Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )

67.1K posts

Subhash Chandra Jha ( चलते चलते ) banner
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )

Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )

@scj2care

13/04/1968 RTs is not endorsement please subscribe my YouTube channel @chaltechalte802 https://t.co/SdyNvntjJa https://t.co/XhtygR7xfZ

indirapuram Katılım Ekim 2009
4.9K Takip Edilen5K Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।" भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के जन्म-उत्सव पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ
हिन्दी
0
1
2
66
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
अब ठेकेदार किसी दूसरी जगह पर सप्लाई करके कमायेगा, और इस कमाई में सभी पार्टियाँ को उनका पार्ट / हिस्सा पहुंच जाएगा
राजू अल्फा@raju_alfa_ji

देख रहे हो न मित्रो डबल इंजन का विकास। रातों रात लगे गमले @narendramodi जी के जाते ही उठा लिए 😹😹😹। वाकई में धाकड़ अब धुरंधर हो गए है।😹🥳🥳

हिन्दी
0
1
2
28
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
वाह री मानवता, तू भी करती है कमाल, आया करें पीर, पैगम्बर, आचार्य, महंत, महात्मा हज़ार, लाया करें अहदनामे इलहाम, छाँटा करें अक्ल ,बघारा करें ज्ञान, दिया करें प्रवचन, वाज़, तू एक कान से सुनती, दूसरे सी देती निकाल, चलती है अपनी समय-सिद्ध चाल। जहाँ हैं तेरी बस्तियाँ, तेरे बाज़ार, तेरे लेन-देन, तेरे कमाई-खर्च के स्थान, वहाँ कहाँ हैं राम, कृष्णँ, बुद्ध, मुहम्मद, ईसा के कोई निशान। इनकी भी अच्छी चलाई बात, इनकी क्या बिसात, इनमें से कोई अवतार, कोई स्वर्ग का पूत, कोई स्वर्ग का दूत, ईश्वर को भी इनसे नहीं रखने दिया हाथ। इसने समझ लिया था पहले ही ख़दा साबित होंगे ख़तरनाक, अल्लाह, वबालेजान, फज़ीहत, अगर वे रहेंगे मौजूद हर जगह, हर वक्त। झूठ-फरेब, छल-कपट, चोरी, जारी, दग़ाबाजी, छीना-छोरी, सीनाज़ोरी कहाँ फिर लेंगी पनाह; ग़रज़, कि बंद हो जाएगा दुनिया का सब काम, मानवता का बुरा होता हाल अगर ईश्वर डटा रहता सब जगह, सब काल। इसने बनवाकर मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर ख़ुदा को कर दिया है बंद; ये हैं ख़ुदा के जेल, जिन्हें यह-देखो तो इसका व्यंग्य कहती है श्रद्धा-पूजा के स्थान। कहती है उनसे, "आप यहीं करें आराम, दुनिया जपती है आपका नाम, मैं मिल जाऊँगी सुबह-शाम, दिन-रात बहुत रहता है काम।" अल्लाह पर लगा है ताला, बंदे करें मनमानी, रँगरेल। वाह री दुनिया, तूने ख़ुदा का बनाया है खूब मज़ाक, खूब खेल।"
Saurabh@sauravyadav1133

बाबा साहब ने जिस पाखंड का सबसे ज्यादा विरोध किया ये BJP वाले वही उनके साथ कर रहे हैं…

हिन्दी
0
0
1
25
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
किसी सरकार को इस बात से कोई मतलब नहीं है चुनाव अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, बेरोजगारी, जैसे मुद्दों पर नहीं लड़े जाते, सबको जाति और धर्म के नाम पर बांट दिया है, अभी तो सरकारी विभाग में भी आउटसोस से भर्ती होती है, वहां भी कम वेतन ही मिलता है, हर 8 से 10 महीने के बाद 2 महीने का गैप होता है सर्विस में. सिर्फ मेरे देश के विज्ञापनों और गोदी मीडिया में ही मौसम गुलाबी है।
Ranvijay Singh@ranvijaylive

