PARDEEP KUMAR

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PARDEEP KUMAR

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@pardeepsaurer

An Indian National Highlighting National concern issues and policies that requires considerationupto last common man. Zero tolerance towards corruption.

Katılım Şubat 2014
156 Takip Edilen23 Takipçiler
PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@NHAI_Official @nitin_gadkari After implementing the Fastag more than 50 % of lanes are closed at toll plaza deliberately. Only 2-3 are operational. Why not reserve some lanes for paid user only and one lane for Fokat Class / Exempted.
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@NHAI_Official @nitin_gadkari Respected Sir , Now a days on most of toll plaza like CHHARA out of 5/6 lanes only 2 are working and remaining are deliberately closed. This is not justified. For this toll plaza I have already raised complaint 6 times over safety issue.
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@TrafficGGM @DGPHaryana @police_haryana @gurgaonpolice Respected Sir , Honestly, For HSRP on dumpers and trucks , there is clear negligence . On NH 48 including Kherki toll plaza , every 5 minutes you will find minimum 1 dumper with either defective HSRP or movable front side HSRP How many challan we make on NH48 for HSRP per day?
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Gurugram Traffic Police
Greased plates won't save you from the law! Traffic Inspector Savita impounded 2 trucks today with pending challans of ₹1,30,150 & ₹36,500. Special drive continues against those with 90+ days of unpaid fines and tampered number plates. Follow rules, avoid impoundment! #Gurugram #TrafficSafety #SmartPolicing
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अपणा महेंद्रगढ़
रेवाड़ी के रामगढ़-भगवानपुर गांव में 200 बेड के सरकारी अस्पताल की मांग को लेकर चल रहा धरना अब ग्रामीणों की एक बड़ी जीत के रूप में दर्ज हो गया है। यह धरना लगभग 319–320 दिन तक चला और अंततः मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मौके पर पहुंचने, आश्वासन देने और धरना समाप्त करवाने के साथ खत्म हुआ। यह तथ्य अपने आप में बहुत कुछ कहता है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्रामीणों को लगभग एक वर्ष तक धूप, सर्दी और बरसात झेलकर सड़क पर बैठना पड़ा, सिर्फ इसलिए कि सरकार अपने ही किए वादों को याद करे और उन्हें सुनने के लिए तैयार हो। 320 दिन सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और नौजवानों के धैर्य, अनुशासन और लोकतांत्रिक संघर्ष की कीमत है। यह भी उतना ही कड़वा सच है कि इतने लंबे समय तक चले इस धरने के दौरान सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कई लोग, जिनके दफ्तर और घर रामपुरा हाउस से लेकर जिला मुख्यालयों तक फैले हैं, न तो स्वयं वहां पहुंचे और न ही उन्होंने गंभीरता से पहल की; अंत में जब मुख्यमंत्री को खुद आकर स्थिति संभालनी पड़ी, तभी प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व ने हरकत दिखाई। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की असली परीक्षा चुनावी भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे आंदोलनों के दौरान उनके व्यवहार से होती है – और इस कसौटी पर यह पूरा प्रकरण व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है। फिर भी, इतना लंबा संघर्ष व्यर्थ नहीं गया। मुख्यमंत्री द्वारा गांव की जमीन पर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज/अस्पताल और खेल संबंधी ढांचे के निर्माण की घोषणा, और आश्वासन के आधार पर धरना समाप्त होना यह दिखाता है कि सतत, शांतिपूर्ण और संगठित जनदबाव अंततः नीतिगत फैसलों को बदलने की क्षमता रखता है। यह जीत सिर्फ घोषणा की नहीं, बल्कि उन लोगों के आत्म-सम्मान की है, जिन्होंने हार नहीं मानी और यह संदेश दिया कि गांव की आवाज़ को अनसुना करना अब आसान नहीं रहा। भगवानपुर का यह संघर्ष, हमें महेन्द्रगढ़–रेवाड़ी बेल्ट में पहले हुए आंदोलनों की भी याद दिलाता है – जैसे 152D (ट्रांस हरियाणा एक्सप्रेसवे) पर बाघोत कट के लिए किसानों और स्थानीय लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा था, तब भी विकास की बड़ी परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन की बहस ने तूल पकड़ा था। यह सिलसिला दिखाता है कि हमारे यहां ‘कंसल्टेशन’ और ‘पार्टिसिपेशन’ अक्सर कागजों में लिखी शब्दावली भर रह जाती है; असली भागीदारी तो तब शुरू होती है जब लोग मजबूर होकर धरने-पंडालों के जरिए अपना पक्ष रख रहे होते हैं। भगवानपुर का यह आंदोलन सिर्फ एक गांव या एक अस्पताल की मांग की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की तस्वीर है जिसमें जनता को अपने ही चुने हुए राजनीतिक नेतृत्व का ध्यान खींचने के लिए 300+ दिन तक सड़क पर बैठना पड़ता है – और जब अंततः कोई आता है, तब भी यह एक ‘उपकार’ की तरह पेश किया जाता है, न कि एक संवैधानिक जिम्मेदारी की तरह। इस धरने से उठती सबसे अहम बात यह है कि अगर गांव, कस्बे और छोटे नगर संगठित होकर शांतिपूर्वक, तथ्यों के साथ और दीर्घकालिक तैयारी के साथ संघर्ष करें, तो वे न सिर्फ अपना हक दिलवा सकते हैं, बल्कि लोकतंत्र को उसकी मूल भावना के थोड़ा और करीब भी ला सकते हैं।
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Anamika Jain Amber
Anamika Jain Amber@anamikamber·
अब तो समझ आ ही गया होगा कि ये राम का भारत है #bangalresults2026
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Shefali Vaidya. 🇮🇳
There are almost 600 convicts on death row in India. Not a single person has been hanged since 2020. The oldest r@pe case convict, Vasant Dupare who r@ped and kiIIed a 4 year old in Nagpur in 2008 is STILL alive in jail despite all courts from sessions to Supreme sentencing him to death. SEVENTEEN years!! And @CMOMaharashtra and @SunetraA_Pawar are talking about fast track courts giving speedy justice in the Nasrapur r@pe case! Judiciary in this country is a joke!
