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भारतीय न्याय व्यवस्था से अब सड़ांध आने लगी है। एक आदमी को इसीलिए बेल मिल जाती है कि उसे चुनाव प्रचार करना है। एक आदमी को इसीलिए बेल मिल जा रही है कि वह 300 शब्दों का निबंध लिखेगा। और एक आदमी को बेल इसीलिए नही मिलती कि उसने किसी पार्टी के मेनिफेस्टो की आलोचना की। सैकड़ो लोग बेल मिलने के इंतजार में जेल में अपनी जिंदगी खपा रहे हैं, लेकिन पैसे वालों के लिए कोर्ट कभी भी खुल सकती है। न्याय की देवी की आंखों से पट्टी उतारने का समय आ गया है। #तीसराटर्मज्यूडिशियरीरिफार्म
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