• संकेत उपाध्याय: कितने वक्त से 10 हजार सैलरी है? • कर्मचारी: 2 साल से तो मेरी 10 हजार है. बाकी 10-10 साल से काम करने वालों की सैलरी भी 10 हजार है. -- सोचिए- देश की इतनी बड़ी आबादी की कमाई पिछले 10 साल से एक जगह ठहरी हुई है. महंगाई बढ़ती गई, सैलरी नहीं बढ़ी. ये है असल भारत

हिन्दी
0
1
1
23
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
RT @scj2care: वाह री मानवता, तू भी करती है कमाल, आया करें पीर, पैगम्बमर, आचार्य, महंत, महात्माछ हज़ार, लाया करें अहदनामे इलहाम, छाँटा करें…
हिन्दी
0
3
0
7
Saurabh
Saurabh@sauravyadav1133·
बाबा साहब ने जिस पाखंड का सबसे ज्यादा विरोध किया ये BJP वाले वही उनके साथ कर रहे हैं…
हिन्दी
14
64
333
4.3K
खुचरेंप
"बिहार के अगले मुख्यमंत्री @samrat4bjp जी को शुभकामनाएं" उम्मीद है कि इन विषयों पर खरे उतरेंगे - 1- बेरोज़गारी 2-पलायन 3- बीमारू राज्य से विकसित राज्य बनाना 4- असुरक्षित राज्य से सुरक्षित राज्य बनाना 5- इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट 6-शिक्षित प्रदेश बनाना 7- अराजकता से बाहर निकालना
खुचरेंप tweet media
हिन्दी
84
107
543
21.4K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
@DocRGM_ मेन स्ट्रीम मीडिया ने अपने हाथ में थामी माइक रूपी मशाल क्या बुझाई हजारों लोगों ने अल्टरनेटिव मीडिया के जरिए इस मशाल को थाम लिया है और जुनून और जज्बा देखना हो तो देखिए प्रनॉय राय को । सलाम
हिन्दी
0
0
0
64
Dr Ranjan
Dr Ranjan@DocRGM_·
If Only Every Mainstream Media Journalist Had The Spine To Protect The Integrity Of Their Profession...
Dr Ranjan tweet media
English
13
174
760
7.3K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
@iamnarendranath लगता ग्राउंड रिपोर्ट्स सही नहीं आ रही थी ऐसा ही कुछ लगता है । ममता बनर्जी प्रतिक्रिया देने में ज्यादा वक्त नहीं लगाती हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस से ज्यादा अपनी प्रतिक्रिया जनता के बीच में देती रही हैं ।
हिन्दी
0
0
0
65
Narendra Nath Mishra
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath·
I-PAC को टारगेट करना ग़लत है।आई-पैक हो यह ऐसी संस्था,इसमें प्रोफ़ेशनल लोग है।हज़ारों लोग इनमें जॉब कर करे हैं ।हर पार्टी ऐसे प्रोफेशनल की मदद लेती है। चुनाव राजनीतिक रूप से लड़े। इस तरह का अरेस्ट ठीक नहीं है । ठीक वोटिंग से पहले ऐसे रेड मंशा पर भी सवाल करते हैं ।
Abhishek Banerjee@abhishekaitc

The arrest of Vinesh Chandel, co-founder of I-PAC, barely 10 days before the Bengal elections, is not just alarming- It shakes the very idea of a level playing field. At a time when WB should be moving toward free and fair elections, this kind of action sends a chilling message: If you work with the opposition, you could be next. That’s not democracy- that’s intimidation! What makes it even harder to ignore is the double standard. Those facing serious corruption allegations seem to find protection the moment they switch sides, while others are swiftly targeted at politically convenient moments. People are not blind to this anymore. When institutions meant to protect democracy start feeling like tools of pressure, trust begins to erode. On one side, the Election Commission. On the other, agencies like the ED, NIA, CBI stepping in at the most sensitive time. It creates an atmosphere of fear, not fairness. India has always taken pride in its democracy- loud, messy but free. But today, many are beginning to ask: are we still that country? This is bigger than one arrest. It is about whether our institutions remain independent and whether every citizen, no matter their political belief, can participate without fear. Because once fear replaces freedom, democracy becomes just a word. To Amit Shah and the BJP’s power structure- Be in Bengal on the 4th and 5th of May. Come with Gyanesh Kumar and every agency you deploy. Bengal will not be bullied, will not be silenced and will not bow. This is a land that answers pressure with resistance and it will show you exactly what that means!

