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@kandidsid

I stink, therefore I am Self-styled Cynic and your regular In-betweenerr

Delhi, India Katılım Temmuz 2009
53 Takip Edilen33 Takipçiler
iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
What is this hullabaloo over 500% tariff? Why can't we impose a similar tariff on just two US companies, Apple and Microsoft? #JustThinkingAloud
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iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 आपका कोई contribution होता नहीं है वीडियो और लेखन सामग्री लिखी लिखाई आ जाती है आपके पास आप सिर्फ column-inch कर हिसाब से छपवा देते हो। और हो गए पत्रकार। मैं आपको समझाना चाह रहा था कि पत्रकारिता की भी कुछ मर्यादाएँ होती हैं। आशा है आगे से ध्यान रखेंगे आप।
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iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 मुझे तो आप पर दया आती है, आपका अखबार आपका नाम प्रकाशित नहीं करता फिर आप लेख की ownership लेने के लिए उसे अपने ट्विटर पे डालते हो। आप प्रसन्न हो जाते हो और और जिसने आपको वीडियो और जानकारी लिखकर भेजी होती है वो इधर उधर डालकर अपना एजेंडा पूरा करता है। 1/2
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🇮🇳Ashok Gupta🇮🇳
🇮🇳Ashok Gupta🇮🇳@Ashok_GAKC·
@siddharth2596 @MyFusionHomes @NBTDilli @NavbharatTimes @CMOfficeUP @myogiadityanath @OfficialGNIDA @dmgbnagar @GreaterNoidaW @NandiGuptaBJP अग्रवाल साहब आप निष्पक्षता से अपना काम करते जाइए कुछ नमूने आपको हमेशा ट्रोल करेंगे। अनावश्यक ऐसे नमूने परध्यान न दें। जय हिंद।
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iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 आपके लेख को पढ़ा जिसकी क्लिपिंग आपने अपनी पोस्ट पे लगाई और आपका पोस्ट पढ़ा। विषमताएं दिखीं इसलिए कमेंट किया। आप भी ध्यान से पढ़िए जो मैंने पढ़ा शायद समझ पाएं आप। आपने किस से बात की कहीं स्पष्ट नहीं है आपके लेख में। एक तरफा लेख है। बाकी इससे ज्यादा बहस में नहीं पडूंगा मैं🙏
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Siddharth Agarwal 🇮🇳
Siddharth Agarwal 🇮🇳@siddharth2596·
@kandidsid अगर निवासी है, तो इतना ज्ञान क्यो रहे है। आप कौन होते है पता करने वाले मैने किस बात की किस से नही। दिक्कत आपको हुई खबर पर, बाक सोसायटी से आपके कोई नही बोला। इस कारण आपको प्रवक्ता बोला था
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iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 मैं तो एक रेजिडेंट की तरह बोल राह। क्या आप हमारी सोसाइटी के रेजिडेंट हैं जो AOA विरोधियों की भाषा बोलने लगे गए क्या मुझे बताना पड़ेगा कि पत्रकार हैं आप और कुछ तटस्थता की उम्मीद बाकी थी अब वो भी नहीं रही। और ये तू-तड़ाक पे उतारना जरूरी था क्या☺️☺️☺️
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Siddharth Agarwal 🇮🇳
Siddharth Agarwal 🇮🇳@siddharth2596·
@kandidsid तुमको कही ओर होना चाहिए। एओए के प्रवक्ता वाले काम करके, क्यो अपनी किरकिरी करा रहे है।
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iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 Haha, व्यक्तिगत कमेंट!!! आपको TV स्क्रीन पे होना चाहिए क्यों लेखन में अपनी प्रतिभा का ह्रास कर रहे हैं☺️☺️☺️
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Siddharth Agarwal 🇮🇳
Siddharth Agarwal 🇮🇳@siddharth2596·
@kandidsid एओए के अध्यक्ष से बात हुई, आपको अगर दिक्कत है, तो उस व्यक्ति से बात करे, जोकि दरवाजा बुरी तरह पीट रहा था। आपको दिक्कत है, तो बताओ मैं मिलवाता हूं, पीड़ित से। आपको क्या एओए ने जिम्मेदारी दी है, किसी पोस्ट पर टिप्पणी करने के लिए। आप प्रवक्ता तो नहीं #aoa के
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iStinkThr4iAm
