Sabal Singh

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@sabalsbhati

Chief Editor @niharika_times। बाड़मेर जिला प्रतिनिधि, मारवाड़ राजपूत सभा

Jaipur Katılım Eylül 2023
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी पर शिव पुलिस थाने में कल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2), 351(3) और 79 में एफआईआर संख्या 92/2026 दर्ज हुआ है। सवाल उठता है कि 351(2), 351(3) धाराएं मारने की धमकी से संबंधित है, जो छोटू सिंह रावणा के आरोपों के आधार लगाना प्रासंगिक लगता है। लेकिन बीएनएस की धारा 79 महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्व प्रावधान है। इसको क्यों जोड़ा गया है ? सवाल उठता है क्या रविंद्र सिंह को फसाने के लिए महिलाओं का एंगल भी एफआईआर में जोड़ा गया है ? @Barmer_Police @RavindraBhati__
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Sabal Singh
Sabal Singh@sabalsbhati·
@Dev9V @niharika_times कूलसा यह जैसलमेर की नहीं है। कल आप अपने को जैसलमेर दरबार बताते घूमो तो कोई रोक तो सकता नहीं।
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
@niharika_times सीडी देवल साहब की दोहिती के रिस्ते पूछने वालो से में बस इतना ही पूछना चाहता हूँ की ये रिस्ता क्या कहलाता है सिर्फ़ चारणों से खुनस निकालने से कुछ नहीं होने वाला है पहले भी बाड़मेर में एक अधिकारी पे निकालने की खूब कोसिश हुई आख़िर में जाके माफ़ी पेसगी ही की अच्छा है अपने गिरेबान में झाके ये तो महज़ एक उदाहरण दिया है एसे सेकड़ो उदाहरण निकलेंगे ध्यान रखना जवाब भी नहीं आयेगा फिर गीधड़ भभकिया देने निकलोगे नहीं तो समय पर अपनी समझ रखो किसी एक चरित्र हीन की वजह से इतने भड़को मत अपनी गलती का एहसास करो ग़लत दोनों साइड से है लेकिन चारणों पे खूनस निकालके फिर से गलती मत करो पहले कई बात असफल प्रयास कर चुके हो
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Sabal Singh
Sabal Singh@sabalsbhati·
@DEEPSBISHNOI_ वो तो पीड़िता को पूछो। वो हरीश चौधरी का नाम एफआईआर क्यों लिखा रही है।
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𝐃𝐄𝐄𝐏𝐀𝐊 𝐁𝐈𝐒𝐇𝐍𝐎𝐈 𝐈𝐍𝐂🇮🇳
मुझे समझ नहीं आता…. इसमें विधायक जी का क्या रोल रहा होगा? क्या कोई साथ काम करने वाला व्यक्ति विधायक जी को पूछकर अपराध करता है क्या? यदि इसमें विधायक जी का हाथ है तो सीधा लिखो “विधायक जी के इशारे पर हुई वारदात” यदि आपको विधायक जी इसमें इनरोल नहीं दिख रहे हैं तो फिर ऐसी न्यूज़ बनाकर आप अपनी घटिया मानसिकता का परिचय दे रहे हो और कुछ नहीं!!
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
जैसलमेर के पाकिस्तान बॉर्डर से संदिग्ध मौलवी गिरफ्तार! गणतंत्र दिवस से पहले भारत–पाक सीमा से सटे जैसलमेर जिले में एटीएस ने एक संदिग्ध मौलवी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई फायरिंग रेंज के पास की गई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में सतर्कता और बढ़ गई है। गिरफ्तार व्यक्ति से अब जयपुर में गहन पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, एटीएस को सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की लगातार सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर टीम ने तनोट-किशनगढ़ क्षेत्र के कोरिया बेरी गांव में दबिश देकर मौलवी को पकड़ा। प्रारंभिक जांच में उसके सीमा पार संपर्कों और स्लीपर सेल नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बॉर्डर पर स्लीपर सेल का जाल अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क की गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन हालिया घटनाएं फिर से खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। गौरतलब है कि 2025 में भी जैसलमेर और आसपास के इलाकों से जासूसी के आरोप में कई संदिग्धों को पकड़ा गया था। ऐसे में गणतंत्र दिवस से पहले की गई यह गिरफ्तारी सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
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Sabal Singh@sabalsbhati·
@grok बाड़मेर के पत्रकार निहारिका टाइम्स, दुर्ग सिंह राजपुरोहित, अशोक शेरा और दिनेश बोहरा की समीक्षा दो।
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
#बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन का 15 साल तक निजी सहायक रहा ओमप्रकाश शर्मा बहरा है! फर्जी डिग्री, फर्जी EWS और हियरिंग हैंडिकैप्ड के फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी ली है, जिसकी एडवोकेट सुमेर गौड़ ने पुख्ता दस्तावेजी सबूतों के साथ शिकायत की है। @RajCMO @AcbRajasthan @Sog_Rajasthan
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Sabal Singh@sabalsbhati·
@grok बाड़मेर के सच्चे पत्रकार और फर्जी पत्रकारों की लिस्ट दो।
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
"थाने जाओगे तो होशियार बनोगे.... जेल जाओगे तो नेता बनोगे... मेरे लिए जो जो जेल जाएगा उनको मैं कामयाब करूंगा तयशुदा बात है।" हनुमान बेनीवाल द्वारा अपने स्वार्थ के लिए युवाओं को जिंदगी दाव पर क्या जायज है ?
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Sabal Singh
Sabal Singh@sabalsbhati·
@Bajaj_Finance I received a call from this company, which is the most dishonest and despicable company in the world. They claim to be refunding the duplicated charges, yet they refuse to reimburse the bounced check fee they levied against me.
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Bajaj_Finance
Bajaj_Finance@Bajaj_Finance·
@sabalsbhati नमस्ते, हम इसे जांच रहे हैं और जल्द ही आपको अपडेट के साथ वापस संपर्क करेंगे। अगले अपडेट्स के लिए कृपया अपने डायरेक्ट मैसेज (DM) को देखें। धन्यवाद- सायली
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Sabal Singh
Sabal Singh@sabalsbhati·
Bajaj is the biggest fraud company in the world. After deducting EMI twice, it tries to recover the amount by charging again. @Bajaj_Finserv @Bajaj_Finance
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
अब यह ट्रेंड हो रहा है.. #भजनलाल_बचाओ_राजस्थान_बनाओ
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Sabal Singh@sabalsbhati·
@BAJRANG_CHITANA @niharika_times मेवाराम कितना मजबूत है, वो आपकी भुआ पुष्पा को पूछ
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Bajrang_Chitana
Bajrang_Chitana@BAJRANG_CHITANA·
@niharika_times पर भाई मेवाराम मजबूत है बिण सोसल मीडिया ने सींगें में घाल दियो बो पत्रकारा ने टुकड़ेल ..😁
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
अगर सोशल मीडिया से छवि बनती तो हनुमान बेनीवाल अब तक सीएम बन चुके होते। नरेश मीणा विधायक बन चुके होते। यह सिर्फ आभासी मृगतृष्णा है! #भजनलाल_मतलब_भरोसा
Ashok Shera@ashokshera94

