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Pradeep Tewari
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Pradeep Tewari
@tpradeep05
journalist
New Delhi, India Katılım Şubat 2015
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आशिकी फिल्म के सुपरस्टार एक्टर राहुल राय ने 20k फॉलोवर वाली इंस्टाग्राम इनफ्लुएंसर के साथ एक रील बनाई थी,जिस पर बहुत सारे लोगों ने उनको ट्रोल किया था।
लोगों ने कहा था कि,राहुल राय की हालत बहुत खराब हो गई है और वह इंस्टाग्राम के छपरियों के साथ रील बना रहे हैं और इससे पहले भी राहुल राय को बिहार जाकर किसी शादी में गाना गाते हुए देखा था।
अब इसी घटना पर राहुल राय ने कहा है कि,कुछ लोग मुझको ट्रोल कर रहे हैं जो की बिल्कुल गलत है। मैं इस उम्र में भी काम कर रहा हूं क्योंकि मुझे अपने पुराने मुकदमो का भुगतान करना है।
मुझे कुछ समय पहले ब्रेन स्ट्रोक हुआ था,तब भी मैं इस वक्त काम कर रहा हूं। मैं किसी का मजाक नहीं उड़ा रहा हूं मेहनत करके कमा रहा हूं। तब भी कुछ लोगों को मुझसे दिक्कत हो रही है।
इसके बाद राहुल राय ने लिखा कि,मैं जब तक जिंदा हूं तब तक काम करना चाहता हूं क्योंकि मुझे ब्रेन स्ट्रोक हुआ था,उसके बाद मुझे अपना जीवन चलाने के लिए काम करते रहना जरूरी है।
कुछ लोग मेरा ऐसा करने पर मजाक उड़ाते हैं यह मेरे बारे में कम और आपके संस्कारों के बारे में ज्यादा बताता है।
इसीलिए अगर सच में आपको मेरी चिंता है तो मुझे काम दिलाने में मदद करें।
यह सब बातें राहुल राय ने अपने ट्रोल करने वालों को जवाब दिया है।



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ये रहा हमारे Exit polls का प्रस्तुतीकरण का अंदाज़ा। संभवतः सबसे छोटा विश्लेषण मैंने ही किया।
देख लीजिए ये वीडियो-
youtube.com/live/WAqSKmiV6…

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पैरों ने साथ छोड़ दिया, मगर हौसले अब भी खड़े हैं…🫡
माँ खुद चल नहीं सकती, फिर भी बच्चे का भविष्य थामे ज़मीन पर घिसटते हुए उसे स्कूल पहुँचा रही है।🥺
ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं, एक माँ की ममता, दर्द और त्याग की ऐसी कहानी है जो पत्थर दिल को भी पिघला दे। ❤️🇮🇳
लेकिन बिटिया को एक ट्राइसाइकिल भी नसीब नहीं हो सका!!!
