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“राजनीतिक लोकतंत्र तब तक टिक नहीं सकता, जब तक उसके आधार पर सामाजिक लोकतंत्र न हो। सामाजिक लोकतंत्र से क्या मतलब है? इसका मतलब है एक जीवन-शैली, जो स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और बंधुत्व (Fraternity) को जीवन के मूल सिद्धांतों के रूप में मानती हो।”
डॉ भीमराव अंबेडकर
सरल हिंदी में समझें:डॉ. अंबेडकर कह रहे हैं कि सिर्फ़ वोट देने और सरकार चुनने वाला लोकतंत्र (राजनीतिक लोकतंत्र) अकेला पर्याप्त नहीं है। अगर समाज में जात-पात, छुआछूत, अमीर-गरीब और असमानता बनी रही, तो यह लोकतंत्र लंबे समय तक नहीं चल सकता। सामाजिक लोकतंत्र का मतलब है कि समाज में हर व्यक्ति को स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के साथ जीने का अधिकार मिले। यही असली लोकतंत्र की नींव है।यह उद्धरण डॉ. अंबेडकर के संविधान सभा के भाषणों में से एक बहुत महत्वपूर्ण विचार है, जिसमें उन्होंने बताया कि राजनीतिक आजादी के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी जरूरी है।

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