iStinkThr4iAm@kandidsid·
@siddharth2596 आपने लिखा "जानलेवा लिफ्ट" क्या किसी की जान पे बन आयी थी? क्या आपने किसी AOA बोर्ड मेंबर से बात की इस बारे में? बस किसी रेजिडेंट ने आपको वीडियो भेजा और आपने छाप दिया! इसको कहते हैं lazy journalism
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Siddharth Agarwal 🇮🇳
Siddharth Agarwal 🇮🇳@siddharth2596·
@kandidsid इसमें गलत क्या लिखा है ये बताओ आप। सीमाएं कहां लांघी गई हैं। गहनता से वीडियो देखिए, फिर पता चलेगा किस स्थिति में वे महिला अपने बच्चे के साथ ही।
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Ravi Bhadoria
Ravi Bhadoria@ravibhadoria·
महोदय अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पीड़ित को इस मामले में कोई कागज तक नहीं दिया गया। पीड़ित के पिता चौकी और थाने के बीच धक्के खा रहे हैं। एक बच्चे पर जानलेवा हमले के मामले में क्या ऐसे ही कार्यवाही होती है?? @myogiadityanath @Uppolice @DCPCentralNoida @noidapolice @dr_maheshsharma
DCP Central Noida@DCPCentralNoida

@ravibhadoria @Uppolice @noidapolice @2_noida @tejpalnagarMLA @CMOfficeUP उक्त सम्बन्ध में थाना बिसरख पर अभियोग पंजीकृत है, आरोपी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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iStinkThr4iAm@kandidsid·
@ri017453 @OfficialGNIDA They put up their shops and carelessly throw away the waste all around when they leave. They are becoming a menace for the trees which the society's residents had planted around the society for greenery.
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Rohit Awasthi
Rohit Awasthi@ri017453·
हमारी सोसायटी Fusion Homes, Tech Zone 4, Greater Noida West & Centurion park society के बीच की रोड पर बाहर ग़ैरक़ानूनी सब्ज़ी बाज़ार ने पैर पसार लिए हैं। इनके ठेलेवाले हमारे नीम और पीपल के पेड़ों को तोड़-फोड़ रहे हैं, जो @OfficialGNIDA व सोसायटी निवासियों ने मिलकर प्यार से लगाए और संभाले थे। कई बार समझाने के बावजूद ये नहीं मान रहे। ये पेड़ हमारी साँस और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद हैं। कृपया @noidapolice , @myogioffice @myogiadityanath @CMOfficeUP @Uppolice तुरंत कार्रवाई कर इस बाज़ार को हटाएँ — वरना हरियाली और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं।
Rohit Awasthi tweet mediaRohit Awasthi tweet mediaRohit Awasthi tweet media
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iStinkThr4iAm@kandidsid·
Please comment and retweet the post for maximum reach
Pankaj Rana@PankajR50727052

@PrernaSinghIAS I hope you will acknowledge on this,as no one in authority listen to citizens complaints. I'm attaching images of MITRA app for tracking id. @OfficialGNIDA just dont listen and dispose the ticket without resolutions.

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iStinkThr4iAm@kandidsid·
@Pravendra_Sikar Gundagardi chal rahi hai society mein. AOA term March mein end ho gaya. DR ke adesh hain AOA koi neetigat nirnay nahin le sakti. Phir bhi AOA nayi security agency ko bina kisi GBM aur suchna ke jabardasti laana chah rahe the. UP Apartment Act aur Bylaws ki dhajjiyan udai jaa rahi
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Pravendra Singh Sikarwar
Pravendra Singh Sikarwar@Pravendra_Sikar·
सुरक्षा को लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की फ्यूजन होम्स सोसायटी में बवाल. दो शिफ्ट में 60 की जगह 30 सिक्युरिटी गार्ड आ रहे हैं. टावरों के बाहर भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं हैं. एक गंभीर आरोप यह भी है की पुरानी AOA बोर्ड के मेंबर फिर से सत्ता में आना चाहते हैं तो चुनाव नहीं कराया.