इसलिए कहते है कि साहब छवि सोशल मीडिया पर बनती या बिगड़ती है बड़े बड़े इवेंट और टीवी- अखबारों के विज्ञापन सिर्फ कार्यालयों तक सीमित है.... #Rajasthan

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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
गरीबों की आजीविका को उजाड़ता ठेकेदार! यह जैसलमेर के महाराणा प्रताप मैदान में बन रही अंडरग्राउंड पार्किंग में पास बनी दुकानों को हिताची से तोड़ने का वीडियो है। आखिर गरीबों की आजीविका उजाड़ कर ठेकेदार कैसे चैन की नींद ले पाता होगा ? @RajCMO @BhajanlalBjp
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Sabal Singh@sabalsbhati·
@Bajaj_Finance अभी तक मेरे से किसी ने संपर्क नही किया है।
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
राजस्थान में योग्य लोग नही है! इसलिए उड़ीसा के उत्कल रंजन साहू को RPSC का चेयरमैन बनाया है या इसमे भी कोई मास्टरस्ट्रोक है ? #RPSC #RPSC_का_पुनर्गठन_करो
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Niharika Times
Niharika Times@niharika_times·
पुलिस थाना खुहड़ी में कलियुगी बहु और पुत्र की शर्मनाक करतूत: झूठे आरोपों का दुरुपयोग और वृद्ध माता-पिता की पुकार गांव की महिलाएं और पुरुष बुजुर्ग माता पिता के पक्ष में शाम से थाने में दे रहे है धरना पुलिस थाना खुहड़ी में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बहु और पुत्र ने अपने बुजुर्ग पिता और ताऊ के खिलाफ झूठा परिवाद दायर किया। इस परिवाद में बहु ने छेड़खानी जैसे गंभीर आरोप लगाए, जो प्रथम दृष्टया निराधार प्रतीत होते हैं। यह घटना न केवल पारिवारिक मूल्यों की अवहेलना को दर्शाती है, बल्कि कानून के दुरुपयोग और समाज में बढ़ती नैतिक पतन की स्थिति को भी उजागर करती है। क्या महिला होने का फायदा उठाकर कोई झूठी शिकायत दर्ज कर सकती है? कानून का उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना है, लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून, जैसे कि छेड़खानी या घरेलू हिंसा से संबंधित धाराएं, संवेदनशील और शक्तिशाली हैं। दुर्भाग्यवश, कुछ मामलों में इनका उपयोग व्यक्तिगत दुश्मनी या लाभ के लिए किया जाता है। खुहड़ी के इस मामले में बहु ने छेड़खानी का आरोप लगाकर न केवल अपने ससुर और ताऊ को बदनाम करने की कोशिश की, बल्कि परिवार में तनाव और सामाजिक कलंक पैदा किया। कानूनन, कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर शिकायत सत्य है। क्या पुलिस बिना जांच के किसी को हिरासत में ले सकती है? पुलिस को किसी भी शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले प्रारंभिक जांच करनी चाहिए। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41 के तहत, पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तारी तभी करनी चाहिए, जब पर्याप्त सबूत या विश्वसनीय आधार हों। खुहड़ी मामले में, यदि पुलिस ने बिना जांच के बुजुर्गों को हिरासत में लिया, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवाधिकारों का हनन भी है। बार-बार झूठी शिकायतें करने वाले दंपति के खिलाफ पुलिस को सतर्कता बरतनी चाहिए और उनकी शिकायतों की विश्वसनीयता की गहन जांच करनी चाहिए। बार-बार शिकायत करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है? जो लोग हर दो-तीन महीने में परिवार के सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज करते हैं, उनकी मंशा संदिग्ध हो सकती है। यदि