Advocate Ram Pandey
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Advocate Ram Pandey
@ram_pandey
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How to steal an election? Maharashtra assembly elections in 2024 were a blueprint for rigging democracy. My article shows how this happened, step by step: Step 1: Rig the panel for appointing the Election Commission Step 2: Add fake voters to the roll Step 3: Inflate voter turnout Step 4: Target the bogus voting exactly where BJP needs to win Step 5: Hide the evidence It’s not hard to see why the BJP was so desperate in Maharashtra. But rigging is like match-fixing - the side that cheats might win the game, but damages institutions and destroy public faith in the result. All concerned Indians must see the evidence. Judge for themselves. Demand answers. Because the match-fixing of Maharashtra will come to Bihar next, and then anywhere the BJP is losing. Match-fixed elections are a poison for any democracy.







बेटे को क्या बनते देखना चाहते हो...? चाय पीने आये एक दोस्त ने पूछा, तो कुछ अस्पस्ट सा उत्तर दिया था मैंने। पर लम्हे में दिमाग मे एक तस्वीर उभरी थी।। शशि थरूर!! ●● शिक्षा, योग्यता, समझ, व्यक्तित्व, लोक व्यवहार, मुस्कान और सिचुएशन हैंडलिंग.. खुद के कदमो से चलाकर यूएन के अंडर सेक्रटरी जनरल तक ले जा सकती हैं। ऐसे मकाम, आपका "आप" होना ही वहां तक ले जा सकता है। फिर पद, पोजिशन ओहदे तो आते जाते रहते हैं,वजन व्यक्तित्व का होना चाहिए। उस नाम का, उस शख्स का.. औरा होना चाहिए। और जहां थरूर होते हैं, उस फोरम पर सबकी नजरों में वही होते हैं। तो थरूर संज्ञा नही, विशेषण है। ●● जन्मे यूके में, मगर बचपन भारत मे गुजरा, दिल्ली के सेंट-स्टीफेंस से एमए किया। फिर मैसाच्युसेट्स की टफ्ट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। हम सेवेंटीज की औलादें और मिलेनियल्स छोकरे.. जो आज उनकी छोरियों के साथ तस्वीरों पर फिकरे कसते हैं। जानना चाहिए कि हम जब बोलना सीख रहे थे न साहब.. शशि थरूर इंटरनेशनल रिलेशन्स पर पीएचडी कर, डॉक्टर हो चुके थे। उस वर्ष यूनिवर्सिटी का बेस्ट स्टूडेंट का खिताब भी दक्षिणा में लेकर निकले। ●● 1978 में उन्होंने यूनाइटेड नेशन जॉइन किया। जो विंग रेस्क्यू मिशन चलाती है, वहां काम किया। अगले पच्चीस साल अपने संगठन की सीढियां चढ़ते गए, दुनिया के हर देश, हर नेता, हर डिप्लोमेट से डील किया। सिंगापुर बोट क्राइसिस हैंडल किया, यूगोस्लाविया की टूट के दौरान सक्रिय रहे। इज्जत हासिल की, दोस्त बनाये। UN में अपनी विंग के हेड हुए। 2002 कोफी अन्नान ने उन्हें अंडर सेकेट्री जनरल बना दिया। हिंदी में बोले तो संयुक्त राष्ट्र का उप महासचिव। ●● फिर आया 2006, अन्नान रिटायर हो रहे थे। यह एक तरह का राजनीतिक पद है। यूएन का सेक्रेटरी जनरल सभी महाद्वीपों से बारी बारी चुना जाता है। अफ्रीकन अन्नान के बाद अब किसी एशियन का चांस था। यह मौका अब लम्बे समय बाद ही आना था। चीन और उसके साथी, साउथ कोरियन "बान की मून" की उम्मीदवारी के समर्थन में थे। इस वक्त थरूर ने भारत सरकार से सम्पर्क किया। अपनी उम्मीदवारी, नॉमिनेट करने का निवेदन किया। ●● भारत झिझका, मगर थरूर को अपने करियर में किये काम और अंतरराष्ट्रीय सम्बंधो पर भरोसा था। तो मनमोहन की सरकार ने उनके भरोसे पर भरोसा किया। पहले राउंड में वोटिंग के मून और थरूर ही बचे। लेकिन इस राउंड में एक गड़बड़ हो गयी। अमरीका ने थरूर को वीटो कर दिया। ●● कोफी अन्नान स्वतंत्र सोच के मजबूत व्यक्ति थे। थरूर उसी रीढ़ के, उसी धार वाले शख्स थे। बड़ी ताकतों को कोई झंडू चाहिए था। कोंडोलिज्ज़ा राइस ने अपने डिप्लोमेट्स को कहा- नो मोर कोफीज .. (दूसरा अन्नान नही चाहिए) ●● थरूर ने सर्विस से रिजाइन कर दिया। भारत आ गए। कांग्रेस का न्योता मिला, चुनाव लड़े, जीते। सरकार ने सीधे विदेश मंत्रालय थमा दिया, जो उन्होंने बखूबी संभाला। सुनंदा पुष्कर मामला जरूर विवादों में लाया। लंबे विवाद में उन्हें उलझाने वालो को फटकार लगाकर, कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी कर दिया। लेकिन एक संस्कारी विश्वगुरु देश मे ऐसा विवाद, छवि से चिपक जाता है। शायद ये उनकी एक बड़ी बाधा है, जो अब आगे सदा चिपकी रहेगी। ●● पर वे त्रिवेंद्रम से लगातार सांसद हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। पार्टी के बदतरीन दौर में, उसकी बागडोर लेकर कुछ कर दिखाने का माद्दा दिखाया। यह उनके भीतर का लोहा दर्शाता है। चुनाव हारे, लेकिन अलमस्त हैं। राजनीतिक क्षेत्र में उनके पास जो भी है, प्रोफेशनल जीवन के बाद मिला "एक्स्ट्रा" है। सो लोड नही लेते। लोकप्रिय हैं,जहीन हैं, मजे में है। किताबे लिखते हैं, सन्सद में बोलते हैं, यूनिवर्सिटी कॉलेज में व्याख्यान देते हैं। हंसाते हैं, लुभाते हैं। ●● और मजेदार बात!!! कंडोम गिनते इस देश के कुंठितो को उनकी एक तस्वीर रोज मिलती है। हम जलते-भुनते फिकरे कसते हैं। उन्हें मालूम है कि हमारा मेंटल लेवल उतना ही है। इसलिए फिर अगली तस्वीर मे जल्द ही मुस्कुराहट के साथ, हमे सन्देश भेजते हैं। जलो कुतरों.. !!! ●● @ShashiTharoor ने अपने तौर पर भरपूर जिंदगी जी है। दोबारा मौका मिले, तो यकीनन बिना रिग्रेट, यही जिंदगी जीना चाहेंगे। फिर से, थरूर ही बनना चाहेंगे। क्योकि थरूर सेल्फ मेड है। उन्हें अपने शिक्षा, व्यक्तित्व, गरिमा, और अपने वकार का अहसास है। ●● हमारे बेटों को भी सेल्फ मेड होना चाहिए। उन्हें वैसी शिक्षा, व्यक्तित्व, गरिमा, वकार हासिल करना चाहिए। उनका भी नाम संज्ञा नही, विशेषण होना चाहिए। उनका कद हिंदुस्तान को समझ आये न आये।। दुनिया को आना चाहिए। ❤️











