
Prashant Nilatkar
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Prashant Nilatkar
@nilatkar
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Nagpur Katılım Şubat 2012
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इस लड़की का नाम नेहा राजपूत हैं , इसके माता पिता राम और बुद्ध के बारे में बता रहे थे ,
इस पर इसने पलट कर पूछ लिया कि प्रभु श्री राम ने माता सीता के साथ गलत क्यों किया ?
अगर बुद्ध भगवान हैं तो बीबी बच्चों को सोता छोड़ कर आधी रात में क्यों भाग गए थे?
यही काम उनकी पत्नी करती तो समाज क्या कहता ?
ऐसे तार्किक सवाल सुनने के बाद उसके माता पिता चुप हो गए , कोई जवाब नहीं दे पाए !
आपको क्या लगता हैं , ऐसे सवाल उठना सही है या जो सदियों से चीजें चली आ रही हैं, उसे आंख बंद कर के मान लेना चाहिए ?


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@ScienceJourney2 विदिशा के उदयगिरी गुफाओं के शिल्प इस
short video में देखिये. ये गुप्तकाल के बौद्ध
शिल्प है, पर उसका हिंदूकरण किया गया है.
कृपया इस पर कुछ बताए... IMP.
youtube.com/shorts/NFCASs4…

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कुंतल (कर्नाटक) क्षेत्र के चुटु वंश के नागवंशी
राजा चुटकुलानंद (पहली सदी) का सिक्का-
एक तरफ "स्तूप" के साथ "राजा चुटकुलानंद"
लिखा है और दूसरी और "बोधिवृक्ष" है.
"छोटा नागपुर" का मूल नाम "चुटिया नागपुर" है.
youtube.com/watch?v=tBlbuA…
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह

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उत्तर प्रदेश के देवगढ़ स्थित दशावतार मंदिर
में यह बौद्ध शिल्प मिलता है, जो गुप्तकाल का
है. शेषनाग पर एक बोधिसत्व लेटे हुए है.
ऊपर के कमल पुष्प पर ४ मुख वाले बुद्ध है.
संबंधित video link-
youtube.com/watch?v=wFnikx…

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@DrLaxman_Yadav हिंदू राज का विकल्प बताने में डर लगता है?
तुम चाहते हो की लोग शूद्र बने रहे?
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डॉ. आंबेडकर RSS की विचारधारा के ख़िलाफ़ खड़े थे।
एक तरफ़ RSS का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है। वहीं दूसरी तरफ़ डॉ. आंबेडकर लिखते हैं कि “अगर हिन्दू राज हकीकत बनता है, तब वह इस मुल्क के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। हिन्दू कुछ भी कहें, हिन्दू धर्म स्वतन्त्रता, समता और बन्धुता के लिए खतरा है। इस पैमाने पर वह लोकतन्त्र के साथ मेल नहीं खाता है। हिन्दू राज को किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए।” (पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इण्डिया, पृ.338)।
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उड़ने वाले बौद्ध भिक्षु ✈️
बौद्ध ग्रन्थ 'दीपवंश' में सम्राट अशोक के बेटे महेंद्र की श्रीलंका की हवाई यात्रा का वर्णन है। 🚀
घटनाक्रम कुछ ऐसा है:
विदिशा में आराम: ३० दिन मज़े से विदिशा में रहने के बाद बौद्ध महेंद्र जी को लगा कि अब श्रीलंका जाना चाहिए।
नो रनवे, नो टिकट: बौद्ध भिक्षु महेंद्र ने अपने 6 साथियों के साथ 'टेक-ऑफ' किया। ग्रंथ कहता है कि वे हंसों की तरह हवा में उड़ते हुए गए। (ट्रैफिक जाम के ज़माने में यह टेक्नोलॉजी बहुत काम की हैं 🕊️)

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@BishtLokinder The kings of the Gupta dynasty were Buddhists. They were educated at Nalanda. Budhagupta's son was "Tathagata" Gupta! The script of the inscriptions is Dhamma (Brahmi) script...
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The Budhagupta Garuda pillar at Eran, 5th CE, (My Click) raised in honour of Janardana. (Budhagupta, was a Gupta emperor and the successor of Kumaragupta II). This pillar is located right on the division line in front of the Varaha temple and Vishnu temple. On top of the pillar is a double statue of Garuda, holding a serpent in his hands, with a chakra wheel in the back. Below is an inscription in Sanskrit The letters are half an inch in size. The shape of the letters is of the northern style and are similar to those used in the inscriptions of Samudragupta. In the third line of the inscription, where the Gupta era date is given, the numbers have been used. This date is 484 of the Gupta era (which corresponds to the time when Budhagupta was ruling as a Gupta emperor). It is stated in the inscription that during the reign of Budhagupta, a feudatory Maharaja named Surashmichandra was ruling the region between the Yamuna and Narmada rivers. 1/2……..




