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कविता-ख़ोर
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कविता-ख़ोर
@samridhi85
अंतर्गमन की पहली कविता --- https://t.co/RLHZgrriYz
lost Katılım Ocak 2017
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धूप हिना की
रात का कजला
चाँद की बिछिया लाया हूँ
देख !
मैं तेरी चौखट पर सजदा करने आया हूँ !
गीत वस्ल के
रक़्स विरह का
दीद का टोना लाया हूँ
देख !
मैं तेरी चौखट पर सजदा करने आया हूँ !
©समृद्धि
#kavitaख़ोर
(📸 zubair)

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भाषा में कविताएँ कैद हैं
भाषा तोड़कर उन्हें रिहा करो
भटकने दो शब्दों को निपट अकेला
भावनाओं के निर्जन मरू में
ताकि उनकी प्यास
पककर बन जाए पत्थर और
गलकर हो जाए सोना
कविताओं को मंडराने दो
दुःखों के पराग कणों पर
यह कविताएँ ही वसंत को जन्म देंगी
• समृद्धि @samridhi85
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हम तुम कितनी दूर हैं
कितने पास ये चाँद सितारे
सच पूछो तो
तुम बिन खोटे लगते हैं सुख सारे....
मगर सच्चे लगते हैं....
ये आँसू,
ये तड़पन,
ये नैना,
और तुम...
©समृद्धि
#kavitaख़ोर
(पोस्टर - shiveringsouls )

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@samridhi85 यूँ अचानक नहीं हुई बरसात
कोई रोया होगा आह भर के
दानिश
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इस बे-मौसम बरसात से
धुल गया है शहर,
निथर गईं हैं सड़कें,
गहरा गया है पेड़ों का हरा |
तुम्हारे आ जाने से भी तो
यूँ ही जी उठा है जीवन
जो अब तक
मंथर,
मैला,
बदरंग,
गुज़र रहा था !
©समृद्धि
#kavitaख़ोर
(📸 अब्बास बेग )

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जब प्रलय आएगी
तब सब कहाँ डूबेगा !
मनु बनाएंगे इक नौका
नूह* बनाएंगे इक जहाज़
दुनिया और जीवन
जितना संभव होगा बचा लेंगे..
लेकिन जब भर आएंगी तुम्हारी आँखें
मैं न बच पाऊँगा !
प्रलय आएगी उसदिन
जब बिन पतवार, बिन किनारे
डूब जाऊँगा तेरी आँखों में ||
©समृद्धि
#kavitaख़ोर
(नूह - Noah)

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ग़ज़बै 💐
कविता-ख़ोर@samridhi85
जब प्रलय आएगी तब सब कहाँ डूबेगा ! मनु बनाएंगे इक नौका नूह* बनाएंगे इक जहाज़ दुनिया और जीवन जितना संभव होगा बचा लेंगे.. लेकिन जब भर आएंगी तुम्हारी आँखें मैं न बच पाऊँगा ! प्रलय आएगी उसदिन जब बिन पतवार, बिन किनारे डूब जाऊँगा तेरी आँखों में || ©समृद्धि #kavitaख़ोर (नूह - Noah)
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यह यात्रा ही
हमारा घर है |
और....
कहीं भी पहुँचने के लिए
की गईं तमाम कोशिशें,
दरअसल ख़ुद तक पहुँचने की
कोशिश का हिस्सा हैं ||
©समृद्धि
#kavitaख़ोर

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हम-तुम मरकर नहीं बनेंगे
आसमान के तारे
हम तो जीते जी हैं
सम्पूर्ण स्पंदित ब्रह्माण्ड...
और मरकर हो जाएँगे
कविताओं में तब्दील
खोजते-फिरेंगे इक-दूजे को
भाषा-भाषा...
शब्द-शब्द...
छंद-छंद...
©समृद्धि
#kavitaख़ोर

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हम जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं
प्रेम के बारे में उससे भी कम
और अपने बारे में नाममात्र...
परंतु तब भी
हम सारा जीवन ऐसे बिताते हैं
जैसे सबकुछ जानते हैं ||
©समृद्धि
#kavitaख़ोर
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