Advocate Ram Pandey

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@ram_pandey

Impulsive,influencer & natural

indore, Katılım Temmuz 2010
96 Takip Edilen331 Takipçiler
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Shikha Singh
Shikha Singh@Shikhasinghana·
मोदी और चीन का रिश्ता पता चल गया बड़ा टोपी बाज आदमी है last तक वीडियो देखना ?
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Rebellious 2.0🕊️
Rebellious 2.0🕊️@RebelliousPari8·
गुरु जी आपकी मूर्ती बना कर विद्या ग्रहण करना चाहती हूँ...🙏🙏
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Sakshi Joshi
Sakshi Joshi@sakshijoshii·
“हाँ आ जाओ... कर लो मेरा Rape” Uttarakhand की VIRAL बहादुर बेटी रो रही है, LIVE बता रही है पूरी कहानी जिन्हें चाचा , मामा , भाभी कहकर बड़ी हुईं जब उनसे ही सुनने को मिले भद्दी टिप्पणी तो क्या बीतती है ! सुनिए अंदर तक झकझोरने वाली ये पूरी बातचीत #ShailaNegi #Dehradun Link : youtu.be/YMoxSBti5tU?si…
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Puneet Kumar Singh
Puneet Kumar Singh@puneetsinghlive·
कब तक हर एक बात को आरक्षण के पीछे छिपाते रहोगे? चीन में जातिगत भेदभाव भी नहीं होता है ये कौन बताएगा अग्निहोत्री?
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Wasim Akram Tyagi
Wasim Akram Tyagi@WasimAkramTyagi·
बीफ एक्सपोर्ट में भारत नंबर वन है। @himantabiswa गौहत्या पर ज्ञान दे रहे थे। पत्रकार ने सवाल पूछा तो ऐंगली बैंगली गाने लगे, उसके बाद का काम रील बनाने वाले ने कर दिया।
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Supriya Shrinate
Supriya Shrinate@SupriyaShrinate·
मोदी जी को इतिहास का अल्प ज्ञान है कह रहे हैं स्वामी विवेकानन्द ने जमशेद टाटा को उद्योग लगाने की सलाह दी स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में हुआ जमशेद टाटा ने भारत में पहला उद्योग 1868 में लगाया, तब स्वामी जी 5 साल के थे यह जानकारी देनी ज़रूरी है क्योंकि कभी फेंकते फेंकते नॉन बायोलॉजिकल महामानव यह ना कह दें कि इन्होंने भी रतन टाटा से 5 साल की आयु में संवाद किया था!
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Supriya Shrinate
Supriya Shrinate@SupriyaShrinate·
पत्रकार: क्या मोदी मणिपुर जाएंगे? अमित शाह: ऐसा होगा तो अपने आप सूचना आ जाएगी पत्रकार: इतनी हिंसा के बाद भी मुख्यमंत्री अपने पद पर बने हुए हैं अमित शाह: आप सवाल कर सकते हैं, बहस नहीं कर सकते भई सवाल पूछना बहस कब हुआ? किसी दिन आइये बहस करने शाह साहब
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Sakshi Joshi
Sakshi Joshi@sakshijoshii·
एक एक बात में दम है @ReallySwara को ज़रूर सुनिए
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Anshu Kumar
Anshu Kumar@Anshubhai07·
@JaikyYadav16 स्वरा भास्कर ने देश के न्यायधीशों को सही आईना दिखाया है स्वरा ने मेरे मन की बात भी कह दी है...कि हमें तो डर है लेकिन बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोगों को किस चीज का डर है?
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Prashant Tandon
Prashant Tandon@PrashantTandy·
इतने मूर्खों को कभी एक साथ देखा है? देखिये इन कोट पैंट टाई पहने मूर्खों को बिना टिकट लिये.
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Shashi Tharoor
Shashi Tharoor@ShashiTharoor·
हालांकि हम कभी भी एक-दूसरे से नहीं मिले हैं या हमारा कोई संपर्क नहीं है, लेकिन आप मेरे बारे में यह सब कहने के लिए आश्चर्यजनक रूप से दयालु और उदार रहे हैं। आपकी इस बात ने मेरे हृदय को छुआ है और मैं विनम्रतापूर्वक यह कहना चाहता हूँ कि मेरे लिए यह बहुत संतोष की बात है कि मेरे जीवन और काम का एक अजनबी पर इस तरह का प्रभाव पड़ा है। यह सब कहने के लिए आपको मेरा हार्दिक धन्यवाद । मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं।
Manish Singh@RebornManish

