
sagar kumar
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@ShivaInSaffron संचालक मुस्लिम ओर नाम हॉस्पिटल का हिंदू?? क्यों??
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in hijabiyo ko apne masjid me to झांकने v nhi diya jata hamare मंदिरों me नियुक्ति kis liye si gyi hii😡😡😡
Ritika@Im_Ritikaa
हिजाब पहने ASI के "employees" कथित तौर पर चप्पल पहनकर हमारे मंदिर में घुस गए। हिंदू मंदिर स्थलों पर मुसलमानों को क्यों नियुक्त किया जा रहा है? @ASIGoI इतनी लापरवाही कैसे कर सकता है? साथ ही, कृपया जांच करें कि क्या सभी मूर्तियां सुरक्षित हैं। पता नहीं, दिमागी रूप से प्रभावित लोगों ने क्या कर दिया हो।

@Rites_hyadav @indiatvnews आरक्षण चाहिए क्यों??क्या खुद की काबिलियत पर भरोसा नहीं? जब बराबरी चाहिए तो जायदा के लिए आरक्षण क्यों
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@indiatvnews दरअसल, भाजपा कभी भी ओबीसी समुदाय के कल्याण की परवाह नहीं करती और यही भाजपा की विचारधारा का स्पष्ट दृष्टिकोण है। ओबीसी आरक्षण में कटौती करना यह दर्शाता है कि वे ओबीसी समुदाय से कितनी नफरत करते हैं।
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य में ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने कुल ओबीसी आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही मुस्लिम समुदायों को दिए जा रहे ओबीसी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला लिया गया है। सरकार के अनुसार, पहले ओबीसी कैटेगरी-ए में 10 प्रतिशत और ओबीसी कैटेगरी-बी में 7 प्रतिशत आरक्षण था। अब केवल कुल 7 प्रतिशत आरक्षण ही लागू रहेगा। नई नीति के तहत यह आरक्षण केवल “वास्तविक पिछड़े हिंदू समुदायों” को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में नहीं आते।
#WestBengal #SuvenduAdhikari #BJP #Reservation #OBC #Muslims

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भारतीय रेल और महामानव सरकार द्वारा सवर्णों को एक और नए प्रकार का मीठा ज़हर दिया गया
एससी-एसटी उम्मीदवारों को 10 दिन पहले और अन्य उम्मीदवारों को केवल 4 दिन पहले अपने परीक्षा केंद्रों के बारे में जानकारी मिल पाएगी।
एससी-एसटी उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित होने के लिए आरक्षित सीटों के साथ मुफ्त यात्रा कर सकते हैं।
सरकार एक काम करें सवर्णों को घर घर जाकर जहर दे दें अथवा गोली मरवा दें तभी 100% आरक्षण मिल पाएगा SC ST को

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अभिनेता Rajinikanth का सनातन धर्म को लेकर बयान 🚩
उन्होंने कहा —
“सभी धर्म, चाहे वह ईसाई, इस्लाम या बौद्ध धर्म हो,
उनकी स्थापना करने वाले संस्थापक हैं
या फिर उनके अनुयायियों ने उनकी स्थापना की है।
लेकिन हिंदू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है।
यही सनातन है और सनातन का अर्थ है
अनादि, अनंत और शाश्वत।”
🙏 रजनीकांत के इस बयान को लेकर सामाजिक माध्यमों पर व्यापक चर्चा हो रही है।

