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Niraj Kumar
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Niraj Kumar
@nirajishaan19
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New Delhi, India Katılım Eylül 2021
449 Takip Edilen127 Takipçiler

@news24tvchannel Delhi govt ko ab kya hi bolu, sab bhagwan bharose hai🤐
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दिल्ली की बिगड़ती हवा पर एक विदेशी का वायरल इंस्टाग्राम वीडियो फिर चर्चा में है
◆ ‘ऑसी भाई’ एंडी इवांस ने 60 दिनों में एयर प्यूरीफायर का फिल्टर काला पड़ते दिखाया
◆ वीडियो ने लोगों को चौंकाया, दो महीने में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता गहराई
#DelhiPollution | Air Quality | #AirPurifier | #Pollution | #SmogDelhi | #ViralVideo
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@saurabhtop @TheLallantop नई शुरुआत के लिए ख़ूब शुभकामनाएं सर...
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यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया
हम न होंगे कोई हमसा होगा
शुक्रिया @TheLallantop
मान, पहचान और ज्ञान के लिए.
एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी
( शेर नासिर काज़मी की कलम से)

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वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के पीछे उसके विशाल तेल भंडार और उसपर क़ब्ज़े का इरादा जगज़ाहिर है। राष्ट्रपति ट्रंप इसे छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं।
लेकिन इस हमले एक और बड़ा घरेलू राजनीतिक कारण भी है- असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना। यह भी इतना जाना-पहचाना है कि हँसी आती है।
1997 के आसपास एक फिल्म आई थी- Wag The Dog (डस्टिन हॉफमैन और राबर्ट डी-नीरो)।इस फिल्म की कहानी यह है कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति अगले चुनाव की तैयारी कर रहे हैं लेकिन तभी एक सेक्स स्कैंडल में फँस जाते हैं। राजनीतिक मुश्किलें बढ़ें और चुनाव ख़तरे में पड़ जाए, इससे पहले राष्ट्रपति का पीआर (स्पिन मास्टर) एक हालीवुड डायरेक्टर को हायर करता है।
वह डायरेक्टर एक नक़ली युद्ध (अल्बानिया) का सेट तैयार करता है, हमले और युद्ध के सीन बनाता और पब्लिक को दिखाता है। स्कैंडल पीछे चला जाता है। राजनीतिक माहौल बदल जाता है। राष्ट्रपति चुनाव जीत जाता है।
यह कहानी अमेरिका और दुनिया के कई देशों में बार-बार दोहराई गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह पहला साल है। लेकिन पहले साल में ही उनकी अप्रूवल रेटिंग 36-41 फीसदी तक रह गई है जबकि डिस्प्रूवल 58 से 62 फीसदी तक पहुंच गई है। यह सीएनएन का पोल ऑफ पोल्स है:
edition.cnn.com/polling/approv…
एपस्टीन फ़ाइल के राज धीरे-धीरे खुल रहे हैं। मागा समर्थकों में झगड़े बढ़ रहे हैं। टूटन शुरू हो गयी है। राजनीतिक मुश्किलें बढ़ रही हैं। इस साल अमेरिकी संसद-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट के मिड टर्म चुनाव भी हैं।
माहौल बदलना और ध्यान भटकाना ज़रूरी हो गया था।
वेनेजुएला से साफ्ट टार्गेट और क्या हो सकता था?
जहां इतना तेल, मतलब सउदी अरब से भी ज्यादा तेल है।ताक़तवर अमेरिकी आयल लॉबी साथ रहेगी। आक्रामक इमिग्रेशन नीतियों से नाराज़ ट्रंप समर्थक हिस्पैनिक वोटरों का साथ मिलेगा।
बाक़ी राजनीतिक विज्ञान में इसे सिर्फ़ एक नाम से जाना जाता है- #साम्राज्यवाद।
बाक़ी “लोकतंत्र, मानवाधिकार, शांति” या “ड्रग कार्टेल और भ्रष्टाचार” वग़ैरह-वग़ैरह बकवास या “स्पिन” है।
#NicolasMaduro #Venezuela
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हमारे वतन की नई ज़िन्दगी हो,
नई ज़िन्दगी इक मुकम्मिल ख़ुशी हो।
नया हो गुलिस्ताँ नई बुलबुलें हों,
मुहब्बत की कोई नई रागिनी हो।
न हो कोई राजा, न हो रंक कोई,
सभी हों बराबर सभी आदमी हों।..
सभी होंठ आज़ाद हों मयक़दे में,
कि गंगो-जमन जैसी दरियादिली हो।
नए फ़ैसले हों नई कोशिशें हों,
नई मंज़िलों की कशिश भी नई हो।- गोरख पांडेय
आप सभी मित्रो को नया साल मुबारक!

