Mrityunjay K Singh

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Mrityunjay K Singh

Mrityunjay K Singh

@ipsmrityunjay

IPS retd. A beginner with science, ended up with humanities. Finds peace in the cradles of literature. Poet,author, lyricist & singer. . Trustee,Yapanchitra Cal

Kolkata, India Katılım Kasım 2008
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आखर भोजपुरी
उमिरिया ई झंझट बेसाहे में लागल विविध लोग के चित्त थाहे में लागल रहीं एक नोकर मिलल खूब ठोकर भले दुष्ट लो के सराहे में लागल सभा अउर संस्था में बीतल अवस्था जिनिगिया ई चन्दा उगाहे में लागल सफलता-विफलता कुछो ना बुझाइल समय किन्तु काफी सराहे में लागल मदत के भरोसा दिआइल खुशी से मगर कुछ भला लोग डाहे में लागल रहल चाह लेकिन ई कमजोर जीवन बहुत बिघ्न के बान्ह ढाहे में लागल फकत जोस में कान जे जे नधाइल फँसे से ही से-से निबाहे में लागल चलल एक ई बैल कोल्हू के जब से ठहर ना सकल जन्म राहे में लागल - महेंदर शास्त्री
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आखर भोजपुरी
आखर भोजपुरी@aakharbhojpuri·
" कुंवर सिंह के बैठलखाना " - हरेन्द्रदेव नारायण भोजपुरी में सबसे पहिला महाकाव्य के रचे वाला हरेन्द्रदेव नारायण जी के लिखल महाकाव्य 'कुंअर सिंह" से कुछ पंक्ति आज के खास दिने । एह में कुंअर सिंह के ले के वर्णन भइल बा । एक हाली पढीं सभे एह कालजयी रचना के- बैठलखाना कुँअर सिंह के बाहर खूब जमल बा, झालर लागल बा, नफीस चंदोवा एक टँगल बा।। दियाधार के दीपन से मृदु मन्द जोत आवत बा, एक गुनी बैठल बा, सारंगी पर कुछ गावत बा।। अइलन बाबू कुँअर सिंह सहसा भीतर से बाहर, कोलाहल कुछ भइल, विपिन में बाहर आइल नाहर।। हड्डी ठोस पेसानी दमकत, पुष्ट वृषभ कंधा बा, अस्सी के बा उमर, भइल का ? कहे बूढ़, अन्धा बा।। सिंह चलन रवि नयन जलत जुग सुगठित चंड भुजा बा, अइसन डोलेला, जइसे डोलेला विजय पताका।। नवजुग के हम दूत कहीं या जय के याकि विभा के, केन्द-बिन्दु मानुस-सपना के, साहस, सत्य, प्रभा के।। अइलन झोंका से बैठक में, जुग जइसे आवेला, सांती बीच समर आ जाला, अमर सत्य आवेला। या जइसे निकलेला दुख-सुख धरम के पुतला, या कि मरन में अमर बनल आवे अनित्य के पुतला।। छोटन रागन के समाज में महाराग आवेला, फूसन के ढेरन में जइसे कहीं आग आवेला।। जिनगी के अँधियाली में या पुन्न भाग आवेला, कोलाहल भय स्वार्थ बीच जइसे विराग आवेला।। बइसे अइलन कुँअर सिंह जी,’जय जय, जय जय’ गूँजल, ब्राह्मन-कुल वो बन्दी जन के चिर मंगल लय गूँजल।। जइसे अइला से प्रभात के चिड़िया-कुल चहकेला, भोरहरी के हवा चले तो कमल फूल महकेला।। जिनकर हड्डी में सिमटल होखे जोती के सागर, जिनकर मांस-पेसियन में सूतल हो अमित प्रभाकर।। जिनकर चमकत नयन-पुत्तली में सूरज-चन्दा हो, वंक भौंह में सब कुभाल के जहाँ मरन-फंदा हो।। जे हो महासिन्धु साहस के जहाँ गिरे सब धारा, जे असीम गौरव हो जेकरा में ना कहीं किनारा।। अइसन माँझी जे आँधी में नौका खोल चलेला, तलहथ्थी में भाग मले, ओकरा के वृद्ध कहेला।
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Sean Feucht
Sean Feucht@seanfeucht·
🚨BREAKING: Muslims set fire to an entire Coptic Christian neighborhood in Cairo, Egypt. They don’t want you to see what is happening to Christians in this part of the world!
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आखर भोजपुरी
आखर भोजपुरी@aakharbhojpuri·
नन्हकी चिरईया झूठो के सउँसे खुलल आसमान बा ।। नन्हकी चिरईया के आफ़त में जान बा ।। कबले शिकारी इ खोंता उजारी रो-रो के कबले चिरईया पुकारी ठेपी बा लागल कि बहिरन के कान बा नन्हकी चिरईया के आफ़त में जान बा ।। चिरई पुकारे त कुछुओ ना बोले सीयल बा ओठ कबो मुँह नाहीं खोले मोहर मराइल कि बइठल जबान बा नन्हकी चिरईया के आफ़त में जान बा ।। चिरई के रोअला पर अइसन छोहाला कि आगी में रहि रहि चे घीवे डलाला कइसन इ कुरसी में अँटकल परान बा नन्हकी चिरईया के आफत में जान बा ।। रोजे अजादी के सपना देखावे सगरी बगइचा के सरगे बतावे दादा हो , के जाने कइसन पलान बा नन्हकी चिरईया के आफत में जान बा ।। -सुनील कुमार ‘तंग’
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Navin K Tiwari
Navin K Tiwari@imbhojpuria·
भोजपुरी के संस्था वाला लो मनोज तिवारी के पव-पूजी करे में निखहरे ओखहरे भुईँया ओठंघ जाला लो । बाकिर भोजपुरी भाषा के संगे खेला खेले वाला में एहु व्यक्ती के भरल-पुरल सोगहग हाथ बा । इनिका के कुछ लो कहि देले बा कि " भोजपुरी भाषा है या बोली" एहि से भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता नइखे मिलत । हमरा, इनिकर विडियो ना मिलल ह, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के, जवन अमनौर में भइल रहे, बाकिर सुने में आवत बा कि ओहिजो इ दू हाथ के लेमनचुस, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पदाधिकारी लो के चुसा के अपना बगली में ध लेले बाड़े । भोजपुरी के नाव प छहित्तर खेले में सबसे आगे एहि व्यक्ति यानि कि मनोज तिवारी के नाव आवेला । बहुत बड़ - बड़ छहित्तर इ जवान भोजपुरी संगे खेलले बा । बाकिर का करब, भोजपुरी साहित्य जगत से जु‌डल, एहि जवान के गोड़ में निखहरे भुईँआ, गोड़ के जरी ओठंघल बा ।
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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
violence, fear, and retribution Can it ensure natural selection? 🤔
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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
ओह, प्रासंगिक...👏😅
Navin K Tiwari@imbhojpuria