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
बाहर से किताबें खरीदने पर अभिभावकों का शुक्रिया अदा करतीं सनबीम स्कूल हरदोई की प्रिंसिपल मैडम। ऐसे प्रिंसिपल हों तो स्कूलों की स्थिति बहुत जल्दी ख़राब हो जाएगी।
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ashish chopra
ashish chopra@ashishc_arch·
Such is d lawlessness in #Gurugram that dumper mafia operates without any fear of d law as @gurgaonpolice @TrafficGGM officers on duty r so corrupt dat trucks ply on city roads & highways without license/ registration plates in broad daylight. Location- NH-48 (near IFFCO CHOWK) Date- 24 April 2025 Time - 1015-1030 hours 1000s of such violations happen 24×7 in #Gurugram & posted on @X by citizens but no action taken ever. Shame on d administration under @DC_Gurugram @police_haryana @DGPHaryana that @gurgaonpolice @TrafficGGM have stooped 2 a new low of corruption.
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@NHAI_Official @PMOIndia @MORTHIndia @PIBMoRTH On this expressway one major safety concern which can totally spoil user safety is that trucks and goods vehicles are running freely in high speed lane. There is no action of NHAI even after complaint. See attached latest video at KM75 , Delhi to Katra PB11CQ2149 , 16.04 7:20 AM
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ताई रामकली
ताई रामकली@haryanvitai·
करनाल के सरकारी स्कूल के क्लर्क का लेटर हो रहा वायरल कि खुद को बर्खास्त करने की मांग
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kapil bishnoi
kapil bishnoi@Kapil_Jyani_·
लोग कह रहे हैं कि आप लोग घूँघट का महिमामंडन कर रहे हो… आपको कोई अधिकार नहीं घूँघट की बढ़ाई करने का सही बात है जिस तरह हमे घूँघट का महिमामंडन करने का कोई अधिकार नहीं है… ठीक उसी तरह आपको भी घूँघट की बुराई करने का कोई अधिकार नहीं है… आजकल की प्रगतिशील महिलाओं को घूँघट के लिए कोई बाध्य नहीं करता… वो महिलाएँ अच्छे से जानती है उन्हें कहाँ घूँघट करना है और कहाँ नहीं इसलिए आप उन्हें घूँघट के बारे में अपना ज्ञान मत दिजिये… वो अपना अच्छा बुरा आपसे ज़्यादा अच्छा समझतीं हैं
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@NHAI_Official @nitin_gadkari Respected Sir , कृपया बताए कि टोल प्लाजा CHHARA on NH334B , आपके किसी खास रिश्तेदार का है तो , हम आपकी मजबूरी समझते हुए आगे से शिकायत करना बंद कर देते है , क्योंकि 8 बार एक ही मुद्दे की शिकायत करने के बाद भी कोई सुधार नहीं ।1/2
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@NHAI_Official हम नहीं सुधरेंगे Respected Sir , There is CHHARA toll plaza NH334B. It is creating accident point by making lane light green and blocking lane with small non-reflective plastic pc. More than 10 times I have done complaint but no action why?
