ने शुरू की। जिसके कारण सैकड़ो ऐसी ओबीसी जातीयो से मंत्री तक बने, जिन्हने कभी विधानसभा तक नही देखी थी। मान्यवर कांशीराम ने ऐसे में से ही मंत्री बनाये।। जय भीम। विकास कुमार जाटव

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AMIT_007
AMIT_007@AMIT_KM_007·
@bramh0sWali Then she will file Domestic Violence, Dowry case & lots of other case & extract a hefty Sum & property & the Hindu Husband will Rot in Jail
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M@manash053·
@bramh0sWali It happened against her wish. You're no less than a misogynist man. Had she been involved with the Muslim man willingly, the husband giving her divorce woul hve been well understood
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@Voiceofpavan लेकिन तुमको मिर्ची सिर्फ ब्राह्मणों के धंधे से ही लगती है😃😃😃( यदि तुम्हारी ये तर्कहीन बात सच मान भी ली जाए, क्योंकि कर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। सब अपने अपने कर्म करते रहें समाज खुशहाल रहेगा
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पवन
पवन@Voiceofpavan·
"बाल काटना नाई का धर्म नहीं धंधा है, चमड़े की सिलाई करना मोची का धर्म नहीं धंधा है, इसी तरह पूजा पाठ करना करवाना ब्राह्मण का धर्म नहीं धंधा है।'' - राष्ट्रपिता महात्मा फुले
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@neelkam70386015 @priti134 थोड़ा पढ़ो लिखो डॉक्टर साहब, तर्कपूर्ण बातें करने में मदद मिलेगी। किसी बात को ऑथेंटिकेट करने के लिए समकालीन लेखन, पुरातात्विक साक्ष्य, सिक्के आदि quote किए जाते हैं। किसी 10 साल पुराने लिखे गये पन्ने नहीं।
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Dr N Kverma
Dr N Kverma@neelkam70386015·
@priti134 इतिहासकार डॉ. रुचिका शर्मा और कुछ अन्य विचारकों का मत है कि नालंदा को किसी विदेशी आक्रमणकारी ने नहीं, बल्कि बौद्ध और ब्राह्मण धर्मों के बीच के संघर्ष के दौरान ब्राह्मणों द्वारा जलाया गया था। ब्राह्मणों द्वारा जलाए जाने का दावा: इस दृष्टिकोण के अनुसार, शंब्राह्मणवादी कर्मकांडों
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@biharigurl Konsa hmare bolne se modiji apna mood change kr lenge?? Unko jo Krna hoga decision le chuke hain aur ye sirf aur sirf unhi ka nirnay hona bhi chahiye
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Vineeta Singh 🇮🇳
Vineeta Singh 🇮🇳@biharigurl·
Which ministers do you think should be replaced in NDA Cabinet??
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@desh_bhkt @abhijeet_dipke वैसे तो मै जीव हत्या नहीं करता पर अब सोच रहा हूं तिलचट्टा खोजना शुरू करूं
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Dolli
Dolli@desh_bhkt·
@abhijeet_dipke Ink ka drama reh gya hai, phir sadak par dharna bhi dena hoga cockroachwal ko
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Abhijeet Dipke
Abhijeet Dipke@abhijeet_dipke·
Physical attacks are a sign of fear and cowardice. We will continue to raise our voices peacefully. I am a follower of Gandhi and Ambedkar, and I will keep fighting this battle with peace and love. PS: Dharmendra Pradhan must resign!
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Aditya bajirao Mishra
Aditya bajirao Mishra@aditya_pandit08·
प्रयागराज नैनी में एक डिग्री कॉलेज के 4th क्लास के कर्मचारी की एक 18 वर्षीय बेटी को एक 30वर्ष का शादी शुदा फुरकान फंसा लेता है। फुरकान सैलून की दुकान चलाता है उसी में वो लड़की बाल कटवाने गई थी,और उसके बाद सब सिस्टम पानी बन जाता है। इसकी सूचना हमें मिली थी हम गए और सारा मामला साल्व किया। फुरकान के कान फुर्र हो गए इतना बढ़िया इलाज किया। लेकिन जब हमने लड़की के पिता जी को बोला कि इसपर FIR करवा दो तो उन्होंने मना कर दिया ये कह कर कि बदनामी होगी। हमने कहा कि कम से कम वीडियो बनवा लो अपना जिसमें पूरी घटना बताओ जिससे हर हिंदू जागरूक हो तो बोल रहे हैं BHAIYYA बहुत बदनामी होगी। लड़का का इलाज करने के बाद गंगा स्नान किया और अभी निकल रहा हूं। हर हर महादेव हर हर गंगे।।
Aditya bajirao Mishra tweet mediaAditya bajirao Mishra tweet media
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@AstroCounselVik अभी 10 दिवस पहले ही पूरा अरेंजमेंट रूम का लाइब्रेरी का चेंज किया हूं, जोकि अभी तक बहुत पसंद आ रहा
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Spiritual GPS Service
Spiritual GPS Service@AstroCounselVik·
When a major transit activates the 4th house, 4th lord, or even Cancer strongly, you may feel an urge to change your surroundings. Often people start rearranging their room, moving the furniture. Home changes first, because a new chapter is already looking for a place to land.
