एक मेरे मिलने वाले सरसौ के तेल का काम करते थे,एक महोदय ने उनका सैम्पल भरा तेल का,सैम्पल भी वह भरा गया जो वह स्पेलर से निकालकर पहले ड्रम मै रखते थे फिर कुछ दिन बाद फिल्टर करते थे,उन्होने बहुत मना किया अधिकारी से कि यह तेल बिना फिल्टर का है इसका सैम्पल नही भरो लेकिन साहब नही माने सैम्पल भर गया लैब से अनसेफ आ गया शुद्ध तेल,उनका कोर्ट मै केस चल रहा है फिर उन्होने काम बंद कर दिया तेल का,वह यह कहते है कि मै शुद्ध तेल ईमानदारी से बेचकर आज मै मुजरिम बन गया कोर्ट मै।
सबसे सरसौ के तेल के मानक चैक करने के बहुत पुराने है,तेल मै मॉइश्चर आ गया तो फेल,यदि फिल्टर से कैसे भी सरसौ के तेल का कचरा भी पहुंच गया तो फेल,ये कमी नही होनी चाहिये।
फैक्ट यह है कि बिना पानी डाले सरसौ का तेल नही निकलेगा,कचरा वैसे आता नही है कैसे भी फिल्टर से निकल गया तो फेल।
हापुड़ में पकड़ा गया नकली टोमेटो सॉस
मिलावटखोरों की 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में आजीवन कारावास देने के लिए कानून कब बनेगा?
@PMOIndia@HMOIndia
प्रधान, सरकारी नाकामी और CBSE स्कूलों की नई SMC
धर्मेंद्र प्रधान @dpradhanbjp जाते-जाते एक और कांड कर के जा रहा है। वैसे प्राइवेट स्कूल, जिसमें सरकार एक पैसा नहीं देती, उनमें SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमिटी) में 75% अभिवावकों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी, स्कूल के मालिक अब यह तय नहीं करेंगे कि स्कूल कैसे चले।
ऊपर से आपको लगेगा कि यह तो अच्छी बात है, स्कूल मनमानी फीस लेते हैं, अब नकेल बँधेगी। हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है। फीस नियंत्रित करना है तो ब्रैकेट बना दो, फ्रेमवर्क बना दो कि कितनी फैसिलिटी पर कितनी फीस मान्य है।
एसी और स्वीमिंग वाले स्कूल की फीस आपके बगल के आठ कमरों वाले स्कूल के फीस के बराबर नहीं होगी। हाँ, यूनिफॉर्म और किताब के नाम पर बाध्यता बंद होनी चाहिए। और ये कार्य वहाँ करो जहाँ सरकार पैसे देती है।
खैर, अब ये जो SMC है, उसमें 75% अभिभावक होंगे, तो स्कूल का पैसा कहाँ खर्च होगा, वही तय करेंगे। कौन से शिक्षक पढ़ाएँगे, वही तय करेंगे। किस शिक्षक की कितनी सैलरी होगी, वही तय करेंगे।
इस कमिटी में वस्तुतः स्कूल के मालिक के अलावा सब हैं। 8% स्थानीय प्रशासन के लोग, 8% शिक्षक, 8% में आंगनवाड़ी, आशा बहू एवम् अन्य स्थानीय लोग होंगे। सरकारी बना नहीं सकते, वहाँ से पैसा आता नहीं, तो प्राइवेट का दोहन करो।
और तो और, ये कमिटी ही यह तय करेगी कि स्कूल अपनी बाउंड्री बनाने से ले कर लैब बनवाने, स्मार्ट क्लास का काम या अन्य बड़े कार्य किस ठेकेदार को दे। यानी, अब अभिभावक यह बताएँगे कि स्कूल जिस ठेकेदार से कम में काम करा रहा है उसकी जगह वो अभिभावकों के बीच के किसी व्यक्ति को ठेका दें, वह भी PWD रेट पर!
