कुसुम पांडेय

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कुसुम पांडेय

कुसुम पांडेय

@real_kusumm

राष्ट्रीय सेविका समिति 🙏/ राष्ट्रवादी / राष्ट्र धर्म सर्वोपरि 🙏

New Delhi, India Katılım Aralık 2019
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कुसुम पांडेय
सभी राष्ट्र भक्तो से और मोदी जी को 2024 में फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए नीचे दिए गए फेसबुक लिंक को लाइक और फॉलो करे । छोटा सा प्रयास है आप सब इसमें भागीदार बने ऐसी मेरी आशा है 👇 facebook.com/profile.php?id…
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Shubham Shukla
Shubham Shukla@Shubhamshuklamp·
सुधांशु त्रिवेदी जी की उम्र देखिए। अब प्रियंका भर्ती की उम्र देखिए। सुधांशु त्रिवेदी के सहनशीलता को सैल्यूट! प्रियंका इस डिबेट में इतनी घटिया और स्कोरबोर्ड शब्दावली का उपयोग करती रही। फिर भी सुधांशु त्रिवेदी मौन रहे। शांत और शालीन रहे। जिन्हें बड़ों से बात करने की तमीज नहीं। डिबेट करने का लहजा नहीं। उनके दम पर तेजस्वी चले थे CM बनने?
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Dr. Kanchana Yadav
Dr. Kanchana Yadav@Kanchanyadav000·
प्रिय प्रियंका और सारिका दीदी, कल से सोशल मीडिया पर बीजेपी के ट्रोलर्स और नेताओं द्वारा आप दोनों का, और हम सभी का जो चरित्र हनन, गालियाँ और ट्रोलिंग की जा रही है, उसे पूरा देश, विशेषकर देश की महिलाएँ देख रही हैं। महिलाएँ राजनीति में आएँ, चल रहे नैरेटिव को चुनौती दें और अपने नेता व पार्टी के लिए मज़बूती से खड़ी हों, यह बात संघियों को कितनी चुभ रही है, यह उनकी भाषा से साफ़ दिख रहा है। शायद इन लोगों को यह नहीं मालूम कि फिल्म तो अभी शुरू हुई है। अब तो उन्हें हमें और हम जैसी तमाम महिलाओं को सुनना ही पड़ेगा, चाहे कान से ख़ून ही क्यों न निकल आए। क्योंकि अभी इन्हें यह भी समझना बाकी है कि महिलाओं की राजनीति 10,000 रुपये तक सीमित नहीं है। 10,000 रुपये से भले कोई महिला एक बकरी खरीद ले, पर उसके बच्चों का क्या? उनके बच्चों को अच्छी स्कूलिंग चाहिए, सरकारी नौकरी के अवसर चाहिए, कारखानों और रोजगार की ज़रूरत होगी। श्री @yadavtejashwi जी ने विधानसभा में कहा था "सब समय आएगा, तब तेजस्वी आएगा।" हमें अपने नेता श्री तेजस्वी यादव जी पर नाज है, और यह नाज हमेशा रहेगा। इसे कोई छीन नहीं सकता। हम ही नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों में आगे बढ़ने वाली महिलाओं को भी ऐसी घृणित, मनुवादी, पितृसत्तात्मक मानसिकता वाले पुरुषों का सामना करने की क्षमता मिले, ताकि महिलाओं की वोट की कीमत 10,000 रुपये तय न की जाए, बल्कि वे अपना अधिकार डटकर माँग सकें। माननीय सुप्रीम कोर्ट का विशेष धन्यवाद, जिसने महिला मतदाताओं की कीमत कुछ रुपये में तय करने को हरी झंडी दिखाई। इलेक्शन कमिशन जिम्मेदार है, तो कोर्ट भी उतना ही इस लोकतंत्र के लिए। लोकतंत्र जिंदाबाद।
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कुसुम पांडेय
@ajeetbharti Asia cup se aur in sb chiz se kya lena dena hai ? Cricket khelna chor de kya cricketer ? Baithe baithe tweet pela jaa raha hai intellectual Dwara. Bat pakadne aata nahi hai Chale hai gyan Dene.
