

paaruni
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कुछ आदमी अपने समय में बहुत विजनरी माने जाते हैं लेकिन समय के साथ उनकी असलियत सामने आती है तो बहुत औसत लगने लगते हैं! यही इनफ़ोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति के साथ हो रहा है! अपने समय में मिसाल रचने वाले नारायणमूर्ति बाद में रिस्क से डरने लगे! विज़न को दरकिनार करने लगे! उसका नतीजा आज देख सकते हैं! आज से दस साल पहले उनकी कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस में इन्वेस्ट करने की बात की तो उन्हें खारिज किया गया! जब उन्होंने कंपनी छोड़ी तो इसे भी एक कारण बताया!। विशाल सिक्का उस समय इसमें काम करना शुरू करना चाह रहे जब चीन ने भी पूरी तरह इसमें काम शुरू नहीं किया था! वही तब नारायणमूर्ति ने पब्लिक मंच से आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस को खारिज किया! बाद में नारायणमूर्ति का फोकस लोगों के काम करने के घंटे गिनने में बीतने लगा! आज यही पूरी आईटी इंडस्ट्री को निगल रही है! गारा विशाल सिक्का की बात तब मान ली गयी होती तो भारत इस मामले में पिछड़ा नहीं होता!