सरकार इस पर यही कहेगी कि ‘ये स्कूल और स्कूल के ट्रस्टी की मनमानी रोकने के लिए है’। फिर तो सरकार को हर दुकान, हर कम्पनी में ‘उपभोक्ता की कमिटी’ बना देनी चाहिए कि पारले का बिस्कुट कितने में बिकेगा, मारुति की कार कितने में आनी चाहिए। प्राइवेट का मतलब फिर क्या होता है?
सरकार नकारी है, घटिया शिक्षा देती है इसलिए उसका लोड प्राइवेट स्कूल उठाते हैं। वो मनमानी न करें, इसलिए आप एक रेगुलेशन ले कर आते हैं। प्राइवेट स्कूल को @cbseindia29 तब रिकग्नाइज करती है जब उसके पास कुछ मूलभूत सुविधाएँ हों: लैब है, स्मार्ट क्लास है, सीसीटीवी है, ग्राउंड है, शिक्षकों की डिग्री क्या है, कितने बच्चों पर कितने शिक्षक हैं आदि।
क्या यह फ्रेमवर्क काफी नहीं है? या अब माता-पिता ही तय करेंगे कि उनके बच्चे को जिस शिक्षक ने डाँटा, अब उसे निकाला जाए? क्या माता-पिता बताएँगे कि स्मार्टबोर्ड का टेंडर फलाने की जगह ढिमका को दिया जाए क्योंकि वो इनके मित्र हैं? जब सरकार वित्तीय सहायता नहीं देती, तो वह उसके आर्थिक विषयों में इतना हस्तक्षेप क्यों करना चाहती?
तुमने गाँव के स्कूलों में पंचायत समिति का बवासीर डाल रखा है जो ग्रामीण राजनीति के कारण वहाँ भी नकारापन फैलाती दिखती है। सरकारी शिक्षक जनगणना से ले कर चुनाव ड्यूटी और सामूहिक विवाह तक में ड्यूटी दे रहे होते हैं। दाल-चावल का हिसाब रखना होता है, वह अलग।
RTE के माध्यम से, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आपने प्राइवेट में भी गरीब बच्चों के लिए व्यवस्था की। सरकारी में क्यों नहीं डालते? क्योंकि आप जानते हो वहाँ रद्दी शिक्षा मिलती है। प्राइवेट आपका लोड कम करता है, और आप वहाँ 75% माता-पिता के हाथों में नियंत्रण देना चाहते हैं।
अब ये जो गुलाबी बात कही जा रही है, उसका फॉलआउट ये नहीं जानते। स्कूल बंद होने लगे, तो क्या सरकार स्कूल खोलेगी? जिस माता-पिता को विद्यालय मनमानी वाला लगता है, उनके पास विकल्प है कि वो दूसरे विद्यालय में चले जाएँ। आपको एसी चाहिए बच्चों के लिए तो आपको पैसे भी देने पड़ेंगे।
पुनः कहूँगा कि यूनिफॉर्म-पुस्तक का केवल डिजाइन, नाम और सिलेबस स्कूल को देना चाहिए। बच्चों को स्वतंत्रता हो कि वो कहाँ से लें। फीस का ब्रेकेट तय करे सरकार स्कूल की सुविधाओं के आधार पर। इससे इतर यदि निजी स्वामित्व के विद्यालयों में माता-पिता को 75% नियंत्रण दिया गया तो समाजवाद तो आ जाएगा, पर समाजवादी पैरेंट्स के बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय नहीं बचेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान की बेटी के फॉरेन ट्रिप का 70,000 का छोटा सा फोन बिल सरकारी कंपनी पेट्रोनेट ने भरा। तो उसमें इतना हल्ला क्यों मचाना? मंत्री जी की बेटी अगर विदेश जाएगी तो पिता के साथ संपर्क में तो रहेगी ना?😴😴
भारत में एक एकमात्र राज्य कर्नाटक है जहां कांग्रेस की सरकार साइकिल सवारों से ₹25 टोल वसूलती है
और साइकिल पर टोल का सवाल पूछने पर घटिया तरीके से बदतमीजी करती है
शर्म कर ले राहुल गांधी शर्म कर ले
और कितना गरीबों का खून चूसेगा भाई
@ThePushprajX हिन्दुऔ ने कोबरा को छोड़कर अजगर के पास चले गये,कोबरा तो डंसता है लेकिन अजगर तो निगल जायेगा,कोबरा और अजगर मिलकर अब अच्छे से शिकार करैगे,डसने से बच गया तो निगल जायेगा और निगलने से बचे तो डस जायेगा,बचना नही है कैसे भी।
सबसे खतरनाक सरकार बना तमिलनाडु में ,जहां सरकार और विपक्ष दोनों हिंदू विरोधी है...
