Shailendra Sharma

937 posts

Shailendra Sharma banner
Shailendra Sharma

Shailendra Sharma

@shail2018

Passionate about Education. Believe in freedom of expression, dignity of all. Against Monopoly of Power.

Katılım Ağustos 2018
94 Takip Edilen8.5K Takipçiler
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
जिस कंपनी की मदद से भारत सरकार ने देश के पासपोर्ट दफ्तरों से दलालों की लगभग छुट्टी कर दी, वही कंपनी दिल्ली की सरकारी और प्राइवेट शराब की दुकानों से राजस्व की चोरी नहीं रोक पाई… और इसी चोरी को रोकने की कोशिश को बीजेपी-कांग्रेस नें "दिल्ली शराब घोटाला" कहा! तो बात करते हैं एक कंपनी की जिसका नाम है टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), और दिल्ली के शराब विभाग में इसकी भूमिका की। TCS हमारे देश की एक सम्मानित टेक्नोलॉजी कंपनी है, इसकी साख़ दुनियाभर में है। 17 साल पहले भारत सरकार ने टेक्नोलॉजी की मदद से देश में पासपोर्ट एप्लिकेशन प्रोसेस की शुरुआत की, इसके ज़रिए पासपोर्ट सेवा केंद्र का जन्म हुआ, और TCS को इस काम का कांट्रैक्ट मिला। अब पासपोर्ट बनवाने के लिए, कम से कम दिल्ली और कई अन्य महानगरों में, दलालों की “सेवा” नहीं लेनी पड़ती! इसी TCS को दिल्ली सरकार ने साल 2013 में सभी शराब की बोतलों को बारकोड के ज़रिए "एंड टू एंड ट्रैक" करने का कांट्रैक्ट दिया। मक़सद था कि एक एक बोतल का रिकॉर्ड हो ताकि दिल्ली में अवैध शराब न बिक सके और पूरा राजस्व सरकारी ख़ज़ाने में आए। पर हुआ इससे काफ़ी अलग। दिल्ली में 6 प्रकार की शराब की दुकानें हैं, इनमें से 4 दिल्ली सरकार के कॉरपोरेशंस की दुकानें हैं। 52% शराब सरकारी निगम की दुकानें बेचती हैं, और 40% प्राइवेट वेंडर। बाक़ी 8% रेस्टोरेंट्स, कैंटीन, डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर बिकती है। चूँकि सरकार के कामकाज़ में रिकॉर्ड्स बड़ी बारीकी से रखा जाता है इसलिए अपेक्षा ये थी कि सरकारी शराब की दुकानें सभी बोतलों का हिसाब अच्छे से रखती होंगी, प्राइवेट वाले ज़्यादा हेराफेरी करते होंगे। पर होता था इससे ठीक उल्टा। दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने एक साल में 45% बोतल बिना बारकोड स्कैन किये बेची, दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाइज़ कॉरपोरेशन लिमिटेड (DSCSCL) ने 36%, और दिल्ली टूरिज़्म एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DTTDC) ने 30% शराबें बिना बारकोड स्कैन किए बेची!! और प्राइवेट वेंडरों ने 29% शराब बिना स्कैन के बेची। यानि TCS द्वारा बनाया गए सिस्टम के बावजूद दिल्ली के शराब कारोबार में ये सब हो रहा था!! तो एक तरफ़ दिल्ली में सरकारी शराब की दुकानें प्राइवेट की तुलना में 40% अधिक थी, फ़िर भी राजस्व दोनों से बराबर ही आता था! लेकिन सरकारी दुकानों से इतने बड़े लीकेज़ के बाद भी शराब विभाग के तत्कालीन आयुक्त रवि धवन की कमेटी ने होलसेल के कारोबार से प्राइवेट वेंडरों को हटा कर, सब कुछ एक सरकारी निगम के हाथ में देने की सिफारिश की थी! यानि रिफार्म के नाम पर बनने वाली नई शराब नीति में भी पहले जैसे बंदरबाँट वाली व्यवस्था क़ायम रहे, ये इरादा था मठाधीशों का। पर जब केजरीवाल सरकार ने रवि धवन कमेटी की रिपोर्ट को अक्षरशः मानने की बजाय “ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर” बनाया जिसने सभी सिफारिशों को ध्यान से देखा, स्टेकहोल्डर्स से सलाह मशविरा करके नीति प्रस्तावित की, तो इसमें इन्हें साज़िश नज़र आई!! चूँकि दिल्ली में शराब के धंधे का काला और सफ़ेद तंत्र कांग्रेस के जमाने में बना था, और 2021, या यूँ कहें कि अभी तक वही सब चल रहा है। इसलिए केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ सबसे पहले तथाकथित शराब घोटाले की शिकायत कांग्रेस के नेताओं ने की थी। बीजेपी को तो कोई अंदाज़ा भी नहीं था कि इस धंधे में आख़िर हो क्या रहा है। बीजेपी की भूमिका तब से शुरू होती है जब नए एलजी विनय सक्सेना और नए मुख्यसचिव नरेश कुमार नें 2022 में कमान संभाली। तो अगर आसान शब्दों में कहें तो केजरीवाल सरकार की नई शराब नीति कांग्रेस के लिए “आर्थिक” मसला थी, और बीजेपी के लिए “राजनैतिक” लिहाज़ा, दोनों ने एक साथ केजरीवाल सरकार पर धावा बोल दिया। और इसका ख़ामियाज़ा भुगता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 23 निर्दोष लोगों ने, और नुक़सान हुआ दिल्ली की जनता का, क्योंकि जिस पैसे से उनके विकास का काम हो सकता था, वो अभी भी कुछ नेताओं, अफसरों और कारोबारियों की तिज़ोरी में जा रहा है...