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iStinkThr4iAm@kandidsid·
@RebornManish नहीं पढ़ी है! भाई साब, पढिये। आज भी रिलेवेंट है, और उनके आर्ग्यूमेंट्स और विवेचना कारने का सलीका आपको कायल कर देगा। और आप समझेंगे की क्यों अम्बेडकर को पढ़ना अनिवार्य है। दो ही पोलिटिकल सोशल फिलॉसफर हुए हैं आधुनिक भारत में, एक गांधी और दूसरे अम्बेडकर।
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
मेक ए विश.. मेरे एक गुरु ने कहा था- इंसान के तीन गोल होते हैं - पर्सनल,प्रोफेशनल,सोशल। जीवन मे तीनो का संतुलन रखना रखना चाहिए। ●● मैंने यह फॉलो किया। पर इस लिहाज से विश भी 3 तरह की हो सकती हैं। पर्सनल, प्रोफेशनल, और सोशल। तो आज अगर ईश्वर मुझसे सोशल विश मांगने को कहे - तो एक चीज माँगूंगा। जातियों का खात्मा.. अम्बेडकर की ये किताब मैनें पढ़ी नही है। पर इसका शीर्षक आकर्षक है। जातियाँ हिंदुस्तान के पैरों में बंधी एक बेड़ी है। इनका विलीन हो जाना, श्रेष्ठ वरदान होगा। ●● ये समाज हमने गजब ही खाँचो में ढाला है। उम्र , वर्ण, जेंडर बेसिस पर- खुद ही इतनी सामाजिक, सांस्कृतिक वर्जनाएं ओढ़ ली, कि वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा, इन वर्जनाओं ने बेकार कर दिया। यूँ सोचिये कि समाज मे 100 लोग हैं। 25 ब्रम्हचारी है, शिक्षा ले रहे हैं। 25 वानप्रस्थी है, ब्रह्मचारियों को पढ़ा रहे है। 25 सन्यासी है। ये सब वो इकॉनमिक एक्टिविटी से दूर है। मात्र 25% गृहस्थ ही समाज मे आर्थिक योगदान कर रहे हैं। पर आधी महिलाएं है, हटा दीजिए। बची 12.5% की आबादी, आठवां हिस्सा, याने 1 व्यक्ति, बाकी 7 का बोझ ढोएगा, तो वह समाज कितना समृद्ध होगा? ●● इससे मेरा तर्क जरा स्पस्ट होगा, मगर यह उदाहरण फिट नही। पूरी डायनामिक्स बदल जाती है, जब दूसरे फैक्टर कंसीडर करें। आश्रम विभाजन तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य में था। शूद्र जो समाज का, आबादी का, असल वर्कफोर्स था। उसे तो शिक्षा और सन्यास ग्रहण करने की इजाजत ही न थी। उसे खटना था, पालने से चिता तक.. समाज में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करनी थी। कपड़े, जूते, बढई, लुहारी क्राफ्ट का काम, नाई, धोबी, पशुपालन, तेल पेरना, माल ढोना, साफ सफाई, खेत मे मजदूरी.. याने मैन्युफैक्चरिंग वही करेगा। सर्विस जनरेशन, प्रोडक्शन वही करेगा, हाथों से!! छोटे औजार, आदिम तरीको से.. ●● बिना शिक्षा, बिना औजार, बिना फंडिंग, उसे सर्विस और गुड्स पैदा करनी है। ईश्वर, राजा औऱ अफसर को चढ़ावा देना है। सोसायटी का सबसे कमजोर, बेआवाज तबका.. आपकी वर्कफोर्स है। तो कैसी वर्कफोर्स है?? स्केल नही, इनोवेशन नही, फंड्स नही, प्रतिनिधित्व नही। तो कहाँ से ये कोई बाटा, स्वारोस्की, बॉस, लेकोस्ट, प्यूमा, गुच्ची बनेंगे। कैसे