Shubham Pratap

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@pratap_raw

Jai Bhim

Katılım Ekim 2019
283 Takip Edilen713 Takipçiler
Shubham Pratap
Shubham Pratap@pratap_raw·
@BHEEM_BAUDH जो बीएसपी का नहीं वो हमारा नहीं हो सकता! जय भीम, जय कांशीराम, जय बसपा🐘
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Shubham Pratap
Shubham Pratap@pratap_raw·
@BHEEM_BAUDH चन्द्रशेखर अपना होता तो BSP के खिलाफ़ नहीं जाता वो दूसरे को समर्थन करता हैं लेकिन बसपा को नहीं तो वो अपना कैसे तुम्हारे हिसाब से वो तुम्हारा हैं तो तुम्हारे उदित राज, वामन मेश्राम, नवाब सतपाल तंवर आदि हैं तुम अपना नेता इन्हीं को मानो हमारी नेता बहनजी हैं और हमारी पार्टी BSP हैं!
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BHEEM BAUDH
BHEEM BAUDH@BHEEM_BAUDH·
मै आदरणीय बहन जी का अनुयायि था और रहूंगा मैने हमेशा प्रेम मोहब्बत और तहजीब की बात की है बाकी मै उन अंधभक्तों गाली गलौज करने वाले लोगो की फिक्र नहीं करता ,आदरणीय बहन जी से मैने सच बोलना सीखा वही सच लिखा तो देखा कुछ व्यक्ति जो अपने आप को बहन जी का अनुयायि कहते है उनको बुरा लग गया सच नहीं हजम हुआ, मै फिर कह रहा हु बीएसपी गर्त में है तो तुम नफरतियों की वजह से है और सुनो सिर्फ तुम ही वोटर नहीं हो बसपा का हमारे पुरखे रहे मै भी हु इसलिए जितना तुम हक जताते हो बीएसपी पर इतना मुझे भी हक है, और यह हक मुझसे कोई नहीं छीन सकता, मै किसी से नफरत नहीं करता न करूंगा चाहे आदरणीय बहन जी हो या भाई चंद्र शेखर आजाद सब अपने है : भीम बौद्ध
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(Prateek Pushkar)
(Prateek Pushkar)@LearnGeography0·
सूरज सर के इस लेख को दलितों को जरूर पढ़ना चाहिए ।
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh

लक्ष्मण यादव के एजेंडे का पोस्टमॉर्टम। एक पॉडकास्ट में बहन मायावती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर स्मृतियों का नहीं, संघर्ष का है। लक्ष्मण जी, आप Dominant Caste से आते हैं। अतः आपको स्मृतियों की कद्र नहीं है लेकिन हम दलितों के जेहन में सपा सरकार के एक-एक पाप की स्मृति अमिट छाप की तरह बसी हुई है। क्या आपके सामाजिक न्याय की समझ यही कहती है कि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने गेस्ट हाउस कांड में बहन जी पर जो जानलेवा एवं बर्बर हमला किया था, हम उन स्मृतियों को भूल जाएं क्योंकि हमें BJP को हराना है? क्या हम उन स्मृतियों को भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने जातीय द्वेष में 20 लाख से अधिक कर्मचारियों का डिमोशन किया था? या फिर उन स्मृतियों को भूल जाएं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भरी संसद में SC-ST समुदाय के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था? क्या आप यह नहीं जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 के अपने मैनिफेस्टो में कैसे SC-ST Act के तहत दर्ज मामलों का रिव्यू करने का वादा किया था, और अखिलेश की सरकार बनते ही उन्होंने सत्ता एवं प्रशासन के दम पर रिव्यू के नाम पर अनगिनत पीड़ित दलितों पर उल्टा कार्रवाई कराई थी? हम कैसे भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने अपनी जातीय कुंठा में बहन जी द्वारा दलित एवं पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे? या फिर यह भूल जाएं कि कैसे सपा सरकार ने अनेकों आम्बेडकर पार्कों को खाली कराया, कैसे बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने अनेकों अस्पतालों, पार्कों एवं कॉलेजों के नाम बदले थे? सपा सरकार बनते ही आपके सजातीय लोगों ने दलितों की जमीनें कब्जानी शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन पर बर्बर हमले हुए, लेकिन सपा सरकार और पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर उनका मनोबल बढ़ाने में लगी रही। दलित समुदाय की मां-बहनों का बाहर निकलना भी दुभर हो गया था। रेप, छेड़खानी एवं जातीय हिंसा आम बात हो गई थी। यह सब किसी आतंक से कम नहीं था। आप चाहते हैं कि हम इन स्मृतियों को भूल जाएं? वाह! दलितों के मंच में जाकर उन्हें लच्छेदार भाषणों की चटनी चटाने वाले लक्ष्मण यादव को सामाजिक न्याय की इतनी सी बुनियादी समझ नहीं है कि स्मृतियां हमेशा समता के संघर्ष को सींचती हैं। ये स्मृतियां उस दौर की हैं जब दलित समुदाय के लोग मान्यवर कांशीराम एवं बहन जी के नेतृत्व में आजादी की आबोहवा में सिर उठाकर जीना शुरू कर चुके थे। समाजवादी पार्टी के गुंडों ने शुरू से ही उन्हें कुचलना शुरू किया। आलम यह था कि उन्होंने गैंग बनाकर 2 जून 1995 को बहन जी जैसी महान और शक्तिशाली नेता पर भी जानलेवा हमला किया। वैसे तो आप मनुस्मृति की किताब उठाकर रोज स्मृतियों की दुहाई देते रहते हैं, लेकिन जब दलितों की स्मृतियों की बारी आई तो आप स्मृतियों को भूलकर संघर्षों की दुहाई देने लगे। वैसे किन संघर्षों की बात कर रहे हैं आप? अखिलेश यादव द्वारा एक हॉल में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को आप संघर्ष कहते हैं? दलितों द्वारा दिन-रात जातीय हिंसा के खिलाफ हो रहा संघर्ष आपको दिखाई नहीं देता? दिखाई भी क्यों देगा, जाति का मामला जो है। अखिलेश यादव आपके सजातीय हैं। अतः उनका नाखून कटाना भी आपको संघर्ष ही दिखाई देगा। हम जानते हैं कि हमारा समाज बहुत भोला-भाला है, गुमराह हो जाएगा, लेकिन सनद रहे कि अभी समाज में हम जैसे लोग जिंदा हैं। हम अब उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने देंगे। जब आपके सजातीय लोग दलितों का दमन करते हैं, तो आपका सामाजिक न्याय वाला मुखौटा पूरा समाज देखता है। आपकी सामाजिक न्याय की समझ बस इतनी है कि आप BJP का डर दिखाकर दलितों का राजनीतिक नेतृत्व खत्म कर सकें, ताकि दलित आप Dominant Caste के रहमो-करम पर जिंदा रहे, जहां आप अपने फायदे के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। जैसे गांवों में लोग मजदूरी एवं बेगारी हेतु दलितों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही आप राजनीति में उनका इस्तेमाल करें। न तो हम मान्यवर कांशीराम, बहन जी एवं बसपा की कल्याणकारी स्मृतियों को भूलेंगे और न समाजवादी पार्टी द्वारा दलितों पर किए गए पापों की स्मृतियों को भूलेंगे। संघर्षों का दौर आपके लिए नया होगा, लेकिन हम दलित समुदाय के लोग सदियों से ही संघर्ष करते आए हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम दलितों का जीवन संघर्षों में ही बीतता है। बस अंतर इतना है कि आपका संघर्ष सिर्फ BJP से है। हमारा संघर्ष सिर्फ BJP से नहीं, बल्कि उनसे भी है जो BJP के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दलितों का संघर्ष समता एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए है। किसी पार्टी के विरोध अथवा समर्थन के नाम पर हमें खाई में न धकेलें। दलितों के जेहन में सपा की जातीय उत्पीड़न, विद्वेष एवं जातीय हिंसा से ओतप्रोत स्मृतियां भरी हुई हैं। न भूलेंगे, न माफ करेंगे।

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Deepak Baser - Equality Live
इस सुतिये के काका की पार्टी कांग्रेस ने बंगाल में बीजेपी की B टीम बनकर काम किया और यह ज्ञान बाँट रहा 🤣
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The सामाजिक सदभाव
ब्राह्मणों से इतनी नफ़रत है तो बताओ, चंद्रशेखर आजाद ने अपना केस लड़ने के लिए के के शर्मा और सुशील शुक्ला को क्यों चुना था? तब बहुजन याद नहीं आए? या वो वकील किसी और पार्टी ने करके दिए थे?