“ उजबेकिस्तान के 30 लाख आबादी वाला उज्बेक भाषा में 1917 से पहिले एकहू किताब ना रहे। आज उज्बेक भाषा के राष्ट्रीय कवि ज्ञम्बुल के प्रसिद्धि विश्व भर में बा आ 1943 तक ताशकंद में उज्बेक भाषा के शानदार-सफल विश्वविद्यालय बन गइल।” इ बात हम नइखी कहत, इ त भाषाई विद्वान आ क गो भाषा के जानकारी, राहुल सांकृत्यायन जी भोजपुरी के ले के, महेंद्र शास्त्री के लिखल एगो पाती में कहले रहनी ! अब राहुल सांकृत्यायन जी के का मालूम रहे के आगे चलि के भोजपुरी के नाव प बनल साहित्यिक संस्था वालो लो मनोज तिवारी, अक्षरा सिंह, रवि किशन , कल्पना पटावरी आ अइसन आदि - इत्यादि लोगन के चारो ओर से गेंड़ के “ चकई के चक धिन मकई के लावा” खेले लागी लो !

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आखर भोजपुरी
आखर भोजपुरी@aakharbhojpuri·
टोकनी ना इ वस्तु प्रयोग में बा ना इ शब्दओ प्रयोग में बा। डॉ नेमिचंद्र शास्त्री जी के अनुसार, भोजपुरी शब्द 'टोकनी' असल में प्राकृत के 'टोक्क्ण' शब्द से बनल बा आ एकर उपयोग अनाज भा अन्य चीजन के नापे-जोखे खातिर होत रहे। इ बांस से बनत रहे। शब्द टोकरी एहि से बनल बा। फोटो में जवन टोकनी देखत बानी असल में इ टोकनी ना खइंची के छोट सरुप ह टोकनी तनि अउरी गझिन बिनाला । बाकिर अमेजन प टोकनी नाव से 10" के इ चार गो खईंची 2 हजार के आसपास मिलत बाड़ी स । टोकनी असल में नापे जोखे खातिर बनत रहे । मग-जग-गिला-लोटा के प्रयोग से टोकनी के प्रयोग घटे लागल आ अब टोकनी शब्द के प्रयोग आ समान के प्रयोग लगभग नइखे । एह दिहल जानकारी में कुछ कमी होखे त बतावल आ सुधारल जाउ । हिंदी के टोकरी, भोजपुरी के टोकनी भा प्राकृत के टोक्कण से बनल बा ।
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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
हर मोड़ पर टिके रहते हैं सान्निध्य के प्रिय पल, संग चलते हैं हर राह पर प्रियजनों के संचित क्षण ... (वंदना की ही एक कविता से) शतकोटि नमन उस प्रिय साथी को जिसकी दुर्द्धर्ष कर्मपरायणता और संवेदना ने मुझे बहुत कुछ सिखाया था।🙂‍↕️🙏🙏
Rajesh Malik@RajeshM72121745

Today is the martyrdom day of my sister, Ms. Vandana Malik, I.P.S, 26, who laid down her life in Imphal in 1989. She loved the people of Manipur deeply . Had she not joined I.P.S, she would have certainly excelled in Hindi literature. Sharing some of her poems and letters.