हाई क्वॉलिटी, कम्पटीटिव प्राइज वाले प्रॉडक्ट और ब्राण्ड देंगे?? ●● गजब ये, कि "निम्न वर्ण" का बनाया माल बेचना उच्च कर्म था। आज भी है। ब्रांडेड शॉप में जो "ट्राइबल आर्ट" 20 हजार में बिकता है, उसे ट्राइबल की झोपड़ी में 1200 में खरीदा गया होता है। ट्रेड वस्तुतः पलटी करना है। यहां से खरीदना, लपेटना, वहां पे बेचना। पैकेजिंग, ब्रांडिंग, स्टॉक। ट्रेड की जरूरतें अलग हैं। पूंजी हो, नेटवर्क हो, बारगेन करने की क्षमता हो, हिसाब किताब की शिक्षा हो। कम तौलना, मिलावट और झूठ आता हो। मैन्युफैक्चरिंग के लिए हुनर चाहिए, तन्मयता, ईमान,लगन चाहिए। ये जिनके पास है,उनके पास फंड नही। शिक्षा, नेटवर्क, बारगेन पावर नहीं। जिनके पास है- उनके लिए मैन्युफैक्चरिंग के अधिकतर काम "नीच कर्म" है। यह सोच, पैराडॉक्स,अभाव.. जाति व्यवस्था का नतीजा है। ●● यह वर्चस्व का जरिया है। तो जन्म के नाम पर "छोटे लोगो" को बढ़त हासिल करने से रोका गया। वह शिक्षित हो जाये, ऊंचे पद पर आ जाये, ऊंची उपलब्धि हासिल हो जाये, तो भी "कोटा छाप" कहलाता है। नकार दिया जाता है। बैंको से लोन में उनकी भागीदारी देखिए, दुकान, फैक्ट्री, बिजनेस में उनका हिस्सा देखिए। टॉप 100 उद्योगपतियों में उनकी संख्या देखिए। टॉप ब्यूरोक्रेट,टीचर, लेक्चरर, आर्मी, पुलिस के ऊंचे पदों में सँख्या देखिए। कुछ तो गलत जरूर है। ●● मैं अम्बेडकराइट नही, दलित एक्टिविस्ट नही। सिम्पेथाईजर होने का दावा भी नही करता।खुद तथाकथित सवर्ण हूँ। इस नाम पर गालियां खाई, और दी हैं। पर मेरा मजबूत मानना है कि मैजोरिटी इंडियन वर्कफोर्स, जो परंपरागत रूप से मैन्युफैक्चरर और प्रोड्यूसर है, उसे फंड्स,एजुकेशन और रिप्रेजेंटेशन मिलेगा, तो हम सब कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेंगे। ●● यह ठीक है कि नौकरियों में आरक्षण, सन्सद विधानसभा में आरक्षण दिये। पर कितनी सीटें है सारी विधायिकाओं में, कितने पद है नौकरशाही में? 10-15 हजार विधायक सांसद दिये?2-4 करोड़ सरकारी नौकर बनाये??ये महज लीपापोती है। जरूरत असल इन्वेस्टमेन्ट की है, ट्रू एम्पावरमेंट की है। ये लोग, ग्रोथ के लिमिटिंग फैक्टर हैं। तो जितना ये ग्रो करेंगे, भारत की रफ्तार सीधे उतनी बढ़ेगी। ●● याने जाति का विलीन होना, एक जरूरत है, देशभक्ति है, विश है, वरदान है। जन्मदिन है। ईश्वर वरदान मांगने को कहे, तो यही माँगूंगा, जिस शीर्षक की किताब अम्बेडकर ने लिखी। जातियां खत्म हों। 🙏
Manish Singh tweet media
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iStinkThr4iAm@kandidsid·
@Fusionhomesgr @Uppolice @CMOfficeUP कालातीत AOA मनमर्जी कर रही है और सामान्य रेसिडेंट्स को आतंकित कर रही है, बिजली की चोरी धडल्ले से चल रही है।
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