हिन्दी
3
56
119
5.2K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
दिल्ली सरकार के स्कूलों में 9वीं की छात्राओं को साइकिल मिलेगी ताकि वो ड्रॉपआउट न हों… ये दिल्ली की अवैध बीजेपी सरकार की एक और दिशाहीन योजना है! इन्हें कोई अंदाज़ा नहीं है कि कितनी छात्राएं 9वीं में ड्रॉपआउट, यानि पढ़ाई छोड़ती हैं, और वो भी किस कारण से! पर समाधान ढूँढ लिया है, साइकिल के रूप में! सोचिए, जब 8वीं की छात्रा उसी स्कूल में अगले साल 9वीं में जाती है, तो वही स्कूल अचानक घर से दूर कैसे हो जाएगा? दिल्ली सरकार के कुल 1087 स्कूलों में, सिर्फ 19 स्कूल ही 8वीं क्लास तक हैं। यानि इन 19 स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी 1068 स्कूलों में 8वीं के बाद उसी स्कूल में छात्राएं 9वीं में जाती हैं! तो 9वीं क्लास में पढ़ने वाली कुल 1.25 लाख छात्राओं में से सिर्फ 800 ऐसी हैं जो दूसरे स्कूल से आई हैं, बाक़ी लगभग सभी उसी स्कूल में पहले से पढ़ रही थीं। ऐसे में 9वीं क्लास में घर से दूरी की वजह से कोई छात्रा क्यों ड्रॉपआउट होगी? और अगर कोई बच्ची बाहर से आकर सीधे 9वीं क्लास में दिल्ली सरकार के स्कूल में दाखिला ले रही है तो अपने घर से नज़दीक वाले स्कूल में जाएगी, दूर के स्कूल में नाम लिखाकर ड्राप आउट थोड़े होना चाहेगी!! अब बात करते हैं ड्रॉपआउट के असल कारण की। लड़कियाँ और लड़के दोनों ड्राप आउट क्यों होते हैं इसे समझने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को टाइम्स ऑफ़ इंडिया की मेघना धूलिया और इशिता जैरथ की ये रिपोर्ट पढ़नी चाहिए। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के तहत समग्र शिक्षा ब्रांच ने एनजीओ चेतना के साथ मिलकर ठोस प्रमाण के साथ ड्रॉपआउट के कारण और निवारण प्रस्तुत किए हैं। अगर वाक़ई मुख्यमंत्री महोदया ड्रॉपआउट रोकना चाहती हैं तो ₹90 करोड़ के बजट को उन उपायों पर ख़र्च करें जो इन्हीं के शिक्षा विभाग का समग्र शिक्षा ब्राँच चिन्हित कर रहा है, न कि साइकिल बाँटने पर। और हाँ, रिकॉर्ड के लिए बता दें कि साइकिल बाँटने में कोई हर्ज़ नहीं है, मैडम चाहें तो बेशक छात्राओं को मोटरसाइकिल दे दें, पर ड्रॉपआउट रोकने के नाम पर साइकिल बाँटना, वो भी आज की दिल्ली में, बकवास क़दम है…
Shailendra Sharma tweet media
हिन्दी
4
35
54
1.4K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
बीजेपी की तरक़्क़ी में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पार्टी अध्यक्ष से कहीं ज़्यादा बड़ी है... इसीलिए सबसे शक्तिशाली भारतीयों की लिस्ट में ज्ञानेश कुमार, नितिन नबीन और जे पी नड्डा से बहुत ऊपर हैं! बीजेपी ख़ुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, पर इसके अध्यक्ष देश के शक्तिशाली लोगों में काफ़ी नीचे हैं!! इंडियन एक्सप्रेस ने 2026 की 100 मोस्ट पावरफुल इंडियंस की एक सूची जारी की है, हर साल की तरह। इसमें देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 20वें और बीजेपी के वर्तमान अध्यक्ष नितिन नबीन 21वें नंबर पर हैं! और अभी पिछले महीने तक अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा 54वें नंबर पर हैं। नड्डा जी पिछले 6 सालों से बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं, इनके “नेतृत्व” में बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें प्राप्त की, दर्जनों राज्यों के चुनाव जीते। पिछले साल की सूची में भी नड्डा जी 50 वें नंबर पर थे। यानि इनका वजूद न पहले था, और न अब है! नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा लगभग 10 बीजेपी के केंद्रीय मंत्री और 2 बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री अपने वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष से ज़्यादा शक्तिशाली हैं!! यहाँ तक कि अमित शाह के बेटे जय शाह न सिर्फ़ इस साल बल्कि पिछले साल भी नड्डा जी से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली थे! कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जिनके लिए बीजेपी कहती है कि असली कमान उनके नहीं, गांधी परिवार के हाथ में है, वो भी न सिर्फ़ इस साल बल्कि पिछले साल भी तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नड्डा जी से ज़्यादा शक्तिशाली थे। तो कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत एक रबर स्टैम्प से ज़्यादा नहीं है। पार्टी के मालिक मोदी-शाह हैं, अध्यक्ष तो सिर्फ़ इनके द्वारा नियुक्त एक मुलाज़िम हैं… और इसके बाद भी मोदी जी कहते हैं कि हमारे यहाँ कोई भी अध्यक्ष बन सकता है, पार्टी के अंदर लोकतंत्र है, अध्यक्ष ही सब कुछ है, इत्यादि। ग़ज़ब मज़ाक़ है न?