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
जस्टिस यशवंत वर्मा ने इंपीचमेंट से पहले इसीलिए इस्तीफा दिया है ताकि पेंशन चालू रहे , हम सबको #StopHisPension के लिए आवाज उठानी चाहिए , ताकि ये नियम खत्म हो और इनको ज्यूडिशियल प्रोसेस से होकर गुजरना पड़े। वरना हमको एक भ्रष्टाचारी के लिए जीवन भर टैक्स देना पड़ेगा।
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Harindar Dhingra हरींद्र ढींगरा ہریندر ڈھنگڑا
ख़ैरात में नहीं मिली मुझको ये मुफ़लिसी, ये आवारगी, ये बेबाक लहज़ा, बड़ी मशक्क़त की है, मैने, ख़ुद को इतना बरबाद करने के लिये.. ..15 साल में हज़ारो RTI लगाई, 10 PIL की, 3 FIRs (3IAS, 2HCS, 3XEN और कई अन्य के खिलाफ) कराई और Two Complaints filed by me pending under PC Act before Session Court Gurugram against 6 IAS, 3 HCS officers & One IFS officer; बदले मे सरकार ने 15 दिनों (2021) में मुझ पर 3FIR (उनमे से आज के दिन दो कैंसिल व तीसरी Stayed by हाई कोर्ट) दर्ज कराई क्योंकि मैंने नौकरशाहों और राजनेताओं से सवाल पूछने की हिम्मत की... इसीलिए फ़न कुचलने का हुनर भी सीखिए.. सांपों के ख़ौफ़ से जंगल नहीं छोड़ा करते।
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@our_mahendrgarh @YadavSunil80 @BPY68 @rao_purshotam_ इस हिसाब से अगर एनएच-8 , गुरुग्राम से रेवाड़ी के बीच अगर किसी CM साहब की गाड़ी गड्डों या जाम में फस जाये तो ये भी हाईवे भी ठीक हो जाएगा क्या ?
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अपणा महेंद्रगढ़
सीएम के काफिले को झटका लगा तो अफ़सरों की कुर्सियाँ हिल गईं, जनता रोज़ इन्हीं गड्ढों में झूलती है तो उसे बस ‘एडजस्टमेंट’ कहकर टाल दिया जाता है। सालों से टूटी सड़कों पर आवाज़ उठाने और ज्ञापन देते रहने वाले नागरिकों के साथ यह किसी कड़वे मज़ाक से कम नहीं!
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PARDEEP KUMAR
PARDEEP KUMAR@pardeepsaurer·
@our_mahendrgarh @YadavSunil80 @ArtiSinghRao @HaryanaPwd @XNarnaul @DCMahendragarh @hryhelpdesk चंडीगढ़ के तरफ़ देखो पिछले 1 साल में कई पुल चालू हो गए और कई चालू होने वाले है , पता नहीं क्यों राजा साहब के इलाके में कोई काम या तो सुरु ही नहीं होता है , अगर गलती से हो भी जाए तो समय से पूरा होने का कोई सवाल ही नहीं 1. कशोला चौक 2. बिलासपुर 3. पटौदी रोड 4. गोकलगढ़
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अपणा महेंद्रगढ़
सुशासन का वास्तविक उदाहरण तो आए दिन आने वाली ऐसी खबरें ही हैं। प्रशासनिक व्यवस्था आज भी इतनी ही लचर है कि छोटे-मोटे ठेकेदार भी सिस्टम को मात दे रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा काम अधूरा छोड़ देना कोई नई बात नहीं है।
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SANATAN
SANATAN@Eternaldharma_·
रमेश गुप्ता की 2019 में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। उम्र सिर्फ 54 साल। उनके पास ₹50 लाख की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 11 साल तक एक भी प्रीमियम मिस नहीं किया। उनकी पत्नी ने क्लेम फाइल किया। इंश्योरेंस कंपनी बोली: “हमें जांच करनी होगी।” जांच 3 साल तक चली। बार-बार नए दस्तावेज मांगे गए। वह हर बार देती रहीं, और हर बार नई मांग आ जाती। इस बीच हालात बिगड़ गए— घर की EMI नहीं भर पाईं, गाड़ी बेचनी पड़ी, रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा। 2022 में कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया। कारण बताया “पहले से बीमारी छुपाई गई थी।” वो “बीमारी” क्या थी? सिर्फ हल्का ब्लड प्रेशर, जो 2015 के एक रूटीन चेकअप में नोट हुआ था। न कोई इलाज, न कोई दवा। पत्नी ने हार नहीं मानी। IRDAI और फिर कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट का साफ फैसला आया— जिस बीमारी का कभी इलाज नहीं हुआ, जो कभी स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती, उसे 11 साल बाद क्लेम रिजेक्ट करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। आदेश दिया गया: ₹50 लाख की पूरी राशि, 2019 से 9% ब्याज के साथ, और ₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न के लिए। 3 साल तक एक विधवा को घुमाया गया। लेकिन अदालत ने उसका हक वापस दिलाया—पूरा, ब्याज सहित। याद रखिए: अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम “नॉन-डिस्क्लोज़र” के नाम पर खारिज हो तो चुप मत बैठिए, लड़िए। अदालतें बार-बार कह चुकी हैं छोटी, बिना इलाज वाली स्थितियों को आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट करना गलत है।
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