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आखर भोजपुरी
आखर भोजपुरी@aakharbhojpuri·
राहुल सांकृत्यायन : जयंती विशेष जन्मतिथि : 9 अप्रैल 1893 पुण्यतिथि : 14 अप्रैल 1963 आखर परिवार, 34 से बेसी भाषा /लिपि के जानकार सुप्रसिद्ध साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी, अध्यापक, इतिहासकार, यायावर, महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी के जयंती प बेर बेर नमन क रहल बा । ' सब्बन्‌ खनिकम्‌ ' राहुल जी बुद्ध के एह वाक्य के अक्सर कहत रहले जवना के माने रहे ' सब कुछ क्षणिक बा' यानि कि दुनिया में कवनो चीज अंतिम ना ह । हम कवनो सांच के एकाधिकार नइखी रखले । हम आपन काम करत बानी । आवे वाली पीढी आई आ हमरा काम के सुधारी । लेनिन के वाक्य के कोट करत रहले ' कुछउ अंतिम नइखे । राहुल सांकृत्यायन जी के संछेप में परिचय आ उहां के जिनगी के टाइमलाइन - सन्‌ 1893 ई. : राहुल जी के जनम 9 अप्रैल 1893 के नाना किहां यानि कि पन्दह गांव जिला आजमगढ ( उत्तर प्रदेश) में भइल रहे , मूल गांव कनैला रहे । माई के नाव कुलवंती, बाबुजी के नाव गोवर्द्धन पाण्डेय रहे । राहुल जी के बचपन प इहां के नानाजी रामशरण पाठक जी के पुरा प्रभाव रहे । केदारनाथ पाण्डेय , राहुल जी के लइकाई प के नाव रहे जवन राहुल जी के नाना के धइल रहे । चार भाई आ एगो बहिन में राहुल जी सबसे बड़ रहले । सन्‌ 1893 से 1905 तकले : पन्दहा के नजीक रानी की सराय कस्बा में शुरुवाती पढाई । बनारस - बिंध्याचल ( 1902) में पहिला यात्रा आ एगारह साल के उमिर में ( 1904 में ) राम दुलारी जी से विवाह । [ राहुल जी लिखत बानी कि ' 11 साल के उमिर में बिआह हमरा खातिर एगो तमाशा रहे । जब हम अपना जिनगी के बारे में सोचेनी त हमरा लागेला कि जिनगी में समाज के प्रति बिद्रोह के पहिला बिआ एहिजे से जामल रहे । ] सन्‌ 1906 से 1909 तकले : निजामाबाद के मिडिल स्कुल में दाखिला । ओहि घरी 1907 आ फेरु 1909 में घर से भाग के कलकत्ता चल गइल रहले । सन्‌ 1910 से 1912 तकले : सन्यास के ओर डेग बढल । अयोध्या, हरिद्वार, गंगोत्री , जमनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ के यात्रा - घुमक्कड़ी के शुरुवात । काशी चहुंप के संस्कृत के पढाई । प्रयाग के यात्रा । मंत्रसाधना । सन्‌ 1912 से 1913 तकले : परसामठ ( छपरा) के महंथ के उत्तराधिकारी । वैष्णव साधु । नाव धराइल ' रामउदार दास ' सन्‌ 1913 में : परसा से पलायन, दक्षिण भारत के यात्रा । तिरुमिशी के मठाधीस के शिष्य । नया नाव धराइल ' दामोदराचारी ' । तमिल भाषा सीखले । तिरुमिशी से निकल के रामेश्वरम्‌, बंगलोर, विजयनगर, पुने-बंबई-नासिक-अहमदाबाद आदि जगहन के यात्रा । सन्‌ 1914 में : परसा वापसी । अयोध्या में तीन महीना । आर्य समाज से लगाव । आगरा के आर्य मुसाफिर विद्यालय में । एजुगा से लेख लिखाइल शुरु हो गइल । सन्‌ 1915 में : लाहौर में पढाई । आर्य समाज के प्रचारक के रुप में यात्रा । लखनउ से पहिला हाली बौद्ध साहित्य के बारे में जानकारी । काशी में बाबुजी के अंतिम दर्शन । पचास के उमिर ले हो जाए तकले आजमगढ में गोड़ ना धरे के प्रतिज्ञा । सन्‌ 1916 में : पंजाब से बंगाल तक के घुमक्कड़ी । संगे -संगे लाहौर, चित्रकुट आ काशी में अध्य्यन । बौद्ध संस्कृति के ओर झुकाव । कुशीनगर , बोध गया, लुम्बिनी आदि जगह प बौद्ध तीर्थन के यात्रा । सन्‌ 1917 से 1920 तकले : फेरु से तिरुमिशी चहुंप के संस्कृत शास्त्रन के अध्ययन , कुर्ग में चार महीना के प्रवास । सन्‌ 1920 से 1921 तकले : असहयोग आंदोलन के घरी राजनीति में प्रवेश । छपरा जिला में सत्याग्रह के आयोजन । बाढ पिड़ित के सेवा । सन्‌ 1921 में : गिरफ्तार, बक्सर जेल में 6 महीना । संस्कृत में बाईसवी सदी आ कुरानसार के लेखन \ जेल से छुटला के बाद जिला कांग्रेस के मंत्री । गया कांग्रेस में सक्रिय योगदान । कांग्रेस के जिला मंत्री के पद से इस्तीफा । सन्‌ 1922 में : नेपाल में डेढ महीना । वापस भारत अइला प गिरफ्तार । कुछ दिन बक्सर जेल में फेरु दु साल हजारीबाग जेल में । अध्य्यन आ लेखन काम । बाईसवी सदी आ कुरानसार के हिन्दी लेखन । कानपुर कांग्रेस खातिर प्रतिनिधि । सन्‌ 1926 में : मेरठ में हरनामदास ( बाद में भदंत आनंद कौसल्यायन ) से पहिला हाली भेंट । खैबर, कश्मीर, लद्दाख, पछिमी तिब्बत, किन्नौर के यात्रा । छपरा में राजनैतिक सहभागिता । गोहाटी कांग्रेस के प्रतिनिधि । श्रीलंका के विद्यालंकार बिहार विद्यापीठ में करीब 19 महीना ले पढवनी आ पालि अउरी बौद्ध साहित्य के अध्य्यन भी कइनी । त्रिपिटकाचार्य के उपाधि मिलल । सन्‌ 1929 से 1930 तकले : भारत वापस । नेपाल में अज्ञातवास । तिब्बत के यात्रा । काशी के पंडित सभा में महापंडित के उपाधि । बौद्ध भिक्षु बनले । नाव धराइल ' राहुल सांस्कृत्यायन' । 'बुद्धचर्चा' नाव से ग्रंथ लिखनी । सन्‌ 1931 से 1938 तकले : सत्याग्रह में शामिल होखे से ले के युरोप के यात्रा, श्रीलंका , लद्दाख के यात्रा । जपान कोरिया, मंचुरिया, सोवियत आदि देसन में यात्रा । बिहार के भुकम्प प्रभावित क्षेत्र में सेवा कार्य । एहि बीचे टाईफाईड से ग्रसित । कइसहूँ जान बाचल । दु साल नेपाल में । तिब्बत के फेरु से यात्रा । पटना आ प्रयाग में लेखन काम \ लाहुल के यात्रा । एहि समयकाल में लेनिनग्राड में लोला से मुलाकात । लोला से शादी । रुसी पुत्र इगोर के जनम । सन्‌ 1939 से 1942 तकले : बिहार में किसान मजदूरन खातिर संघर्ष में शामिल । अमवारी किसान आंदोलन के नेतृत्व कइनी । लाठी से हमला । छपरा जेल में । छितौली किसान संघर्ष में गिरफ्तार । हजारीबाग जेल में । किताब 'तुम्हारी क्षय हो' आ ' जीने के लिए' एहि समय लिखाइल । जेल से छुटला के बाद मुंगेर में कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना में शामिल । मोतिहारी में किसान सम्म्लेन के सभापति । वोल्गा से गंगा भी एह समय काल में लिखाइल रहे । एहि समयकाल में भोजपुरी के आठ गो नाटक के लेखन । 1- जपनिया राछछ 2-देस-रच्छक 3-जरमनवा के हार निहिचय 4-ई हमार लड़ाई 5- ढुनमुन नेता 6- नइकी दुनिया 7- जोंक 8- मेहरारुन के दुरदसा सन्‌ 1943 में : आजमगढ ना जाए के जवन प्रण कइले रहनी , 50 साल के भइला के बाद कनैला ( आजमगढ ) के यात्रा । पहिला पत्नी से मुलाकात । सन्‌ 1943 से 1960 तकले : देस - बिदेस में क जगह यात्रा जवना में सोवियत से ले के इंग्लैंड तकले शामिल बा । हिन्दी साहित्य सम्मेलन बंबई के सभापति एहि समय काल में बनल रहनी । घुमक्कड़ शास्त्र एहि समयकाल में लिखाइल रहे । पढाई लिखाई घुमाई लगातार जारी रहे । नैनीताल मसूरी में घुमे निकल गइनी । कमला पेरियार ( सांकृत्यायन) से तीसरा विवाह । अनेकन गो लेखन काम के संगे संगे यात्रा जारी रहे । एहि समय काल में कमला सांकृत्यायन जी से पुत्री जया आ पुत्र जेता के जनम । लेखन के अनेकन गो ऐतिहासिक आ दुर्लभ काम एह समय काल में भइल । चीन के यात्रा भी एहि समय काल में रहे । पालि, हिन्दी, संस्कृत आ बाकि क गो भाषा में किताब लिखनी । सन्‌ 1961 से 1962 तकले : दार्जलिंग 'राहुल आवास' के बाद श्रीलंका फेरु कलकत्ता वापसी । यादाश्त भुलाए के बेमारी । कलकत्ता में इलाज । मास्को में सात महीना इलाज । सन्‌ 1963 में : 23 मार्च 1963 के वापस दार्जलिंग वापसी । 14 अप्रैल 1963 के दार्जलिंग के इडेन अस्पताल से राहुल जी लमहर यात्रा प निकल गइनी । राहुल सांकृत्यायन जी के सहकर्मी रहल रमेश सिन्हा, अली अशरफ आ इंद्रदीप सिन्हा के हिसाब से राहुल जी 34 भाषा के जानकारी रहनी । मित्र आ सहयोगी डॉ प्रभाकर माचवे भी लिखले बानी कि राहुल सांकृत्यायन 34 से बेसी भाषा के जानकार रहले । अपना लेखन कार्यकाल के 34-35 साल में राहुल सांकृत्यायन 50 हजार से बेसी पन्ना लिख चुकल रहनी । जदि राहुल सांकृत्यायन के पुरा जिनगी के जदि देखल बुझल जाउ त मालूम चली कि राहुल जी स्वाधीनता सेनानी , क्रांतिकारी किसान नेता, अध्यापक / लेक्चरर, कम्युनिस्ट नेता, उपन्यासकार, कहानीकार, गीतकार, नाटककार, निबंधकार, दार्शनिक, विचारक, धर्मभीरु, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता रहनी । 1947 में दूसरे अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन (गोपालगंज) के मंच पे राहुल सांकृत्यायन जी बोलनी कि - " ”ई लोग के राज तबे नीमन चली, जब लोग हुसियार होई। राजनीति के बात दू चार गो पढुआ जाने, अब ए से काम ना चली। जवना से लोग आपन नफा-नोकसान समझे आ उ बूझे कि दुनिया जहान में का हो रहल बा तवन उपाय करे के पड़ी। एकर मतलब ई बा कि अब लोगवा के मूढ़ रहला से काम न चली। लोग कइसे सग्यान होई, एकर एके गो उपाय हवे कि सब लोग पढ़े-लिखे जाने। खाली लइके ना, बूढ़ो जवान के अंगुठा के निसान के बान छोड़ावे के परी। अंगरेज के राज रहल त ओकनी के फायदा एही में रहल कि समूचा हिन्दुस्तान के लोग मूढ़ बनल रहे। चोर के अजोरिया रात न लुभावे भावे। लेकिन अपना देश में केहू बेपढ़ल ना रहे। एकर कौन रहता बा ? केहू भाई कही कि सबकरा के हिंदी पढ़ावल जाव। बाकी ई बारह बरिस के रहता ह। जो हिंदी में सिखावै-पढ़ावै के होई त पचासो बरिस में हमनी के सब लइका परानी पढ़ुआ ना बनब। आएवे हमनी के दसे-पनरह बरिस में समूचा मुलुक के पढा देवे के ह। कइसे होई ई कुलि… अपना भाखा में पढ़ल-लिखत कवनो मुसकिल नइखे। खाली ककहरे नू सोखे के परी।” आखर परिवार बेर बेर नमन क रहल बा योद्धा महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी के । [ साभार : किताब - राहुल सांकृत्यायन : अनछुए प्रसंग , योद्धा महापंडित राहुल सांकृत्यायन : उर्मिलेश , भोजपुरी साहित्यांगन, गुगल , राहुल सांकृत्यायन जी के लिखल कुछ किताब ]
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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
एमे कोनो संदेह नइखे... आ प्रकाश उदय भाई के कविता के साथे रूपम जी जइसन हलुक आ परचार मुखी कविता के कवनो तुलना ना कइल जा सके। कहां राजा भोज...
Navin K Tiwari@imbhojpuria