हिन्दी
1
33
86
3.9K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
एक वरिष्ठ महिला पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी के चरित्र पर गंभीर इल्ज़ाम लगाए हैं… 4 दिन बीत चुके हैं, पर अभी तक किसी भी TV चैनल या अख़बार ने इस पर कोई ख़बर या बहस नहीं की है! अभी तक मोदी जी की तरफ़ से उस वरिष्ठ पत्रकार के ख़िलाफ़ मानहानि का नोटिस भी नहीं भेजा गया है! इससे हमें ये पता चलता है कि देश में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पूरी तरह "स्वतंत्र", "निष्पक्ष" और "निर्भीक" है, उस पर कोई "दबाव" नहीं है! तथा देश में "अभिव्यक्ति" की पूरी आज़ादी है, कोई भी प्रधानमंत्री मोदी के "चरित्र" पर सवाल उठा सकता है! आख़िर हम अमेरिका जैसे पिछड़े देश थोड़े न हैं कि कोई महिला उनके तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर यौन शोषण का आरोप लगाए, और अमेरिका के प्रमुख अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स उसे छापें, उनके देश के अटॉर्नी जनरल मामले की जाँच करें, और अमेरिकी संसद अपने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाए!! हम तो विकसित भारत हैं, विश्वगुरु हैं, हमारे धर्मशास्त्रों में तो नारियों को पूजने की परंपरा है, हम क्यों किसी महिला के यौन शोषण और वो भी तब, जब आक्षेप महामानव रूपी हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री पर लगा हो, कोई तबज़्ज़ो दें! हम तो सर्टिफ़ाइड महान हैं, किसी और प्रमाण की क्या ज़रूरत…
हिन्दी
44
218
604
23.1K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
दिल्ली में असली शराब घोटाला क्या है, इसे जानने के लिए CAG की रिपोर्ट का चैप्टर 2 पढ़िए… रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में लगभग 30% शराब बिना बारकोड स्कैन किए बेची जाती है! यानि 100 में से 30 शराब की बोतल का टैक्स, सरकार नहीं, किसी और की जेब में जाता है, ये संभव है। “ख़राब नेटवर्क, बिजली कटौती, या बारकोड स्पष्ट न होने की वजह से सभी बोतलों की स्कैनिंग संभव नहीं है” ये जवाब है दिल्ली सरकार के शराब विभाग का, दिल्ली विधानसभा की PAC को, CAG की नोटिंग पर! यानि वो दिल्ली जहाँ रेहड़ी पटरी वाले का भी बारकोड स्कैनर चलता है, जहाँ बिजली 24 घंटे आती है, वहाँ करोड़ों के टर्नओवर वाली शराब की दुकान अपनी सभी बोतलों के बारकोड स्कैन नहीं कर पाती हैं!! है न कमाल? तो अगर 70% शराब पर लगभग ₹5000 करोड़ का राजस्व आता है, तो 100% पर कितना आना चाहिए? आसान सवाल है, दिल्ली सरकार के स्कूलों में आठवीं का छात्र भी इसका जवाब दे सकता है! पर दिल्ली विधानसभा की PAC ने न तो ये सवाल पूछा, न उन्हें जवाब मिला, क्योंकि वो तो हर जवाब में सिर्फ़ मनीष सिसोदिया ढूँढ रहे थे! और कल भी दिल्ली की अवैध बीजेपी सरकार की मुख्यमंत्री नें Times Now Summit में, और इनके एक मंत्री नें विधानसभा में केजरीवाल के नाम की माला जपी! ख़ैर, ज़वाब है ₹7143 करोड़!! यानि जहाँ वास्तव में सरकारी ख़ज़ाने में ₹7143 करोड़ आने चाहिए, वहाँ मात्र ₹5000 करोड़ आते हैं। तो आख़िर हर साल लगभग ₹2000 करोड़ कहाँ जाता है, किस किस की जेब में जाता है? चूँकि इस सवाल का जवाब किसी को नहीं चाहिए इसलिए दिल्ली सरकार का शराब विभाग “ख़राब नेटवर्क” और “बिजली कटौती” जैसे बचकाना ज़वाब देकर अपना पीछा छुड़ाता है ताकि "यथा स्थिति" बरक़रार रहे। और इसलिए जब केजरीवाल सरकार ने अपने दूसरे टर्म की शुरुआत में ही 2010 से चले आ रहे "नेक्सस और कार्टेल" को तोड़ने की कोशिश की, तो इसके लाभार्थियों ने मिलकर "रिफ़ार्म" को ही "घोटाला" घोषित कर दिया! आज हर रोज़ बीजेपी-कांग्रेस, केजरीवाल सरकार की नई शराब नीति के अनुमानित ₹2000 करोड़ के नुक़सान की बात करते हैं, पर क्या इनका मुद्दा सरकारी ख़ज़ाने को हर साल हो रहे वास्तविक ₹2000 करोड़ के नुक़सान को रोकना नहीं होना चाहिए? शायद नहीं, क्योंकि हो सकता है इन्होंने केजरीवाल को इस तथाकथित घोटाले में फँसाया ही इसलिए था, ताकि “धंधे का संतुलन” बना रहे…
हिन्दी
10
167
318
18.3K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
सवाल पूछने, और जवाब देने वाला, दोनों शायद देश और दिल्ली के इतिहास से अपरिचित हैं.. 1991 के क़ानून के बाद से दिल्ली में 6 मुख्यमंत्री हुए, उनमें से 3 महिलायें थीं! सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी ने बतौर दिल्ली की मुख्यमंत्री कभी भी महिला होने के नाते किसी भी ताने या टार्गेटिंग की शिकायत नहीं की! शीला दीक्षित जी तो 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं, बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी कार्यकाल शीला जी से कम था! और एक साल मुख्यमंत्री के पद पर रहने के बाद भी रेखा जी को लगता है कि महिला होने की वजह से उन्हें टारगेट किया जाता है! मैडम, जब आप पैदा भी नहीं हुई थीं, तब इस देश की जनता ने इंदिरा गांधी को न सिर्फ़ प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार किया था, बल्कि अपने सिर माथे पर बैठाया था! और आज की दिल्ली को भी इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उसकी मुख्यमंत्री महिला है, या पुरुष!! बस सही नियत और क़ाबिलियत की दरकार है…
हिन्दी
6
65
148
15.8K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
अब क्या कहना है माननीय सुप्रीम कोर्ट को? दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुले आम दावा कर रही हैं कि कोर्ट में “सेटिंग” हुई! NCERT की किताब में “जुडिसियल करप्शन” पर चंद पंक्ति लिखनें पर तो सुप्रीम कोर्ट बहुत नाराज़ हुआ! किताबें वापस करा ली, तीन शिक्षाविदों को हमेशा के लिए शैक्षिक समाज से बहिष्कृत कर दिया!! अब इनका क्या करेंगे? योर लॉर्डशिप, आप इन्हें किस समाज से बहिष्कृत करेंगे??