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‘CBI का IO मिला,जज ने पैसे खाए’ Unnao Rape Victim ने BJP MLA रहे कुलदीप सिंह सेंगर के साथ-साथ किन पर गंभीर आरोप लगाए?
youtu.be/NQ0KybMoEb4
Watch Full Interview on @thenewspinch YouTube Channel with @Abhinav_Pan
#UnnaoCase

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मैं पत्रकारिता के अपने विद्यार्थियों को, और कई विषयों के साथ पिछले कई सालों से मीडिया और पत्रकारिता के एथिक्स और मूल्यों के बारे में पढ़ाता रहा हूँ।
लेकिन मेरे विद्यार्थियों को यह लगता है कि आज न्यूज़रूम में एथिक्स और उसके मूल्य बेमानी हो चुके हैं।यह केवल कक्षाओं और किताबों में है।वास्तविक और प्रोफेशनल जीवन में उसे कोई नहीं पूछता है।
देर-सवेर विद्यार्थियों की ओर से यह सवाल आ ही जाता है: “सर, ये सब किताबों की बातें हैं।आज के न्यूज़रूम में कौन एथिक्स की परवाह करता है?”
मैं यह जवाब देता हूँ- तुम्हारा सवाल बिल्कुल जायज़ है। हाँ, आज कई जगह पत्रकारिता पर दबाव हैं- राजनीति का, बड़ी पूंजी और कॉरपोरेट का, टीआरपी और क्लिकबेट का।
ऐसे में, नैतिकता की बातें सचमुच आदर्श लगती हैं, ज़मीन से कटे हुए शब्दों की तरह।
लेकिन ज़रा सोचो- अगर पत्रकारिता का मक़सद सच पर पर्दा डालना और झूठ परोसना हो; प्रोपैगंडा करना हो; सिर्फ़ किसी तरह ध्यान खींचना हो; अगर खबर का मूल्य सिर्फ़ उसकी छिछली “वायरलिटी” हो तो फिर पत्रकार और प्रचारक/ में फर्क क्या रह जाएगा?
आखिर पत्रकारिता की ज़रूरत क्या है? अगर हम यह मानते हैं कि पत्रकारिता की असली पहचान और उसका पहला लक्ष्य सत्य की खोज है और लोकतंत्र में सत्ता और ताक़तवर संस्थाओं की जवाबदेही तय करना है।
यह दोनों तभी संभव हैं जब हमारे भीतर एक नैतिक कम्पास हो- जो हमें बताता रहे कि क्या सही है, क्या ग़लत। एथिक्स कोई नियमों की सूची नहीं है, यह असल में, हमारे-तुम्हारे भीतर की आवाज़ है जो कहती है-
“मैं झूठ नहीं लिखूंगा।”
“मैं किसी की गरिमा नहीं कुचलूंगा।”
“मैं सत्ता के सामने सच बोलने से नहीं डरूंगा।”
शायद तुम्हें लगे कि इस रास्ते पर चलने वाले अकेले हैं। लेकिन याद रखो, हर सच्चे बदलाव की शुरुआत एक अकेले व्यक्ति से ही होती है। हर वह पत्रकार जो भीड़ से अलग खड़ा होता है, वही पत्रकारिता को ज़िंदा रखता है।
एथिक्स अगर कई छोटे-बड़े न्यूज़रूम में कमज़ोर पड़ गए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि वे बेमानी हो गए हैं।इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि अब उन्हें हमें-तुम्हें जिंदा रखना है।इसलिए उन्हें पढ़ना और समझना ज़रूरी है।
थोड़ा-बहुत समझौता सभी करते हैं लेकिन हमारा नैतिक कंपास उसकी लक्ष्मण रेखा तय करने में मदद करता है कि इससे आगे नहीं।जहां लोगों का जीवन दाँव पर लगा हो, सामाजिक सौहार्द खतरे में हो और सच को पूरी तरह दबा देने की कोशिश हो, वहाँ यही नैतिक कंपास हमारी रीढ़ को झुकने से बचाता है।
वहीं हमें पूरी तरह से फिसलने और अनैतिकता के कीचड़ में सनने से बचाता है।
हाँ, अगर सब समझौता कर लेंगे, तो फिर पत्रकार कौन रहेगा?
#MediaEthics #Journalism #Truth #JournalisticValues