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भारतीय फोटोग्राफी के युग पुरुष और विश्व प्रसिद्ध छायाकार रघु राय जी का 83 वर्ष की आयु में निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने कैमरे के लेंस से न सिर्फ तस्वीरें खींचीं, बल्कि दशकों के भारतीय इतिहास, आम जनजीवन और हमारी संस्कृति की आत्मा को हमेशा के लिए सहेज दिया।
1960 के दशक से शुरू हुए उनके लंबे करियर में, 'द स्टेट्समैन' और 'इंडिया टुडे' जैसे संस्थानों से लेकर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी 'मैग्नम फोटोज' (Magnum Photos) तक उनका सफर अद्वितीय रहा। अपनी ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन तस्वीरों के जरिए उन्होंने भारत की धड़कन और यहाँ के बदलते स्वरूप को पूरी दुनिया के सामने एक विजुअल इतिहास के रूप में जीवंत कर दिया।
रघु राय जी की उपलब्धियां अनगिनत हैं। 1971 के बांग्लादेश शरणार्थी संकट और 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की उनकी संवेदनशील और हृदयविदारक तस्वीरों ने दुनिया भर को झकझोर कर रख दिया था। मदर टेरेसा, दलाई लामा और इंदिरा गांधी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के उनके आइकॉनिक पोर्ट्रेट्स फोटोग्राफी जगत की धरोहर हैं। उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 1972 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा उन्हें फ्रांस सरकार का 'Officier des Arts et des Lettres' सम्मान और हाल ही में 'Academie des Beaux-Arts Photography Award' भी मिला। 50 से अधिक किताबें प्रकाशित करने वाले इस महान विजुअल स्टोरीटेलर को भावभीनी श्रद्धांजलि।
🙏📷

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*स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई कर रहा एक छात्र लिखता है*👇
स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई करते समय, मैंने स्कूल के पास एक घर किराए पर लिया था।
उस घर की मालकिन का नाम क्रिस्टिना था। वह 67 वर्ष की अविवाहित वृद्ध महिला थी। वह पहले माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं और अब सेवानिवृत्त हो चुकी थीं।
स्विट्ज़रलैंड में पेंशन बहुत अच्छी होती है, इसलिए बुढ़ापे में भोजन और रहने की कोई चिंता नहीं होती।
फिर भी, उन्होंने एक “काम” स्वीकार किया था — एक 87 वर्षीय अविवाहित वृद्ध व्यक्ति की देखभाल करना।
मैंने उनसे पूछा, “क्या आप यह काम पैसे के लिए करती हैं?”
उनका जवाब मुझे चौंकाने वाला था: “मैं पैसे के लिए काम नहीं करती। मैं अपना समय ‘टाइम बैंक’ में जमा करती हूँ। जब मैं खुद बूढ़ी हो जाऊँगी और चल-फिर नहीं सकूँगी, तब मैं उस समय को निकालकर उपयोग करूँगी।”
मैंने पहली बार “टाइम बैंक” की अवधारणा सुनी थी, इसलिए मुझे बहुत उत्सुकता हुई और मैंने उनसे इसके बारे में और जानकारी ली।
“टाइम बैंक” मूल रूप से स्विट्ज़रलैंड के सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई एक योजना है। लोग अपनी युवावस्था में बुजुर्गों की सेवा करके अपना ‘समय’ जमा करते हैं और जब वे स्वयं बूढ़े, बीमार या असहाय हो जाते हैं, तब उस समय का उपयोग कर सकते हैं।
इस योजना में शामिल होने के लिए व्यक्ति का स्वस्थ, मिलनसार और दयालु होना आवश्यक है। उन्हें जरूरतमंद बुजुर्गों की नियमित देखभाल करनी होती है।
उनकी सेवा के घंटों को सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में उनके व्यक्तिगत ‘टाइम अकाउंट’ में जमा किया जाता है।
क्रिस्टिना सप्ताह में दो बार काम पर जाती थीं। हर बार वह दो घंटे बुजुर्गों की मदद करती थीं — खरीदारी करना, कमरा साफ करना, उन्हें धूप में बैठाना और उनसे बातचीत करना।
समझौते के अनुसार, एक वर्ष बाद “टाइम बैंक” उनके कुल कार्य घंटों की गणना करता है और उन्हें “टाइम बैंक कार्ड” देता है।
जब उन्हें स्वयं देखभाल की आवश्यकता होती है, तो वह इस कार्ड का उपयोग करके “समय और उस पर ब्याज” निकाल सकती हैं। जांच के बाद “टाइम बैंक” अन्य स्वयंसेवकों को उनकी सेवा के लिए भेजता है — घर पर या अस्पताल में।
एक दिन जब मैं स्कूल में था, घर की मालकिन का फोन आया कि वह खिड़की साफ करते समय स्टूल से गिर गईं।
मैं तुरंत छुट्टी लेकर उन्हें अस्पताल ले गया।
उनके टखने में फ्रैक्चर हो गया था और उन्हें कुछ दिनों तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
मैं उनके लिए घर पर देखभाल की व्यवस्था कर रहा था, तभी उन्होंने कहा कि मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने पहले ही “टाइम बैंक” से समय निकालने के लिए आवेदन कर दिया था।
वास्तव में, दो घंटे के भीतर “टाइम बैंक” ने एक नर्सिंग कर्मचारी भेज दिया।
उस नर्स ने रोज उनकी देखभाल की, उनसे बातें कीं और स्वादिष्ट भोजन बनाया।
इस अच्छी सेवा के कारण वह जल्दी ठीक हो गईं।
ठीक होने के बाद, वह फिर से “काम” पर जाने लगीं। उन्होंने कहा कि जब तक वह स्वस्थ हैं, तब तक “टाइम बैंक” में और समय जमा करती रहेंगी।
आज स्विट्ज़रलैंड में बुजुर्गों की मदद के लिए “टाइम बैंक” की अवधारणा बहुत सामान्य हो गई है।
स्विस सरकार ने भी इस योजना का समर्थन करने के लिए कानून बनाए हैं।
कितनी सुंदर कल्पना है! आशा है कि यह पूरी दुनिया में लागू हो।
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असली हल्दीराम कौन सा?