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Prathik
Prathik@traphikp·
@lalitgrateful I still think 30+ age k baad hi wo politics/administration mein jaana better hai. Experience is the key
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Spiritual GPS Service
Spiritual GPS Service@AstroCounselVik·
If you are going through the dasha of a planet in moksha houses (4, 8, 12) then don't be surprised if life starts caring less about your plans and more about your inner world. It may be annoying. You wanted progress. Life keeps asking whether you're actually at peace.
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Dr. Neha Das
Dr. Neha Das@neha_laldas·
अजीत भारती: "आपने दलितों के बीच का जातिवाद देखा है?" अनिल शारदा: "हाँ देखा है, पर आपने ब्राह्मणों के बीच का जातिवाद देखा है?" अरे @theanilsharda जी, लेकिन ब्राह्मण तो जातिवादी हैं ही ना? तभी तो उनको आरक्षण नहीं मिलता! लेकिन दलितों को मिलता है आरक्षण जातिवाद की वजह से! तो सवाल ये है कि जो गलती खुद कर रहे हो, उसी गलती का इल्जाम दूसरों पर थोप कर उसका हर्ज़ाना कैसे मांग सकते हो?? Hopefully, बात समझ आ गयी होगी!!
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अपर्णा पंडित
इस लड़की के पिता और भाई ने जब लड़के की हत्या की तो इसने उनको बहुत बुरा बुरा बोला बहुत ज्यादा , फिर इसने एक नाटक किया जिसमें इसने इसकी लाश के साथ शादी की और बोला कि मैं अब इसकी विधवा बनकर इसके परिवार के साथ रहूंगी। और अब ये लड़के के घर से चली गई। क्योंकि उस समय सबने इसे देवी बना लिया बस चलता तो इसकी मूर्ति भी बना लेते , और इसको अच्छा खासा फेम दिया । पर एक बात नहीं सोची किसी ने , जब ये लड़की अपने मां बाप की नहीं हुई परिवार की नहीं हुई, उसकी हरकतों और अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए इसके बाप भाई को हत्यारा बनना पड़ा ,उनकी जिंदगी बर्बाद होगयी तो ये लड़की एक लाश की सगी कैसे हो जाती? इसको तो मिल जायेगा कोई नया बकरा पर इसने बर्बाद किए दो परिवार, एक अपना और एक इस लड़के और खुद जिएगी अब एक नई और बढ़िया जिंदगी । पर कोई नहीं देवी है वो आरती उतारनी तो पड़ेगी ही।
अपर्णा पंडित tweet media
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Arvind tripathi
Arvind tripathi@imvivek297·
@desh_bhkt आज फिर हुआ क्या किसी के साथ
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Dolli
Dolli@desh_bhkt·
TMC guys these days, " डंडे से डर नहीं लगता साहेब, अंडे से लगता है
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Priti Gautam
Priti Gautam@priti134·
कोई भी सिख प्रचारक किसी एक उस हिन्दू का नाम भी नहीं बताता, जिस की सिखों ने रक्षा की। इसके विपरीत जिन हिन्दुओं ने सिखों की रक्षा की उन सबके नाम इतिहास में उपलब्ध है। सिख प्रचारक बताते हैं के गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों के लिए अपना सर कटवा दिया लेकिन गुरु तेग बहादुर जी की हत्या कश्मीर में नहीं बल्कि दिल्ली के चांदनी चौक में की गई और गुरु तेग बहादुर जी की आंखों के सामने ब्राह्मण कुल के भाई श्री मत्ती दास जी , भाई श्री सती दास जी तथा भाई दयाल जी की हत्या की गई। बल्कि हरियाणा के सनातन वीर खालसा से भी बड़े खालसा श्री कुशाल सिंह दहिया , ने गुरु तेग बहादुर जी के सिर के बदले अपना सिर देकर गुरु तेग बहादुर जी का अंतिम संस्कार करवाया। इसी प्रकार साहबजादों का अंतिम संस्कार करने वाले सनातन वीर दीवान टोडरमल जैन जी, साहबजादों की हत्या का मुगलों से बदला लेने वाले महान सनातन राजपूत वीर वैरागी लक्ष्मण मनहास जी, साहबजादों को मुस्लिमो की कैद में खाना पहुंचाने वाले सनातन