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
एशिया कप के अंत तक आते-आते यह स्पष्ट हो गया है कि हम क्यों अहमदाबाद एयर क्रैश, RCB की भगदड़, दिल्ली के दंगे आदि सप्ताह भर में भूल जाते हैं। हमें हमारे नेता जानते हैं कि हमारा सारा ‘विरोध’ किसी एक फोटो या ट्वीट पर हवा हो जाएगा। इसलिए, हमें पाकिस्तान से खेलना भी पड़ता है, खेल मंत्रालय का कुतर्क झेलना भी पड़ता है और पाकिस्तान जैसे नंगे देश को प्लेटफॉर्म दे कर, उनकी नग्नता को देखना भी पड़ता है। पंद्रह दिन नहीं लगे हमें ‘हम एक भी मैच नहीं देखेंगे’ से ‘अरे इतना भी क्या विरोध करना, क्यों रोते रहते हो इतना’ लिखने में। पहले मैच में विरोध, दूसरे में विरोध की चर्चा भी नहीं, तीसरे में मैच देख कर जस्टिफिकेशन की पाकिस्तान को पेला जा रहा है। हमारी सामूहिकता पाँच दिन नहीं चलती। यही एटीट्यूड हमें ‘चलता है यार’, ‘एक दिन से क्या हो जाता है’ आदि में राहत देने लगता है। हमारी नग्नता चार पैसों के आगे कैसे दिख जाती है, वो हमें अटारी बॉर्डर पर BSF के जवानों द्वारा कराए जाने वाले सर्कस में दिखता है। वह केवल इसलिए चालू हुआ क्योंकि उसकी अपनी एक इकॉनमी बन चुकी है। जो लोग मरे, उसका बदला जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ले लिया गया, तो फिर क्रिकेट ही क्यों व्यापार आदि भी चालू कर देना चाहिए। बात यह है कि जब आप भावनाओं को उत्तेजित करने के लिए ‘खून और पानी’ वाला संवाद बोलते हो तो बाद में क्रिकेट खेल कर, हाथ न मिलाने, जेस्चर बनाने, ट्रॉफी न लेने को ‘भावनाओं के बलात्कार’ की संज्ञा देने पर ज्ञान मत दो कि देशभक्ति क्या होती है। तीनों मैच में जीत से यह पाप नहीं धुल जाता कि हमने एक आतंकी राष्ट्र को यूएन में आतंकी कहा, पूरी दुनिया में सांसदों के दल भेजे और कुछ पैसों के चक्कर में लीचड़ों की तरह, उन विधवाओं के अपमान के लिए उन्हें प्लेटफ़ॉर्म दिया। आपको जीत की बधाई हो, मैं भी जीत से प्रसन्न हूँ, परंतु यह नकारापन असहनीय है।
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कुसुम पांडेय
@ajeetbharti @BCCI Har kuch ab Ajeet Bharti ke hisab se to hoga nahi. Arey bhai match nahi dekhna to mat dekho. Itna kya BCCI aur players ke piche pade ho. Apna personal view ko apne paas rakho sb pe mat thopo.
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
बस अब निर्लज्ज @BCCI कोई विजय परेड न निकाल दे! इनका PR तो धीरे-धीरे काम कर ही गया। लोग हाथ न मिलाने और ट्रॉफी न लेने पर नाच रहे हैं। विक्ट्री परेड भी हो ही जाएगी।
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
एशिया कर समाप्त, पर FUCK YOU @BCCI
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कुसुम पांडेय
@TrumpTruthOnX If you do not care. Then why are you righting this. India can work without you. We are the largest growing economy and this is what you are not able to digest. Grow up man !