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The सामाजिक सदभाव
आखिर बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा से इतनी नफ़रत क्यो? जबकि, १)चंद्रशेखर आजाद के दोनों वकील(के के शर्मा और सुशील शुक्ला)ब्राह्मण हैं, २)सपा ने विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ब्राह्मण बनाया, ३)ममता बनर्जी और राहुल गांधी खुद ब्राह्मण हैं, सतीश मिश्रा के परिवार का कोई सदस्य कभी टिकट नही लिया।
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पवन
पवन@Voiceofpavan·
मैडम 15 साल से कुर्सी पर बैठी थीं,अब जनता ने आपको उससे उतार दिया है,लेकिन आप तो उसपर कब्जा करना चाहती हैं।
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The सामाजिक सदभाव
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी को घमंड था कि बिहार चुनाव का प्रभाव वहां नहीं पड़ेगा, लेकिन हुआ क्या? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अपनी सीट भी हार गई,उनके भी लोक सभा में 29 सांसद थे। अब सपा वाले बोल रहे कि पश्चिम बंगाल चुनाव का प्रभाव उनपर नहीं पड़ेगा, अरे भाई,क्या बोलूं 🥲
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Ravi Arya
Ravi Arya@raviadi7793·
चंद्रशेखर देश के अन्य नेताओं से मिल लेता है, जो बहुजन विरोधी हो संविधान विरोधी हो, लेकिन बहन जी से यह मिल ही नहीं पाता इसको बोला गया था बसपा में काम करने के लिए यह खुद नही करना चाहता भाग जाता है, अखिलेश भैया बहन जी से मिल लेते है तेजस्वी यादव मिल लेते है पवन कल्याण मिल लेते है, इंदु चौधरी को टिकट मिल जाता है शंभू पटेल को टिकट मिल जाता है ऋतु सिंह को को टिकट मिल जाता है पिछले चुनाव में देखा था छोटे छोटे यूट्यूबर पत्रकार बहन जी से मिल लिए बस यही नही मिल पाता है।🙃
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Ravi Arya
Ravi Arya@raviadi7793·
चंद्रशेखर के नासमझ भक्त कल से यानी कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद यह बोलते दिख रहे हैं बसपा को बहन जी को चंद्रशेखर से गठबंधन कर लेना चाहिए। अंधभक्त और मूर्खता राजनीति को खत्म कर देती है यह इन मूर्खों को नहीं पता राजनीतिक इतिहास क्या कहता है ? मेरा सवाल है भक्तों को जवाब देना चाहिए जिनको लगता है कि चंद्रशेखर गठबंधन लायक हैं 🔥🔥🔥 1.याद करिए उत्तर प्रदेश के महानगरपालिका नगर पंचायत चुनाव जिसमें सपा प्रमुख श्री अखिलेश यादव को बिना शर्त समर्थन देते हुए सहारनपुर में बसपा के खिलाफ प्रचार किया ..... वहां ना तो टिकट की बात की , ना गठबंधन की बात की नहीं कोई उम्मीद नजर आई। 2. आ जाइए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 यहां जबरदस्ती गठबंधन करने के लिए रोना धोना चालू कर दिया आप लोगों ने देखा होगा मुझे मात्र 2 सीट दे देते तो मैं सब कुछ न्योछावर कर दूंगा अगर यह भी नहीं देते छोटा भाई मान लेते तो मैं खुलकर समर्थन कर देता बिना शर्त सोचिए जिसके पास शर्त रखने का कोई विजन ही नहीं हो वह क्या राजनीति करेगा ? 3. चलिए आते हैं तीसरे विकल्प पर भाजपा को रोकने की नौटंकी में चंद्रशेखर शामिल हो गए कैसे दिल्ली में केजरीवाल को भी बिना शर्त समर्थन दे दिया क्योंकि भाजपा को रोकना था क्या हुआ ? बिन बुलाए बिना कहे बेवजह समर्थन वहां पर भी अपने हिस्सेदारी की बात नहीं की वहां पर भी समाज की चिंता नहीं थी केवल भाजपा को रोकना है यह कौन सा मिशन है ? 4. अब आ जाइए राजस्थान बेनीवाल के साथ बिना शर्त बेमेल गठबंधन बेनीवाल चुनाव जीत गया इनका वोट लेकर इनको क्या मिला कुछ नहीं यह कौन सी राजनीति है ? 5. अब आ जाइए बिहार बिहार में भी बिना शर्त गठबंधन पप्पू यादव के साथ हेलीकॉप्टर से घूमने लगे वहां भी कोई शर्त नहीं कोई वजह नहीं कोई चिंता नहीं गठबंधन या गठबंधन है या नाटक है ? 