वीर मोतीराम मेहरा जी, सब ने सिखों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया ।। लेकिन क्योंकि यह सब हिन्दू थे,सबके हिन्दू नाम थे , इसलिए इनको जो सम्मान सिख समाज द्वारा दिया जाना चाहिए वह नहीं मिला, जिन हिन्दूओं ने अपनी सनातन पहचान अर्थात सनातनी परंपरागत नाम तथा सनातन धर्म की शिक्षाओं के अनुसार मुगल अत्याचार ग्रस्त सिख समाज की रक्षा के लिए अपना तथा अपने परिवार का सर्वस्व बलिदान कर दिया उन सब की तस्वीर हर गुरुद्वारे में होनी चाहिए, ताकि सिख प्रचारकों द्वारा आज की सिख पीढ़ी के दिमाग में हिंदुओं के प्रति भरी जा रही द्वेष भावना का निवारण हो। सिख प्रचारक उन हिंदुओं को जिन्होंने सिख समाज को मुगल अत्याचार से बचाया या मुगल अत्याचार काल में सहायता पहुंचाई उन सब हिन्दू नाम वाले सनातनियों को सिख बताते हैं । जिस किसी को बदनाम करना है उसी को हिन्दू बताते हैं अपने मुंह मियां मिट्ठू। बताने के लिए टोडरमल जैन जी को सिख प्रचारक सिख बताते हैं लेकिन ना तो टोडरमल जैन जी की हवेली कि इन्होंने सुध ली और ना ही इन की तस्वीर गुरुद्वारों में लगाते हैं। तस्वीर गुरुद्वारे में भिंडरावाला की लगाते हैं। कहने को हरि सिंह नलवा और महाराजा रणजीत सिंह ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया था। लेकिन किसी की कोई निशानी भारत में या पंजाब में , या अफगानिस्तान में मौजूद नहीं है। जिसकी निशानी नहीं, जिस कहानी का कोई सबूत नहीं , वह कहानी है , इतिहास नही। सिख परचारक जितनी भी कहानीयां सुनाते हैं , किसी का कोई सबूत , ना भारत में मौजूद है ,ना पंजाब में मौजूद है ।। ना कोई विजय स्तंभ , ना कोई विजय द्वार , ना कोई शिलालेख। जितने भी इनकी कहानी हैं , सब सिर्फ सिख प्रचारको द्वारा 50-60 वर्ष पहले लिखी गई पुस्तकों में ही उपलब्ध है। मुगलों से लडी लड़ाइयां के सबूत में इनके पास दो भाले ,चार तलवारें और पांच दर्जन बर्तन हैं। जयपुर के महाराजा मान सिंह ने 5 वर्ष तक अफगानिस्तान पर हुकूमत की। अफगानिस्तान के 5 कबीलों पर विजय प्राप्त करके जयगढ़ किले पर पांच रंगा ध्वज फहराया और अफगानिस्तान से लाया हुआ तोप बनाने का कारखाना जयगढ़ किले में स्थापित किया। जिसको आज भी देखा जा सकता है। इतिहास वही है जो पत्थर के लकीरों से लिखा हुआ है। सिख प्रचारक बताते हैं इन्होंने पूरे भारत की सुन्नत नहीं होने दी , जबकि आधे से ज्यादा पंजाब खुद की सुन्नत करवा कर पाकिस्तान में चला गया।
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Priti Gautam
Priti Gautam@priti134·
बताओ जब सदियों से पानी छूने का भी अधिकार नही था तो आखिर क्या पीकर सदियों तक जीवित रहा? और सबसे बड़ी बात बिना पानी के बिना नहाए सदियां कैसे गुजार दिया? और इससे भी बड़ी बात अगर पानी छूने का अधिकार नही तो ज्ञान भी नही धुला सदियों तक इसका मतलब 😅
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
पटना में परीक्षार्थी सफोकेशन से मर गया घुट-घुट के। सेशन पर जो अराजकता की स्थिति थी, वह हम सबने देखी। विद्यार्थियों को इस देश में कीड़े-मकोड़े की तरह देखा जाता है। रैंडम जगह पर सेंटर होंगे ताकि बच्चे अधिकतम समस्याओं का सामना कर सकें। उन्हें एक दिन पहले जाना पड़े, रेल में भीड़ हो, सड़कों पर जाम लगे। कोई लॉजिक नहीं है बगले के जिले की जगह तीन सौ किलोमीटर दूर सेंटर देने का। कुत्तों की तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था इन्हें ट्रीट करती है। छात्र मर रहे हैं, मारे जा रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं, लीक हुए पेपर की दोबारा परीक्षा दे रहे हैं, और नीरो बंसी बजा रहा है। उसे कोई पॉलिसी नहीं लानी, मरते रहो। ऐसी निष्ठुर सत्ता, ऐसी घटिया व्यवस्था, ऐसी उपेक्षा मैंने पहले नहीं देखी।
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