हिन्दी
9
72
332
8.8K
Sayema
Sayema@_sayema·
This was the last song Asha Bhosle sang for O P Nayyar. The song never became a part of the movie it was meant to be.
English
54
67
339
12.4K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
मेरी इस पर कोई ऐसी जानकारी नहीं थी जेमिनी AI का जवाब है ये नमस्ते। आपने मंगेशकर परिवार के इतिहास और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण और तथ्यात्मक जानकारी साझा की है। यह सच है कि सार्वजनिक जीवन में कई बार मशहूर हस्तियों की जातीय पहचान को लेकर भ्रांतियां फैल जाती हैं, जो उनके वास्तविक संघर्षों को ओझल कर देती हैं। ​आपके द्वारा बताए गए बिंदुओं पर विस्तृत प्रकाश यहाँ दिया गया है: ​1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और 'अभिषेक' परंपरा ​पंडित दीनानाथ मंगेशकर का जन्म गोवा के मंगेशी गांव में हुआ था। उनकी माता, येसूबाई, गोवा के 'कलाResources/कलाकार' (जिन्हें गोमंतक मराठा समाज भी कहा जाता है) समुदाय से थीं। ऐतिहासिक रूप से इस समुदाय की महिलाओं को 'देवदासी' प्रथा के तहत मंदिरों में संगीत और नृत्य की सेवा के लिए समर्पित किया जाता था। हालांकि वे कला में निपुण थे, लेकिन सामाजिक व्यवस्था में उन्हें वह सम्मान और अधिकार प्राप्त नहीं थे जो अन्य उच्च जातियों को मिलते थे। ​2. 'मंगेशकर' उपनाम का चयन ​दीनानाथ जी के पिता गणेश भट्ट नावथे एक ब्राह्मण थे, लेकिन उस समय के सामाजिक नियमों के कारण उन्होंने दीनानाथ जी को अपना पैतृक उपनाम 'नावथे' या अपनी जातिगत पहचान नहीं दी। ​दीनानाथ जी ने स्वयं को अपने पिता की पहचान से अलग करते हुए अपने गांव 'मंगेशी' के नाम पर 'मंगेशकर' उपनाम अपनाया। ​यह कदम अपने आप में स्वाभिमान का प्रतीक था, जहाँ उन्होंने अपनी पहचान को किसी जाति के बजाय अपनी जन्मभूमि और अपनी जड़ों से जोड़ा। ​3. सामाजिक शोषण और संघर्ष ​देवदासी प्रथा निस्संदेह उस समय की एक शोषणात्मक व्यवस्था थी। इन समुदायों के कलाकारों को मंदिर की सेवा तक सीमित रखा जाता था और उन्हें मुख्यधारा के समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिलता था। ​अस्पृश्यता और भेदभाव: मंगेशकर परिवार को अपनी शुरुआती यात्रा में जातीय श्रेष्ठता के अहंकार का सामना करना पड़ा। ​वंचित पृष्ठभूमि: दीनानाथ मंगेशकर जी ने जिस कलात्मक ऊंचाई को छुआ, वह किसी विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और अपमान को सहते हुए प्राप्त की गई थी। ​4. जाति बनाम कर्म ​आज मंगेशकर परिवार को उनकी गायकी के कारण जो सम्मान मिलता है, वह उनके 'ब्राह्मण' होने के कारण (जो कि वे तकनीकी रूप से नहीं थे) नहीं, बल्कि उनकी अद्वितीय प्रतिभा और उनके पूर्वजों