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Commentary: Trump Truth Social Posts On X
I don’t care what India does with Russia. They can take their dead economies down together, for all I care. We have done very little business with India, their Tariffs are too high, among the highest in the World. Likewise, Russia and the USA do almost no business together. Let’s keep it that way, and tell Medvedev, the failed former President of Russia, who thinks he’s still President, to watch his words. He’s entering very dangerous territory! (TS: 31 Jul 00:00 ET)​​​‍​​‌‍​​‌‍​​​​​‌‍​​​​​​​​​​‌‍​​​​​‌‍​​​​​​‌‍​​​​​​​​​‌‍​​​​​‌‍​​​​​​​​‌‍​​​​​​​​​​‌‍​​​​​​​​‌‍​​​​‌‍​​‌‍​​​​​​​​​​‌‍​​​​‌‍​​​​​​​​‌‍​​‌‍
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Adv. Avtaar S Turka / अवतार तुरका 🇮🇳
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बेइज्जती करवाने के लिए अपनी आवाज बुलंद कीजिए और एक स्वर में कहिए नरेन्द्र मोदी इस्तीफा दो ! #Samba #ceasefirevoilation #IndiaPakistanWar2025 #IndiaPakistanWar Source @ANI
Adv. Avtaar S Turka / अवतार तुरका 🇮🇳 tweet media
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कुसुम पांडेय
@SatyapalMalik6 Tu deshdrohi hai .. pakistan wale jo teri clip chala rahe unse bol tu kisan ka beta hai.... Vo chalana band kar de to hm manenge tu kisan ka beta hai budhe
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Satyapal Malik
Satyapal Malik@SatyapalMalik6·
नमस्कार साथियों। बहुत से लोग मुझे सोशल मीडिया पर टारगेट कर रहे हैं, अनाप शनाप मेरे खिलाफ लिख रहे हैं। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि मैं उस किसान क़ौम का बेटा हूं मैं बाग़ी हो सकता हूं लेकिन गद्दार होना मेरी फितरत में नहीं है। मैंने मेरे जीवन में झुकना नहीं सीखा सत्ता पक्ष से मेरे आज़ भी वही सवाल है- - सत्यपाल मलिक (पूर्व गवर्नर) #SatyapalMalik
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Shehbaz Sharif
Shehbaz Sharif@CMShehbaz·
I am extremely grateful to President Trump for his pathbreaking leadership and commitment to global peace and for his most valuable offer to play a greater role in bringing lasting peace to South Asia. For decades, Pakistan and the U.S. have been partners who worked together closely to protect and promote our mutual interests as well as for peace and security in critical parts of the world. I am confident that in President @realDonaldTrump, Pakistan has found a great partner who can reinvigorate our strategic partnership and strengthen Pakistan-U.S. ties, not only in trade and investment but in all other areas of cooperation.
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Rohini Singh
Rohini Singh@rohini_sgh·
Huge victory for India’s opposition leaders including @RahulGandhi @yadavakhilesh and @yadavtejashwi that had been constantly pushing for a caste census. Will Noida anchors that jump at every opportunity to berate the opposition give credit where due?
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Hardik Bhavsar
Hardik Bhavsar@Bitt2DA·
आज तो मोदी जी की बैक टू बैक मीटिंग हुई पहले रक्षा मंत्री,और तीनो सेना प्रमुखों के साथ फिर मोटा भाई के साथ बैठक की और अब मोहन भगवत जी के साथ बैठक पूरी हुई आज रात पाकिस्तान के साथ साथ माँ-बेटे और उनकी दरबारी गेंग व् चमचे चैन की नींद सो नहीं पाएंगे भगवा-ऐ-पाक निश्चित है