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हिंदुओं हो सके तो कांड की जानकारी मुख्यमंत्री @Dev_Fadnavis साहब तक पहुंचा देना |
महाराष्ट्र के मीरा भायंदर में जियो पेट्रोल पंप के बाहर एक हिंदू परिवार पेट्रोल भरवाने के लिए लाइन में खड़ा था |
एक मजहबी व्यक्ति ने लाइन तोड़कर आगे जाने की कोशिश की हिंदू परिवार ने कहा पहले हमारी बारी है हम पहले पेट्रोल भरवाएंगे |
इसके बाद उसने अन्य मजहबियौं के साथ मिलकर हिंदू परिवार की बर्बरता पिटाई की जिससे हिंदू परिवार घायल हो गया |
हिंदुओं अगर मजहबी मौके पर इक्ट्ठा हो सकते हैं पर हम नहीं तो कम से कम सोशल मीडिया के माध्यम से इस परिवार का साथ तो दे सकते हैं |
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महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुछ महान बाते 🚩
(1) प्रथ्वीराज चौहान ने 12 वर्ष कि उम्र मे बिना किसी हथियार के खुंखार जंगली शेर का जबड़ा फाड़ ड़ाला ।
(2) चौहान ने 16 वर्ष की आयु मे महाबली नाहरराय को हराकर माड़वकर पर विजय प्राप्त करना ।
(3) चौहान ने तलवार के एक वार से जंगली हाथी का सिर धड़ से अलग कर देना ।
(4) महान सम्राट प्रथ्वीराज चौहान कि तलवार का वजन 84 किलौ होना और उसे एक हाथ से चलाना ।
(5) पशु-पक्षियो के साथ बाते करना अर्थार्त उनकी भाषा का ज्ञात होना ।
(6) महान सम्राट का पुर्ण रूप से मर्द होना अर्थार्त उनकी छाती पर स्तंन का न होना ।
(7) महान सम्राट की भुजाँऔ का उनके घुटनो पर लगना ।
(8) प्रथ्वीराज चौहान का 1166 मे अजमेर की गद्दी पर
बैठना और दो वर्ष केबाद यानि 1168 मे दिल्ली के
सिहासन पर बैठकर पुरे हिन्दुस्तान पर राज करना ।
(10) गौरी को 16 बार हराकर जीवन दान देना और 16 बार कुरान की कसम का खिलाना।
(11) गौरी का 17 वी बार चौहान को हराना अपने देश ले जाना और चौहान का उसके राजदरबार मे अपनी आँखो का फड़वा लेना पर निचे ना करना ।
(12) गौरी का महान सम्राट को अनेको प्रकार कि पिड़ा
देना और कई महिनो तक भुखा रखना पर सम्राट का न मरना ।
(13) महान सम्राट की सबसे बड़ी बात जन्मसे शब्द भेदी बाण का ज्ञात होना ।
(14) चौहान का गौरी को उसी के भरे दरबार मे शब्द भेदी बाण से मारना ।
(15) गौरी को मारने के बाद बुल्लो के हाथो न मरना
अर्थार्त स्वंय को खुद मार लेना
जय पृथ्वीराज चौहान 🔥

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एक-एक करके बारी सबकी आएगी बस ऐसे ही मोदी योगी RSS की अंधभक्त और गुलामी में लगे रहो
एक असहाय पीड़ित गरीब ब्राह्मण... न्याया की उम्मीद में दर बदर भटक रहा.
ये हैं अमरेश तिवारी
ग्राम ढोकरी थाना फुलपुर प्रयागराज ...
इनके अनुसार इस मामले में एक पक्षी कार्रवाई हुई है, इनको लाठी डंडा धारदार हथियार से मारे भी और उल्टा इनके ऊपर FIR भी लिख दिया गया है कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है....
@Uppolice @dgpup @DM_PRAYAGRAJ सर @myogiadityanath जी के शासन में एक गरीब ब्राह्मण न्याय के लिए दर बदर भटक रहा..
@AapKiPartyRAM @alankar82
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माता सीता द्वारा मूलकासुर वध की कथा :
रामायण काल से जुड़ा यह अत्यंत रोचक और शक्तिशाली प्रसंग, जो नारी शक्ति की महिमा को दर्शाता है।
कुंभकर्ण पुत्र मूलकासुर का जन्म अत्यंत अशुभ मूल नक्षत्र में हुआ था। कुंभकर्ण को लगा कि यह बालक राक्षस कुल के विनाश का कारण बनेगा इसलिए वह इसे मारना चाहता था। परंतु रावण के कहने पर इसे एक वीरान जंगल में अकेला छोड़ दिया गया, जहां मधुमक्खियों ने अपने शहद से इस बालक का पालन-पोषण किया। बड़ा होने पर जब मूलकासुर लंका पहुंचा, तो उसे अपने पिता की मृत्यु और चाचा विभीषण द्वारा श्री राम का साथ देने की बात पता चली। उसने विभीषण को धिक्कारा और प्रतिशोध की ज्वाला में ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की।
उसने बड़ी चतुरता से यह वरदान मांगा कि कोई भी पुरुष या पराशक्ति (दुर्गा/काली) उसका वध न कर सके। उसका अंत केवल एक सामान्य नारी के हाथों हो, और वह भी तब, जब उसने उस नारी का अपमान किया हो।
अहंकारी मूलकासुर को जब पता चला कि लंका के विनाश का कारण माता सीता थीं, तो उसने उन्हें अपशब्द कहे। इस पर एक ऋषि ने उसे श्राप दिया कि उसी स्त्री के हाथों उसका अंत होगा। क्रोधित मूलकासुर ने लंका पर आक्रमण कर दिया और ब्रह्मा जी के वरदान के कारण विभीषण को हराकर लंका पर अधिकार कर लिया।
विभीषण की पुकार पर श्री राम, लक्ष्मण और हनुमान जी युद्ध क्षेत्र में आए। सात दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ, लेकिन वरदान के कारण श्रीराम उसे मार नहीं पा रहे थे। तब स्वयं ब्रह्मा जी ने प्रकट होकर श्री राम को रहस्य बताया कि इसका वध केवल माता सीता ही कर सकती हैं।
श्री राम के संदेश पर माता सीता पुष्पक विमान से रणभूमि पहुंचीं। मृत्यु को सामने देख मूलकासुर ने कपट से युद्ध टालने का प्रयास किया और श्री राम की क्षमता पर अपमानजनक सवाल उठाए। अपने स्वामी का अपमान सुनकर माता सीता अत्यंत क्रोधित हो गईं और उन्होंने मूलकासुर के पुरुषार्थ को चुनौती दी। जैसे ही क्रोध में आकर मूलकासुर ने माता सीता पर प्रहार किया, माता सीता ने तुरंत चंडिका अस्त्र का प्रयोग किया और उसका शीश धड़ से अलग कर दिया।
यह कथा हमें सिखाती है कि जब विपरीत परिस्थितियों में पुरुष भी असमर्थ हो जाता है, तब नारी शक्ति ही संकट का निवारण करती है। स्त्री का सम्मान ही समाज की रक्षा का मूल है।
🙏 जय सियाराम 🙏