Atishi@AtishiAAP

Shocking! Delhi CM @gupta_rekha alleging that the judiciary has been ‘set’! Is this what BJP thinks about the judiciary? Should she not be held in contempt?

हिन्दी
1
101
198
4.2K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
अब इसे कैसे रोक पाओगे बीजेपी वालों? इसे कहते हैं क्रिटिकल थिंकिंग, खोज-चर्चा-विश्लेषण आधारित लर्निंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग एप्रोच… ये था मनीष सिसोदिया का शिक्षा मॉडल, जिससे आप डर गए, और अब आप इसे ख़त्म करना चाहते हैं!! ये बच्चे आज आपसे, अपने हुक्मरानों से आँख में आँख डालकर सवाल पूछने की क़ाबिलियत और साहस रखते हैं। बीजेपी वालों, आप दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चों को रोकना चाहते हो, इनके हौसलों को कुचलना चाहते हो। पर सॉरी, आप इन बच्चों को नहीं रोक पायेंगे…
Saurabh Bharadwaj@Saurabh_MLAgk

GenZ निडर है आज CM रेखा गुप्ता स्कूल की बच्चियों से मिली, बच्चों ने वो सवाल पूछ लिए जो अच्छे अच्छे नहीं पूछ पाए यमुना की सफाई और पिंक कार्ड के सवाल पर खूब तालियाँ बजी

हिन्दी
2
114
201
4.3K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
अयोध्या के राजा राम की पत्नी सीता की पवित्रता पर एक सामान्य नागरिक ने सवाल उठाया। और राजा राम ने अपनी पत्नी को त्याग दिया। उसी राजा राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, प्रधानमंत्री मोदी जी ने की थी। आज देश के प्रधानमंत्री के चरित्र पर एक प्रतिष्ठित महिला एवं देश की नागरिक बहुत ही गंभीर सवाल उठा रही हैं। पर मोदी जी में इतनी भी नैतिकता नहीं है कि वो इन आरोपों का ज़वाब दे सकें, पद का त्याग तो बहुत बड़ी बात है! ख़ैर, राम की मूर्ति मंदिर में बैठा कर ख़ुद सत्ता की गद्दी पर बैठने वाले से मर्यादा की उम्मीद करना, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का अपमान होगा। पर हमें अपने राम पर भरोसा है, वो सब देख रहे हैं… सभी को राम नवमी की शुभकामनाएँ
Manish Sisodia@msisodia

‘एपस्टीन गैंग’ के कारनामों की चर्चा के बीच मधु किश्वर का यह ट्वीट बहुत खतरनाक बात कह रहा है, कि - ऐसे मामलों में उलझे नेता देश के लिए खतरा बन सकते हैं क्योंकि वे ब्लैकमेल के शिकार हो सकते हैं। मधु किश्वर का यह लंबा ट्वीट बेहद महत्वपूर्ण है- इसमें लगाए गए आरोप किसी विपक्षी नेता का राजनीतिक बयान नहीं हैं, बल्कि सत्ता के अंदर की उन चर्चाओं का ज़िक्र हैं जिन्हें वे वर्षों से सुनती रही हैं। वे लिखती हैं कि- - 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनके निजी जीवन, कुछ महिलाओं को पद देने और यहाँ तक कि कुछ मंत्रियों से जुड़े विशेष सेवाओं की बातें सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय थीं। - इन बातों से वे इतनी असहज हो गईं कि उन्होंने खुद दूरी बना ली, यहाँ तक कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी जाने से बचती रहीं। - और सबसे गंभीर चेतावनी- वे यह भी दावा करती हैं कि विदेशों तक में उनकी अय्याशी की कहानियाँ सुनने को मिलती थीं। अब ये बातें इसलिए और गंभीर हो जाती हैं क्योंकि मधु किश्वर कोई ट्रोल या विपक्ष की कार्यकर्ता नहीं हैं। वे देश की जानी मानी लेखिका, पत्रकार और विचारक हैं, भाजपा और संघ की विचारधारा के करीब रही हैं। यहाँ तक कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की जीवनी भी लिखी है। ऐसे व्यक्ति की बात को यूँ ही खारिज नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं- - क्या सचमुच महिलाओं को पद देने के बदले उनका शोषण हुआ? - क्या महिलाओं की जासूसी करवाई गई? - क्या देश की सत्ता ऐसे आरोपों के साये में चल रही है? नरेंद्र मोदी जी, देश आपसे सीधा जवाब मांग रहा है। 56 इंच का सीना सिर्फ भाषणों में नहीं, सच का सामना करने में भी दिखना चाहिए।

हिन्दी
40
114
382
27.1K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