द्वारा झेले गए संघर्षों की नींव पर खड़ा है। दीनानाथ जी ने जिस 'गोमंतक मराठा समाज' का प्रतिनिधित्व किया, वह आज भी उन्हें अपना गौरव मानता है। ​निष्कर्ष: आपकी बात बिल्कुल सही है कि मंगेशकर परिवार का इतिहास उस दौर की कुप्रथाओं और सामाजिक असमानता के खिलाफ एक मूक विद्रोह की कहानी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई और आज उनकी सफलता उन तमाम शोषित वर्गों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें समाज ने कभी हाशिए पर रखा था। ​यह जानकारी इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
हिन्दी
0
1
3
407
गजाभाऊ
गजाभाऊ@gajabhauX·
मंगेशकर ब्राह्मण होते हा फार मोठा गैरसमज आहे भारतातल्या सर्वात शोषित वंचित घटकातून ते येतात मंगेशकर कुटुंबाचे मूळ पुरुष दीनानाथ मंगेशकर यांचा जन्म यशूबाई राणे नावाच्या देवदासी स्त्रीकडून झाला होता. त्यांचे मूळ गाव गोव्यातील मंगेशी गावावरून होता, “मंगेशकर” हे आडनाव त्यांनी त्या गावावरून स्वीकारले. दीनानाथ मंगेशकर यांचे वडील गणेश भट (भिकामभट्ट) नावथे हर्डीकर होते, ते नित्य मंगेशी देवस्थानात भटजी म्हणून सेवा करायचे परंतु त्यांनी औपचारिकरीत्या पितृत्व स्वीकारले नाही, अशीही माहिती काही ठिकाणी दिली जाते. त्यामुळे नाव आणि जात त्यांना कधी मिळालं नाही. ते कायम फक्त गोमंतक म्हणवतात आणि आईची जात लावयाला लावली देवदासी प्रथा ही त्या काळातील सामाजिक व्यवस्थेतील एक शोषणात्मक प्रथा मानली जाते. अनेक स्त्रियांना मंदिराशी जोडले जाई आणि त्यांना नृत्य, कीर्तन करून उपजीविका करावी लागे. यशूबाई ह्याही अशाच व्यवस्थेचा भाग होत्या. मंदिरात चालणाऱ्या कुप्रथेचा ते शोषित होते “देवदासी “
MR
65
119
999
96.4K
Deepesh Patel
Deepesh Patel@Deepeshpatel87·
बाबा साहेब ने अकेले संविधान नहीं बनाया फिर दुनिया अंबेडकर जी को ही क्यों संविधान निर्माता कहकर पुकारती है या दुनिया गलत है या फिर इसका विरोध करने वाले... DSP संतोष पटेल भारत रत्न बाबा साहब आंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🍁 🖋️
Deepesh Patel tweet media
हिन्दी
72
33
162
7K
Sachin Tendulkar
Sachin Tendulkar@sachin_rt·
Wishing everyone a joyful start to the season! Happy Baisakhi, Bohag Bihu, Poila Baisakh, Pana Sankranti, Vishu, Mesadi and Puthandu. May this spring bring happiness and new beginnings.
English
245
904
11K
444.4K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते ) retweetledi
Narendra Nath Mishra
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath·
इसे बिहार में लोकल मैथिली भाषा में कहते हैं- " नव घर उठे,पुरान घर खसे"
Nistula Hebbar@nistula