रूपम मिश्र के कविता, भाषाई इस्तेमाल आ अवसरवाद के उदाहरण का रउवा प्रकाश उदय जी के “बेटी मरे त मरे कुंआर” पढले बानी ? रूपम मिश्र के कविता पढनी ह, कुछेक कानूनी रुप से प्रतिबंधित शब्द के अलावा अइसन कवनो खास बात नइखे कि लोगन के अतना बैखरा धइले बा । हं कुछेक कानूनी रुप से प्रतिबंधित शब्दन खातिर अदम गोंडवी के आत्मा के बान्हि के ले आवे के परी ! मू* आ ह* के देसज तेवर के दंवक देखावे खातिर रूपम जी भोजपुरी भाषा के पुरा अलम ले ले बानी । असल में तेवर देखावे के फेरा में इहां के गरिआवे वाला मोड में आ गइल बानी ! असल में रूपम जी लेखा हिंदी के साहित्यकार लो भोजपुरी के जवाइन मंगरइल लेखा स्वाद लेबे खातिर इस्तेमाल क के छांटि फटक के बिग फेक देला । असल में उहां के कविता के भाषा आंचलिक ना हो के “use and throw “ मतिन बा ! तेवर देखे के बा आ स्त्री प रचित रचनन के तेवर देखे के बा त रउवा सभ के प्रकाश उदय जी के किताब “ बेटी मरे त मरे कुआंर” पढे के चाहीं !