कोलकाता में घूमते हुए भूख लगी तो हमने टैक्सी चालक से कहा कि भाई ऐसी जगह ले जाओ जहां नानवेज ना बनता हो। यहां ऐसी जगह मिलनी मुश्किल है। मैंने कहा कि यहां हल्दीराम वगैरह हो तो वहां ले चलो। उसने कहा कि पार्क स्ट्रीट में हल्दीराम है। वहां पहुंचे तो देखा कि हल्दीराम का लोगो व अंदर का काउंटर व बुकिंग सिस्टम उत्तर भारत व दिल्ली के हल्दीराम से बिल्कुल अलग। लेकिन खाना व अंदर रखे उत्पाद सब कुछ वैसे ही और शुद्ध शाकाहारी।
पता चला कि ये एक ही फैमिली के हैं लेकिन देश में तीन हिस्सों में बंटे हैं। पूरी कहानी कुछ इस तरह हैः-
📷 हल्दीराम की नींव 1937 में राजस्थान के बीकानेर में गंगाबिशन अग्रवाल (जिन्हें प्यार से 'हल्दीराम' बुलाया जाता था) ने एक छोटी सी नमकीन की दुकान से रखी थी। उनकी बीकानेरी भुजिया इतनी मशहूर हुई कि व्यापार तेजी से बढ़ा। समय के साथ, व्यापार का विस्तार हुआ और परिवार के बड़े होने पर इसे भौगोलिक आधार पर गंगाबिशन जी के पोतों के बीच बांट दिया गया।आज हल्दीराम मुख्य रूप से तीन अलग-अलग पारिवारिक धड़ों (factions) में बंटा हुआ है, जिनका एक-दूसरे के व्यापार में कोई दखल नहीं है:
📷उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में आप जो हल्दीराम देखते हैं (जो देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है), वह मुख्य रूप से इसी कंपनी का है। इसका संचालन मनोहर लाल अग्रवाल और उनका परिवार करता है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के हिस्सों में व्यापार का संचालन शिवकिशन अग्रवाल और उनका परिवार करता है।
कोलकाता (पूर्वी भारत - Haldiram Bhujiawala): कोलकाता और पूर्वी भारत का व्यापार प्रभु शंकर अग्रवाल के परिवार के पास गया।
कोलकाता का हल्दीराम दिल्ली वाले हल्दीराम से कानूनी और व्यावसायिक रूप से बिल्कुल अलग है। 'हल्दीराम' नाम के इस्तेमाल को लेकर इन पारिवारिक धड़ों (खासकर दिल्ली और कोलकाता) के बीच दशकों तक लंबी कानूनी लड़ाई चली।
कानूनी विवादों के कारण और अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए, कोलकाता वाले धड़े ने अपने उत्पादों को 'प्रभुजी' (Prabhuji - From the house of Haldiram's) ब्रांड नाम के तहत प्रमोट करना शुरू कर दिया।ये सब कोलकाता में ही बनते हैं प्रतीक फूड्स के बैनर मेंं। यहां रखे डिब्बों पर मैंने ये सब विवरण पाया। दोनों की मैनेजमेंट, फैक्ट्रियां और रेसिपी बिल्कुल अलग हैं, इसलिए कोलकाता के हल्दीराम आउटलेट्स का लोगो, पैकेजिंग, मिठाइयों का स्वाद और रेस्टोरेंट का डिज़ाइन उत्तर भारत के हल्दीराम से पूरी तरह भिन्न है।
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आप जानते हैं पीर पंजाल कैसा चक्रव्यूह है...ये एक ऐसी जगह है ,जिसमें पहाड़,दर्रे,गूफाएं,जंगलों का जैसे ताना-बाना है,जिसे तोड़ने में भारतीय सेना हमेशा लगी रहती है...