और कमाल की बात ये है कि दोनों को.हिंदुओं ने जिताया...
इसीलिए हिंदू अपनी बरबादी का खुद जिम्मेदार है....
महाराष्ट्र के बाद अब बंगाल से मुसलमानों को ओबीसी से हटाया गया। दवाब बनाना काम आता है। सरकार का यह दोगलापन नहीं चलेगा कि एक तरफ मुसलमानों को आरक्षण देती है और दूसरी तरफ छाती ठोकती है कि कॉन्ग्रेस को धार्मिक आधार पर आरक्षण देने नहीं देंगे।
सत्य और न्याय के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार की रैली की भाषा और उसके कार्यों में एकरूपता न आए। अभी सवर्णों के टैक्स के पैसों का लाभ आरक्षितों के हॉस्टल-फीस-फॉर्म आदि के अलावा, निर्धन सवर्णों को भी दिलवाने की योजनाएँ के लिए हम दवाब बनाते रहेंगे।
लम्बा चलेगा और हम लिखते-बोलते रहेंगे। प्रोटेस्ट का अधिकार तो हमें है नहीं, तो जितना है वो करेंगे। बाकी, चुनाव में सवर्ण विधायक-सांसद से पूछा जाएगा कि आप लोग इतने बड़े दोगले क्यों हैं।
भोजशाला पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला आ गया है, लेकिन इस मामले में "मुस्लिम मानसिकता" को भी समझना जरूरी है...
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि 1937 से 1942 के बीच जब हिंदू और मुसलमानों के बीच विवाद हुआ... तब धार स्टेट के तात्कालीन राजा ने मुसलमानों को नमाज पढ़ने के लिए बख्तावर मार्ग पर मस्जिद के लिए स्थान दे दिया, जहां पर आज भी रहमत मस्जिद मौजूद है... राजा के द्वारा दी गई रहमत के कारण ही इसे रहमत मस्जिद का नाम दिया गया...
अब सोचिए भोजशाला के बदले में मुसलमानों को पहले ही मस्जिद मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी इन्होंने फिर से भोजशाला पर दावा ठोक दिया... और हिंदुओं को अपना मंदिर पाने के लिए कोर्ट में चप्पलें घिसवाईं...
