vikramvarma

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vikramvarma

vikramvarma

@vikramvarma07

i m anti establishment man

New Delhi, India Katılım Mayıs 2010
154 Takip Edilen115 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
vikramvarma
vikramvarma@vikramvarma07·
मैंने 2001 मे politics मे interest लेना छोड दिया था लेकिन 2011 में जब AK को देखा तब से लेकर आज तक politics मे जी रहा हूं #IshqKejriwal
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Abhinay Maths
Abhinay Maths@abhinaymaths·
चित्रा सब आपकी तरह संवेदनहीन नही है कि महंगाई, बेरोज़गारी जैसे मुद्दों देख कर भी सफलता का जश्न मनाया जाए| आजकल पत्रकार और समर्थक में फर्क ढूँढना मुश्किल है… Analysis की जगह मीडिया cheering करती ज्यादा दिखाई देती है| लोकतंत्र में विपक्ष दुश्मन नहीं होता…...
Chitra Tripathi@chitraaum

केरल में पूरे 10 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है. केरल में कांग्रेस की कामयाबी भी अभूतपूर्व है, लेकिन कांग्रेस में जश्न नहीं मन रहा है. इस दुख में कि BJP बंगाल कैसे जीत गई? अपनी सफलता में खुश होने की बजाय दूसरों की सफलता से जलन करना इसे ही कहते है. ममता बनर्जी का 15 सालों का शासन था, बंगाल कांग्रेस के लोग बेहद खुश हैं क्योंकि कई जगहों पर TMC के लोगों ने उनके दफ्तर पर क़ब्ज़ा कर लिया था, जिसे अब छुड़ाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें देखी. लेकिन दिल्ली से बंगाल कांग्रेस को कहा जा रहा है ख़ुशी मत मनाइये🤦🏻‍♀️ (( यकीनन दिल्ली कांग्रेस को इस बात का डर होगा कि एक बार बीजेपी किसी राज्य की सत्ता में आ गई तो जल्दी जाती नहीं है, और बंगाल तो 42 लोकसभा सीटों के साथ बेहद महत्वपूर्ण राज्य है ))

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Somnath Bharti सोमनाथ भारती
आपके सवाल पढ़ने के बाद मैंने आपका प्रोफाइल चेक किया और पाया कि आप @ndtv यानी @gautam_adani यानी मोदी जी की नौकरी करते है तो ऐसा सवाल पूछना लाज़मी है। वैसे आप 598 पेज की ट्रायल कोर्ट की जजमेंट पढ़ लेते और उस पर एक दिन अपने चैनल पर डिबेट रखते तो अच्छा होता, और उस डिबेट में मुझे बुलाइए तो आप पत्रकार कहलाने लायक हो नहीं तो आपको लोग जो कह रह रहे है वो आप जानते ही हो! जय हिन्द!
Akhilesh Sharma@akhileshsharma1

अरविंद केजरीवाल ने तिहाड़ में रहने के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया। ममता बनर्जी चुनाव हारने के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा न देने की बात कह रही हैं। इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है?

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Mukesh Mittal
Mukesh Mittal@Mukesh_Mittal_·
.@ArvindKejriwal opressed @SwatiJaiHind in the party so much that first he made her DCW chair person for many years and then made her RS MP How could someone bear so much oppression in a party ?
Mukesh Mittal tweet media
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Maheshwer Peri
Maheshwer Peri@maheshperi·
The angst against @raghav_chadha is not because he left AAP. Many left AAP as they were upset with Arvind Kejriwal. The 7 of them could have left AAP and forged a separate group. They could have joined Congress or TMC or any other group. In the past 5 years, AAP and its leaders were harassed and jailed by BJP. For every AAP person, BJP was the abuser, the enemy. To that extent, no AAP leader could sleep with the enemy. Raghav Chadha moved away from AAP and joined BJP as he wanted to be in power, enjoy power of a politician. It was all about being in power. What Raghav Chadha projected of himself and what he has done are the exact opposite. He sold himself as a young idealist politician and what emerged from the facade will put even the worst politician to shame. Raghav Chadha will lose, big time..
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RishiKesh Kumar
RishiKesh Kumar@rishikeshlaw·
She is Central Government Standing counsel appointed by the union government out to criticise @ArvindKejriwal because her appointment by the union. This precisely the point raised by Arvind Ji . How could you expect someone whose son or daughter is government Pannel they ought to follow their bosses choice.
ANI@ANI

#WATCH | Delhi | On AAP national convenor Arvind Kejriwal’s letter to Justice Swarana Kanta Sharma and refusing to appear in person or through a lawyer for the hearing in the Delhi excise policy case, Advocate Monika Arora says, “When an order is passed against a person, he files an appeal and goes to the higher court… But Arvind Kejriwal is different, he does not file an appeal but appears for a Press Conference… He boycotts the court… He wants a judge of his choice, which is not how things work. As per India’s criminal justice system, you cannot have the judge of your choice… Mahatma Gandhi did Satyagraha against the Britishers, but Arvind Kejriwal wants to do Satyagraha against the Constitutional courts… This country won’t run as per the whims of Kejriwal ji but as per the constitution.”