ये एक ऐसी जगह है जो दशकों तक आतंकियों का पनाहगाह रहा...आज भी ये आतंकवादियों का सेफ हाइड आउट रहा है...पर कोई अभिमन्यु तो चाहिए था,जो इसे तोड़ सके...
कल मैं जब कश्मीर में पारा एसफ के वाइट नाइट कार्प्स का पेज देख रही थी तो एक व्यक्ति को ये स्पेशल यूनिट अंतिम प्रणाम ,अंतिम सलामी दे रही थी...
जब उत्सुकता जगी,तो मुझे उस अभिमन्यु का पता लगा,जिसे फौज हिल काका का बहादूर कहा करती है....
ताहिर फजल चौधरी की कहानी उन अनकहे कहानियों में से एक है, जो हम नही जानते,बस भारतीय सेना जानती है...
इतिहास की किताबों में भले ही इनका नाम कम लिखे जाते हैं, लेकिन ऐसे लोग कश्मीर की जमीन पर उसकी की रक्षा की नींव बनते हैं।
ताहिर फ़ज़ल चौधरी जिन्हें स्थानीय लोग भी बहादुर-ए-हिल काका के नाम से जानते थे, जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके के निवासी थे। वे पेशे से साधारण व्यक्ति थे और एक समय सऊदी अरब में काम करते थे।
लेकिन 2002 में जब आतंकवादियों ने उनके भाई हाजी मोहम्मद आरिफ की निर्मम हत्या कर दी, तो उनकी ज़िंदगी बदल गई,उनकी जिंदगी का मकसद बदल गया...
उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने भारत लौटकर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का संकल्प लिया।
सऊदी से वापस आने के बाद उन्होंने स्थानीय युवाओं को संगठित किया और पीर पंजाल स्काउट्स नाम का एक समूह बनाया। यह कोई सरकारी सैन्य यूनिट नहीं थी, बल्कि देशभक्ति से प्रेरित स्थानीय लोगों का समूह था, जो भारतीय सेना की मदद करता था।
और पता है ताहिर फजल की सबसे बड़ी ताकत क्या थी, चक्रव्यूह तोड़ना ,उन्हे स्थानीय इलाके की गहरी जानकारी तो थी है पीर पंजाल के पहाड़ों, घने जंगलों और गुप्त रास्तों की ऐसी जानकारी थी ,जो उन्होंने सेना को दी...
ये ऐसी जानकारी थी जो जो सेना के किसी नक्शे में नहीं मिलती थी।
इसी नक्शों ने भारतीय सेना को ऑपरेशन सर्प विनाश में मदद की...
यह ऑपरेशन 2003 में जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ चलाया गया था।
इसमें ताहिर चौधरी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी।जहाँ हेलीकॉप्टर नहीं पहुँच सकते थे, वहाँ ताहिर खुद खतरा उठा कर पैदल जाकर आतंकियों के ठिकानों की सटीक जानकारी सेना तक पहुँचाते थे।
उनकी सूचना के आधार पर भारतीय सेना ने 80 से अधिक आतंकियों को मार गिराया और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।
इसी के साथ उनका वो बदला भी पुरा हुआ ,जहां सेना के साथ उन्होंने उस आतंकी कमांडर कासिद को भी खत्म किया, जिसने उनके भाई की हत्या की थी। फिर वार ट्राफी की तरह कासिद की एके 47 को अपने पास रख ली थी...
