नौतपा की इस जानलेवा और भीषण गर्मी में, जब तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है, उत्तर प्रदेश के शिक्षक अपना ग्रीष्मावकाश कुर्बान करके लगातार विभागीय ड्यूटी कर रहे हैं। बिना EL के यह काम कराना शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है
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दिल्ली,राजस्थानऔरMPकी सरकारों ने शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें EL की सुविधा दीहै। UP का बेसिक शिक्षक भी इस नौतपा की तपती धूप में फील्ड और दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।माननीय मुख्यमंत्री जी,आपसे न्याय की उम्मीद है।
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मुख्यमंत्री जी, अन्य राज्यों की तरह UP के शिक्षकों को भी EL देकर उनके साथ समानता और न्याय का व्यवहार करें ।
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ग्रीष्मावकाश में काम करने के बदले शिक्षकों को EL मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। मुख्यमंत्री जी, कृपया संज्ञान लें।
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माननीय मुख्यमंत्री जी, नौतपा की इस भयानक लू में भी शिक्षक पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और अपना ग्रीष्मावकाश गंवा रहे हैं। इस निस्वार्थ सेवा के बदले शिक्षकों को 'अर्जित अवकाश' की सौगात देकर प्रोत्साहित करने की कृपा करें।
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जब अन्य राज्यों (दिल्ली, राजस्थान, MP) में शिक्षकों को EL मिलती है, तो उत्तर प्रदेश UP के शिक्षकों को क्यों नहीं?
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बिना किसी आराम और अवकाश के लगातार काम करने से शिक्षकों में मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है। ग्रीष्मावकाश में काम के बदले अर्जित अवकाश (EL) पाना हमारा अधिकार है। उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन है कि शिक्षकों की इस जायज मांग को तुरंत पूरा करे।
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लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ, बिना किसी विश्राम और अवकाश के निरंतर ड्यूटी, शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका रही है।
ग्रीष्मावकाश, जो शिक्षकों के पुनः ऊर्जा प्राप्त करने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर होना चाहिए, वह भी अब कार्यों में बीत रहा है।
ऐसी स्थिति में ग्रीष्मावकाश में कराए गए कार्य के बदले अर्जित अवकाश (EL) देना कोई उपकार नहीं, बल्कि शिक्षकों का न्यायोचित अधिकार है।
उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र निवेदन है कि शिक्षकों की इस संवेदनशील और उचित मांग को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले शिक्षक सम्मान और संतुलन के साथ अपना दायित्व निभा सकें।