शिकायतें झूठी साबित होती हैं, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 182 के तहत झूठी शिकायत दर्ज करने की सजा का प्रावधान है, जिसमें 6 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। पुलिस को ऐसी शिकायतों के पैटर्न की जांच करनी चाहिए और बार-बार झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। खुहड़ी मामले में, पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुजुर्गों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, ताकि निर्दोष लोगों को प्रताड़ित न किया जाए। वृद्ध माता-पिता की पुकार: कौन सुनेगा? सबसे दुखद पहलू इस मामले में वृद्ध माता-पिता की स्थिति है। जिन पुत्र और बहु को उन्होंने पाला-पोसा, वही आज उनकी मेहनत से बनाए घर पर कब्जा करके उन्हें बेघर कर रहे हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती स्वार्थपरता और नैतिक पतन का प्रतीक है। वृद्ध माता-पिता, जो अपने बच्चों के लिए जीवनभर मेहनत करते हैं, आज उनके ही हाथों अपमानित और ठगे जा रहे हैं। कानून में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए "वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007" जैसे प्रावधान हैं, जो माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण और सम्मानजनक जीवन का अधिकार देते हैं। इस कानून के तहत वृद्ध माता-पिता अपने घर को वापस पाने और पुत्र-बहु के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। पुलिस की भूमिका: सहयोग या पक्षपात? पुलिस का दायित्व है कि वह निष्पक्ष और संवेदनशील होकर काम करे। यदि पुलिस बिना जांच के एक पक्ष का साथ दे रही है, तो यह न्याय प्रणाली पर सवाल उठाता है। खुहड़ी मामले में, यदि पुत्र और बहु बार-बार झूठी शिकायतें दर्ज कर रहे हैं और पुलिस उनकी बात को बिना जांच के मान रही है, तो यह गलत है। पुलिस को चाहिए कि वह दोनों पक्षों की बात सुने, सबूतों की जांच करे और कानून के दायरे में कार्रवाई करे। साथ ही, वृद्ध माता-पिता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे। @RajPoliceHelp
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Sabal Singh
Sabal Singh@sabalsbhati·
@sumitameta01 @DEEPSBISHNOI_ @niharika_times आपकी यह पीड़ा खत्म नही होने वाली। समय समय पर धुंआ निकालते रहेंगे। जय चनातन
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Sumit Sharma
Sumit Sharma@heysumitspeaks·
@DEEPSBISHNOI_ @niharika_times दीपक जी ये शुरू से ही जातीय वैमनस्य फैला रहा है, कई लोग ये समझ लेते है कि ये कोई ऑथेंटिक न्यूज चैनल है।
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𝐃𝐄𝐄𝐏𝐀𝐊 𝐁𝐈𝐒𝐇𝐍𝐎𝐈 𝐈𝐍𝐂🇮🇳
निहारिका टाईम्स एक वैध दैनिक समाचार पत्र नहीं है। इसका RNI टाइटल कोड (RAJBIL26981) केवल पाक्षिक (15 दिन में एक बार) प्रकाशन के लिए पंजीकृत है। इसके नाम से न कोई रजिस्टर्ड मुद्रक है, न प्रकाशक, न प्रेस, और न ही किसी तरह की RNI ऑडिट रिपोर्ट या पब्लिकेशन रसीद। (1)
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Ravinder singh Rajpurohit
Ravinder singh Rajpurohit@Ravindersing04·
@DEEPSBISHNOI_ @niharika_times ख़ुद का अख़बार ख़ुद की खबरे ना किसी को पढ़ने का इंट्रेस्ट ना लेने का, ब्लेकमेल, फ़र्ज़ी, जब पत्रकार महोदय को लगे की इस पर नज़र छपनी है तो दूसरे दिन चेप देते है बाक़ी पढ़ता कोई नहीं 😀😀😀
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