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@ChatterjAsking Abe rakh tu apna dan apne pas ।khud to brahmno se liya aarakshan khata bra aaya dan dene wala jhutha sosit vanchit
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@jpsin1 ye or aa gya urne wali ghori par baithkar ।par vo hii knha dwkha kya
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कमाल की बात है
फिर मुसलमानो ने अजंता एलोरा बनाया फिर मुसलमान जो पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते वह फिर से इस दुनिया में पुनर्जन्म लेने के विचार पर विश्वास करते हुए पिरामिड बनाए
फिर मुसलमानो ने कंबोडिया में अंकोरवाट के विशाल मंदिर बनाये
उसके बाद मुसलमानो ने सांची के स्तूप भी बनाए
मतलब जब दुनिया जब वजूद में आई तब से मुस्लिम है लेकिन वह बेचारे कोई निर्माण कार्य नहीं कर सके 😂😂😂😂
गजब का लॉजिक दे रहे हो भाई
Shaukat Ali@imshaukatali
लोग कहते हैं इस्लाम 1400 साल पहले आया,यह ग़लत है 1400साल पहले दीन मुकम्मल हुआ था,इस्लाम उस वक्त आया जब दुनिया वजूद में आई,दुनिया का पहला आदमी आदम अ.स थे जो कि मुसलमान थे,और नबी थे,बाद में लोगों ने अपने अपने हिसाब से नए नए धर्मों को बनाकर उसमें अस्था रखने लगे।
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@swetasamadhiya इसकी कोई अच्छे से सफाई क्यों नहीं कर रहा पब्लिक को जूते कम पर गए ही क्या??
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मुझे लगता है बजरंग दल, की तरह एक गोडसे सेना भी होनी चाहिए
आप लोगों कि क्या राय है 😂😂
Manoj Sharma@manoj60018
आजादी की आखिरी गोली चलाने वाले महान राष्ट्रभक्त पंडित नाथूराम गोडसे जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन।🙏💐 #नाथूराम_गोडसे_अमर_रहें #भारत_माता_की_जय
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हनुमान चालीसा की 18वीं चौपाई में इस खगोलीय दूरी का अद्भुत वर्णन मिलता है:
"जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।"
इसका सरल वैज्ञानिक विश्लेषण इस प्रकार है:
जुग (युग): वैदिक गणना के अनुसार 12,000 वर्ष।
सहस्र: 1,000।
जोजन (योजन): एक योजन लगभग 8 मील के बराबर होता है।
गणित: यदि हम इन तीनों का गुणा करें (12,000 \times 1,000 \times 8), तो परिणाम 96,000,000 मील आता है।
आधुनिक विज्ञान (NASA) के अनुसार पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी लगभग 930 लाख मील (93 million miles) है। तुलसीदास जी द्वारा दी गई गणना इस वैज्ञानिक तथ्य के अविश्वसनीय रूप से करीब है। यह चौपाई बताती है कि जिस सूर्य को बालक हनुमान ने एक मीठा फल समझकर निगलने का प्रयास किया था, वह पृथ्वी से कितनी विशाल दूरी पर स्थित है। आम लोग इसे केवल एक कथा मानते हैं, परंतु इसमें प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान का गहरा रहस्य छिपा है।

