#BREAKING
Union Education Minister Dharmendra Pradhan announces relief measures for rescheduled NEET exam:
- 15-minute duration extension (2–5:15 PM)
- Complete fee waiver
- A one-week window to choose the exam city.
- Admit cards by June 14
He says that the OMR sheets are the root cause of the paper leak. NEET will transition to Computer-Based Test mode from next year
अति आवश्यक सुचना :-
ये बैठी एक बच्ची जो अपने परिजनो से बिछड़ चुकी हैं ..!
यह जोधपुर के मंडोर गार्डन की घटना है जहां भैरूजी मंदिर के बाहर खुलें चौक में बैठी देखी गई
वहां एक महिला आकर पूछती है लेकिन स्पष्ट बता नही पा रही है जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि
उनके मां बाप तक सुचना पहुंच सकें
पिछले महीने 4000 का bill आया था… इस बार 8826 देखकर सच में दिमाग हिल गया 💔
पिछले महीने 4000 का बिजली bill आया था, सोचा normal है… लेकिन इस बार सीधा 8826 का bill आ गया
समझ ही नहीं आया इतनी खपत है कहाँ मेरे घर में तो बस एक पंखा, एक cooler और एक AC है… वो भी कभी-कभी ही चलता है
फिर इतना bill कैसे आ गया reading check की तो units भी पहले से ज्यादा दिख रहे थे
तभी ध्यान आया जब से ये नया smart meter लगा है तभी से ऐसा हो रहा है
पहले वाला meter था तो कभी 5000 cross नहीं हुआ अब हर महीने bill देखकर ही shock लग जाता है
सच बताऊँ अब पछतावा हो रहा है सोचता हूँ ना बदलवाता तो अच्छा था ज्यादा से ज्यादा 2–4 बार office के चक्कर लगते लेकिन पैसे तो बचते
अब हर महीने bill देखने से डर लगता है
एक गलत फैसला और हर महीने उसका bill भरना पड़ता है
आपके यहाँ भी smart meter लगा है या अभी भी पुराना ही चल रहा है?
वीडियो कमेंट सेक्शन में देखे 👇👇
Khan Sir जैसे Teacher का Hospital बनाना जितना प्रेरणादायक है, उतना ही हमारे Healthcare System पर सवाल भी खड़ा करता है।
ज़ब एक आम इंसान 7 रूपये में Blood Test, 25 रूपये में ECG और 800 से 1000 रूपये में डायलीसिस जैसी सुविधाएं दिला सकता है तो सोचने वाली बात है कि बाकी जगहों पर ये इतनी महंगी क्यों है?
किसी Hospital में कोई भी टेस्ट 500 रूपये और डायलीसिस 10-15 हजार से कम में नहीं होता है जो कि आम आदमी के लिये बहुत बड़ा बोझ है। यहाँ साफ दिख रहा है कि System में कही न कही कमी है।
यहाँ पर सोचने वाली बात है कि जो काम सरकार और बड़े संस्थानों को करना चाहिए, वो काम खान सर जैसे शिक्षक कर रहें है। ये सिर्फ तारीफ की बात नहीं है, बल्कि सुधार की जरूरत का संकेत भी है।
भारत में सबसे “तगड़ा धंधा” अगर कोई है, तो वो है — शिक्षा और चिकित्सा!
खान सर की बात सोचने पर मजबूर करती है:
👉 10 रुपये की दवा 100 में
👉 20 रुपये की किताब 200 में
क्या ये सेवा है या सिर्फ मुनाफे का खेल? जहां इलाज और शिक्षा हक होना चाहिए, वहां ये “बिजनेस मॉडल” बन चुका है!
अगर देश को सच में आगे बढ़ाना है, तो
📚 शिक्षा सस्ती और बेहतर होनी चाहिए
🏥 इलाज हर आम आदमी की पहुंच में होना चाहिए
अब सवाल ये है — क्या हम इस सच्चाई को स्वीकार करेंगे या चुप रहेंगे?
आपकी क्या राय है? 👇
#Education#Healthcare#India#RealityCheck#khansir
शिक्षा, सशक्तिकरण का ज़रिया नहीं रही…
व्यवसाय और मुनाफ़े का ज़रिया बन चुकी हैं…!!
अगर इस देश को बर्बाद होते नहीं देखना चाहते हो…
तो इस व्यवस्था को जल्द से जल्द बदलो…!!
वरना भविष्य बेहद भयावह होने जा रहा है…!!!
"Education ministers, are you alive?"
Private schools are looting poor parents by forcing them to buy expensive books only from selected publishers and shops.
Do state govts also take a share in this loot? Why are ministers silent on this issue?
ऐसा कौन सा GOLD लगा हुआ पन्नों पर ये किताब छापते हैं कि LKG के बच्चों तक की किताब हजारों में कीमत चली जाती है ❓
हद से ज्यादा लूट मचा रखा है🫢 इन PRIVATE SCHOOL वालों ने।👺👺
मेरे ही स्कूल से जबरदस्ती किताब भी लो, जबरदस्ती ड्रेस भी लो , ये सब तो सीधा-सीधा शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है जबकि रेजिस्ट्रेशन ये लोग ट्रस्ट के नाम से लेकर चलाते हैं।
ये सब नीचे का देखो और आवाज बुलंद करो ✅ ये मनमानी रुकनी चाहिए 👏
देश में एक नियम से शिक्षा हो जहां सबके बच्चे एक जैसी शिक्षा पाए ✅
सहमत है तो शेयर करें ताकि आवाज बुलंद हो 💪🎯🎯
#education#india#scam#school_scam #लूट
Police issued a ₹10,000 pollution fine… on an ELECTRIC VEHICLE ⚡😂
❌No engine.
❌ No emissions.
Still “polluting” according to them.
Even after explaining it’s an EV, they refused to listen instead started adding MORE fines (tinted glass, etc.) just to justify it.
So the real question is:
Are laws being enforced… or just used to extract money? 🤔
Educated system or automated extortion?
🚨Repost for better reach
आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्राइवेट स्कूल आखिर 26 सब्जेक्ट बच्चों को रोज़ाना पढ़ाते कैसे हैं? सुबह 8 बजे से लेकर 2 बजे तक यानी सिर्फ 6 घंटे में इतना भारी सिलेबस पूरा कर दिया जाता है—यह समझ से परे है।
दूसरी कक्षा के छोटे बच्चों को, जिन्हें अभी बुनियादी चीज़ें ठीक से सीखनी चाहिए, उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कठिन विषय पढ़ाए जा रहे हैं। आजकल का सिलेबस देखकर कई बार हमें खुद पर ही शक होने लगता है कि हमने पढ़ाई की भी थी या नहीं।
पहले के समय में पढ़ाई सरल और संतुलित होती थी—हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत जैसे विषय ही मुख्य होते थे। लेकिन अब शिक्षा का स्तर समझ से ज्यादा बोझ बनता जा रहा है।
अगर समय रहते आवाज़ नहीं उठाई गई, तो प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर एक दुकान बनकर इसी तरह अभिभावकों और बच्चों पर दबाव डालते रहेंगे। अब जरूरत है कि हर नागरिक इस मुद्दे पर ध्यान दे और सही बदलाव के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करे।
#EducationSystem#SchoolPressure#StudentLife#RaiseYourVoice#StopExploitation