केजरीवाल नें “शीशमहल” बनवाया, उसमें लाखों का सामान लगवाया, लिस्ट लंबी है… पर आज इसकी सज़ा सेंट्रल, नार्थ और साउथ दिल्ली के बाशिंदों को क्यों मिले? दिल्ली जल बोर्ड के चंद्रावल प्लांट का पाईप कई दिनों से ख़राब है, ठीक नहीं हो रहा, पानी की किल्लत है, पर पानी मंत्री नें कल दिनभर विधानसभा में सिर्फ़ इस तथाकथित शीशमहल में लगे सामानों की लिस्ट गिनाई! चार दिनों से ख़राब इस पाइपलाइन की वजह से जो इलाक़े प्रभावित हुए हैं उनमें सिविल लाईन भी है। जी, वही सिविल लाईन जहाँ ये तथाकथित शीशमहल विराज़मान है। कल जब दिल्ली की अवैध बीजेपी सरकार के पानी मंत्री प्रवेश वर्मा विधानसभा में इस तथाकथित शीशमहल में लगे पंखे, ट्यूबलाइट्स और टोंटी की लिस्ट पढ़ रहे थे, तो लगा शायद चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का पाइप इसी शीशमहल की वजह से टूटा, या अब इसके ठीक होने के रास्ते में आ रहा है! पर मंत्री जी नें इस “कनेक्शन” पर कोई प्रकाश नहीं डाला!! ख़ैर, अब तो बीजेपी के धूर समर्थक भी “शीशमहल” की कहानी सुन-सुन कर बोर हो चुके हैं! आख़िर जिसको इस कहानी पर यक़ीन करना था उसनें किया, बीजेपी को वोट भी दिया, और अब उनमें से कई पानी ख़रीद कर पी रहे हैं, नहाने धोने के लिए होटल का कमरा बुक कर रहे हैं! इसलिए, मंत्री जी, चूँकि निकट भविष्य में दिल्ली में कोई चुनाव नहीं होने हैं लिहाज़ा “शीशमहल” की कहानी पर विराम दें, और नार्थ, साउथ, सेंट्रल दिल्ली में हो रही पानी की क़िल्लत से जनता को निज़ात दिलवायें, क्योंकि चंद्रावल की पाईप लाईन “शीशमहल” की कहानी सुनकर अपने आप ठीक नहीं होगी…
Shailendra Sharma tweet media
हिन्दी
9
69
119
4K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
भारतीय रेल के TTEs को बधाई… आपके लिए मोदी सरकार के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक ज़बरदस्त "स्कीम" ले कर आए हैं। अब से अगर कोई ट्रेन रवाना होने से 8 घंटे के अंदर अपना टिकट कैंसिल कराता है तो उसे कोई रिफंड नहीं मिलेगा। यानि अब अगर किसी का प्लान बदल गया पर 8 घंटे की सीमा पार हो गई तो वो टिकट कैंसिल ही नहीं कराएगा! और वो रिज़र्व सीट ख़ाली है इसकी जानकारी केवल TTE को होगी, वो भी ट्रेन चलने के बाद! तो अनकॉन्फ़र्म्ड टिकट यात्री TTE से संपर्क करें, ट्रेन छूटने के थोड़ी देर बाद वो सीट आपको TTE साहेब के “विशेषाधिकार” के तहत, मिल सकती है। अब TTEs को अपने "विवेक और विशेषाधिकार" का इस्तेमाल कैसे करना है, ये बताने की ज़रूरत नहीं है, सभी जानते हैं!! तो है न मास्टरस्ट्रोक स्कीम TTTs के लिए? आख़िर "अमृतकाल" का लाभ TTEs को भी क्यों न मिले...
हिन्दी
124
665
2.4K
134.3K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
दिल्ली के सरकारी ख़ज़ाने को ₹2026.91 करोड़ का नुक़सान हुआ, केजरीवाल सरकार की शराब नीति की वजह से... CAG की रिपोर्ट से कट-पेस्ट करके बनाई गई दिल्ली विधानसभा की पब्लिक एकाउंट्स कमेटी(PAC) का ये निष्कर्ष है! कट-पेस्ट का आलम ये है कि PAC ये तय नहीं कर पा रही कि राजस्व नुक़सान का आंकड़ा ₹2002.68 करोड़ है या ₹2026.91 करोड़!! कोई नहीं, इसे भी “क्लेरिकल मिस्टेक” मान लेते हैं.. CAG की रिपोर्ट ख़ुद स्वीकार करती है कि साल 2021-22 में राजस्व ₹5487 करोड़ था जबकि, *2020-21 में ₹4108 करोड़ *2019-20 में ₹5068 करोड़ था यानि कोरोना काल से पहले वाले साल के मुक़ाबले 2021-22 में ₹400 करोड़ ज़्यादा राजस्व आया, वो भी तब, जब 2021-22 में आधे साल पुरानी पॉलिसी और आधे साले अड़ंगे और रूकावटों के साथ नई पॉलिसी लागू हुई थी!! यानि सभी ज़ोर ज़बरदस्ती, खींचा-तानी के बाद भी सरकारी ख़ज़ाने में जितना पैसा पहले आ रहा था, उससे ज़्यादा ही आया, कम नहीं। तो फ़िर नुक़सान की बात कहाँ से आती है? वो ये बात पकड़ कर बैठ गए हैं कि नई पॉलिसी लागू करते वक़्त जो राजस्व का अनुमान लगाया था, उससे ₹2000 क़रोड़ कम आया!! यानि ये नुक़सान वास्तविक नहीं है! पर क्या करें, जब तक बीजेपी नुक़सान-नुक़सान नहीं जपेगी तब तक आरोप में दम नहीं लगेगा, इसलिए ये चाहते हैं कि सभी दिल्लीवासी इनके ₹2002 करोड़, नहीं ₹2026 करोड़ के नुक़सान के काल्पनिक ग़म में शामिल हो जायें..