6. पश्चिम बंगाल का चुनाव हाल ही में ले लीजिए यहां ब्राह्मण महिला ममता बनर्जी के लिए बिना मांगे बिन बुलाए समर्थन दे दिया हम समर्थन देते हैं क्योंकि भाजपा को रोकना है अरे भाई बीजेपी को रोकने का ठेका केवल बहुजन समाज ने लिया हुआ है दलित समाज ने लिया हुआ है ? अब आ जाइए बहुजन समाज पार्टी के ऊपर लगातार आरोप बेवजह बे मतलब लगाते रहे, फिर किस बात की गठबंधन की उम्मीद लगाए बैठे हो बहन मायावती जी मिशन से भटक गई है। और बहुत सारे आरोप प्रत्यारोप बेवजह जबकि #नगीना चुनाव में खुद एक वीडियो में यह कहते हुए पाए गए की बहन जी ने हमें समर्थन दे दिया है इसलिए उन्होंने कमजोर प्रत्याशी उतार दिया है कहीं ना कहीं उनका समर्थन है चलो भाई 🔥🔥🔥 बहन जी की प्रतिक्रिया तक नहीं आई आखिरकार नगीना में चुनाव जीत गए मान कर चलते हैं की बहन जी ने चुनाव जीतने में मदद कर दी क्योंकि जवाब नहीं आया बहन जी का। गठबंधन करने वाली बात भाई उपरोक्त जितने भी पार्टियों के नेताओं का नाम लिखा गया है किसी से गठबंधन की बात नहीं हुई किसी से हिस्सेदारी की बात नहीं हुई किसी से टिकट बंटवारे की बात नहीं हुई सिर्फ भाजपा को रोकने के लिए समर्थन दे दिया। तो बहुजन समाज पार्टी को समर्थन देने में क्या दिक्कत है बहुजन समाज पार्टी की नेता जिन्होंने बहुजन समाज के लिए पूरी जिंदगी कुर्बान कर दिया आज बहुजन इतिहास जो खड़ा है उत्तर प्रदेश में यह उन्हीं की देन है तो उनको समर्थन देने में कौन रोक रहा है ? असल में भाजपा को रोकना मकसद नहीं है भाजपा को मदद करना मकसद है 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले चंद्रशेखर को रिहा किया गया है इसका एहसान चुका रहे हैं चंद्रशेखर। और रही बात आंकड़ों की ओर परसेंटेज की तो देखकर अंदाजा लग जाएगा क्या हैसियत है तो ऐसी भी बुनियाद बातों को नहीं उठाना चाहिए।
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Ratnesh Kumar
Ratnesh Kumar@Ratneshgautam0·
@BHEEM_BAUDH एक बात और सतीश चंद्र मिश्रा जी राज्यसभा में थे पूरा संसद का भाषण उठाकर देख लो दलित पिछड़े अल्पसंख्यक और बहुजन महापुरुषों की ही बात करते रहे यानी की पार्टी लाइन पर चलते रहे। और विरोधी पार्टियों के साथ मिलकर फर्जी अंबेडकरवादी भाजपा तक में भी जाकर अपने परिवार को सेट किया।
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Ratnesh Kumar
Ratnesh Kumar@Ratneshgautam0·
@BHEEM_BAUDH मूर्खता वाली बात को अगर छोड़ दिया जाए तो देखो सबसे ताकतवर मंत्रियों में कौन थे बसपा की सरकार में। पिछड़े और दलित धोखा भी इन्होंने नहीं दिया अपने स्वार्थ के लिए मिश्रा जी मंत्री थे ? बाबू सिंह कुशवाहा, सिद्दीकी स्वामी सेकंड चीफ मिनिस्टर कहे जाते थे। अपने परिवार को फायदा पहुंचाया
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The सामाजिक सदभाव
अखिलेश यादव केरल नहीं गए थे,वहां कांग्रेस जीत गई, ये पश्चिम बंगाल गए थे वहां भाजपा जीत गई, दीदी हार गई। #electionresult2026
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The सामाजिक सदभाव
कांग्रेस को तुरंत बसपा के दरवाजे पर दस्तक देनी चाहिए, बसपा+कांग्रेस+अन्य छोटे दल भाजपा को यूपी की सत्ता से बाहर कर सकते हैं, सपा को साथ लेना मतलब भाजपा चुनाव हिंदू बनाम मुसलमान कर देगी।
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The सामाजिक सदभाव
जिनको लोक सभा सदस्यों का गुरूर है,उनको बता दूं ममता बनर्जी के 29 सांसद हैं,वो भी यूपी से छोटे राज्य पश्चिम बंगाल में, बस अब समझ जाओ।
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The सामाजिक सदभाव
सुनने में आया है कि केजरीवाल ने यूपी के एक नेता को फोन करके कहा है पंजाब में मत दिख जाना, तुम्हारे समर्थन की जरूरत नहीं।
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The सामाजिक सदभाव
जो लिख रहा हूं सच लिख रहा हूं, जबतक आदरणीय बहनजी यूपी की धरती पर चुनाव से 4-5 महीने पहले नहीं आती, तबतक भाजपा यूपी की सत्ता से बाहर नही जाएगी। अखिलेश यादव को भी ये बात पता है कि वो विपक्ष में ही रह सकते हैं। भाजपा को भी ये बात पता है कि अखिलेश यादव को हराना बहुत आसान है।
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The सामाजिक सदभाव
क्या बंगाल में बदलाव इस तरह से आएगा? भाजपा के कार्यकर्ता भी टीएमसी के कार्यकर्ताओं की तरह ही व्यवहार कर रहे। आखिर सत्ता परिवर्तन से कैसा बदलाव आया?
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