बेटे को क्या बनते देखना चाहते हो...? चाय पीने आये एक दोस्त ने पूछा, तो कुछ अस्पस्ट सा उत्तर दिया था मैंने। पर लम्हे में दिमाग मे एक तस्वीर उभरी थी।। शशि थरूर!! ●● शिक्षा, योग्यता, समझ, व्यक्तित्व, लोक व्यवहार, मुस्कान और सिचुएशन हैंडलिंग.. खुद के कदमो से चलाकर यूएन के अंडर सेक्रटरी जनरल तक ले जा सकती हैं। ऐसे मकाम, आपका "आप" होना ही वहां तक ले जा सकता है। फिर पद, पोजिशन ओहदे तो आते जाते रहते हैं,वजन व्यक्तित्व का होना चाहिए। उस नाम का, उस शख्स का.. औरा होना चाहिए। और जहां थरूर होते हैं, उस फोरम पर सबकी नजरों में वही होते हैं। तो थरूर संज्ञा नही, विशेषण है। ●● जन्मे यूके में, मगर बचपन भारत मे गुजरा, दिल्ली के सेंट-स्टीफेंस से एमए किया। फिर मैसाच्युसेट्स की टफ्ट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। हम सेवेंटीज की औलादें और मिलेनियल्स छोकरे.. जो आज उनकी छोरियों के साथ तस्वीरों पर फिकरे कसते हैं। जानना चाहिए कि हम जब बोलना सीख रहे थे न साहब.. शशि थरूर इंटरनेशनल रिलेशन्स पर पीएचडी कर, डॉक्टर हो चुके थे। उस वर्ष यूनिवर्सिटी का बेस्ट स्टूडेंट का खिताब भी दक्षिणा में लेकर निकले। ●● 1978 में उन्होंने यूनाइटेड नेशन जॉइन किया। जो विंग रेस्क्यू मिशन चलाती है, वहां काम किया। अगले पच्चीस साल अपने संगठन की सीढियां चढ़ते गए, दुनिया के हर देश, हर नेता, हर डिप्लोमेट से डील किया। सिंगापुर बोट क्राइसिस हैंडल किया, यूगोस्लाविया की टूट के दौरान सक्रिय रहे। इज्जत हासिल की, दोस्त बनाये। UN में अपनी विंग के हेड हुए। 2002 कोफी अन्नान ने उन्हें अंडर सेकेट्री जनरल बना दिया। हिंदी में बोले तो संयुक्त राष्ट्र का उप महासचिव। ●● फिर आया 2006, अन्नान रिटायर हो रहे थे। यह एक तरह का राजनीतिक पद है। यूएन का सेक्रेटरी जनरल सभी महाद्वीपों से बारी बारी चुना जाता है। अफ्रीकन अन्नान के बाद अब किसी एशियन का चांस था। यह मौका अब लम्बे समय बाद ही आना था। चीन और उसके साथी, साउथ कोरियन "बान की मून" की उम्मीदवारी के समर्थन में थे। इस वक्त थरूर ने भारत सरकार से सम्पर्क किया। अपनी उम्मीदवारी, नॉमिनेट करने का निवेदन किया। ●● भारत झिझका, मगर थरूर को अपने करियर में किये काम और अंतरराष्ट्रीय सम्बंधो पर भरोसा था। तो मनमोहन की सरकार ने उनके भरोसे पर भरोसा किया। पहले राउंड में वोटिंग के मून और थरूर ही बचे। लेकिन इस राउंड में एक गड़बड़ हो गयी। अमरीका ने थरूर को वीटो कर दिया। ●● कोफी अन्नान स्वतंत्र सोच के मजबूत व्यक्ति थे। थरूर उसी रीढ़ के, उसी धार वाले शख्स थे। बड़ी ताकतों को कोई झंडू चाहिए था। कोंडोलिज्ज़ा राइस ने अपने डिप्लोमेट्स को कहा- नो मोर कोफीज .. (दूसरा अन्नान नही चाहिए) ●● थरूर ने सर्विस से रिजाइन कर दिया। भारत आ गए। कांग्रेस का न्योता मिला, चुनाव लड़े, जीते। सरकार ने सीधे विदेश मंत्रालय थमा दिया, जो उन्होंने बखूबी संभाला। सुनंदा पुष्कर मामला जरूर विवादों में लाया। लंबे विवाद में उन्हें उलझाने वालो को फटकार लगाकर, कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी कर दिया। लेकिन एक संस्कारी विश्वगुरु देश मे ऐसा विवाद, छवि से चिपक जाता है। शायद ये उनकी एक बड़ी बाधा है, जो अब आगे सदा चिपकी रहेगी। ●● पर वे त्रिवेंद्रम से लगातार सांसद हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। पार्टी के बदतरीन दौर में, उसकी बागडोर लेकर कुछ कर दिखाने का माद्दा दिखाया। यह उनके भीतर का लोहा दर्शाता है। चुनाव हारे, लेकिन अलमस्त हैं। राजनीतिक क्षेत्र में उनके पास जो भी है, प्रोफेशनल जीवन के बाद मिला "एक्स्ट्रा" है। सो लोड नही लेते। लोकप्रिय हैं,जहीन हैं, मजे में है। किताबे लिखते हैं, सन्सद में बोलते हैं, यूनिवर्सिटी कॉलेज में व्याख्यान देते हैं। हंसाते हैं, लुभाते हैं। ●● और मजेदार बात!!! कंडोम गिनते इस देश के कुंठितो को उनकी एक तस्वीर रोज मिलती है। हम जलते-भुनते फिकरे कसते हैं। उन्हें मालूम है कि हमारा मेंटल लेवल उतना ही है। इसलिए फिर अगली तस्वीर मे जल्द ही मुस्कुराहट के साथ, हमे सन्देश भेजते हैं। जलो कुतरों.. !!! ●● @ShashiTharoor ने अपने तौर पर भरपूर जिंदगी जी है। दोबारा मौका मिले, तो यकीनन बिना रिग्रेट, यही जिंदगी जीना चाहेंगे। फिर से, थरूर ही बनना चाहेंगे। क्योकि थरूर सेल्फ मेड है। उन्हें अपने शिक्षा, व्यक्तित्व, गरिमा, और अपने वकार का अहसास है। ●● हमारे बेटों को भी सेल्फ मेड होना चाहिए। उन्हें वैसी शिक्षा, व्यक्तित्व, गरिमा, वकार हासिल करना चाहिए। उनका भी नाम संज्ञा नही, विशेषण होना चाहिए। उनका कद हिंदुस्तान को समझ आये न आये।। दुनिया को आना चाहिए। ❤️