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Atishi
Atishi@AtishiAAP·
जब एक आम इंसान को लगता है कि उसको न्याय ही नहीं मिलेगा, तो उसके पास क्या विकल्प बचता क्या है? तभी वो सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने का फैसला करता है। वही रास्ता जो गांधी जी ने सिखाया था। आज बात सिर्फ अरविंद केजरीवाल की नहीं, बल्कि यह हर उस नागरिक की भावना है जिसकी न्याय की उम्मीद टूट रही है। #KejriwalKaSatyagraha
Arvind Kejriwal@ArvindKejriwal

जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है। अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूँगा।

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Saurabh Tripathi
Saurabh Tripathi@Saurabh_Pinch·
Right Man in the Wrong Party... कहा अटल जी के बारे में जाता था. वो तो टिके रहे. बाकि जनता फायदा उठाने में नहीं चूक रही🤔😆 #RaghavChadha
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Ajit Anjum
Ajit Anjum@ajitanjum·
मेरे पिता जी ज्यूडिशियरी में रहे हैं . थोड़ी -बहुत समझ मुझे भी है . मैंने कई ऐसे मौके देखे हैं , जब किसी जज पर कोई पक्ष उनकी निष्पक्षता पर जरा शक करता है तो जज ख़ुद ही ऐसे मामलों की सुनवाई से अलग हो जाते हैं . कई बार जज इसलिए किसी सुनवाई से ख़ुद को अलग कर लेते हैं कि उनपर कोई आरोप न लगे या उनकी मंशा पर कोई संदेह न हो . लोअर कोर्ट से अपर कोर्ट की ऐसी दर्जनों मिसालें हैं . यहां तो देख रहा हूं कि इतने सवाल खड़े होने के बाद भी जज ने तय कर लिया है कि उन्हें इस मामले से अलग नहीं होना है . बल्कि सुनवाई भी करनी है और फैसला भी देना है .
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Abhisar Sharma
Abhisar Sharma@abhisar_sharma·
अगर तुम्हारी कोई विचारधारा नहीं, तो लानत है तुम्हारी राजनीति पर ! सच यह है की चाहे पत्रकार हो या राजनेता- बीजेपी से वही सवाल कर सकता है जिसकी अलमारी या किसी बैंक अकाउंट में कोई राज़ न छुपे हों ! अगर आपकी भूख , आपका लालच-आपकी राजनीति की दिशा तय करती है- तो पर्दे के पीछे काम करने वाले बहुत दलाल हैं. मुझे तरस आता है AAP के उन कार्यकर्ताओं पर जो उसे defend करने के लिए भिड़ जाते थे . एक युवा राजनेता को अपनी विरासत की चिंता होनी चाहिए. इतिहास तुम्हें एक मौकापरस्त इंसान के तौर पर याद रखेगा जिसने लोकतंत्र को कुचलने वाली ताकतों के साथ हाथ मिला लिया( आगे हो ही जाएगा) . मगर थोड़ा डर क्या दिखा दिया - दिखा दी असलियत!
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Saurabh Bharadwaj
Saurabh Bharadwaj@Saurabh_MLAgk·
भाजपा कमज़ोर नहीं बहुत मज़बूत पार्टी है , इस मजबूती को दर्शाते हुए आप भी सुब्रह्मण्यम स्वामी जी को निष्कासित करें। भाजपा और प्रधान मंत्री दोनो को अपने अंदरूनी विपक्ष का सम्मान करने के लिए मधुकिश्वर जी और सुब्रह्मण्यम स्वामी जी दोनों को राज्यसभा भेज दें ।
BJP Delhi@BJP4Delhi

आम आदमी पार्टी के नेतृत्व का यह अधिकार है कि वह अपने संसदीय दल का नेता नियुक्त करे, लेकिन जिस तरह सांसद राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया है, बल्कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें सदन में बोलने का समय न दिया जाए, उससे स्पष्ट है कि राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के अराजक और भ्रष्ट नेतृत्व से दूरी बना ली है। पहले सुश्री स्वाति मालीवाल और अब राघव चड्ढा, जो आम आदमी पार्टी की नींव रहे हैं, अरविंद केजरीवाल से दूर हो गए हैं। संभव है कि कुछ अन्य लोग भी आम आदमी पार्टी के दैनिक कार्यों से दूरी बना चुके हों। बेहतर होता कि अरविंद केजरीवाल नैतिक जिम्मेदारी दिखाते हुए सुश्री स्वाति मालीवाल और राघव चड्ढा को पार्टी से निष्कासित कर देते, लेकिन हम सभी जानते हैं कि केजरीवाल एक कमजोर नेता हैं, जिनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं है—चाहे वह विपक्षी दलों से हो या पार्टी के भीतर से- प्रदेश अध्यक्ष श्री @Virend_Sachdeva

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