
@dibang केवल तारीख पर तारीख लगाते हैं ताकि हर तारीख पर पेशकार के जरिए ₹500-1000 मिलजाते,इनके बच्चे पलते हैं,ये दीमक हैं न्याय व्यवस्था को खा रहे हैं,यह न्याय करना नहीं जानते हैं क्योंकि इनको न्याय करना आता नहीं ,केवल मोटी रिश्वत लेना जानते हैं लाखों मुकदमे वर्षों से न्याय की राह में
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