हिन्दी
3
103
226
16.1K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
2309-ये संख्या याद रखिए… ये केजरीवाल के तथाकथित “वोट बैंक” थे! केजरीवाल नें दिल्ली में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाया, अपने वोट बैंक के लिए!! बीजेपी की ये रूदाली तो याद होगी न? 2024 में तत्कालीन एलजी साहेब नें दिल्ली पुलिस के ज़रिए बांग्लादेशी घुसपैठिए ढूँढने का अभियान चलाया था! अब दिल्ली पुलिस नें भारत सरकार के गृह मंत्रालय को बताया है कि नवंबर 2024 से मई 2025 के बीच सिर्फ़ 720, और जून 2025 से फ़रवरी 2026 के बीच 1589 बांग्लादेशी घुसपैठिए मिले! यानि दिल्ली में अब तक कुल 2309 बांग्लादेशी घुसपैठिए मिले, मोदी सरकार की दिल्ली पुलिस को!! और इन घुसपैठियों के नाम पर लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटवाकर बीजेपी नें दिल्ली में अपनी अवैध सरकार बनाई!! तो सोचने की बात ये है कि आख़िर आज की तारीख़ में दिल्ली में घुसपैठिया कौन है? वो जिनके नाम पर डर की राजनीति खेली गई, या वो जो उस डर की बैसाखी पकड़कर फ़रवरी 2025 में दिल्ली की सत्ता पर क़ाबिज़ हुए…
हिन्दी
2
56
97
4.5K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
NCERT वाक़ई बच्चों को ग़लत पाठ पढ़ा रहा है!! ये बच्चों की किताब में लिखते हैं कि देश के उपराष्ट्रपति को राज्यसभा और लोकसभा में पारित प्रस्ताव के ज़रिए हटाया जा सकता है.. पर सुना है कि पूर्व उपराष्ट्रपति धनकर जी को “ED की फ़ाइल” के ज़रिए “हटाया” गया! लिहाज़ा देश के बच्चों को “भ्रामक” शिक्षा देने के लिए इस बार NCERT की सामाजिक विज्ञान की पूरी किताब ही बैन कर देनी चाहिए…
हिन्दी
0
10
29
1.2K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
धुरंधर, द रिवेंज देखी… ग़ज़ब फ़िल्म है, मज़ा आ गया! अब समझ में आया कि मोदी जी ने “नोटबंदी” क्यों की थी! गर्व हुआ ये सर्टिफिकेट पाकर कि हिंदू “कमज़ोर” क़ौम नहीं है, वो भी “कसाईनुमा” हो सकती है! आत्मा तृप्त हो गई ये जानकर कि भारतीय विमान का अपहरण करके कंधार ले जाने वाले को “भारत माता की जय” बुलवाकर डोवाल जी ने ठुकवाया!! देशभक्ति जाग गई ये जानकर कि भारत से भागा दाऊद पूरे पाकिस्तान की सियासत कंट्रोल कर रहा है, ISI वालों का “बड़ा साहेब” है! ज्ञान बोध हुआ ये देखकर कि इलाहाबाद के माफ़िया अतीक अहमद का एनकाउंटर पराक्रमी यूपी पुलिस नें ख़ुद क्यों नहीं किया! वास्तव में कोई घटना क्यों और कैसे घटित हुई ये जानने की अब हमें कोई ज़रूरत नहीं है, हमें तो बस वैसे बताइए जैसा हम देखना और सुनना चाहते है, वैसे जिससे हमारे "दिल को ठंडक" मिले, गर्व महसूस हो!! इसलिए भारत सरकार को तुरंत "धुरंधर, द रिवेंज" को टैक्स फ्री कर देना चाहिए, ताकि सभी लोग, हमारे देश के दुश्मनों के नाक रगड़ने का काल्पनिक दृश्य वास्तव में देख सकें…
हिन्दी
7
19
72
5.1K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
आज बात करते हैं दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाले की "रिश्वत की रक़म", और गोवा चुनाव में उसके इस्तेमाल पर... “केजरीवाल ने हज़ार करोड़ का घोटाला किया, दो हज़ार करोड़ का घोटाला किया” उन दिनों बीजेपी के नेताओं में होड़ मची थी कुछ भी रक़म बोलने की, लगता था बोली लग रही है!! हक़ीक़त समझने के लिए निचली अदालत के ऑर्डर के पैरा 24 से शुरू करते हैं। CBI की चार्जशीट के अनुसार “साउथ ग्रुप” यानि शराब कारोबारियों के एक समूह ने ₹90-100 करोड़ की रिश्वत दी, पॉलिसी में अपने हिसाब से बदलाव के लिए। और इस ₹90-100 करोड़ में से ₹44.54 करोड़ हवाला के ज़रिए गोवा पहुँचे, और वहाँ के विधानसभा चुनाव में खर्च हुए!! ये CBI की कहानी का मूल ढाँचा है। CBI ने अपने केस में 23 लोगों को आरोपी बनाया जिसमे से 4 AAP से हैं- विजय नायर, मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और दुर्गेश पाठक। एजेंसियों