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News Algebra
News Algebra@NewsAlgebraIND·
BIG BREAKING NEWS 🚨 Vice President Jagdeep Dhankhar questions Judiciary 🔥🔥 He says - "We cannot have a situation where you direct the President of India." "Article 142 of the Constitution, which gives the Supreme Court special powers" "But now that has become Nuclear Missile Against Democratic Forces 24X7" - VP DHANKAR
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Panchjanya
Panchjanya@epanchjanya·
लोगों का भरोसा सुप्रीम कोर्ट से उठ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ये कैसे तय कर सकता है कि भारत के राष्ट्रपति को क्या करना चाहिए। : जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति
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Meenakshi Joshi
Meenakshi Joshi@IMinakshiJoshi·
कोई भूल से ‘काशी’ के काग़ज़ ना मांगे ना ही ‘मथुरा’ के । काग़ज़ नहीं दिखाएँगे ! 😃
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Raj Thackeray
Raj Thackeray@RajThackeray·
राज्य शालेय अभ्यासक्रम आराखडा २०२४ नुसार महाराष्ट्रात पहिलीपासूनच हिंदी ही भाषा अनिवार्य करण्यात आली आहे. मी स्वच्छ शब्दांत सांगतो की ही सक्ती महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना खपवून घेणार नाही. केंद्र सरकारचं सध्या जे सर्वत्र 'हिंदीकरण' करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत, ते या राज्यात आम्ही यशस्वी होऊ देणार नाही. हिंदी ही काही राष्ट्रभाषा नाही. ती देशातील इतर भाषांसारखी एक राज्यभाषा आहे. ती महाराष्ट्रात का म्हणून पहिलीपासून शिकायची ? तुमचं त्रिभाषेचं सूत्र जे काही आहे ते सरकारी व्यवहारांपुरतंच मर्यादित ठेवा, त्याला शिक्षणापर्यंत आणू नका. या देशात भाषावार प्रांतरचना झाली, आणि ती इतकी वर्ष टिकली. पण आत्ताच ही दुसऱ्या प्रांताची भाषा इथे महाराष्ट्रावर लादण्याचे प्रकार का सुरु झालेत? भाषावार प्रांतरचनेच्या तत्वालाच हरताळ फासला जात आहे. प्रत्येक भाषा ही सुंदरच असते आणि तिच्या जडण्याघडण्याच्या मागे एक दीर्घ इतिहास असतो, परंपरा असते. आणि ती ज्या राज्याची भाषा असते, त्या राज्यात तिचा सन्मान राखलाच गेला पाहिजे. महाराष्ट्रात जसा मराठीचा सन्मान इतर भाषिकांकडून राखला गेला पाहिजे, तसा सन्मान इतर राज्यात त्या भाषेचा सर्व भाषिकांकडून राखला गेला पाहिजे. अगदी इतर राज्यात राहणाऱ्या मराठी जनांनी त्या राज्याची भाषा आपली मानली पाहिजे हा आमचा आग्रहच आहे. पण हे सोडून या देशाची भाषिक परंपराच खिळखिळी करणार असाल तर ते आम्हाला मान्य नाही. आम्ही हिंदू आहोत पण हिंदी नाही आहोत ! महाराष्ट्रावर हिंदीकरणाचा मुलामा द्यायचा प्रयत्न कराल तर महाराष्ट्रात संघर्ष अटळ आहे. या सगळ्याकडे पाहिलं तर लक्षात येतं की सरकार हा संघर्ष मुद्दामून घडवत आहे. येणाऱ्या आगामी निवडणुकांमध्ये मराठी विरुद्द मराठीतर असा संघर्ष घडवून स्वतःचा फायदा काढून घेण्यासाठी हा सगळा अट्टाहास सुरु आहे? या राज्यातील मराठीतर भाषिकांनी पण सरकारचा हा डाव समजून घ्यावा. त्यांना तुमच्या भाषेबद्दल विशेष प्रेम आहे असं काही नाही. त्यांना तुमची माथी भडकवून स्वतःची राजकीय पोळी भाजून घ्यायची आहे. आज राज्याची आर्थिक अवस्था बिकट आहे, सरकारकडे योजनांसाठी पैसाच शिल्लक नाही. मराठी तरुण-तरुणी नोकरीच्या प्रतीक्षेत आहेत. कर्जमाफी करू असं निवडणुकीच्या आधी सांगितलं, पण पुढे ती केलीच नाही. त्यामुळे कर्जमाफीच्या आशेवर असलेला शेतकरी निराश आहे. आणि उद्योग जगताने महाराष्ट्राकडे पाठ फिरवल्यासारखी परिस्थिती आहे. जेंव्हा सांगण्यासारखं किंवा ठोस दाखवण्यासारखं काहीच नसतं, तेंव्हा फोडा आणि राज्य करा हा ब्रिटिशांचा मंत्र इथे वापरला जातोय, अशी शंका यावी अशीच पाऊलं सरकारकडून उचलली जात आहेत. बरं