
Naveen Tiwari
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यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।


देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों से लेकर IIT, IIM जैसे सर्वोच्च अकादमिक संस्थानों में आज भी SC, ST, OBC के आधे से ज़्यादा पद ख़ाली हैं। हम किसी के ख़िलाफ़ नहीं हैं—हम सिर्फ़ अपने संवैधानिक हक़, अधिकार और हिस्सेदारी की माँग करते हैं।







कुछ मित्र कहते हैं कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 80% से ज्यादा प्रोफेसर सवर्ण हैं तो योग्यता के बल पर हैं! फिर "80% योग्य प्रोफेसरों" के होते हुए देश के एक भी विश्वविद्यालय को आज तक विश्व के 100 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में जगह क्यों नहीं मिली? समावेशी होकर ही देश समर्थ होगा!