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Navin K Tiwari
Navin K Tiwari@imbhojpuria·
क वजह हो सकेला ? अधिकतर भोजपुरी भाषी भा भोजपुरिया लो भोजपुरिया भइला के बादो, भिखारी ठाकुर, महेंदर मिसीर, रसूल मिया आदि लोगन प गहिराह काम कइला के बादो, भोजपुरी लोकगीतन के गावला के बादो, भोजपुरी में नाट्य मंचन कइला के बादो, भोजपुरी गीत-संगीत प आहि - आहि वाह-वाह कइला के बादो इ लोग भाषा भोजपुरी में ना लिखेला लो । इ लो महेंदर मिसीर, भिखारी ठाकुर, रसूल मियाँ के त महान कहेला, भोजपुरी लोकगीत-लोकसंगीत से नस्टेलिया जाला, नात्य-मंचन क के अकादमी ओकादमी से इनाम - सम्मान ध ले ला, बाकिर एह कुल्ह के भाषा में लिखे के बेर, सिकुड़ जाला, कोहना जाला। आखिर काहें ? कवनो खास वजह ? एह चीज के ईरान-इजरायल युद्ध से कवनो कनेक्सन नइखे नू ?
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Satish Veer Mishra
Satish Veer Mishra@inbornaviator·
@imbhojpuria @ipsmrityunjay @ManojTiwariMP @RajivPratapRudy @ravikishann @DineshY_Nirahua @nishikant_dubey भोजपुरी भाषा खातिर कुछ करके के सौभाभ्य बा। जीवन एक बार मिलल बा । सब काम हो ता। एक बार समय निकालें। सांसद बने और पैसा कमाए में ए भाषा के योगदान बा।
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Navin K Tiwari
Navin K Tiwari@imbhojpuria·
भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता से ले के अकादमी के भाषा बनावे आ भोजपुरी साहित्य के सृजन के जिम्मेवारी बहुत पहिले से लोग ले ले रहे । कुछ दिन पहिले कुछ लोग आरोप लगावत कहल कि भोजपुरी के बोली से भाषा बनावे के कोशिश आज हो रहल बा जबकि लोगन के मालुमे नइखे कि क पीढी एह में खप गइल बिआ । भोजपुरी के नाव प भोजपुरी भाषा साहित्य आ क्षेत्र खातिर लोगन के जुटान 1940 से ही होखे लागल रहे बाकिर , गते-गते आ बाद में यानि कि 1947 आवत -आवत , राहुल सांकृत्यायन , उदय नारायण तिवारी , दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह ' नाथ ' जी , अक्षयबर दिक्षीत, संत कुमार वर्मा , अवध बिहारी सुमन जइसन अउरी क गो भोजपुरी साहित्यकार लो , भोजपुरी भाषा साहित्य आ क्षेत्र खातिर सम्मेलन जुटान करे लागल लो । कुछ खास बात बतावत बानी - 1947 में भोजपुरी भाषा आ साहित्य के ले के अधिवेसन बिहार के सिवान में भइल रहे । अलग भोजपुरी राज्य के मांग सबसे पहिले राहुल सांकृत्यायन जी 1947 में कइले रहनी । बाद में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के बात आइल जब संविधान लागू हो गइल रहे । राहुल जी के कहनाम रहे कि भोजपुरियन के एकता के तुरे खातिर अंग्रेज शासन भोजपुरिया लोगन के दू गो राज्य , बिहार आ युनाइटेड प्राविनेंस ( अब युपी ) में बांट देले बा । बनारस में " भोजपुरी देसम " नाव के एगो पार्टी बनल जवन कि अलगा भोजपुरी राज्य के मांग कइले रहे , जवना में , बनारस के अलग भोजपुरी प्रदेस के राजधानी के रुप में देखावल गइल रहे । आरा के एगो संगठन रहे " भोजपुरी क्रांतिकार मोर्चा " , एह संगठन के मांग एग्रेसिव आ डामिनेंट रहे , कुछ लो एह संगठन खातिर " मिलिटेंट " शब्द के भी प्रयोग कइले बा , इ संगठन , 'टटका' नाव से अखबार निकालत रहे , आ बहुत जोरदार तरिका से भोजपुरी प्रदेश के डीमांड कइले रहे लो । भोजपुरी भाषा आ साहित्य के संघर्ष के इतिहास बहुत जोरदार आ बेजोड़ रहल बा । हमनी के अबहीं टीटीहरी लेखा भोजपुरी-भोजपुरी चिचिलात बानी जा ।हमरा हंसी बरेला आज के डेट में जब केहू भोजपुरी के सिरमौर बने के दावा करेला । हम एहि से हरदम कहेनी कि भोजपुरी खातिर लगातार मेहनत , जोरदार मेहनत बहुत जरुरी बा । - नबीन कुमार
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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
हमरो आमंत्रण मिलल बा भोजपुरी के तरफ से 'बोलियां: भाषा का अन्य पक्ष ' प बोले के। एगो सत्र के 6-7 मिनट में सरिहार के एतना बिसद बिसय प बोलल त एगो चुनौतिए कहाई, तबे बोलल जरूरी बा। सोचत रहीं कि अपना भाषण में कतना भोजपुरी में बोतल जाव आ कतना हिंदी भा अंग्रेजी में। कवनो सुझाव??🤔🤔
Sahitya Akademi@sahityaakademi