ने इन चारों के यहाँ कई बार छापे मारे, क्या मिला? अमूमन जब ED, CBI या इनकम टैक्स का कहीं छापा पड़ता है तो वहाँ से नोटों की गड्डियाँ, सोने की ईंटें, बेनामी संपत्तियों के काग़ज़ात बरामद होते हैं। पर ये देश का सबसे विचित्र छापा और जाँच थी जिसमें न सिर्फ़ AAP के इन चार नेताओं बल्कि किसी भी आरोपी के पास से एक रुपये भी बरामद नहीं हुए!! तो ₹90-100 करोड़ कहाँ ग़ायब हो गए, इसका जवाब ढूँढने के लिए एजेंसियां गोवा पहुँच गई। कहा कि, जी AAP ने लगभग आधे पैसे गोवा चुनाव में खर्च किए!! ख़ैर, CBI की मज़बूरी का आलम ये है कि बाक़ी आधे के लिए तो कोई कहानी भी नहीं बना पाई! अब कोई पूछे इनसे कि भाई, अगर ये पैसे गोवा चुनाव में खर्च हुए तो, क्या चुनाव आयोग के ऑब्ज़र्वर्स ने इस तथाकथित ख़र्चे को रिपोर्ट किया? नहीं!! ट्रायल जज ने अपने ऑर्डर के पैरा 1046-1052 में चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों पर विस्तृत चर्चा की है। यानि जब चुनाव आयोग ख़ुद चुनाव के सभी पहलुओं को कंट्रोल करता है, ख़र्चों पर नज़र रखने के लिए स्पेशल ऑब्ज़र्वर्स लगाता है तो क्या CBI के अनुसार आयोग ने गोवा में अपना काम ढंग से नहीं किया? तो अब लब्बो-लबाब ये है कि CBI ने हज़ारों करोड़ के घोटाले से अपनी कहानी शुरू की, ₹90-100 करोड़ पर टिके, उसमें से भी सिर्फ़ ₹44.54 करोड़ का कुछ टूटा-फूटा हिसाब दिया, हिसाब के लिए गोवा चुनाव की शरण में पहुँच गए, जहाँ सीधे भिड़ गए चुनाव आयोग के कार्य क्षेत्र में, और परोक्ष रूप से ख़ुद चुनाव आयोग की दक्षता पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करवा दिया!! लिहाज़ा, कमज़ोर कहानी की वजह से बीजेपी द्वारा प्रोड्यूस्ड और एजेंसियों द्वारा डायरेक्टेड फ़िल्म अदालत में फ्लॉप हो गई…
हिन्दी
3
76
142
4.9K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाले में एक कहानी बड़े जोर शोर से चली थी... "केजरीवाल ने शराब कारोबारियों का मुनाफ़ा 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया", और "इस मार्जिन को रिश्वत के तौर पर लेकर गोवा चुनाव में ख़र्च किया" याद है न? सच्चाई ये है सरकार के ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स ने अपने पहले ड्राफ्ट में मुनाफ़ा, यानि प्रॉफिट मार्जिन “कम से कम 5%” प्रस्तावित किया। पर पुनर्विचार के बाद अगले ड्राफ्ट में इसे “12% तक” कर दिया। तो अगर ये “कम से कम 5%” रहता तो वास्तविकता में होलसेलर कुछ भी प्रॉफिट मार्जिन अपनी मर्ज़ी से ले सकता था।ये 10%, 20%, 50% यानि कुछ भी हो सकता था!! पर इसे “12% तक” पर सीमित करने, और अन्य खर्चे जैसे किराया-भाड़ा, इंश्योरेंस इत्यादि इसी में शामिल करके केजरीवाल सरकार ने तो कारोबारियों के मुनाफ़े की ऊपरी सीमा तय कर दी थी। यानि किसी भी सूरत में कारोबारी 12% से ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं कमा सकता था!! पर जाँच एजेंसियों और बीजेपी ने 5% और 12% को बिना उसके आगे-पीछे वाले शब्दों के साथ ऐसे इस्तेमाल किया मानो केजरीवाल सरकार ने शराब कारोबारियों का मुनाफ़ा 7% बढ़ा दिया!! लेकिन ट्रायल जज ने इस झूठ को पकड़ लिया। ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर के पैरा 197 से 204 में जाँच एजेंसी द्वारा “सेलेक्टिव तथ्यों” के इस्तेमाल को बड़े विस्तृत तरीक़े से बताया है। पैरा 205 में तो जज ने जाँच अधिकारी को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि, “एजेंसी का काम कोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड्स को पूरी सच्चाई और संदर्भ के साथ रखना होता है”!! यानि 5% से 12% की कहानी इस तथाकथित शराब घोटाले की झूठी ईमारत की एक कमज़ोर ईंट ही साबित हुई। और अब जबकि ये झूठी ईमारत गिर चुकी है, इसकी ईंटे ख़ुद अपनी सच्चाई बयाँ कर रही है… अगली पोस्ट में बात करेंगे तथाकथित रिश्वत और गोवा चुनाव में उसके इस्तेमाल पर!!