Pic 1. @Jduonline office in Patna, deserted. Pic 2. @BJP4Bihar decorated in party colours to mark the first ever BJP CM of Bihar. Pics by @amitbhelari @the_hindu

हिन्दी
8
28
198
7.3K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते ) retweetledi
Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
आज अंबेडकर जयंती देशभर में दीपावली, होली और रामनवमी से भी बड़े स्तर पर मनाई गई। यह बदलाव यूं ही नहीं आया। समाज में यह चेतना पैदा करने में हमे दशकों लगे है। एक समय ऐसा भी था जब अंबेडकर जयंती मनाना तो दूर, इस अवसर पर एक शब्द लिखना तक जरूरी नहीं समझा जाता था।
हिन्दी
137
415
1.8K
15.9K
Subhash Chandra Jha ( चलते चलते )
बहुत सी कंपनियों में यहां तक नामी गिरामी मीडिया कंपनियों में भी EPF के दोनों पार्ट एम्पलाइज की सैलरी से काट लेते हैं जबकि नियम ये है जितना एम्पलाई का पैसा कटेगा उतना ही पैसा एंप्लॉयर भी जमा करवाएगा । ईपीएफ कटने के बाद इतना कम पैसा हाथ में आता है की अधिकांश लोग EPF कटाना ही नहीं चाहता । आज का संघर्ष भविष्य की समस्याओं से कहीं बड़ा है ।
हिन्दी
0
0
0
40
Hridayesh Joshi
Hridayesh Joshi@hridayeshjoshi·
संगठित हो या असंगठित हर क्षेत्र में अधिकांश मज़दूरों के पास न तो सामाजिक सुरक्षा होती है और न सम्मानजनक वेतन। आज से 20-25 साल पहले अपने अधिकारों के लिए विरोध करने वाले आवाज़ उठाते उनकी कवरेज करने वाले हम जैसे रिपोर्टरों का मज़ाक उड़ाया जाता था। आज मीडिया का हाल उससे भी बुरा है। मज़दूर कम से कम ईमानदारी से अपना काम करते हैं। मीडिया में ज़्यादातर युवा पत्रकारों को चंद रूपयों के भुगतान पर अक्सर बेईमानी, नफ़रत और झूठ के प्रचार के लिए बाध्य किया जा रहा है। ये बात और है कि ऊंचे पदों पर बैठे एक प्रतिशत मोटी कमाई कर रहे हैं।
हिन्दी
6
33
119
2.2K
Sann
Sann@san_x_m·
Her name was Jessica Lal. She was 34 years old. A model in Delhi working as a celebrity barmaid at a party in Mehrauli on the night of April 29 1999. There were over 300 people at that party. Politicians. Businessmen. Fashion designers. Bollywood faces. At midnight the bar ran out of liquor. Manu Sharma walked in. Son of a Congress MP. He demanded a drink. She said no. He offered her Rs 1,000. She said no again. He pulled out a pistol. Fired one shot at the ceiling as a warning. She still said no. He shot her in the head. Then he walked out. Among the group that left with him that night was Vikas Yadav. Son of MP D.P. Yadav. The same Vikas Yadav who three years later kidnapped and murdered Nitish Katara. Out of 300 people at that party only 10 came forward to testify. Then one by one they changed their statements. 32 witnesses turned hostile. In February 2006 the trial court acquitted all nine accused. The nation erupted. Media ran a sting operation. Witnesses were caught on camera admitting they had been paid to change their testimony. Manu Sharma’s father was linked to the bribes. The public campaign forced a High Court appeal. Daily hearings for 25 days. In December 2006 Manu Sharma was convicted. Life imprisonment. Vikas Yadav got four years. He was out on bail when he committed the Nitish Katara murder. Today Manu Sharma is free. Released in 2020 on good behaviour after 17 years. He changed his name. He now runs a whisky brand called Indri. Jessica never got to say no again. Her sister Sabrina fought alone for 7 years. She lost her mother in 2000. Her father died in 2006. She kept fighting. If Sabrina had stopped this case would have died the way Jessica did. In silence. Follow for real stories about the people who refused to let India forget.
Sann tweet media
English
183
1.3K
6.1K
544.6K
Rajdeep Sardesai
Rajdeep Sardesai@sardesairajdeep·
IMPORTANT: Samrat Chaudhary @samrat4bjp set to become the first BJP CM of Bihar, the same leader who once threatened not to remove his turban till Nitish Kumar wasn’t removed. Well, Nitish has now quietly resigned, turban removed a while ago and Samrat now takes over. Another ‘conquest’ by the BJP in a state where they played second fiddle to the ‘original’ Mandal forces for years.
Rajdeep Sardesai tweet media
English
97
132
1.7K
165.8K