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हिंदी पत्रकारिता अपने 200 साल पूरे कर रही है, उसकी इस यात्रा के एक चमकते एक्टिविस्ट संपादक और स्वतंत्रता सेनानी #गणेश_शंकर_विद्यार्थी का आज जन्मदिन है।
उनकी जन्म जयंती पर उन्हें और उनके संपादन में निकले #प्रताप की पत्रकारिता और उसके आदर्शों और मूल्यों को याद करने का दिन है।
जब ‘प्रताप’ शुरू हुआ तो उसके संपादकीय आदर्श को सामने रखते हुए विद्यार्थी जी ने लिखा:
“…हम अपने देश और समाज की सेवा के पवित्र काम का भार अपने ऊपर लेते हैं. हम अपने भाइयों और बहनों को उनके कर्तव्य और अधिकार समझाने का यथाशक्ति प्रयत्न करेंगे. राजा और प्रजा में, एक जाति और दूसरी जाति में, एक संस्था और दूसरी संस्था में बैर और विरोध, अशांति और असंतोष न होने देना हम अपना परम कर्तव्य समझेंगे…
किसी की प्रशंसा या अप्रशंसा, किसी की प्रसन्नता या अप्रसन्नता, किसी की घुड़की या धमकी हमें अपने सुमार्ग से विचलित न कर सकेगी. सत्य और न्याय हमारे भीतरी पथ प्रदर्शक होंगे. सांप्रदायिक और व्यक्तिगत झगड़ों से ‘प्रताप’ सदा अलग रहने की कोशिश करेगा. उसका जन्म किसी विशेष सभा, संस्था, व्यक्ति या मत के पालन-पोषण, रक्षण या विरोध के लिए नहीं हुआ है, किन्तु उसका मत स्वातंत्र्य विचार और उसका धर्म सत्य होगा…”
#GaneshShankarVidyarthi #Pratap

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खबर में डूब गए हैं हमारे पांडे जी. अपनी हर रिपोर्ट में कमाल कर रहे हैं विधायक जी.
बहुत बड़ा मिशन बना लिया है जनहित के मुद्दों को. सच में, ग्राउंड और जनता से बड़ा कोई नहीं.
शानदार दोस्त @Abhinav_Pan 👍
Abhinav Pandey@Abhinav_Pan
बहुत मुश्किल होता है कई बार पत्रकार होते हुए भी भावनाओं पर कंट्रोल में। यहां नहीं कर पाया किसी फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाने से बेहतर हमने सोचा ये डॉक्यूमेंट्री जिसपर बनी है,जिनके पास ना मोबाइल,TV नहीं है,उन्हें दिखाया जाए।पहला Premiere मुसहर टोली में
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असतो मा सद्गमय…तमसो मा ज्योतिर्गमय..!
असत्य से सत्य की ओर…अंधकार/अज्ञानता से प्रकाश की ओर।
आप सभी मित्रो को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बचपन में हम गाँव पर माँ-आजी-बड़ी मां-चाची और भाभी के साथ घर के कमरों में सूप बजाते हुए गाते जाते थे- अइसर-पइसर, दलिद्दर निकसे; लक्ष्मी घर वास हो। आप सब के लिए वही शुभकामनाएँ।
सुनिए उस्ताद फरीद अयाज़ और उस्ताद अबू मुहम्मद क़व्वाल से राग तिलक कामोद बंदिश और तराना देस में माँ लक्ष्मी की स्तुति- मंगल करन सुंदर गजगामिनी..
youtu.be/hA4XrhQ1Isw?si…

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ये वेंडर है या रेलवे स्टेशन का गुंडा?
श्रीमान @AshwiniVaishnaw जी एवं @RailMinIndia इस तरह के गुंडों पर लगाम कब लगेगी?
लोग अपने घर परिवार से दूर सैकड़ों हजारों किलोमीटर का सफर रेलवे से करते है। क्या भारतीय रेलवे यात्रियों के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी नहीं ले सकता?
इंसानियत को शर्मसार करने वाला ये वायरल वीडियो जबलपुर रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा हैं। जहां एक यात्री ने समोसे के पैसे PhonePe से देने की कोशिश की, लेकिन भुगतान असफल रहा और ट्रेन चल पड़ी। इतनी सी बात पर समोसा विक्रेता ने यात्री की कॉलर पकड़ ली, उसे अपमानित किया और जबरन पैसे की मांग की। ट्रेन पकड़ने की जल्दी में यात्री को अपनी घड़ी उतारकर देनी पड़ी।
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UP : मेरठ में शादी के लिए बुक की थी कार, नहीं मिली तो शोरूम के बाहर किसान धरने पर बैठ गए
◆ आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी बहन की शादी के लिए एक कार बुक की थी और उसका भुगतान भी कर दिया था
◆ लेकिन शोरूम ने कार किसी और को बेच दी और कार बदलने के लिए 50,000 रुपये अधिक मांगे, इससे नाराज किसानों ने शोरूम के बाहर धरना दिया
#Meerut | Meerut | #UttarPradesh | Uttar Pradesh
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