हिन्दी
10
169
356
21.6K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
क्या दिल्ली में गैस सिलिंडर की इतनी कमी हो गई है कि अटल कैंटीन बंद करना पड़े? ये कैंटीन ₹5 में खाना खिलाती थी, ग़रीबों के लिए बड़ा सहारा था। पर दिल्ली की अवैध बीजेपी सरकार नें गैस सिलेंडर की कमी का बहाना बनाकर श्रद्धेय अटल जी के नाम से शुरू की गई ख़ुद की कैंटीन को बंद कर दिया। दरअसल बीजेपी सरकार ग़रीबों को कोई सहूलियत देना ही नहीं चाहती, कम से कम अगले चुनाव तक…
Shailendra Sharma tweet media
हिन्दी
10
150
234
7.2K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाला केस को फ़िर से ज़िंदा करने की दस्तक अब हाई कोर्ट में है… और दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा नें पहली ही तारीख़ पर, निचली अदालत के 600 पेज लंबे ऑर्डर को पढ़े बिना, पक्ष-विपक्ष को सुने बिना: सीबीआई के जाँच अधिकारी के ख़िलाफ़ "विभागीय जाँच" की सिफारिश पर रोक लगा दी! आख़िर निचली अदालत ने सीबीआई के जाँच अधिकारी के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच की सिफारिश क्यों की थी? इसे समझनें के लिए निचली अदालत के ऑर्डर का पैरा 458 देखते हैं। दरअसल सीबीआई के जांच अधिकारी नें “अप्रूवर” द्वारा मजिस्ट्रेट को दिए बयान पर ट्रायल जज से सरासर झूठ बोला! सीबीआई के जाँच अधिकारी नें जज से कहा कि अप्रूवर के बयान की कॉपी उनके पास नहीं है। जबकि सील्ड लिफ़ाफ़े में उस बयान की ओरिजिनल कॉपी जब जज को मिली तो उस पर जाँच अधिकारी द्वारा "बयान की प्राप्ति" की रिसीविंग थी!! अब सोचने की बात ये है कि आख़िर सीबीआई के जाँच अधिकारी नें जज से झूठ क्यों बोला? क्या इसलिए ताकि उस बयान की कॉपी बचाव पक्ष को न देनी पड़े? और जब बचाव पक्ष के पास अप्रूवर के बयान की कॉपी नहीं होगी तो वो इसके किसी भी पहलू का इस्तेमाल अपने बचाव में नहीं कर सकेंगे यानि फेयर ट्रायल नहीं हो सकेगा!! जांच अधिकारी अपनी चार्जशीट में जो भी झूठे-सच आरोप लगाए, अदालत उसके लिए जांच अधिकारी को सामान्यतः दोषी नहीं ठहराता। लेकिन यहाँ सवाल ये उठता है कि जब सीबीआई का जाँच अधिकारी ख़ुद जज से झूठ बोलनें की ज़ुर्रत कर सकता है तो उसनें पूरी जाँच प्रक्रिया में और कितनें झूठ का सहारा लिया होगा? लिहाज़ा, ट्रायल जज नें पैरा 475 में संबंधित जाँच अधिकारी के ख़िलाफ़ उचित विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की ताकि न सिर्फ़ उनकी जवाबदेही तय हो बल्कि एजेंसी की साख़ को भी बरक़रार रखा जा सके। तो आख़िर इस सिफारिश में क्या ग़लत है? और फ़िर, ट्रायल जज नें तो सिर्फ़ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की थी, कोई सज़ा तो सुनाई नहीं थी, जिसे अगर तुरंत स्टे न मिलता तो बड़ा अन्याय हो जाता? अगर जाँच अधिकारी नें अपना काम नियमानुसार किया था तो विभागीय जाँच से कैसा डर? पर हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा नें आनन फ़ानन में सबसे पहले इस विभागीय जाँच पर रोक लगा दी। सोचने की बात है कि क्या न्यायमूर्ति नें निचली अदालत के ऑर्डर के पैरा 458 से 475 तक का गहन अध्यन करने के बाद इस जाँच पर रोक लगाई? इन पैराग्राफ़्स में ट्रायल जज नें बड़े विस्तार से उन कारणों को प्रस्तुत किया है जिसके आधार पर उन्होंने विभागीय जाँच का आदेश दिया था। पर जब हाई कोर्ट में बिना दोनों पक्षों को सुने, बिना विस्तृत तर्क दिए अगर निचली अदालत के आदेश के किसी भी पहलू को दरकिनार किया जाता है, तो न्याय की उम्मीद धुंधली हो जाती है!! क्योंकि, “न्याय न सिर्फ़ होना चाहिए, बल्कि न्याय होते दिखना भी चाहिए…”
हिन्दी
13
216
417
29.6K
Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
सरकार को अधिकार था सोनम वांगचुक को गिरफ़्तार करने का, किया और 170 दिन तक जेल में रखा! सरकार को अधिकार था कपिल मिश्रा पर FIR करना, नहीं किया और दिल्ली सरकार में मंत्री बना दिया! लद्दाख में प्रदर्शन हुए, सरकार ने सोनम को इसके लिए ज़िम्मेदार माना, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) जैसे सख़्त क़ानून में बंद किया ताकि बेल न मिल सके! दिल्ली में दंगे हुए, जानें गई पर सरकार ने कपिल मिश्रा पर भारतीय दंड संहिता(IPC) के तहत FIR तक दर्ज़ नहीं की, जेल तो बहुत दूर की बात है!! लद्दाख के पर्यावरण के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले को जेल भेजा जाता है, और दिल्ली में अपनी नेतागीरी चमकाने के लिए जनता की जान से खेलने वाले को मंत्री बनाया जाता है! ये अंधेर नहीं तो और क्या है? ख़ैर, सोनम वांगचुक देश के हीरो थे, हीरो रहेंगे, और कपिल मिश्रा, मौकापरस्त थे, मौकापरस्त रहेंगे! पर ये सरकार अमानवीय तो थी ही, अब अनैतिक भी हो गई है…
हिन्दी
8
113
288
7.6K