#साहित्यअकादेमी, 30 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक रवींद्र भवन परिसर, 35 फीरोज़शाह मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित हो रहे “साहित्योत्सव-2026” में आप सभी को सादर आमंत्रित करती है। @rashtrapatibhvn @VPIndia @PMOIndia @gssjodhpur @Rao_InderjitS @MinOfCultureGoI @secycultureGOI @PIB_India

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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
जे लो के सिखावले गइल उलटा त अब सोझा चाल के उमेद कइसे कइल जाव... गाँव जात रहता में केकरो से पूछनी कि फलनवा गाँव जाय के रहे, त मुंह के खैनी सरियावत जवाब आइल -'हं त पूछते रहब त चहुंपब कब!' बहरी सबहर टेढ़ई के जिनगी जीयत भीतर के सोच, आस्था, बिस्वास, सब टेढ़ा गइल बा।👏🫡
Navin K Tiwari@imbhojpuria

केरल के मुस्लिम के मातृभाषा -मलयालम केरल के हिंदू के मातृभाषा - मलयालम भोजपुरिया मुस्लिम के मातृभाषा - उर्दू (?) भोजपुरिया हिंदू के मातृभाषा - हिंदी (?) मातृभाषा में शिक्षा रोजगार ना रहला के वजह से, भोजपुरी जनला के बादो भोजपुरिया क्षेत्र के मुस्लिम आ हिंदू, भोजपुरी के आपन मातृभाषा कहे के बेंवत ना जुटा पावेलन।

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Mrityunjay K Singh
Mrityunjay K Singh@ipsmrityunjay·
@imbhojpuria जनता के का बुझाता... चाभे मलाई आ देवे भोट बाद में देखे सब में खोट🙂‍↕️🙏
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Navin K Tiwari
Navin K Tiwari@imbhojpuria·
आखिर पेट्रोल डीजल के दाम भारत में काहें ना बढल ? ईरान-इजरायल के युद्ध के वजह से खाड़ी में चल अस्थिरता के वजह से अमेरिका से ले के श्रीलंका ले पेट्रोल डीजल के दाम बढल बा बाकिर भारत में अबहीं ले नइखे बढल । अइसन काहें ? का भारत के लगे अउलाह डीजल-पेट्रोल बा जवन कुछ साल ले चल सकेला ? का भारत के आपन तेल के उत्पादन बढ गइल बा ? का रूस ईरान वेनेजुएला आ अमेरिका से भारत खातिर सस्ता तेल आवत बा ? उपर के तीनो सवाल के जबाब बा “ ना” ! ना भारत के जरी लमहर समय खातिर स्टाक बा, ना भारत के आपन तेल उत्पादन बहुत बढल बा ना भारत के तेल के सप्लाई बढल बा । त फेरू का कारण बा ? 1- असल में कोरोना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर प Indian basket में तेल के दाम लगभग 50-60$ के आसपास रहे । चुकि भारत में डीजल-पेट्रोल के दाम जवन युपीए के टाइम रहे ओह से आगे बढत गइल आ स्थित अइसन भइल कि अंतरराष्ट्रीय स्तर प indian basket के दाम 120$ से 60$ ले आ गइल बाकिर ओह अनुपात में भारत में डीज़ल पेट्रोल के दाम कम ना भइल । (सरकार आ भारतीय तेल कम्पनियन के घोचाह नाफा भइल बा पिछला कुछ साल में ।) 2- चुकि भारत सरकार आ भाजपा चुनावजीवी सरकार आ पाटी ह एह से पांच राज्य में होखे वाला चुनाव के ले के सरकार कवनो रिस्क लिहल नइखे चाहत । एह पांच राज्यन के चुनाव में से तीन गो में भाजपा आपन पुरहर एंट्री के उम्मेद लगवले बिआ । रहल बात दाम बढे के त इ देखे के बा कि कतना दूर ले घींचा सकेला ।
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आखर भोजपुरी
आखर भोजपुरी@aakharbhojpuri·
शहीदन के समाधि - प्रसिद्ध नारायण सिंह बलिया ( उत्तर प्रदेश) के चितबड़ागांव के स्वतंत्रता सेनानी प्रसिद्ध नारायण सिंह जी के लिखल रचना ह 'शहीदन के समाधि'। प्रसिद्ध नारायण सिंह जी खुद 1942 के समय आ एह से पहिले जेल में रहल रहनी। भोजपुरी साहित्य में इहां के अजगुत योगदान बा।
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