
इस कथन में निहित मूर्खता एवं वैचारिक विघटन स्पष्ट करता है कि क्यों आरक्षण हटाओ मुहिम आला दर्जे की जातिवादी मुहिम है तथा ये मुख्यतः जातियारी मुहिम ही है. इस तर्क से चलें तो विकलांगता सर्टिफिकेट वालों को डिसेबिलिटी जस्टिस, महिला कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को जेंडर जस्टिस, बीपीएल और EWS वालों को इकोनॉमिक जस्टिस के लिए आवाज़ उठाने का हक़ नहीं है.























