- तुम ने मुझे कभी बताया क्यों नहीं ?
- क्या ?
- यहीं की, तुम मुझ से प्रेम करते हो।
- तुम्हें पता था ?
- तुम्हारी आंखों में दिखता था।
- तुम भी तो बोल सकती थी।
- मैं तो इंतजार करती रही।
(१/२)
@ChhotiKavita बीते हुए लम्हों को मोड़ लाने की खातिर
हमने भी करी कोशिश घड़ी की सूई पकड़ कर
बहते हुए पानी सा कहूं या मुट्ठी की रेत सा
वो पल भी बह गया जो रखा था जकड़ कर।
@masterni2007