ताहिर चौधरी कोई सैनिक नहीं थे, फिर भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया...उन्होंने इंटेलिजेंस में अहम योगदान दिया.. स्थानीय युवाओं को आतंकवाद के खिलाफ खड़ा किया...
इसी असाधारण साहस और योगदान के लिए भारतीय सेना उसमें भी विशेष रूप से 16 राष्ट्रीय राइफल्स ने उन्हें हमेशा अपना साथी माना।
22 अप्रैल 2026 को जब उत्तराखंड में उनका निधन हुआ तब सेना ने पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी,जो किसी फौजी को मिलती है... जो इस बात का प्रतीक है कि भले वो सैनिक नहीं थे, लेकिन उनके बलिदान और सेवा को सेना ने अपने ही वीरों के समान ही माना है...
ताहिर फजल चौधरी जैसे ईमान वाले लोग हमें बताते हैं कि देश की रक्षा सिर्फ वर्दी वाले ही नहीं करते, कभी-कभी एक साधारण नागरिक भी असाधारण साहस दिखाकर इतिहास में अपना नाम बना लेते है।
रेस्ट वेल वार्रियर...



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“Don’t even let my father touch my body… you won… congratulations on your victory, Papa.”
A trainee lawyer, Priyanshu Srivastava, died by suicide after jumping from the fifth floor of the court building. The incident took place in the court premises of Kanpur, Uttar Pradesh. He left behind a two-page suicide note and asked that whoever reads it should read it till the end.
In the note, he wrote about his painful relationship with his father. He said his father’s scolding, taunts, and threats deeply affected him for years. He even wrote that no one should have a father like this and that his father should not be allowed to touch his body. He ended by saying, “Papa, you won… congratulations on your victory.”
He also mentioned a childhood incident when he was six years old-after secretly drinking mango shake from the fridge, he was punished in a humiliating way. That memory stayed with him.
He further wrote that pressure of studies and even being beaten was still bearable, but constant suspicion, being monitored all the time, and lack of trust felt like mental torture to him.


English

@Mithileshdhar आदमी की जिंदगी में कुछ ऐसे पल आते हैं, जो बच कर निकल गया वो निकल गया. Priyanshu युवा थे और इन हालात से निकल सकते थे लेकिन ज़ख्म ज्यादा गहरे थे. दिल दुखाने वाली खबर है ये.
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कोलकाता पोर्ट का इलाक़ा ममता बनर्जी के सबसे विश्वसनीय फिरहद हाकिम उर्फ़ बॉबी का विधानसभा क्षेत्र है।
यहां इस बार हर गली में जयश्रीराम के झंडे लगे नज़र आ रहे हैं।
इन गलियों में मुस्लिम आबादी भी रहती है लेकिन गर्व से कहो हम हिंदू हैं के पोस्टर बैनरों से पूरा इलाक़ा अटा पड़ा है।
कुछ तो चमत्कार होता नज़र आ रहा है यहां।
#WestBengalLegislativeAssemblyelection2026



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हरियाणा कांग्रेस ने पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में BJP कैंडिडेट के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने वाले पांच MLA को सस्पेंड कर दिया है।
उनमें से तीन – शैली चौधरी, रेणु बाला और जरनैल सिंह – ने BJP को वोट देने की बात से ही मना कर दिया और कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी दोहराई, वहीं मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इसराइल ने बागी रुख अपनाया।
इलियास ने तो केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और CM नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात की, जिससे यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि वह भगवा खेमे में जा सकते हैं।
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लाहौर के एक निजी विश्वविद्यालय में एक लेक्चरर और एक छात्र के बीच कथित अनुचित संबंधों का मामला सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक होने के बाद सामने आई, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों व्यक्तियों को निलंबित कर दिया है।
प्रशासन का कहना है कि मामले की पूरी जांच की जा रही है और आगे के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।
वैसे पाकिस्तानी टीचर कुछ ज्यादा ही भारी नहीं पड़ रही बालक पर? 🤭

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