#Bhojshala
देखो भाई, तेल का दाम बढ़ना ही था। यदि तुम्हें लगता है कि चुनाव के बीच में चुनाव जीतने के लिए नहीं बढ़ाया, तो सही लगता है। कोई पार्टी नहीं बढ़ाती। तेल हमारे यहाँ है नहीं, और जहाँ है (बाड़मेर में), वहाँ पता करो केयर्न एनर्जी की क्या कुत्ते जैसी स्थिति बना रखी है राजस्थान सरकार ने।
दूसरी बात, रूस से सस्ता लिया तो कम क्यों नहीं किया? क्योंकि जनता को भिखारी बनाना अब स्टेट पॉलिसी है। अब बहन और भाई कमाने वाले नहीं, लाड़ली और लाड़ले हो गए हैं। मैया और बहिन अब घरेलू कार्य नहीं करेगी, काम पर नहीं जाएगी, उसका अब सम्मान किया जाएगा राज्य की ‘माई-बहिन योजना’ द्वारा।
इसके लिए पैसे लगते हैं ब्रो। और पैसे चाहे इलेक्टोरल बॉण्ड से आएँ या बिना रसीद वाले बीस हजार, जाते पार्टी फंड में हैं, देश का फंड टैक्सदाता देता है, जिसे मोदी जी ‘नमन है’ कह देते हैं।
तो ये जो लिस्ट दिखा रहे हो कि इतने देशों में कम हो गया, हमारा सबसे कम है, वो मत दिखाओ। हर लिस्ट के उत्तर में दूसरी लिस्ट होती है। विश्व में केवल बीस राष्ट्र नहीं हैं। AI में एक प्रश्न डालने पर हर उस राष्ट्र का नाम आ जाएगा जिन्होंने टैक्स कम किए या सब्सिडी दी।
मैं यह नहीं मानता कि यह सरकार ईरान युद्ध के समय कुछ अनुचित कर रही है, पर मुझे घुटन होती है नकली भगवानों की मूर्तियों से, उनके तीर्थों से, उनके नाम से चलने वाली रेवड़ी योजनाओं से और हर उस मूर्खतापूर्ण फ्रीबी से जो अब सामान्य बना दी गई है।
बंगाल में BJP आ गई
मेरे 15 साल का सपना पूरा हो रहा है
मैंने सपना देखा था कि पश्चिम बंगाल में बंगाल फूटबॉल एकेडमी होगा लेकिन TMC ने नही होने दिया
मैं बंगाल में जो भी करना चाहता था, उसे रोका जाता था, अब जाकर हर सपना पूरा हो रहा है।
सोनार बांग्ला बनाऊंगा 🤟
मिथुन चक्रवर्ती : BJP नेता और एक्टर
एक विदेशी महिला @mariawirth1 ने सोए हुए हिंदुओं को जगाने के लिए एक "हिंदू धर्म पर मुसलमानों,ईसाइयों तथा वामपंथियों का आक्रमण" किताब लिखी । लेकिन सोया हिंदू इतनी जल्दी जागने को तैयार कहा ।
अगर किताब खरीद नहीं सकते तो पोस्ट शेयर तो कर सकते हो
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यह एक हिंदू लड़की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पर उसे ग्रेजुएट यानी MBA कर रही है
यह बता रही है कैंपस के अंदर मुस्लिम छात्र और प्रोफेसर इसे ताना मारते हैं कि तुमने एक मुसलमान की सीट खा ली तुम हिंदू होकर हमारे विश्वविद्यालय में पढ़ रही हो
सोचिए हिंदुओं के दिए टैक्स के पैसे से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी चल रहा है फिर उनकी दादागिरी देखिए
धार-भोजशाला मामले में माननीय इंदौर हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया, ए.एस.आई. के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द किया और यह भी माना कि भोजशाला परिसर राजा भोज का है।
दो दिन पहले मैंने सेंट स्टीफेंस से सवर्ण हिंदुओं को 5-5 वर्ष की ऐड-हॉक सेवाएँ देने के बाद, इस वर्ष ईसाइयों को लगभग सारे पद देने पर लिखा था। आज हाई कोर्ट ने स्टीफेंस की नियुक्ति पर स्टे लगा दिया है।
शिक्षा विभाग किस नींद में है उसका दूसरा उदाहरण जामिया मिलिया इस्लामिया है। 1000 में से 990 नॉन-टीचिंग स्टाफ मुसलमान हैं। ये एसबी खुल्ला चल रहा है। हम टैक्स का पैसा दिए जा रहे हैं और अल्पसंख्यक के नाम पर हिंदुओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
इस पर भी हाई कोर्ट ने पूछा है कि ऐसा क्या जादू है इस समुदाय में?
भोजशाला को हाई कोर्ट ने मंदिर घोषित कर दिया है और अब वहाँ सिर्फ पूजा होगी ❤️👏👏
ना जाने कितने जख्म इस देश के हिंदुओं को मुस्-लिम आक्रांताओ ने दिए है।
और आज भी कट्टरपंथी उन्ही के नक्शे कदम पर चलना चाहते है, पर अब और नहीं।