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INC NEWS
INC NEWS@TheIncNews·
इसको देखने के बाद भी आपका खून नहीं खौला तो - तुम जिन्दा लाश को।💔💔 किसी के अंदर जमीर जिन्दा है ??? इंसानियत जिन्दा है ????🤬🤬🤬🤬🤬🤬🤬 ये BJP का बिहार है ये सब बिहार में हो रहा है। भाई गोदी मीडिया नहीं उठायेगा। हमलोगो को ही आवाज बनना पड़ेगा। रीट्वीट करके फैलाओ 🙏🙏🙏
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
देश में अनवर इब्राहिम से मिले तो नेहरू मौजूद थे। कीव पहुंचे तो महात्मा गांधी मौजूद थे। गोडसे, उनके गुरु सावरकर, सब संघियन के गुरु गोलवलकर कहीं नहीं थे, हो भी नहीं सकते। देश का आध्यात्मिक और नैतिक वजूद महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी से है। देश की लोकतांत्रिक पहचान नेहरू, अंबेडकर, पटेल जैसे नायकों से है। इतनी सी बात जनता को समझनी है।
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
नेहरू का भूत, सबसे मजबूत... देश हो या विदेश, मोदी जी जिस भी विदेशी नेता से मिलते हैं, वहां गांधी और नेहरू जरूर मौजूद रहते हैं। अकूत पैसा, अकूत ताकत, मेहनत और दस सालों का घृणा अभियान, हासिल क्या हुआ? न गांधी-नेहरू का कुछ बिगड़ा, न कांग्रेस का, न राहुल का... नफरत और घृणा का हासिल कभी रचनात्मक हो ही नहीं सकता।
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Alok Sharma
Alok Sharma@Aloksharmaaicc·
दरअसल डाटा प्रेजेंटेशन को ही डेटा एनालिसिस बताने का मनोवैज्ञानिक खेल खेला जा रहा है। सच्चाई यह है कि "मोदी मीडिया" ने आंकड़ों की बाजीगरी के द्वारा "मोदीनामा" पढ़ने का नया तरीका ईजाद कर दिया है।
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Dr. Ragini Nayak
Dr. Ragini Nayak@NayakRagini·
स्वाभिमान का सत्यानाशी 🔥 ‘चमचासन’ Featuring Mr Dhankar 🤣
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Dinesh Purohit
Dinesh Purohit@Imdineshpurohit·
एक अजनबी को बचाने के लिए कुछ लोग जलती हुई कार की ओर दौड़े... सराहनीय कार्य 🙏
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Shenaz
Shenaz@WeThePeople3009·
World is making FUN of him 👇
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