हिंदी भाषेची सक्ती महाराष्ट्रातच का ? ही अशी हिंदीची सक्ती दक्षिणेच्या राज्यात कराल का ? आणि करून तर बघा, तिथली सरकारंच पेटून उठतील. इथलं राज्यातील सरकार आणि त्यातील घटक पक्ष निमूटपणे हे सगळं खपवून घेतात म्हणून इथे ही सक्ती केली जात आहे. बाकीच्यांचं आम्हाला माहीत नाही आणि आम्हाला देणंघेणं पण नाही, पण महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना हे खपवून घेणार नाही. महाराष्ट्रात पहिलीपासून हिंदी भाषा शिकण्याची सक्ती इथे खपवून घेतली जाणार नाही. शालेय अभ्यासक्रमातील हिंदीची पुस्तकं दुकानांमध्ये विकू दिली जाणार नाहीत आणि शाळांना देखील ती पुस्तकं विद्यार्थ्यांना वाटू दिली जाणार नाहीत, याची नोंद शाळा प्रशासनाने घ्यावी. प्रत्येक राज्यात फक्त त्यांच्या राजभाषेचाच मान राखला गेला पाहीजे ! उद्या सर्व राज्यांमध्ये मराठी भाषा पहिली पासून शिकवाल का ? नाही ना ? मग ही जबरदस्ती इथेच का ? हा मुद्दा ताणू नये असं माझं सरकारला आवाहन आहे. पण या आवाहनाला आव्हान देणार असाल आणि हिंदी लादणार असाल तर मात्र संघर्ष अटळ आहे आणि ज्याला फक्त सरकारच जबाबदार राहील. त्यामुळे सरकारने लोकभावनेचा आदर करत हा निर्णय मागे तात्काळ घेण्याचे आदेश द्यावेत. माझ्या महाराष्ट्रातील तमाम मराठी मातांना, भगिनींना आणि बांधवांना तसेच माझ्या मराठी वर्तमानपत्रात आणि मराठी वृत्तवाहिन्यांमध्ये काम करणाऱ्या सर्व बांधवांना आणि भगिनींना देखील विनंती आहे की यात कोणताही वादविवाद न करता याचा निषेध आणि विरोध करावा ! आणि हो महाराष्ट्रातील इतर राजकीय पक्षांना जर थोडं जरी मराठी भाषेबद्दल प्रेम असेल तर ते देखील याला विरोध करतील. आज भाषा सक्ती करत आहेत, उद्या इतर सक्तीचे फतवे काढतील. म्हातारी मेल्याचे दुःख नाही पण काळ सोकावतो ! आपला नम्र राज ठाकरे ।
MR
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Riniti Chatterjee
Riniti Chatterjee@ChatterjAsking·
इस दादा का दर्द इतना रिपोस्ट करो की देश के प्रधानमंत्री @narendramodi जी के कानों तक जाये । सिर्फ़ ममता बनर्जी को दोष देने से क्या फ़ायदा? जब देश का मुखिया भी मूक बन कर बंगाल में अपने ही लोगों का पलायन देख रहा है । अपनी घर की महिलाओं का इज्जत लुटते देख रहा
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कुसुम पांडेय
अब क्या सुप्रीम कोर्ट देश का कानून बनाएगी ? संसद में पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट कैसे रोक लगा सकती है दीपक जी ? महाभियोग क्यों न लगाया जाए ?
Deepak Sharma@SonOfBharat7

विष्णु शंकर जैन भाई On Fire 🔥 सुप्रीम कोर्ट की हिन्दुओं के प्रति दोगलेपन की कूटनीति की धज्जियाँ उड़ा डाली, पोल खोल दी विष्णु शंकर भाई ने बोला जब हमने वक्फ बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, तो कोर्ट ने हमसे पूछा था कि हम सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए और सुझाव दिया था कि हमें हाई कोर्ट जाना चाहिए, और हमें कोई अंतरिम राहत नहीं मिली, जबकि अलग-अलग हाई कोर्ट में 140 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई हैं। अब क्या मापदंड है कि कोई दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट आए और उनकी न सिर्फ सुनवाई हो बल्कि अंतरिम आदेश से जुड़ी बातें भी कही जाएं? पिछले 13 सालों से - हिंदू मंदिरों के अधिग्रहण से संबंधित 4 राज्यों के हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामले हाई कोर्ट में होने चाहिए और पूछा कि हम (सुप्रीम कोर्ट) ऐसे मामलों की सुनवाई क्यों करें। मेरा सुझाव है कि (वक्फ संशोधन अधिनियम के संबंध में) सभी मामलों को एक ही हाई कोर्ट में ले जाया जाना चाहिए और 6 महीने के भीतर मामलों की सुनवाई के लिए एक संवैधानिक पीठ का गठन किया जाना चाहिए।

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