किरतेश retweetledi

पहले विवेक मर जाता है
जनता ने अपना अमूल्य मत देकर उन्हें जनप्रतिनिधि बनाया है। ऐसे में जिला कलेक्ट्रेट के भीतर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में स्वयं पर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या का प्रयास करना न केवल महज नौटंकी प्रतीत होता है, बल्कि यह बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम भी है।
जो युवा अनेक लोगों के लिए आदर्श माना जाता हो, उसे इस प्रकार की नौटंकियां और अमर्यादित आचरण शोभा नहीं देता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के अनेक लोकतांत्रिक और मर्यादित तरीके मौजूद हैं, लेकिन आज की यह घटना प्रदेश की राजनीति में काले अक्षरों में दर्ज की जाएगी।

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