English

The inscription dates back to approximately 495–500 CE. It was discovered in Kura, located in the Salt Range of Punjab (Present in Pakistan).
This record is historically significant as it shows the Alchon Huna king, Toramana Shaha, adopting local Indian royal titles such as Rajadhiraja (King of Kings) and Maharaja.
It records the gift (deyadharma) of a Buddhist monastery (vihara) by a person named Rotta Siddhavriddhi, was dedicated to the Mahishasaka school of Buddhism.


English

@news24tvchannel @nitin_gadkari प्राचीन संस्कृत बौद्ध आचार्यों ने बनाई थी.
देवनागरी लिपि वाली संस्कृत १२वी सदी के बाद आई.
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"खामेनेई साहब ने बताया कि पर्शियन भाषा संस्कृत भाषा से आई है"
◆ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को याद करते हुए कहा
@nitin_gadkari | #NitinGadkari | #AyatollahAliKhamenei | Nitin Gadkari | Ayatollah Ali Khamenei

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@Shubhamshuklamp ब्राह्मणों को टिकट पाने की बजाय अपनी वर्ण व्यवस्था का पालन करना चाहिए और अपना काम करना चाहिए.
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तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में मुख्य 4 बड़ी पार्टियों में (DMK, AIDMK, BJP, INC) में अलग अलग पार्टियों या गठबंधन में:-
- मुस्लिम को टिकट मिला है
- ईसाई को टिकट मिला है
- OBC को अधिकांश अनारक्षित सीटों पर टिकट मिला है
- SC-ST के उम्मीदवारों को भी टिकट मिला है
- लेकिन ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया गया है।
- बस यही बताना था। यही समझाना था। खबर खत्म हुई।
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@sachinsgaur "दंडामिस" बौद्ध भिक्षु था.
कुलदीप सिंह की "इंडिका" पढ़िये.
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पत्रकार अमित पांडेय की कलम से। बहुत शानदार लिखा है। सबको ये लेख पढ़ना चाहिए और ब्राह्मणो से सीखना चाहिए।
ब्राह्मण कभी लड़कर नहीं जीता, बल्कि खुद को बदलकर जीता।
विश्व विजय के अभियान पर निकला सिकंदर जब भारत पहुंचा, तब उसका सामना कुछ ऐसे ब्राह्मणों से हुआ जो उसकी विशाल सेना ने नहीं डरे। ऐसे ही एक ब्राह्मण थे दंडमिस। जब सिकंदर का दूत उनके पास पहुंचा और बोला -
''दुनिया के विजेता और ईश्वर के पुत्र सिकंदर ने तुम्हें बुलाया है। अगर तुम आओगे तो पुरस्कार पाओगे, नहीं तो तुम्हारा सिर काट दिया जाएगा।''
दंडमिस ने मुस्कुराकर कहा, ''सिकंदर मेरा शरीर ले सकता है, मेरी आत्मा नहीं। मेरा यह शरीर मिट्टी है, यदि वह इसे नष्ट कर दे, तो मैं मुक्त हो जाऊंगा।'' इसके बाद सिकंदर खुद दंडमिस से मिलने गया। ब्राह्मणों ने वेदांत को हथियार बना लिया और निर्भय हो गए।
श्रमण काल में जब बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणों को चुनौती दी, तो उन्होंने मांसाहार त्याग कर शाकाहार अपनाया, भव्य मंदिरों की स्थापना की और जटिल वैदिक ज्ञान को भक्ति की सरल धारा में बदल दिया।
जब इस्लाम की चुनौती आई तो कान्यकुब्ज ब्राह्मण रामानंदाचार्य ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए एक चर्मकार (संत रैदास), एक जुलाहा (कबीर), एक जाट किसान (संत धन्ना) और एक नाई (सेन महाराज) को अपना शिष्य बनाया। उनकी ही शिष्य परंपरा में आगे चलकर तुलसीदास हुए। इस बार जाति और भाषा के बंधनों को तोड़कर संस्कृत को संस्कृति में बदल दिया गया।
आधुनिककाल में जब पेरियार ने 'ब्राह्मण-मुक्त' समाज की वकालत की और तमिलनाडु तथा दूसरे दक्षिण भारतीय राज्यों में ब्राह्मणों की राजनैतिक सत्ता पूरी तरह खत्म हो गई, तो उन्होंने शिकायत करने की जगह अपनी सांस्कृतिक पूंजी को तकनीकी पूंजी में बदल दिया।
नतीजा आज पूरी दुनिया देख रही है:
सुंदर पिचाई - गूगल सीईओ,
सत्या नडेला - माइक्रोसॉफ्ट सीईओ,
शांतनु नारायण - एडोब सीईओ,
अरविंद कृष्णा - आईबीएम सीईओ,
नील मोहन - यूट्यूब सीईओ,
एस वेंकटकृष्णन - बार्कलेज सीईओ,
...सभी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण हैं। उनकी मेधा आज वैश्विक नियमों को तय कर रही है। हर बार ब्राह्मण दूसरे की लकीर मिटाकर नहीं, बल्कि उससे बड़ी लकीर खींच कर जीता।
अब तक बात अतीत की हुई... अगर आप चाहेंगे तो अगली कुछ पोस्ट में भविष्य की राह पर भी चर्चा होगी।

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