Rahis Khan
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Rahis Khan
@rahiskhan77
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Delhi Katılım Nisan 2010
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To @ArvindKejriwal
समय-समय पर कई वालंटियर जमीन की हकीकत से जुड़े अहम इनपुट देते रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह रही कि दिल्ली में बैठे कोर गुट के लोगों ने इन इनपुट्स को कभी गंभीरता से नहीं लिया। अक्सर इन्हें या तो नजरअंदाज कर दिया गया, या हल्के में लेकर हवा में उड़ा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि जमीनी सच्चाई और शीर्ष नेतृत्व के बीच एक गहरा गैप बनता चला गया, जिसका खामियाजा संगठन को बार-बार उठाना पड़ा है।
मैं खुद इसका सीधा उदाहरण हूँ। उत्तराखंड के मुद्दे पर मैंने चुनाव से करीब दो साल पहले से लगातार चेतावनी दी कि संगठन में गंभीर खामियां हैं और अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसका असर चुनाव में साफ दिखेगा। दो साल तक लगातार इनपुट देता रहा, लेकिन किसी ने यह जरूरी नहीं समझा कि मुझसे संपर्क करे या स्थिति को गहराई से समझे। अगर उस समय इन बातों को गंभीरता से लिया जाता, तो चुनाव में खर्च हुए करोड़ों रुपये बचाए जा सकते थे और नतीजे भी कुछ हद तक अलग हो सकते थे।
हरियाणा में भी यही पैटर्न दोहराया गया। वहां भी कई कार्यकर्ता और वालंटियर लगातार जमीन से जुड़े इनपुट दे रहे थे, लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया। इससे साफ है कि यह किसी एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि एक सिस्टमेटिक इश्यू है जहां ग्राउंड फीडबैक को महत्व ही नहीं दिया जाता।
इसका एक बड़ा कारण नेतृत्व की कार्यशैली भी है। केजरीवाल जी की एक कमजोरी साफ दिखती है कि या तो वह किसी पर भरोसा नहीं करते, और अगर करते हैं तो पूरी तरह करते हैं। दिल्ली के कुछ चुनिंदा लोगों को अपने आसपास रखकर हर जिम्मेदारी उन्हीं पर छोड़ दी जाती है। फैसले एक सीमित दायरे में लिए जाते हैं, जहां जमीनी सच्चाई पहुंच ही नहीं पाती। विडंबना यह है कि सबसे ज्यादा नुकसान भी इसी कोर ग्रुप के कारण हुआ है।
नए लोगों और लोकल लीडरशिप पर भरोसा न करना संगठन के विकास में सबसे बड़ी रुकावट बनता है। जब तक स्थानीय नेतृत्व को फैसले लेने की ताकत और जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, तब तक कोई भी संगठन मजबूत नहीं हो सकता। गुजरात इसका उदाहरण है, जहां लोकल लीडरशिप को जिम्मेदारी दी गई और उसका असर भी दिख रहा है।
दिल्ली में बैठकर हर राज्य को कंट्रोल करना व्यावहारिक नहीं है। निगरानी जरूरी है, लेकिन माइक्रोमैनेजमेंट से संगठन नहीं चलता। स्थानीय यूनिट को अधिकार और भरोसा देना उतना ही जरूरी है जितना रणनीति बनाना। बिना इस संतुलन के संगठन कागजों में मजबूत दिखेगा, जमीन पर नहीं।
जम्मू का उदाहरण इस पूरी समस्या को और स्पष्ट करता है। वहां का इकलौता उम्मीदवार ट्वीट करके झंडे और टोपी जैसी बुनियादी चीजें मांग रहा था। इसका सीधा मतलब यह है कि ऊपर बैठे लोगों तक जमीन की असली स्थिति पहुंच ही नहीं रही थी। उस उम्मीदवार ने अपने दम पर चुनाव लड़ा और जीता, जबकि महीनों पहले से कार्यकर्ता उसके समर्थन की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज भी अनसुनी कर दी गई।
यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि एक लगातार दोहराया जाने वाला पैटर्न है। राघव चड्ढा के मुद्दे पर भी यही देखने को मिला। 2024 से ही कार्यकर्ता लगातार अपनी बातें रख रहे थे और कई ऐसे संकेत दे रहे थे जो जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहे थे, लेकिन भरोसे के दायरे में बैठे लोगों तक वे बातें या तो पहुंचीं नहीं या उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बावजूद चड्ढा पर भरोसा कम नहीं हुआ। यहां तक कि जब आप जेल में थे, तब भी विजिटर लिस्ट में उनका नाम प्रमुखता से शामिल था।
संदीप पाठक को लेकर भी लंबे समय से इनपुट मिलते रहे कि वह किस तरह मनमाने तरीके से लोकल कैडर को नियंत्रित कर रहे थे और उनकी अनदेखी कर रहे थे। यह आज की बात नहीं है, बल्कि कई सालों से लगातार उठता हुआ मुद्दा रहा है। हालांकि गुजरात में कुछ इनपुट्स के आधार पर उनके प्रभाव को सीमित करने की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन कुल मिलाकर इन लोगों को काफी ढील दी गई। नतीजा यह हुआ कि वे अंदर ही अंदर अपनी पकड़ मजबूत करने और साजिशें रचने में सफल हो गए।
यह कहना सही है कि ट्विटर देश नहीं है और न ही पूरी जमीन की तस्वीर दिखाता है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि यहां मौजूद कई समर्थक जमीन पर भी सक्रिय हैं और हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। उनके इनपुट को पूरी तरह खारिज करना समझदारी नहीं है। अगर इन फीडबैक को सही तरीके से सुना और समझा जाए, तो यही संगठन की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।
आखिर में बात बहुत सीधी है। चुनाव किसी एक रणनीतिकार या बंद कमरे के दायरे और उनमें लिए गए फैसलों से नहीं जीते जाते। चुनाव वह कार्यकर्ता जिताता है, जो 45 डिग्री की गर्मी में भी जमीन पर खड़ा रहकर मेहनत करता है, लोगों से जुड़ता है और संगठन को जिंदा रखता है। 🙏
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जो संगठन नए लोगों के चक्कर में आकर अपने पुराने अनुभवी स्तंभों (Pillars) को नजरअंदाज कर देते हैं या उन्हें निकाल देते हैं, उनका पतन होना तय है। याद रखिये, नींव के बिना इमारत कितनी भी चमक-दमक वाली क्यों न हो, वो कभी टिक नहीं सकती।
#Leadership #EmployeeRetention #Loyalty
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BC 😡😡
ये तो प्रेस कांफ्रेंस करके बोल रहा है , की पाकिस्तान ने इस लड़ाई में जीत हासिल करि |
हमारा वाला कहाँ रहा गया ???
Siddharth@SidKeVichaar
Pakistani PM Shehbaz Sharif says, “We have won the war.” Why is Indian PM not addressing the nation? #ceasefire #IndiaPakistanWar2025
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ये मीडिया खतरनाक है..देशहित के खिलाफ काम कर रहा है. कल रात भर कितना झूठ चलाया गया. भारतीय सेना ने उत्तर भारत मे पाकिस्तानी हमलों को सफलतापूर्वक टाल दिया. मगर इसके अलावा गोदी मीडिया मे दिखाई गई अधिकतर ख़बरें झूठी साबित हुईं! @AshwiniVaishnaw जी.




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जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब और राजस्थान तक पाकिस्तान में हवाई हमला किया। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले को नाकामयाब किया।
ASHUTOSH MISHRA@JournoAshutosh
Break - जम्मू एयरपोर्ट पर पाकिस्तान ने हवाई हमला किया, एयर स्ट्रिप पर भी राकेट और ड्रोन से हमला। जम्मू में मोबाइल सेवा बाधित, इलाक़े में बिजली का ब्लैक आउट। सतवारी कैंप पर भी हमले की ख़बर।
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"आतंकियों ने अलग होने को कहा लेकिन मुस्लिम परिवार ने नहीं छोड़ा साथ"
◆ पहलगाम आतंकी हमले की चश्मदीद ने बताया
#पहलगाम | #PahalgamTerroristAttack | Pulwama | जम्मू कश्मीर
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