सचिन अग्रवाल 🇮🇳
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सचिन अग्रवाल 🇮🇳
@luvsachin
#भारतीय #हिंदू #राष्ट्रभक्त




गणेश शंकर विद्यार्थी जी का ट्वीट viral हैं. विद्यार्थी जी के बारे में कुछ जानकारियां और देखें उन्होंने क्या-क्या लिखा. - उनकी शहादत के बाद गांधीजी ने 'यंग इंडिया’ में लिखा: “उसका खून अंत में दोनों मजहबों को आपस में जोड़ने के लिए सीमेंट का काम करेगा. कोई कृत्रिम समझौता हमारे हृदयों को आपस में नहीं जोड़ सकता. पर गणेश शंकर विद्यार्थी ने जिस वीरता का परिचय दिया है, वह अंत में पत्थर से पत्थर हृदय को भी पिघलाकर एक कर देगी. ...वह मरे नहीं, आज हम सबसे कहीं अधिक सच्चे रूप में जीवित हैं" - विद्यार्थी जी अपनी पत्रकारिता से लोगों को देश के लिए खड़े होने का सन्देश देते थे. अलग धर्मों में भाईचारा हो इसके लिए उन्होंने खूब लिखा. देखें ‘प्रताप’ में उनका 1924 का लेख: ‘‘इस समय देश में धर्म की धूम है. उत्पात किए जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर...रमुआ पासी और बुद्धू मियां धर्म और ईमान को जानें या न जानें लेकिन उसके नाम पर उबल पड़ते हैं और जान लेने व जान देने के लिए तैयार हो जाते हैं. .. साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में यह बात अच्छी तरह बैठी है कि धर्म और ईमान की रक्षा के लिए प्राण तक दे देना वाजिब है. बेचारा साधारण आदमी धर्म के तत्वों को क्या जाने. लकीर पीटते रहना ही वह अपना धर्म समझता है. उसकी इस अवस्था का चालाक लोग बेजा फायदा उठा रहे हैं.’’ - 'हिन्दू राष्ट्र' पर विद्यार्थी जी ने लिखा: ‘‘हमें जानबूझकर मूर्ख नहीं बनना चाहिए और ग़लत रास्ते नहीं अपनाने चाहिए. हिन्दू राष्ट्र-हिन्दू राष्ट्र चिल्लाने वाले भारी भूल कर रहे हैं. इन लोगों ने अभी तक राष्ट्र शब्द का अर्थ ही नहीं समझा है." - वैसे उन्होंने संयुक्त प्रांत, करीब करीब आज का उत्तर प्रदेश, में कांग्रेस का नेतृत्व किया. उन्हें राज्य कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया गया. क्या और पढ़ना चाहेंगे? आज उनको पढ़ने की बहुत ज़रुरत है आपकी राय. Follow करें जवाब दूंगा, भाषा में संयम न हुआ तो block



इलाहाबाद में 27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आज़ाद पुलिस मुठभेड़ में शहीद हुए. इसके कुछ ही हफ्तों बाद, 23 मार्च 1931 को लाहौर में भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को फाँसी दी गई. इन घटनाओं के बाद देशभर में अंग्रेज़ों के खिलाफ बहुत नाराज़गी थी. उसी दौरान कई जगहों दंगा शुरू हुआ. कानपुर भी इससे अछूता नहीं रहा. ऐसे समय में निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए मशहूर गणेश शंकर विद्यार्थी दंगे को रोकने के लिए मैदान में उतर पड़े. उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई हिंदू और मुस्लिम परिवारों को बचाया. 25 मार्च 1931 को सांप्रदायिक हिंसा को रोकने की कोशिश करते हुए उन्होंने अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी. आज, जब टीवी चैनलों पर अक्सर हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को उछाला जाता है, ऐसे में Ganesh Shankar Vidyarthi जी के आदर्शों को याद करना बेहद ज़रूरी है. यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. 🙏 #HinduMuslim #ChandrashekharAzad #BhagatSingh #Rajguru #Sukhdev #Kanpur