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हनुमान जी और अंगद जी दोनों ही समुद्र लाँघने में सक्षम थे, फिर पहले हनुमान जी लंका क्यों गए?
श्री रामचरितमानस में एक चौपाई आती है,
अंगद कहइ जाउँ मैं पारा। जियँ संसय कछु फिरती बारा॥
अर्थात, अंगद जी कहते हैं कि मैं समुद्र के पार तो जा सकता हूँ, किन्तु लौटने में मुझे संशय (संदेह) है। अंगद जी बुद्धि और बल में अपने पिता बालि के समान ही थे! सौ योजन का समुद्र लांघना उनके लिए बिल्कुल सरल था। फिर उन्हें लौटने में क्या संशय था? आइए जानते हैं :
कथाओं के अनुसार, बालि के पुत्र अंगद और रावण के पुत्र अक्षय कुमार दोनों एक ही गुरु के आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। अंगद बचपन में अत्यंत बलशाली और स्वभाव से थोड़े चंचल थे। वे प्रायः खेल-खेल में अक्षय कुमार को थप्पड़ मार देते थे, जिससे वह मूर्छित हो जाता था।
अक्षय कुमार के बार-बार रोने और गुरुजी से शिकायत करने पर, एक दिन गुरुजी ने क्रोधित होकर अंगद को श्राप दे दिया कि अब यदि तुमने अक्षय कुमार पर हाथ उठाया, तो तुम उसी क्षण मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।
यही वह संशय था! अंगद जी को डर था कि यदि वे लंका गए और उनका सामना अक्षय कुमार से हो गया, तो इस श्राप के कारण राम-काज में विघ्न आ सकता है।
यह श्राप वाली बात रावण भी भली-भांति जानता था। इसलिए जब राक्षसों ने रावण को बताया कि एक विशाल वानर अशोक वाटिका को उजाड़ रहा है, तो रावण ने सबसे पहले अक्षय कुमार को ही भेजा।
रावण को लगा कि वानरों में समुद्र लांघने की क्षमता केवल बालि या अंगद में है। बालि का वध हो चुका है, तो निश्चय ही वह अंगद होगा। रावण की योजना थी कि अंगद श्राप के कारण अक्षय कुमार पर वार नहीं कर पाएगा और अक्षय उसे सरलता से मार देगा।
पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा। चला संग लै सुभट अपारा॥
आवत देखि बिटप गहि तर्जा। ताहि निपाति महाधुनि गर्जा॥
किन्तु, लंका में तो स्वयं महाबली हनुमान जी थे! जब हनुमान जी ने अक्षय कुमार का वध कर दिया और यह सूचना रावण तक पहुँची, तो वह चौंक गया। उसने तुरंत अपने सबसे बलवान पुत्र मेघनाद को भेजा और कहा :
सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना॥
मारसि जनि सुत बाँधेसु ताही। देखिअ कपिहि कहाँ कर आही॥
रावण समझ गया कि यह वानर अंगद नहीं है, इसलिए उसने मेघनाद को आदेश दिया कि इस वानर को मारना नहीं, बंदी बनाकर लाना। रावण स्वयं देखना चाहता था कि बालि और अंगद के अतिरिक्त ऐसा कौन सा शक्तिशाली वानर उत्पन्न हो गया है।
हनुमान जी ज्ञानिनामग्रगण्यम् (ज्ञानियों में अग्रगण्य) हैं। वे भली-भांति जानते थे कि जब तक अक्षय कुमार जीवित रहेगा, अंगद जी लंका में निर्भय होकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
इसीलिए, हनुमान जी ने अक्षय कुमार का वध करके अंगद जी के मार्ग का वह सबसे बड़ा कांटा हटा दिया। इसी कारण बाद में अंगद जी बिना किसी संशय के श्री राम के शांति दूत बनकर लंका जा सके और रावण की सभा में अपना पैर जमाकर उसका अभिमान तोड़ सके।
🙏 जय श्री राम 🙏
🙏 जय बजरंगबली 🙏

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